श्री बड़े मथुराधीश मंदिर पर रथ यात्रा मनोरथ आज, प्रभु देंगे रथ पर सवार होकर दर्शन

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कोटा। शुद्धाद्वैत प्रथम पीठ श्री बड़े मथुराधीश मंदिर, पाटनपोल पर बुधवार को अपार श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ दिव्य रथ यात्रा मनोरथ का आयोजन किया जाएगा।

वल्लभ संप्रदाय की प्रथम पीठ के युवराज मिलन कुमार बावा ने बताया कि पुष्टिमार्गीय परंपरा के अंतर्गत आषाढ़ शुक्ला द्वितीया और तृतीया को पुष्य नक्षत्र के पावन संयोग पर यह भव्य रथ यात्रा महोत्सव मनाया जाता है।

इस विशेष अवसर पर मथुराधीश प्रभु अलौकिक रथ पर सवार होकर निज तिबारी में भक्तों को दिव्य दर्शन देंगे। महोत्सव की शुरुआत प्रभु के विशेष मंगला दर्शन और अभ्यंगसे होगी। जिसके पश्चात प्रातः 10 बजे से श्रद्धालु रथ पर विराजमान प्रभु के दर्शन कर सकेंगे।

​ग्रीष्मकालीन सेवा प्रणाली में होगा बड़ा बदलाव
​गोस्वामी मिलन कुमार बावा ने बताया कि इस रथ यात्रा महोत्सव के संपन्न होते ही प्रभु की दैनिक सेवा प्रणाली में महत्वपूर्ण बदलाव किए जाएंगे। अब तक ठाकुर जी को भीषण गर्मी से राहत पहुंचाने के लिए उपयोग की जा रही ग्रीष्मकालीन व्यवस्थाओं को विदा किया जाएगा। मंदिर में प्रभु के सम्मुख होने वाला जल का छिड़काव, फव्वारे, खस के पंखे, कुंजा और चंदन के शीतल परदे पूरी तरह हटा दिए जाएंगे। इसके साथ ही गर्भगृह और सिंहासन के सामने जल का प्रयोग भी तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया जाएगा। जो वर्षा ऋतु के आगमन का पारंपरिक प्रतीक है।

ऋतु फलों का लगेगा भोग और गूंजेगी राग मल्हार
​मौसम के करवट बदलते ही प्रभु के राजभोग के स्वरूप में भी बदलाव आएगा। अब तक अर्पित की जाने वाली शीतल सामग्रियां जैसे दही-भात और पना आदि का भोग बंद कर दिया जाएगा। इनके स्थान पर अब प्रभु को मौसमी फल जैसे आम, जामुन, अंकुरी, आमरस और आम व खोपरा (नारियल) से तैयार विशेष सामग्रियां बड़े चाव से अर्पित की जाएंगी। इसके साथ ही, मंदिर के भक्तिमय वातावरण में भी नया रंग घुलेगा। वर्षा काल के प्रारंभ होने के कारण प्रभु की अष्टयाम सेवा के कीर्तनों में शास्त्रीय रागों के अंतर्गत ‘राग मल्हार’ की मधुर आलापचारी शुरू होगी। जो श्रद्धालुओं को आनंदित करेगी।