Wednesday, July 15, 2026
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शादियों की मांग निकलने से सोना 31 हजार के पार, चांदी भी महंगी

नई दिल्ली/कोटा। मंगलवार को दिल्ली के सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है। शादी के सीजन के चलते ज्वैलर्स की ओर से बढ़ी खरीदारी के कारण सोना 100 रुपये चढ़कर 31050 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया है। इसी तरह चांदी भी 100 रुपये बढ़कर 40300 रुपये प्रतिकिलो हो गई है।

चांदी की कीमतों में तेजी औद्योगिक इकाइयों और सिक्का निर्माताओं की ओर से बढ़ी मांग के चलते देखने को मिली है।
 सोने की कीमतों में तेजी शादी के सीजन के दौरान घरेलू ज्वैलर्स की ओर से बढ़ी खरीदारी के चलते देखने को मिली है।

वैश्विक स्तर पर सिंगापुर में सोना 0.08 फीसद की बढ़त के साथ 1340 डॉलर प्रति औंस और चांदी 0.03 फीसद की कमजोरी के साथ 17.34 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर आ गया है। इसके अलावा डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में गिरावट के चलते मेटल का आयात महंगा हो गया है और इससे कीमतों में तेजी दर्ज की गई है।

दिल्ली में 99.9 फीसद और 99.5 फीसद वाला सोना 100 रुपये बढ़कर क्रमश: 31050 रुपये और 30900 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई है। जानकारी के लिए बता दें कि बीते चार सत्रों में सोने की कीमतों में 475 रुपये की तेजी देखने को मिली है। गिन्नी की कीमतें हालांकि, 50 रुपये बढ़कर 24800 रुपये प्रति आठ ग्राम के स्तर पर पहुंच गई है।

गोल्ड की तरह चांदी की कीमतें 100 रुपये की बढ़त के साथ 40300 रुपये प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गया है और साप्ताहिक आधारित डिलिवरी 85 रुपये की बढ़त की साथ 39665 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गई है।

चांदी के सिक्कों में भी तेजी दर्ज की गई है। सिक्कों की कीमतें 1000 रुपये की बढ़त के साथ 75000 रुपये लिवाल और 76000 रुपये बिकवाल प्रति सैंकड़ा के स्तर पर आ गई है।

कोटा सर्राफा 
चांदी 39800 रुपये प्रति किलोग्राम। 
सोना केटबरी 30800 रुपये प्रति दस ग्राम, सोना 35920 रुपये प्रति तोला। 
सोना शुद्ध 30950 रुपये प्रति दस ग्राम, सोना 36100 रुपये प्रति तोला। 

दिसंबर में सोने का आयात 71.52 फीसद बढ़ा

नई दिल्ली । भारत में सोने का आयात दिसंबर 2017 में 71.52 फीसद बढ़कर 3.39 बिलियन डॉलर हो गया है। आयात के आंकड़ों में यह इजाफा वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतों में गिरावट और उच्च घरेलू मांग के चलते देखने को मिला है।

सोमवार को वाणिज्य मंत्रालय की ओर से जारी डेटा के मुताबिक चांदी के आयात में भी तेजी दर्ज की गई है।चांदी का आयात 106 फीसद बढ़कर 197.26 मिलियन डॉलर पहुंच गया।

यह आंकड़ा दिसंबर 2016 में 95.84 मिलियन डॉलर रहा था। दिसंबर 2017 में चांदी के आयात का स्तर 3.39 बिलियन डॉलर रहा जो कि बीते वर्ष की समान अवधि के दौरान 1.97 बिलियन डॉलर रहा था।

उद्योग के विशेषज्ञों का मानना है कि आयात में तेजी का मुख्य कारण वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतों में गिरावट और मजबूत मांग रही है। सोने की कीमतें 1250 डॉलर प्रति औंस से लेकर 1260 डॉलर प्रति औंस के बीच रही हैं।

उन्होंने बताया कि कई लोगों ने ड्यूटी फ्री खरीद का लाभ उठाने के लिए सोने का अधिक आयात किया था। साथ ही कुछ लोगों ने डील बुक कर ली थी यह सोचते हुए इंपोर्ट ड्यूटी में आगामी बजट में कुछ बदलाव हो सकता है।

मंत्रालय के डेटा के अनुसार जेम्स एंड ज्वैलरी का निर्यात 2.38 फीसद की बढ़त के साथ 3.15 बिलियन डॉलर से बढ़कर 3.23 बिलियन डॉलर हो गया है।

वैश्विक स्तर पर लंदन स्टॉक एक्सचेंज पर सोने की कीमतें बीते कुछ हफ्तों में 100 डॉलर बढ़कर 1343 डॉलर प्रति औंस हो गया है।

राजस्थान की धरती से देश को मिली रिफाईनरी की सौगात

बाड़मेर। राजस्थान के बाड़मेर जिले में पीएम नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को राजस्थान रिफाइनरी के निर्माण कार्य का शुभारंभ कर देश को रिफाइनरी की सौगात प्रदान की। बाड़मेर के पचपदरा में बनने वाली रिफाइनरी की लागत 43129 करोड़ रुपये है, जिसके बन जाने के बाद राजस्थान को हर साल 34 हजार करोड़ का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा।

राजस्थान में बनने वाली यह ऑयल रिफाइनरी देश की सबसे आधुनिक ऑयल रिफाइनरी होगी, जिससे 10 हजार से ज्यादा लोगों को रोजगार भी मिल सकेगा। राजस्थान रिफाइनरी में काम की शुरुआत करने के बाद पीएम ने यहां एक विशाल जनसभा को संबोधित किया।

जनसभा के दौरान पीएम मोदी ने राजस्थान के तमाम नेताओं को याद करते हुए अपने भाषण की शुरुआत की। इस दौरान पीएम ने जसवंत सिंह, भैरोसिंह शेखावत समेत शीर्ष राजनेताओं का जिक्र किया। पूर्व केंद्रीय मंत्री जसवंत सिंह का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा कि मैं चाहता हूं कि वह जल्द स्वस्थ हों जिससे उनके अनुभव का लाभ हम सब को मिल सके।

पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण के दौरान कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि सिर्फ योजनाओं के पत्थर जड़ देने से काम पूरा नहीं होता है, काम पूरा कराने के लिए काम शुरू कराना भी जरूरी होता है और आज वह काम शुरू हुआ है।

रिफाइनरी के उद्घाटन के बाद पीएम मोदी ने अपने भाषण में कहा कि मैं जब राजस्थान में संगठन के काम से या पड़ोसी राज्य का सीएम रहते हुए आता था तो मुझे यहां के लोगों से सुनने को मिलता था कि कांग्रेस और अकाल का जुड़वा रिश्ता है। इस दौरान लोग मुझसे कहते थे कि जहां कांग्रेस होती है, वहां अकाल होता हैं।

कांग्रेस ने संसद में देश को गुमराह किया: मोदी
पीएम ने कहा कि एक बार मैंने अधिकारियों से बजट के बारे में चर्चा की थी। मैंने पूछा कि रेलवे बजट में तमाम योजनाओं की चर्चा होती है लेकिन इन पर कितना काम हुआ।

इस पर अधिकारियों ने जो कागज मुझे दिखाए उनसे पता चला कि कांग्रेस की सरकार में करीब 1500 योजनाओं का ऐलान तो किया गया लेकिन ये योजनाएं सिर्फ कागज पर ही रह गईं। कांग्रेस ने लोकतंत्र के मंदिर संसद भवन में देश को गुमराह किया।

वन रैंक-वन पेंशन योजना
पीएम ने कहा कि बीजेपी की सरकार बनने से 40 साल पहले ही वन रैंक वन पेंशन की मांग की जा रही थी। इस बीच जब मैंने रेवाड़ी की रैली में ये वादा किया कि बीजेपी की सरकार आई तो सभी पात्र लोगों को वन रैंक वन पेंशन का लाभ दिया जाएगा। इससे घबराई कांग्रेस ने अपने अंतरिम बजट में सिर्फ घोषणा के नाम पर 500 करोड़ की राशि आवंटित कर दी लेकिन इसे किसी को दिया नहीं।

इसके बाद बीजेपी की सरकार आने के बाद जब मैंने अधिकारियों से इस पर काम शुरू कराया तो पता चला कि इस योजना के बारे में बजट आवंटित होने के बावजूद कागज पर इसके नाम पर कुछ नहीं था। फिर भी बीजेपी सरकार ने डेढ़ साल के काम के बाद इसे पूरा किया।

रेकॉर्ड ऊंचाई से गिरा सेंसेक्स, निफ्टी भी फिसला

मुंबई। रेकॉर्ड ऊंचाई के बाद शेयर बाजार में मंगलवार को गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 72.46 अंक गिरकर 34,771.05 और निफ्टी 41.10 पॉइंट गिरकर 10,700.45 पर बंद हुआ।

एशियाई बाजारों से मजबूत रुख के बीच निवेशकों की लिवाली से बंबई शेयर बाजार में शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 92 अंक उछलकर 34,936.03 अंक पर खुला।

बंबई शेयर बाजार का 30 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक शुरुआती कारोबार में 92.52 अंक यानी0.26 प्रतिशत बढ़कर34,936.03 अंक पर पहुंच गया। पिछले तीन कारोबारी सत्र में सेंसेक्स में 410.44 अंक की बढ़त देखी गई।

नैशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी सूचकांक भी शुरुआती दौर में 20.25 अंक यानी 0.18 प्रतिशत चढ़कर10,761.80 अंक पर पहुंच गया।

ब्रोकरों ने कहा कि विदेशी संस्थागत निवेशकों की लिवाली और एशियाई बाजारों से मजूबत रुख से शेयर बाजार को बल मिला। हालांकि, व्यापार घाटा तीन साल के उच्च स्तर पर पहुंचने से चिंताएं बढ़ गई हैं।

GST काउंसिल की अगली मीटिंग 18 को, रीयल एस्‍टेट पर होगी चर्चा

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नई दिल्‍ली। आम बजट से पहले गुड्स एंड सर्विसेज टैक्‍स (जीएसटी) काउंसिल की मीटिंग में रीयल एस्‍टेट को जीएसटी के दायरे में लाने पर सहमति बन सकती है। सूत्रों के अनुसार, जीएसटी काउंसिल की अगली मीटिंग 18 जनवरी को होगी। इस मीटिंग का अहम एजेंडा रीयल एस्‍टेट सेक्‍टर को जीएसटी में लाने पर चर्चा करना है। 

एक सीनियर सरकारी अफसर ने न्‍यूज एजेंसी एएनआई को बताया कि जीएसटी काउंसिल की मीटिंग में रीयल एस्‍टेट को नए टैक्‍स सिस्‍टम के दायरे में लाना अहम एजेंडा होगा। यह मीटिंग 18 जनवरी को निर्धारित है। उन्‍होंने बताया कि इस पर कोई एक फैसला बन पाने की पूरी संभावना नहीं है लेकिन फिर भी एक गंभीर चर्चा होने की उम्‍मीद है। 

दिल्‍ली, जम्‍मू-कश्‍मीर चाहते हैं फैसला 
दिल्‍ली और जम्‍मू-कश्‍मीर जैसे राज्‍य रीयल एस्‍टेट को जीएसटी के दायरे में लाने को लेकर बहुत ज्‍यादा इच्‍छुक हैं। नवंबर की शुरुआत में वित्‍त मंत्रालय के अधिकारियों ने रीयल एस्‍टेट डेवलपर्स के साथ मीटिंग की थी।

इसमें प्राइवेट डेवलपर्स की प्रॉपर्टीज को जीएसटी के दायरे में लाने पर चर्चा हुई थी। इससे पहले, जीएसटी काउंसिल की 23वीं मीटिंग गुवाहाटी में हुई थी। इसमें यह फैसला किया गया कि रीयल एस्‍टेट को भी टैक्‍सेशन सिस्‍टम के दायरे में लाना चाहिए। 

पेट्रोलियम कंपनियों ने काट दिए 30 लाख रसोई गैस कनेक्शन

नई दिल्ली। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी), हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (एचपीसीएल) और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (बीपीसीएल) ने इस महीने कम से कम 30 लाख रसोई गैस कनेक्शन काट दिए हैं, जबकि 1 करोड़ कनेक्शनों की जांच चल रही है।

कंपनी के अधिकारियों एवं डीलरों के मुताबिक बंद किए गए खाते घरेलू गैर सब्सिडी वाले उपभोक्ताओं (डीएनएससी) के हैं जो गैर नकदी हस्तांतरण अनुपालन (एनसीटीसी) वाले कनेक्शन है। एनसीटीसी कनेक्शन ऐसे होते हैं, जो बैंक खाते से नहीं जुड़े होते और उन पर सब्सिडी नहींं दी जाती है।

बहरहाल यह कार्रवाई रसोई गैस का इस्तेमाल दूसरे मद में करने को रोकने के मकसद से की गई है। इस मामले से जुड़े एक सूत्र ने कहा, ‘कम से कम 1 करोड़ कनेक्शन जांच के दायरे में हैं। यह शिकायत आई है कि जिन एनसीटीसी खातों को जांच के बाद बंद कर दिया गया था, वे पिछले कुछ महीने में फिर से चालू हो गए हैं।

कम से कम 30 लाख खाते जनवरी में फिर से बंद किए गए हैं।’ कंपनियों का कहना है कि इस तरह के कनेक्शन कर की राशि बचाने हेतु लिए जाते हैं क्योंकि वाणिज्यिक एलपीजी पर ज्यादा कर है। वाणिज्यिक एलपीजी पर 18 प्रतिशत कर लगता है, जबकि घरेलू एलपीजी पर 5 प्रतिशत कर है।

अब तेल कंपनियां 1 करोड़ खातों की जांच कर रही हैं, जिनमें वे कनेक्शन भी शामिल हैं जो आधार से जुड़े हुए हैं। रसोई गैस के लिए प्रत्यक्ष नकदी हस्तांतरण (डीबीटीएल) लागू किए जाने के बाद करीब 3.74 करोड़ फर्जी कनेक्शन खत्म कर दिए गए, जिससे सरकारी खजाने के करीब 30,000 करोड़ रुपये बचे हैं।

सरकार ने गिव अप अभियान, सभी जिलों में डीबीटीएल लागू करने व एलपीजी कनेक्शन को आधार से जोडऩे जैसे कई अभियान चलाए हैं, जिससे सही व्यक्तियों तक सब्सिडी पहुंच सके। बहरहाल इस कदम का  विरोध भी हो रहा है।

फेडरेशन का कहना है कि गिव इट अप वाले उपभोक्ताओं को भी आधार से जोड़ा जाना चाहिए। इस अभियान के कारण कम से कम 1 करोड़ लोगों ने रसोई गैस सब्सिडी छोड़ी है और डीलरों का कहना है कि इनमें बड़ी संख्या में ऐसे ग्राहक हैं, जिनके कनेक्शन आधार से नहीं जुड़े हैं।

जनरल मोटर्स लाएगी ऐसी कार जिसमें न ब्रेक होगा, न स्टीयरिंग

अब तक आपने फिल्मों में कारों को उड़ते देखा होगा, कई बिना गियर वाली गाड़ियों के बारे में सुना होगा लेकिन अब जल्द ही एक ऐसी कार आने वाली है जिसके बारे में जान आपको एकबार में विश्वास ही नहीं होगा।

दरअसल, इस कार को अमेरिका की जानी मानी वाहन निर्माता कंपनी जनरल मोटर्स ला रही है। इस कार में न ही गियर होगा, न ही ब्रेक और न ही स्टीयरिंग।

यह कार पूरी तरह से ऑटोनॉमस होगी। इसका मतलब है कि आपको कुछ भी करने की जरूरत नहीं है। आपको बस कार में बैठना है और चल देना है।

जनरल मोटर्स कंपनी ने ट्वीट कर लिखा, ‘ऐसी दुनिया के बारे में सोचिए जहां कोई कार दुर्घटना न हो। स्टीयरिंग वील और पैडल्स को सुरक्षित रूप से निकालकर चौथी जेनरेशन की सेल्फ-ड्राइविंग Cruise AV हमारे जीरो ऐक्सिडेंट वाले विजन में मदद कर सकती है।’

बताया जा रहा है कि कंपनी ने इसका प्रॉडक्शन मॉडल तैयार कर लिया है। अमेरिका के परिवहन विभाग से परमिशन पेंडिंग है। इसके मिलते ही 2019 में कार का रोड टेस्ट संभावित है।

रेखा-सचिन समेत 52 मेंबर होंगे राज्यसभा से रिटायर

नई दिल्ली। बजट सत्र के बाद राज्यसभा का रंग बदल जाएगा। सदन के ग्लैमरस समझे जाने कई चेहरे दिखाई नहीं देंगे। राज्यसभा से रिटायर होने वाले सितारों में रेखा और जया बच्चन, तेलुगु फिल्मों के सितारे चिरंजीवी, मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंडुलकर और हॉकी के मैदान से बीजू जनता दल के सांसद बने दिलीप टिर्की शामिल हैं। बजट सत्र के बाद सिर्फ ग्लैमर ही नहीं, बल्कि सियासत के कई कद्दावर चेहरे भी विदा होंगे।

जेटली-प्रसाद समेत कई मंत्रियों को दोबारा चुनकर आना होगा
प्वाइंट ऑर्डर उठाने के लिए नाम कमा चुके सपा के नरेश अग्रवाल और कांग्रेस के राजीव शुक्ला, सत्ताधारी दल की ओर से हमलों की कमान संभालने वाले भूपेंद्र यादव, कांग्रेस की रेणुका चौधरी, कानूनी दांव-पेचों में माहिर कांग्रेस के अभिषेक मनु सिंघवी और अपनी हाजिर जवाबी के लिए अलग मुकाम कायम कर चुके प्रमोद तिवारी से सदन महरूम हो जाएगा।

बीजेपी की ओर से विपक्ष को करारा जवाब देने वाले पुरुषोत्तम रुपाला और विनय कटियार का कार्यकाल भी अप्रैल में ही समाप्त हो रहा है।इसके अलावा अरुण जेटली, जेपी नड्‌डा और रविशंकर प्रसाद जैसे केंद्रीय मंत्रियों को दोबारा चुनकर राज्यसभा में आना होगा।

सचिन तेंडुलकर
27 अप्रैल 2012 को मनोनीत। कभी सदन में बोल नहीं पाए। पिछले विंटर सेशन में 7 मिनट खड़े रहे, मगर हंगामे के कारण बोल नहीं सके।लिखित में 22 सवाल पूछे। इनमें 8 रेलवे से जुड़े थे। सरकार ने सचिन को दो आश्वासन ही दिए।

रेखा
27 अप्रैल 2012 को राज्यसभा में कदम। कोई सवाल नहीं पूछा, कोई स्पेशल मेंशन नहीं किया, कोई प्राइवेट मेंबर बिल नहीं पेश किया। हाजिरी के 78% नेशनल औसत के मुकाबले वह 5% समय ही सदन में रहीं।

जया बच्चन
सपा सांसद के तौर पर राज्यसभा में 3 अप्रैल 2012 को आईं। बहसों में हिस्सेदारी, सवाल पूछने और स्पेशल मेंशन के तहत मुद्दे उठाने में काफी अच्छा रिकॉर्ड। उन्होंने सदन में 77% अटेंडेंस दर्ज कराई। 143 बहसों में हिस्सा लिया, 143 सवाल किए।

फ्लिपकार्ट, अमेजन पर भी मिलेंगे पतंजलि के प्रोडक्‍ट

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नई दि‍ल्‍ली।  योगगुरू रामदेव की पतंजलि‍ आयुर्वेद ने ई-कॉमर्स कंपनि‍यों के साथ एग्रीमेंट कर ऑनलाइन मार्केटप्‍लेस में एंट्री कर ली है। पतंजलि‍ आयुर्वेद नेे अपने स्‍वदेशी रेंज के एफएमसीजी प्रोडक्‍ट्स की ऑनलाइन सेल को बूस्‍ट देने के लि‍ए यह एग्रीमेंट कि‍या है।

अब पतंजलि‍ के सभी प्रोडक्‍ट्स पेटीएम मॉल, बि‍ग बास्‍केट, फ्लि‍पकार्ट, ग्रोफर्स, अमेजन, नेटमेड्ड, 1 एमजी, शॉपक्‍लूज और अन्‍य वेबसाइट पर भी उपलब्‍ध होंगे। कंपनी अभी तक अपने पोर्टल पतंजलिआयुर्वेद डॉट नेट पर अपने प्रोडक्‍ट्स की ऑनलाइन सेल कर रही थी। इसके अलावा उसके कुछ प्रोडक्‍ट अन्य विक्रेताओं के जरिए भी ऑनलाइन उपलब्ध थे।

रामदेव ने क्‍या कहा?
रामदेव ने कहा कि‍ ऑनलाइन सि‍स्‍टम का मकसद आसान और प्रभावशाली ऑप्‍शन देने के साथ-साथ पारंपरि‍क रि‍टेल मार्केट के अलावा दूसरे मार्केटप्‍लेस को मुहैया कराना भी है। उन्‍होंने कहा कि‍ यह सुनि‍श्‍चि‍त कि‍या जा रहा है कि‍ स्‍वदेशी आंदोलन जारी रहे और पतंजलि‍ के प्रोडक्‍ट्स बि‍ना पॉलि‍सी और बि‍जनेस नीति‍ के साथ समझौता कि‍ए प्रत्‍येक घर में पहुंचे।   
 आचार्य बालकृष्णन ने क्‍या कहा? 
पतंजलि‍ आयुर्वेद के सीईओ और एमडी आचार्य बालकृष्‍णन ने कहा कि‍ नई प्रणाली उन लोगों के लि‍ए मददगार साबि‍त होगी तो आजकल शॉपिंग के लि‍ए ज्‍यादा से ज्‍यादा ऑनलाइन प्‍लेटफॉर्म का इस्‍तेमाल करते हैं।
 
नए सेगमेंट में भी उतर चुकी है पतंजलि
हाल ही में पतंजलि कि‍ड्स और एडल्‍ट डायपर्स और सस्‍ते सेनि‍टरी नैपकि‍न सेगमेंट्स में एंट्री की है। बीते माह कंपनी ने सोलर इक्‍युपमेंट मैन्‍युफैक्‍चरिंग में उतरने का ऐलान भी कर चुकी है। एफएमसीजी के अलावा कंपनी दूसरे सेक्‍टर्स जैसे एजुकेशन और हेल्‍थकेयर में भी है। 2016-17 में पतंजलि का टर्नओवर 10,500 करोड़ रुपए के पार चला गया और इस फाइनेंशि‍यल ईयर में कंपनी का मकसद दोगुना ग्रोथ का है।
 
तेजी से बढ़ा रहा है आयुर्वेदिक हेल्थ प्रोडक्ट मार्केट
नील्सन 2017 की रिपोर्ट के मुताबिक आयुर्वेदिक हेल्थ प्रोडक्ट का मार्केट साल 2021 तक 1अरब डॉलर का होगा। रिपोर्ट के अनुसार, कस्टमर अब नेचुरल और ऑर्गेनिक प्रोडक्ट का इस्तेमाल पर्सनल केयर में ज्यादा कर रहे हैं। ज्यादातर लोगों का फोकस केमिकल बेस्ड प्रोडक्ट की जगह हर्बल बेस्ड प्रोडक्ट की तरफ है।
 
पतंजलि मल्टी नेशनल के मार्केट में लगा रही है सेंध
बाबा रामदेव के पतंजलि के नूडल्स, बिस्किट, शैंपू, टूथपेस्ट, शहद जैसे 350 से अधिक प्रोडक्ट हैं। पतंजलि ने अपनी मार्केटिंग में आयुर्वेदिक बेस्ड और स्वदेशी पर ज्यादा फोकस किया है। इससे उनके प्रोडक्ट और ब्रांड दोनों को फायदा हुआ है। पतंजलि देश की सबसे तेजी से ग्रोथ करने वाली एफएमसीजी कंपनी बन चुकी है। साल 2016-17 में 10,000 करोड़ रेवेन्यू वाली कंपनी बन गई है। 

अर्न्स्ट एंड यंग के रीटेल और कन्ज्युमर प्रोडक्ट के नैशनल लीडर और पार्टनर पिनाकरंजन मिश्रा के अनुसार, पतंजलि मौजूदा एफएमसीजी सेक्टर के मार्केट में तेजी से हिस्सेदारी बढ़ा रही है। जिसकी वजह से एफएमसीजी सेक्टर में एचयूएल, आईटीसी, पीएंडजी, नेस्ले मार्केट लीडर कंपनियों के लिए एक नया चैलेंज खड़ा हो गया है। इसी चैलेंज को देखते हुए कंपनियां अब आयुर्वेद पर फोकस कर रही है। जिससे अपने हिट ब्रांड को बचाया जा सके।

सबको बजट में मिल सकता है हेल्थ इंश्योरेंस का तोहफा

नई दिल्ली। मोदी सरकार 1 फरवरी को पेश होनेवाले अपने आखिरी पूर्ण बजट में देश के हर नागरिक को हेल्थ इंश्योरेंस का तोहफा दे सकती है। यानी हर एक व्यक्ति को हेल्थ इंश्योरेंस दिया जाएगा, ताकि किसी तरह की बीमारी होने पर उसको इलाज मिलने में परेशानी न हो। हेल्थ इंश्योरेंस कवर 3 से 5 लाख रुपये तक का हो सकता है।

सूत्रों के मुताबिक, सबको हेल्थ इंश्योरेंस देने के लिए 5,000 करोड़ रुपये का बजट तय किया जाएगा। सरकार की इस योजना के तहत निजी बीमा कंपनियों को बड़ी भूमिका मिल सकती है। सूत्रों के मुताबिक, ट्रस्ट बनाकर स्वास्थ्य बीमा देने पर भी विचार जारी है। हेल्थ इंश्योरेंस सेंट्रल स्पॉन्सर्ड स्कीम के तहत दिया जाएगा। इसमें कुल खर्च का 60 फीसदी केंद्र और 40 फीसदी हिस्सा राज्य वहन करेंगे।

तीन तरह का इंश्योरेंस
सूत्रों का कहना है कि हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम तीन तरह की होगी। पहली स्कीम में गरीबी रेखा से नीचे वालों को इंश्योरेंस कवर दिया जाएगा। इसे कल्याण स्कीम का नाम दिया जाएगा। दूसरी स्कीम 2 लाख रुपये तक के आयवालों के लिए होगी, जिसका नाम सौभाग्य स्कीम होगा।

इसके साथ ही 2 लाख से ज्यादा आमदनी वाले सभी वर्गों के लिए सर्वोदय स्कीम लाई जा सकती है। गरीबी रेखा से नीचे रहनेवाले और 2 लाख से कम आमदनी वालों का प्रीमियम सरकार भरेगी। इससे ज्यादा की आमदनी वालों से हेल्थ इंश्योरेंस के लिए प्रीमियम लिया जाएगा जो कि मामूली होगा।

वित्त मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, इंटरनल सर्वे में पाया गया है कि देश में करीब 70 फीसदी लोगों के पास हेल्थ इंश्योरेंस कवर नहीं है। यही कारण है कि बीमार होने पर इलाज के लिए उनके पास उतने पैसे नहीं होते हैं। इसके मद्देनजर ही हर नागरिकों को हेल्थ इंश्योरेंस के दायरे में लाने का फैसला किया गया है।

 कंपनियों की दिलचस्पी नहीं
इंडस्ट्री चैंबर ऐसोचैम की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, बड़ी-बड़ी कंपनियों में काम करनेवाले आधे से ज्यादा कर्मचारियों का कहना है कि उनकी कंपनियां कर्मचारियों को हेल्दी और फिट रखने के लिए किसी तरह का कार्यक्रम नहीं चलाती हैं।

एफएमसीजी, मीडिया और सूचना प्रौद्योगिकी पर आधारित सेवाओं और रीयल एस्टेट समेत अन्य क्षेत्रों की कंपनियों में किए गए सर्वेक्षण में कहा गया है कि कॉर्पोरेट स्वास्थ्य योजना को अपनाकर भारतीय इंडस्ट्री कर्मचारियों की अनुपस्थिति दर में एक फीसदी की कमी लाकर 2018 में 20 अरब डॉलर की बचत कर सकती है।

करीब 52 फीसदी कर्मचारियों ने खुलासा किया है कि उनकी कंपनी इस तरह की कोई योजना नहीं चलाती है, जबकि बाकी बचे कर्मचारियों में से 62 फीसदी का कहना है कि वर्तमान में उनकी कंपनी द्वारा चलाई जा रही योजना में सुधार की जरूरत है।