Saturday, July 11, 2026
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सेंसेक्स और निफ़्टी मामूली बढ़त के साथ बंद

मुंबई। शेयर बाजार गुरुवार को मामूली बढ़त के साथ बंद हुआ। सेंसेक्स 32.12 अंक बढ़कर 33,250 और निफ्टी 5.80 पॉइंट मजबूत होकर 10,308 पर बंद हुआ।

इससे पहले दो सत्रों में गिरावट के बाद गुरुवार सुबह शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स में 245 अंक का सुधार देखा गया। इसकी वजह निवेशकों के बीच लिवाली का दौर चलना और जीएसटी परिषद की बैठक को लेकर बाजार में सकारात्मक माहौल रहना रही।

ब्रोकरों के अनुसार घरेलू सांस्थानिक निवेशकों के लिवाली करने और एशियाई बाजारों के स्थिर रुख का लाभ बाजार में दिखा। साथ ही अमेरिकी बाजारों के लाभ में रहने का असर बाजार की धारणा पर पड़ा। इसके अलावा लोगों को उम्मीद है कि जीएसटी परिषद टैक्स दरों में कटौती कर कुछ क्षेत्रों को राहत दे सकती है।

बंबई शेयर बाजार का 30 कंपनियों के शेयरों पर आधारित सेंसेक्स 244.99 अंक यानी 0.73% सुधरकर 33,463.80 अंक पर खुला। पिछले दो सत्र के कारोबार में इसमें 512.38 अंक की गिरावट देखी गई थी। इसी प्रकार नैशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 65.30 अंक यानी 0.63 अंक सुधरकर 10,368.45 अंक पर खुला है।

भारत में सोने की मांग 24% गिरकर 145.9 टन रही

मुंबई। भारत में सोने की मांग वर्ष 2017 की तीसरी तिमाही में 24% गिरकर 145.9 टन रही है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। वर्ष 2016 की जुलाई-सितंबर तिमाही में यह मांग 193 टन थी।

इसकी प्रमुख वजह जीएसटी का लागू किया जाना है। साथ ही आभूषणों के खुदरा लेनदेन को लेकर धनशोधन रोधी कानूनों को अमल में लाए जाने से भी खरीदारों ने इससे दूरी बनाए रखी। समीक्षावधि में मूल्य के आधार पर आभूषण की मांग 31% घटकर 30,340 करोड़ रुपये रही है, जो वर्ष 2016 की समान अवधि में 43,880 करोड़ रुपये थी।

कुल निवेश मांग 23% घटकर 31 टन रही जो, पिछले साल इसी दौरान 40.1 टन थी। मूल्य के आधार पर इसमें 29% की गिरावट देखी गई और यह 8,200 करोड़ रुपये रहा, जो इससे पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में 11,520 करोड़ रुपये था।

वर्ष 2017 की तीसरी तिमाही में भारत में कुल 26.7 टन सोने का पुनर्चक्रण किया गया, जो 2016 की इसी अवधि में 25.7 टन था। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के भारत में प्रबंध निदेशक सोमसुंदरम पी. आर. ने कहा, भारत की सोने की मांग में 2017 की तीसरी तिमाही में 24% की गिरावट देखी गई है।

इसकी वजह जीएसटी और आभूषण के खुदरा लेनदेन को लेकर धनशोधन रोधी कानूनों को लागू किए जाने से खरीदारों का खरीद से दूर रहना है। उन्होंने कहा कि लगातार तीन तिमाहियों में वृद्धि के बाद आभूषण की मांग में 25% की गिरावट आई है, जबकि सोने की छड़ और सिक्कों की मांग भी 23% घटकर 31 टन रही है।

उन्होंने कहा कि 2016 में पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए गए, जिसके बाद 2017 में पूरे साल के लिए हमारा अनुमान सोने की मांग 650 से 700 टन रहने का है। यह पांच वर्ष के औसत से कम है। वर्ष 2018 में मांग बेहतर रहने की उम्मीद है।

टैक्स के मोर्चे पर बड़ी राहत की उम्मीद में शेयर बाजार झूमा

नई दिल्ली। जीएसटी काउंसिल की बैठक में टैक्स के मोर्चे पर बड़ी राहत की उम्मीद में शेयर बाजार गुरुवार को झूम उठा। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) और नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई), दोनों के सूचकांक जबर्दस्त तेजी के साथ खुले।

30 शेयरों के बीएसई सेंसेक्स ने 155.34 अंकों की मजबूती के साथ 33,374.15 से कारोबार की शुरुआत की तो 50 शेयरों का एनएसई निफ्टी भी 48.30 अंक चढ़कर 10,351.50 अंक पर खुला।

गुरुवार के कारोबार की शुरुआत में रिलायंस इंडस्ट्रीज, टाटा मोटर्स, आईसीआईसीआई बैंक, आईओसी, एचयूएल, एसबीआई, वेदांता, एचपीसीएल, ऐक्सिस बैंक, सन फार्मा, भारती एयरटेल और टाटा स्टील के शेयर 1 से 12 प्रतिशत तक मजबूत होते दिखे।

हालांकि, कोल इंडिया, इंडसइंडिया, आइशर मोटर्स और इन्फोसिस जैसी कंपनियों के शेयरों पर दबाव देखा गया। कुल मिलाकर निफ्टी मिडकैप के शेयरों में 0.9 प्रतिशत की मजबूती देखी गई और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर प्रति छह शेयर में पांच को चढ़ता देखा गया।

अर्निंग्स के बाद मेघमनी ऑर्गैनिक्स, बॉम्बे डाइंग, पेट्रोनेट एलएनजी, मुथूट फाइनैंस, पिडिलाइट इंडस्ट्रीज, वीए टेक वेबैग, आईटीडी सीमेंटेशन और वोल्टास के शेयरों ने 1 से 10 प्रतिशत की मजबूती हासिल कर ली थी।

इनके अलावा, एचएसआईएल, निटको टाइल्स, सीरा सैनिटरीवेयर, कजारिया सिरामिक्स, सीजी कन्ज्यूमर और हैवल्स के शेयर 1 से 5 प्रतिशथ तक चढ़े।

स्मार्ट फार्म में अब पूरे साल आएंगे आम

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स्मार्ट फार्म में वर्षभर आम की पैदावार देने वाले पौधों का प्रदर्शन

कोटा/उदयपुर। ’’वर्ष भर आम का रस ……….यह लो स्लाइस’’ यह एड अब चरितार्थ हो रहा है ग्राम उदयपुर के आयोजन में जहां स्मार्ट फार्म में वर्षभर आम की पैदावार देने वाले पौधों का प्रदर्शन किया गया है।

कोटा जिले के प्रगतिशील किसान, श्रीकिशन सुमन द्वारा तैयार किये गये ‘सदाबहार आम‘ किसानों के लिए कौतुहल का विषय बने हुए हैं। सुमन द्वारा आम की ‘सदाबहार‘ किस्म इजाद की गई है, जो वर्षभर फल देती है। आम की यह किस्म रोग प्रतिरोधी है।

बौनी किस्म होने से इसे गमले में भी लगाया जा सकता है। इसमें वर्ष भर नियमित रूप से फल आते हैं और ये घने रोपण के लिये भी उपयुक्त है। सुमन का कहना है कि 17 वर्ष पूर्व उन्होंने अपने फलों के बगीचे में आम के ऎसे पेड़ की पहचान की थी, जो तीन ऋतुओं (12 महीने) जनवरी-फरवरी, जून-जुला तथा सितंबर-अक्टूबर में फल दे रहा था।

इस पौधे को संरक्षित करने एवं ग्राफ्टिंग द्वारा अन्य पौधे तैयार करने पर इनमें बेहतरीन विकास देखने को मिला और इनमें दूसरे वर्ष से ही आम लगने आरम्भ हो गए। उनके चार बीघा खेत में आम के 22 मदर प्लांट्स और 300 ग्राफ्टेड प्लांट्स लगे हुए हैं।

सुमन ने बताया कि सरकार द्वारा ग्राम जैसे आयोजन से किसानों को नवाचार सीखने एवं नवाचारों को प्रदर्शित करने का मंच मिला है इससे वैज्ञानिक खेती के साथ खेती के क्षेत्र में सरकार की योजनाओं को जानने का अवसर मिला है। सुमन ने बताया कि ग्राम उदयपुर में उसे अब तक 3 हजार पौधों का आर्डर मिल चुका है।

यहां की मिट्टी बागवानी के लिए अनुकूल है। उसने बताया कि एक ग्राफ्टेड पौधे की कीमत 1 हजार रुपये रखी गई है। जो किसानों को 3 माह में उपलब्ध करा दिये जाते है। उल्लेखनीय है कि इस नवाचार के लिए सुमन को नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन की प्रदर्शनी में पुरस्कृत किया जा चुका है और पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा भी इनकी सराहना की गयी है।

1000 रुपए देते तो उड़द तो क्या मिट्टी भी खरीद लेते हैं पर्यवेक्षक

समर्थन मूल्य की खरीद में गड़बड़ी, किसान कम दामों पर खुली नीलामी में बेचने को मजबूर

कोटा। राजफेड के अधिकारी पहले तो उड़द के नमूनों को फेल कर देते हैं। बाद में 1000 रुपए जेब में डालते ही धूल भरी उड़द को भी पास कर खरीद लेतेे है। उपज का कम दाम मिलने से आहत किसानों ने बुधवार को खुलकर केन्द्रीय कृषि राज्यमंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत के समक्ष अपनी पीड़ा रखी। 

किसानों की बात सुनने के बाद मंत्री ने कहा कि वह खुद किसान के बेटे हैं, पीड़ा जानते हैं। अगर कोई कर्मचारी खरीद में गड़बड़ी करने वाले एक भी कार्मिक को नहीं छोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि किसान को उपज का पूरा दाम मिलना चाहिए। अगर इसमें अधिकारी या व्यापारी दोनों में से कोई भी लापरवाही करेगा तो सीधा जेल जाएगा। 

भामाशाह मंडी में शेखावत बुधवार को हाड़ौती के प्रगतिशील किसानों से रूबरू हो रहे थे। इस दौरान किसानों ने उपज का लाभकारी मूल्य दिलाने की मांग रखी। केन्द्रीय मंत्री ने किसानों के एक-एक सवाल पर जवाब दिया। किसान अपनी बात कहते हुए बिफर गए । इस कारण सांसद ओम बिरला को बीच-बीच में दखल देना पड़ा ।

किसानों ने यह बताई समस्याएं
अर्जुनपुरा के किसान अमरलाल गहलोत ने कहा कि सरकार किसानों को उपज का उचित मूल्य दिलाने की बात कहती है। यह मंडियां कोई राशन की दुकान नहीं, जो किसानों को उपज का उचित मूल्य दिलाएंगे। हमें उपज का लाभकारी मूल्य मिलना चाहिए।

धुलेट के सरपंच नरोत्तम शर्मा ने कहा उड़द खरीद में ऐसी धांधलियां चल रही है। जिसका कोई जवाब नहीं। राजफेड के अधिकारी पहले तो उड़द के नमूनों को फेल कर देते हैं। बाद में 1000 रुपए जेब डालते ही धूल भरी उड़द को भी पास कर खरीद लेतेे है। जिनकी शिकायत करें तो खरीद में आना कानी करते हैं। 

हाड़ौती किसान यूनियन के महामंत्री दशरथ कुमार ने कहा कि आपके पास केंद्रीय कृ़षक कल्याण मंत्रालय की जिम्मेदारी है। अभी तक भी बैनर पर राज्य मंत्री लिखा हुआ है। पहले अपना पद तो सही करवा लो। जहां तक पद नाम सहीं होगा किसानों का कल्याण नहीं हो सकता।

भामाशाह भवन में ग्रेन मर्चेन्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष अविनाश राठी कृषक संवाद कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए।

खरीद केंद्रों पर कागजी कार्रवाई से बचने के लिए किसानों को मजबूरी में एमएसपी से सस्ते दामों में मंडियों में उड़द बेचनी पड़ी।

इससे कोटा संभाग के किसानों को 140 करोड़ का नुकसान हुआ। इसकी केंद्र सरकार को भरपाई करनी चाहिए।

खेड़ली तंवरान के किसान अभयसिंह ने कहा कि उड़द, मूंग खरीद में किसानों के सामने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की बंदिश लगा दी।

ऐसे में किसान सारे कागजात लेकर ई -मित्रों पर चक्कर काटता रहा। एक माह बाद उसे उड़द बेचने का टोकन मिला। किसान को रुपए की जरूरत तो तत्काल है। 

भारतीय किसान संघ के प्रदेश मंत्री जगदीश शर्मा ने कहा कि दसवीं पास लड़के उड़द के नमूने पास करने में लगा रखे हैं। जिन्हें यह भी पता नहीं कि किस क्वालिटी का उड़द खरीदना चाहिए। किसान प्रतिनिधि पन्नालाल मीणा ने कहा कि भामाशाह मंडी में गत वर्ष धर्मकांटे लगे थे। इसके बाद भी अभी तक मंडी में बाट-तराजू से उपज की तुलाई हो रही है।

संवाद कार्यक्रम को सांसद ओम बिरला, विधायक हीरालाल नागर, संदीप शर्मा और ग्रेन मर्चेन्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष अविनाश राठी ने संबोधित किया है। कार्यक्रम में कृषि अधिकारी पीके गुप्ता, रामावतार शर्मा बलवंत सिंह उपस्थित थे। 

कोटा में पीएफ ऑफिस के 2 अधिकारियों को एसीबी ने रिश्वत लेते पकड़ा

कोटा। केन्द्रीय भविष्य निधि (EPFO) क्षेत्रीय कार्यालय के दो प्रवर्तन अधिकारियों को एसीबी ने बुधवार शाम को 25 हजार रुपए रिश्वत राशि लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।

दोनों अधिकारी रिश्वत की राशि लेने के लिए परिवादी के दफ्तर ही पहुंच गए। दोनों ने सिक्योरिटी एजेंसी का लाइसेंस निरस्त नहीं होने देने की एवज में परिवादी से 50 हजार रुपए की मांग की थी।

एसीबी निरीक्षक विवेक सोनी ने बताया कि कंसुआ चौराहा स्थित राघव सिक्योरिटी एजेंसी के संचालक गोबरीलाल मीणा ने मंगलवार को एसीबी चौकी में शिकायत दी कि पीएफ कार्यालय के प्रवर्तन अधिकारी नलिन भट्ट (55) व सुरेश सैनी 4 दिन पहले कार्यालय आए थे।

जहां उन्होंने कहा कि एजेंसी द्वारा सुरक्षा गार्डोंं का दो माह का पीएफ बकाया है। उन्होंने रिकॉर्ड व दस्तावेजों की जांच की। जांच के बाद 30 हजार रुपए पेनल्टी जमा कराने के लिए कहा।साथ ही एजेंसी का लाइसेंस निरस्त नहीं होने देने की एवज में 50 हजार रुपए की मांग की। बाद में 25 हजार रुपए में सौदा तय हुआ। सत्यापन में शिकायत सही मिली।

अधिकारियों ने रुपयों का इंतजाम होने पर फोन करने को कहा। गोबरीलाल ने रुपयों का इंतजाम होने पर दोनों को फोन किया तो प्रवर्तन अधिकारियों ने कहा कि वे एजेंसी पर ही आ रहे हैं। इस पर एसीबी ने ट्रेप की योजना बनाई। दोनों प्रवर्तन अधिकारी सिक्योरिटी एजेंसी के ऑफिस आए।

उन्होंने कुछ देर बात की और दस्तावेज देखने के बाद नलिन भट्ट ने परिवादी से 25 हजार रुपए लेकर जेब में रख लिए। बाद वे जाने लगे तो इशारा मिलते ही एसीबी ने दोनों को पकड़ लिया। रिश्वत की राशि 25 हजार नलिन की जेब से बरामद हुई। एसीबी ने दोनों को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया।

ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट में 18 उपक्रमों के साथ 488 करोड़ के एमओयू

जयपुर। उदयपुर में चल रहे ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट ‘‘ग्राम‘‘ में बुधवार को कृषि मंत्री प्रभुलाल सैनी एवं खान राज्य मंत्री सुरेन्द्रपाल सिंह टीटी की मौजूदगी में 18 उपक्रमों के साथ 488 करोड़ रुपये के एमओयू हस्ताक्षरित हुए। 

राज्य सरकार की ओर से कृषि एवं उद्यानिकी विभाग की प्रमुख शासन सचिव नीलकमल दरबारी और पशुपालन विभाग के सचिव अजिताभ शर्मा ने हस्ताक्षर किए। प्रंस्करण के 10, प्राईवेट मंडी का 1, ट्रेनिंग शिक्षा का 1, वेयर हाऊस और कोल्ड स्टोरेज के 4, नवाचारी फसल किनोवा का 1 और ग्रीन हाऊस फार्मिंग का 1 एमओयू हुआ। 

कृषि मंत्री  प्रभुलाल सैनी ने कहा कि इन एमओयू के माध्यम से 488 करोड़ का निवेश होगा तथा 7500 से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा। प्रदेश निश्चय ही प्रोसेसिंग, ग्रेडेशन और वेल्यूएशन के क्षेत्र में अग्रणी प्रदेश बनेगा। उन्होंने कहा कि सरकार 2022 तक किसानों की आमदनी को दोगुना करने को लेकर गम्भीरता से प्रयास कर रही है।

ऎसे में बडे स्तर पर निवेशकों द्वारा एमओयू के माध्यम से भागीदारी निभाना प्रदेश के किसान कल्याण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम है। कृषि मंत्री ने कहा कि राजस्थान में उन महत्वपूर्ण वन उपजों की पहचान करने की जरूरत है जिनसे किसानों की आय मेें इजाफा हो सके।

साथ ही उन्हाेंने निवेशकों से कहा कि वे किनोआ जैसे एडवान्स्ड फूड प्रोडक्ट्स को नवाचार के रूप में उतारें जिससे प्रदेश के किसानों का बेहतर भविष्य तय हो सके। प्रमुख शासन सचिव (कृषि एवं उद्यानिकी)  नीलकमल दरबारी ने कहा कि राज्य में कृषि एवं कृ6ाकों की दिशा एवं दशा बदलने में निवेशकों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

बाजार की मांग के अनुरूप उत्पाद की गुणवत्ता के लिए भी हम सभी को विशेष प्रयास करने होंगे। उन्हाेंने बताया कि राज्य में कुल 55 हजार करोड़ के निवेश होना महत्वपूर्ण है इससे राज्य को नई ऊंचाइयां मिलेंगी। समारोह में कृशि आयुक्त विकास सीतारामजी भाले ने आभार जताया।

इन उपक्रमों के साथ हुआ एमओयू-
उदयपुर ग्राम में बुधवार को 487.96 करोड़ के हस्ताक्षरित कुल 18 एमओयू में अलवर के तिजारा की वरदान एग्रोटेक एलएलपी के साथ 50 करोड़, सीकर के ओलिटिया फूड्स प्रा.लि. से 40 करोड़, नागौर के साईथेरिया इन्फ्रा एण्ड पावर्स प्रा. लि. से 40 करोड़, जयपुर/ऑस्ट्रेलिया के आयरन वुड केरियर एंड ट्रेनिंग से 37.5 करोड़, मंडाना (कोटा) के मुकुन्दरा इन्फ्रा प्रोजेक्टस से 33.45 करोड।

बूंदी के ओलिटिया फूड्स से 25 करोड़, केकड़ी (अजमेर) के राधा गोविन्द हाईटेक एग्रो फार्म्स से 24.5 करोड़, जयपुर के कम्प्यूकॉम टेक्नोलॉजिस प्रा. लि. से 20 करोड़, भीलवाड़ा के हितकर प्रोडक्टस से 18.7 करोड़, जोधपुर के पवन पुत्र वेफर्स प्रा.लि. से 18.56 करोड़, बारां के सत्यदेव एग्रोट्रेडर्स प्रा.लि. व सांगरिया (हनुमानगढ़) के सूरज एग्रो कॉओपरेटिव सोसाइटी से 15-15 करोड़, बारां से रामगोपाल कन्हैयालाल से 8 करोड़।

रामगंजमण्डी (कोटा) से सुविधा एग्रो इण्डस्ट्रीज से 6 करोड़, कोटा के आजाद एग्रो एन्टरप्राइज व चितौड़गढ़ के इनरबीइंग वेलनेस से 5-5 करोड़, गंगानगर के नवदुर्गा वेयरहाउस 117.25 करोड़ तथा जयपुर के रत्नावली डेयरी प्रॉडक्ट्स के साथ 9 करोड़ के एमओयू पर हस्ताक्षर हुए। इससे प्रदेश के साढे़ सात हजार से अधिक लोगों को रोजगार के अवसर मुहैया होंगे।

मार्केट केंद्रित एप्रोच से बढाएंगे किसानों की आय :शेखावत

इंटरनेशनल एग्री कॉन्फ्रेंस : केद्रीय कृषि राज्य मंत्री ने कहा, लैब से नई टेक्नोलॉजी को बाहर लाकर किसानों की जमीन पर रूपांतरित करें, किसानों की मदद के लिए एक लाख छात्रों को एग्रीप्रिन्योर बनाएंगे।

अरविंद, कोटा। केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि खाद्यान्न उत्पादन में भारत दुनिया की अग्रिम पंक्ति में है। वैश्विक स्तर पर खेती में तेजी से बदलाव हो रहे हैं। इसे देखते हुए देश के किसानों को मार्केट केंद्रित एप्रोच से तैयार किया जाएगा ताकि 2022 तक वे अपनी आय को दोगुना कर सकें।

बुधवार को कॅरिअर पॉइंट ऑडिटोरियम में दो दिवसीय इंटरनेशनल एग्रीकल्चर कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन करते हुए उन्होंने कहा कि किसान अनाज, फल, सब्जियों व अन्य उत्पादों में प्रोसेसिंग तकनीक को अपनाकर उनमें हाई वैल्यू पैदा करें। ताकि उन्हें उचित दाम मिल सकें।

उन्होंने कहा कि पिछले साल सभी खाद्यान्न में रिकॉर्ड उत्पादन हुआ, दूध के उत्पादन में हम सबसे अव्वल हैं। देश में एक ओर हरित क्रांति को नकारते हुए उन्होंने जोर दिया कि हमें ग्लोबल एप्रोच से मार्केट पर फोकस करना है। हाल ही में दिल्ली में हुई ‘वर्ल्ड फूड इंडिया’ में 60 देशों के प्रतिनिधी शामिल हुए।

केद्रीय कृषि मंत्रालय ने इसमें 1.24 लाख करोड़ रूपए की विभिन्न प्रोसेसिंग यूनिटें लगाने के लिए एमओयू किए। ट्रांसफार्मेशन से ही एग्रीकल्चर में नई क्रांति लाई जा सकती है।

इंटरनेशनल एग्रीकल्चर कॉन्फ्रेंस में उपस्थित उद्यमी, छात्र एवं अतिथि।

उन्होने कहा कि अगले तीन माह में वे देश की 103 एग्रो इंडस्ट्रीज में जाकर टेक्नोलॉजी व रिसर्च को लैब से लैंड पर पहुंचाने का प्रयास करेंगे। आज भी देश की 40 प्रतिशत कृषि योग्य भूमि पर केवल गेंहू व चांवल की खेती होती है।

जहां जलवायु गेंहू के अनुकूल नहीं है, वहां भी गेंहू की खेती होती है। बल्कि जिस क्षेत्र में व्यक्ति जो खाता है, उस खाद्यान्न की पैदावार हो। हमें नेचुरल रिसोर्सेस को पहचानकर उनका सही उपयोग करना होगा।

उन्होंने कहा कि राज्य में मुख्यमंत्री ने ओलिव की पत्तियों से चाय का प्रोजेक्ट शुरू कराया। यह चाय 52 रू किग्रा बिक रही है। इसमें 12 तरह के कैंसर से लड़ने की क्षमता है।

महाराष्ट्र के एक गांव में अनार की पैदावार से 250 करोड़ रू. का निर्यात हो रहा है। सी-फूड में भारत से 36000 करोड़ का झींगा एक्सपोर्ट होता है। ये 600 रू. किलो बिकता है।

फसलों में वैल्यू एडिशन व तकनीक अपनाएं
शेखावत ने कहा कि उन्होंने लिंकडिन के फाउंडर से चर्चा की कि भारत में ढाई लाख स्टूडेंट्स एग्रीकल्चर कोर्सेस कर रहे हैं।

मंत्रालय इनमें से 1 लाख को कनेक्ट कर उनकी वर्कफोर्स तैयार करेगा, ताकि ये छात्र 1 घंटा रोज या सप्ताह में तीन दिन किसानो के बीच जाकर उन्हें वैल्यू एडिशन व तकनीक ट्रांसफर कर सकें।

इससे 2022 तक नए भारत की परिकल्पना साकार दिखाई देगी। उन्होंने कहा कि कॅरिअर पॉइंट यूनिवर्सिटी भी एग्रीकल्चर छात्रों को एग्रीप्रिन्योर बनाने की शुरूआत करे।

उन्होंने कहा कि कोटा-बूंदी के सांसद ओम बिरला का सहकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान रहा, उनके क्षेत्र से इसकी शुरूआत की जाए। हमारी एप्रोच ग्राहकों पर केंद्रित न होकर किसानों पर केंद्रित होगी।

सांसद ओम बिरला ने कहा कि सीपी यूनवर्सिटी के एग्रीकल्चर छात्र कोटा जिले की 153 पंचायतों में 3-3 की टीमें बनाकर अपने रिसर्च को किसानों तक पहुंचाए। हमें कृषि वैज्ञानिकों को ऐसे गांवों के मॉडल दिखाएंगे।

हाडौती में 60 फीसदी सिंचित कृषि भूमि है। प्रधानमंत्री का लक्ष्य है कि हम 100 प्रतिशत भूमि को बूंद-बूंद सिस्टम से सिंचित करेंगे। आज रोग लगते ही किसान फसलों पर कीटनाशक छिडकते हैं, जिससे उन्हें लाखों रूपए का नुकसान हो रहा है।

बॉस्केटबाल का मक्का रहा कोटा
केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि देश-विदेश में खेती पर कई वर्ष ग्राउंड वर्क करने से मैं किसानों के दर्द को महसूस करता हूं। 2 माह पहले कृषि व कृषक कल्याण मंत्रालय संभाला है।

यहां आकर एग्रीकल्चर साइंस के छात्रों से मिलकर खुशी हुई। ये हमारे रिर्सोस हैं। वर्षो पहले कोटा बास्केटबॉल का मक्का रहा, यहां आकर बॉस्केटबॉल खेला। माता-पिता भी यहां रहे।

विधायक हीरालाल नागर ने कहा कि हाड़ौती में लहसुन की बम्पर फसल होती है, लेकिन किसान उसका स्टोरेज नहीं कर पाते हैं इसलिए केंद्र सरकार यहां लहसुन के संधारण व संरक्षण का एक प्रोजेक्ट खोले।

इस पर कृषि मंत्री ने कहा कि यहां ऐसे एग्रीप्रिन्योर तैयार करें जो किसानों को लहसुन को डिहाइड्रेट करना सिखा दें। लहसुन खराब होने से बच जाएगा।

‘प्रति लीटर पैदावार कितनी’ यह स्केल हो
दो दिवसीय एग्रीकल्चर कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन समारोह में कोटा यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ.पीके दशोरा ने कहा कि खेती में वैज्ञानिक सोच लाएं। पैदावार नापने का पैमाना प्रति हेक्टेयर की बजाय ‘प्रति लीटर पैदावार कितनी’ होना चाहिए।

केद्र व राज्य सरकार ने किसानों को ‘मृदा कार्ड’ देना प्रारंभ किया, जिससे किसानों को मिट्टी, पानी, बीज व पोस्ट हार्वेस्टिंग तकनीक के बारे में पूर्वानुमान हो जाता है। कोटा यूनिवर्सिटी ने डूंगरज्या गांव को गोद लेकर रिसर्च किया।

वहां पानी के भराव से मिट्टी का क्षरण हो रहा है। 15 से 20 फीसदी फसलें वाटर हार्वेस्टिंग से बर्बाद हो रही है। वैकल्पिक पैदावार शुरू हों। सरकार वेयरहाउस पर भी ज्यादा ध्यान दे।

आईसीएआर, बारामती के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अजयकुमार सिंह, जल संरक्षण के वैज्ञानिक डॉ.आर के सिंह, तथा पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के डॉ. डीके ग्रोवर ने जलवायु परिवर्तन, पैदावार, टेक्नोलॉजी व खाद्य सुरक्षा पर विचार व्यक्त किए।

पीएयू, लुधियाना की प्रो.किरण ग्रोवर ने कहा कि भारत जीएचआई इंडेक्स में 119 देशों की सूची में 100वें स्थान पर है। प्रति 1000 में से 29 बच्चे एक वर्ष तक जीवित नहीं रहते। खेत से प्लेट तक हमें घातक केमिकल्स रोककर फूड क्वालिटी में सुधार करने होंगे।

इससे पूर्व सीपी यूनिवर्सिटी के चांसलर प्रमोद माहेश्वरी, कॅरिअर पॉइंट के निदेशक ओम माहेश्वरी, कुलपति प्रो.डीएन राव, डीन डॉ एसएस तोमर व एकेडमिक डायरेक्टर डॉ.गुरुदत्त कक्कड़ ने अतिथियों का स्वागत किया।

समारोह में विधायक संदीप शर्मा, चंद्रकांता मेघवाल, नेपाल के संग्राम के.लेंका, नाइजीरिया के प्रतिनिधि, कृषि वैज्ञानिक, शोधकर्ता, किसान एवं सीपीयू के एग्रीकल्चर छात्र मौजूद रहे।

टैफे ने ग्राम उदयपुर में अपने उत्पादों को किया प्रदर्शित

उदयपुर। विश्व की तीसरी सबसे बड़ी एवं भारत की दूसरी सबसे बड़ी ट्रैक्टर विनिर्माता कम्पनी टैफे ने 7-9 नवम्बर को आयोजित ग्लोबल एर्गीटेक मीट (ग्राम),उदयपुर में हिस्सा लिया। गौरतलब है कि टैफे इस ग्राम की प्लेटिनम पार्टनर है। उन्होने इस आयोजन में अपनी सुपीरियर मैसी फेर्गुसन, आइकर ट्रैक्टर्स और एग्रीस्टार उपस्करों को प्रदर्शित किया है।

राजस्थान सरकार और फेडरेशन ऑफ इंडियन चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित इस कार्यक्रम ग्राम उदयपुर में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, कृषि मंत्री प्रभुलाल सैनी और अन्य प्रमुख पदाधिकारियों और पूरे राज्य के सभी हिस्सों के कृषकों ने भाग लिया ।

विश्व की तीसरी सबसे बड़ी और भारत की दूसरी सबसे बड़ी ट्रैक्टर विनिर्माताय टैफे जिसकी वार्षिक बिक्री 150ए000 ट्रैक्टरों से भी है अधिक हैए यह भारत के ट्रैक्टर निर्यातकों में प्रमुख है जिसकी टर्नओवर भारतीय रूपए 93 बिलियन से अधिक है।

टैफे एयर.कूल्ड और वाटर.कूल्ड दोनों मंचों में सब 100 एचण्पी वर्ग में ट्रैक्टरों की एक श्रृंखला का विनिर्माण करता है और उन्हें तीन आइकॉनिक ब्रांड्स. मैसी फेर्गुसनए टैफे और आइकर के तहत मार्केट करता है।

1000 से अधिक सशक्त वितरण नेटवर्क के माध्यम से यह पूरे भारत को कवर करता है। भारत के अलावाए इसके उत्पादों को विश्व भर की 100 से भी अधिक देशों में बेहतरीन तरीके से अपनाया गया है जिसमें यूरोप और अमेरिका के विकसित देश भी शामिल हैं।

आवक की कमी से सोयाबीन 50 रुपये तेज

कोटा। भामाशाह अनाज मंडी में बुधवार को आवक की कमी से सोयाबीन 50 रुपये प्रति क्विंटल तेज। धान 50 रुपये प्रति क्विंटल मंदा बिका। माल की कुल आवक 1लाख हजार बोरी की रहीं ।  

गेहूं मिल 1550 से 1575 लोकवान 1600 से 1700 पीडी 1650 से 1700 टुकडी 1600से 1750 रुपये प्रति क्विंटल। धान सुगंधा 2000 से 2350 पूसा -1 2200 से 2550, पूसा-4 (1121) 2000 से 3050 धान (1509) 2000 से 2700 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन 2200 से 2721 सरसो 3200 से 3550 तिल्ली 5000 से 6600 रुपये प्रति क्विंटल। मैथी 2000 से 2600 धनिया बादामी 3400 से 3800 ईगल 3600 से 4000 रंगदार 4000 से 5000 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंग 3500 से 3800 उडद 2400 से 3800 चना 4000 से 4700 चना काबुली 7000 से 10500 रुपये प्रति क्विंटल।चना पेपसी 4500 से 4800 चना मौसमी 4500 से 5000 मसूर 3000 से 3300 ग्वार 2500 से 3050 रुपये प्रति क्विंटल। मक्का नई 800 से 1200 जौ 1100 से 1200 ज्वार 1300 से 2000 रुपये प्रति क्विंटल।