Monday, July 27, 2026
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RBI ने आडीबीआई बैंक पर लगाया 3 करोड़ रुपये का जुर्माना

नई दिल्ली। आईडीबीआई बैंक ने आज बताया कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने उस पर 3 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। केंद्रीय बैंक ने यह जुर्माना इनकम रेकग्निशन ऐंड ऐसेट क्लासिफिकेशन (आईआरएसी) नियमों का पालन नहीं करने के लिए लगाया है।

आईडीबीआई बैंक ने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) को बताया, ‘रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने इनकम रेकग्निशन ऐंड ऐसेट क्लासिफिकेशन नियमों को लेकर अपनी ओर से जारी निर्देशों का पालन नहीं किए जाने पर 10 अप्रैल 2018 के अपने पत्र में अपनी शक्ति का इस्तेमाल करते हुए बैंक पर 30 मिलियन (3 करोड़) रुपये का जुर्माना लगाया है।’ बैंक ने बीएसई को बताया कि इस जुर्माने का बैंक की आर्थिक सेहत पर पर कोई असर नहीं होगा।

गौरतलब है कि पिछले महीने नॉन-परफॉर्मिंग असेट्स (NPA) कैलकुलेशन में गड़बड़ी का दोषी पाए जाने पर आरबीआई ने ऐक्सिस बैंक पर 3 करोड़ रुपये की पेनल्टी लगाई थी जबकि दिसंबर महीने में इंडसइंड बैंक पर भी इतनी ही रकम का जुर्माना लगाया गया था।

इंडसइंड पर पेनल्टी को लेकर आरबीआई की तरफ से जारी बयान में कहा गया था कि नॉन परफॉर्मिंग लोन और नॉन फंड आधारित लिमिट पर केंद्रीय बैंक की तरफ से जारी गाइडलाइंस का उल्लंघन पाए जाने के बाद यह पेनल्टी लगाई गई है।

आरबीआई ने एक अलग मामले में पब्लिक सेक्टर के इंडियन ओवरसीज बैंक पर भी 2 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था। नो योर कस्टमर (KYC) नॉर्म्स की अनदेखी की वजह से बैंक पर यह पेनल्टी लगाई गई थी। इंडियन ओवरसीज बैंक की एक ब्रांच में फर्जीवाड़े के एक मामले की जांच में इस गलती का पता चला था।

सेंसेक्स 47 अंक मजबूत, निफ्टी 10,400 के ऊपर खुला

नई दिल्ली।  डाटा आने से पहले बाजार में कमजोरी देखने को मिल रही है। वहीं शुक्रवार को इंफोसिस के चौथे क्वार्टर के नतीजे जारी होने से सेंटीमेंट्स कमजोर हुआ है। सेंसेक्स 47 अंक की बढ़त के साथ 33.987.55 के स्तर पर खुला। वहीं निफ्टी की शुरुआत 7 अंक की गिरावट के साथ 10,410.65 के स्तर पर हुई। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स ने बढ़त गंवा दी, जबकि निफ्टी 10,400 के नीचे फिसल गया है।

मिडकैप, स्मॉलकैप शेयरों में मिला-जुला कारोबार
कारोबार के दौरान मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में मिला-जुला कारोबार देखने को मिल रहा है। बीएसई का मिडकैप इंडेक्स में 0.07 फीसदी हल्की गिरावट है। हालांकि बीएसई स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.03 फीसदी मामूली बढ़त है।
मिडकैप शेयरों में फ्यूचर रिटेल, बायोकॉन, टाटा ग्लोबल, गृह फाइनेंस, यूबीएल, एलटीआई, नैटको फार्मा, नेशनल एल्युमीनियम, कोलगेट पामोलिव 0.93-2.24 फीसदी तक बढ़े हैं।

अमेरिकी बाजार गिरे, डाओ जोंस 0.90% टूटा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की रूस को चेतावनी से अमेरिकी बाजारों में घबराहट का माहौल देखने को मिला। बुधवार के कारोबार में डाओ जोंस 219 अंक की गिरावट के साथ 24,190 के स्तर पर बंद हुआ। नैस्डैक 25 अंक की कमजोरी के साथ 7,069 के स्तर पर बंद हुआ। एसएंडपी 500 इंडेक्स 15 अंक लुढ़ककर 2,642 के स्तर पर बंद हुआ।
09:25 AM
रुपया 65.31 प्रति डॉलर पर खुला
सप्ताह के चौथे कारोबारी दिन रुपए की सपाट शुरुआत हुई। डॉलर के मुकाबले रुपया बिना किसी बदलाव के 65.31 के स्तर पर खुला। बुधवार को डॉलर के मुकाबले रुपए में बड़ी कमजोरी आई। डॉलर के मुकाबले रुपया 32 पैसे टूटकर 65.31 के स्तर पर बंद हुआ था।
09:25 AM
एशियाई बाजारों में कमजोरी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की रूस को चेतावनी से अमेरिकी बाजारों में घबराहट का माहौल देखने को मिला। इसका असर गुरूवार को एशियाई बाजारों पर दिखा और एशियाई बाजारों में कमजोरी के साथ कारोबार हो रहा है। सिंगापुर का एसजीएक्स निफ्टी इंडेक्स 0.14% बढ़कर 10,433 के स्तर पर कारोबार कर रहा है।

जापान का बाजार निक्केई 7 अंक गिरकर 21,680 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। हैंग सेंग 14 अंक की बढ़त के साथ 30,912 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। कोरियाई बाजार का इंडेक्स कोस्पी 0.04 फीसदी चढ़ा है, जबकि ताइवान इंडेक्स 29 अंक गिरकर 10,944 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। शंघाई कम्पोजिट में 0.38फीसदी की कमजोरी देखने को मिल रही है। स्ट्रेट्स टाइम्स में 0.10 फीसदी की गिरावट के साथ 3476 के स्तर पर कारोबार कर रहा है।
09:25 AM
अमेरिकी बाजार गिरे, डाओ जोंस 0.90% टूटा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की रूस को चेतावनी से अमेरिकी बाजारों में घबराहट का माहौल देखने को मिला। बुधवार के कारोबार में डाओ जोंस 219 अंक की गिरावट के साथ 24,190 के स्तर पर बंद हुआ। नैस्डैक 25 अंक की कमजोरी के साथ 7,069 के स्तर पर बंद हुआ। एसएंडपी 500 इंडेक्स 15 अंक लुढ़ककर 2,642 के स्तर पर बंद हुआ।

 

दुनिया की सबसे महंगी कार नंबर प्लेट 132 करोड़ रुपये में

अहमदाबाद।अगर आपको लगता है कि आप 2-4 लाख रुपये खर्च करके अपना मनपसंद कार या बाइक नंबर लेकर बहुत ज्यादा खर्च कर रहे हैं तो आप गलत हैं। ब्रिटेन में एक ‘F1’ नंबर वाली कार नंबर प्लेट की कीमत 132 करोड़ रुपये (14 मिलियन पाउंड) रखी गई है। इस नंबर प्लेट को दुनिया की सबसे महंगी नंबर प्लेट कहा जा रहा है।

‘F1’ नंबर वाली यह प्लेट पिछले 10 सालों में ब्रिटेन में काफी पॉप्युलर हो गई है। इसे कई तरह की महंगी कारों पर देखा जा सकता है। इस नंबर प्लेट को बेचने का विज्ञापन एक बुगाती वेरॉन के मालिक अफजल खान ने दिया है। खान ने खुद यह नंबर प्लेट कुछ साल पहले 4 करोड़ रुपये में खरीदी थी। खान की फर्म ब्रिटेन में कस्टमाइज्ड वीइकल बनाकर बेचती है।

इससे पहले भी लोगों ने दुबई और अन्य शहरों में लोगों ने करोड़ों रुपये की प्लेट खरीदी हैं। हालांकि ब्रिटेन में ‘F1’ नंबर की यह प्लेट काफी पॉप्युलर है और अगर यह बिकती तो यह दुनिया की सबसे महंगी नंबर प्लेट होगी। भारत में भी आप स्पेशल नंबर प्लेट ले सकते हैं लेकिन एक तो वह कस्टमाइज्ड नहीं हो सकतीं और दूसरी बात कि आप इसे ज्यादा से ज्यादा इन्हें 2-4 लाख रुपये में खरीद सकते हैं।

इंडिया से एक्सपोर्ट होगी सुजुकी की यह कार

सुजुकी ने अपनी बेस्ट सेलिंग कार स्विफ्ट के थर्ड जेनरेशन मॉडल को भारत में बनाकर एक्सपोर्ट कर रही है। कंपनी ने इस कार का पहला लॉट मुंबई से साउथ अफ्रीका को एक्सपोर्ट किया है और जल्द ही अन्य देशों को भी यह कार एक्सपोर्ट की जाएगी।

बता दें कि सुजुकी की यह कार गुजरात के हंसलपुर प्लांट में बनाई जा रही है। इसके साथ ही स्विफ्ट मारुति सुजुकी की पहली कार है जो गुजरात प्लांट से एक्सपोर्ट की जा रही है। मारुति अपनी सब-4 मीटर सिडैन डिजाइर का भी साउथ अफ्रीका और चिली में एक्सपोर्ट करती है लेकिन इस कार को हरियाणा के मानेसर प्लांट में तैयार किया जाता है। स्विफ्ट के अलावा मारुति अपनी हैचबैक बलेनो को भी गुजरात प्लांट में बना रही है।

नई स्विफ्ट पर अभी लगभग 4 महीने का वेटिंग पीरियड चल रहा है। हालांकि कंपनी का कहना है कि स्विफ्ट का वेटिंग पीरियड और नहीं बढ़ेगा क्योंकि गुजरात प्लांट की कपैसिटी एक साल में 2.5 लाख कारें बनाने का है और अभी भारतीय मार्केट में इसकी हर महीने 15-20 हजार यूनिट्स की डिमांड है। बता दें कि मार्च 2018 में मारुति सुजुकी ने स्विफ्ट की लगभग 19,000 यूनिट्स बेची हैं।

मार्च में म्यूचुअल फंड इन्वेस्टर्स ने निकाले 50 हजार करोड़

नई दिल्‍ली। निवेशकों ने मार्च 2018 में म्‍युचुअल फंड से 50 हजार करोड़ रुपए से ज्‍यादा पैसा निकाल लिया है। सबसे ज्‍यादा पैसा लिक्विड और डेट फंड से निकाला गया है। यह जानकारी एम्‍फी की तरफ से जारी आंकड़ों में सामने आई है। इसके अनुसार इक्विटी फंड में 20 महीने में सबसे कम निवेश इस बार मार्च में आया है। यह निवेश 2954 करोड़ रुपए रहा है। जानकार इसे मोदी सरकार की तरफ से बजट में लाए गए 10 फीसदी लॉन्‍ग टर्म कैपिटल गैन टैक्‍स (LTCG) का असर भी बता रहे हैं।

इक्विटी फंड का बुरा रहा हाल
मार्च 18 में इक्विटी फंड में 2,954 करोड़ रुपए का ही निवेश आया है। यह निवेश पिछले 20 माह में किसी महीने आए निवेश में सबसे कम है। इससे पहले जुलाई 2016 में 2221 करोड़ रुपए का निवेश आया था। जानकारों की राय है कि इक्विटी फंड में निवेश में यह कमी बजट में लागू किए गए टैक्‍स के नए नियम हैं।

इनके तहत 10 फीसदी लॉन्‍ग टर्म कैपिटल गैन टैक्‍स (LTCG) लगाया गया है। किसी भी निवेशक को अगर अब 1 लाख रुपए से ज्‍यादा का LTCG का फायदा होता है, तो उसे यह टैक्‍स देना होगा। शेयरखान के निदेशक इन्‍वेस्‍टमेंट सॉल्‍यूशन स्‍टीफन के अनुसार नए टैक्‍स नियमों के अलावा स्‍टॉक मार्केट की खराब प्रदर्शन भी एक कारण है।

हर साल मार्च में होता है ऐसा
बजाज कैपिटल के सीनियर वाइस प्रेसीडेंट और म्‍युचुअल फंड प्रमुख अंजानिया गौतम के अनुसार यह हर साल मार्च में होता है। उनके अनुसार डेट में ज्‍यादातर कार्पोरेट का निवेश होता है जो मार्च में पैसा निकालते हैं। ऐसा यह कार्पोरेट फाइनेंशियल क्‍लोजिंग के चलते करते हैं। यह ट्रेंड हर साल मार्च में नजर आता है। उनके अनुसार हालांकि यह निवेश बाद के महीनों में वापस आ जाता है।

आंकड़ों पर नजर
एसोसिएशन ऑफ म्‍युचुअल फंड इन इंडिया (एम्‍फी) के अनुसार मार्च 2018 में म्‍युचुअल फंड से 50,752 करोड़ रुपए निकाला गया है। आंकड़ों के अनुसार मार्च 17 में यह निकासी 54,883 करोड़ रुपए थी, जबकि मार्च 16 में यह निकासी इससे भी ज्‍यादा 73,000 करोड़ रुपए रही थी। मार्च 18 में जो पैसा निकाला गया है उसमें से 54,979 करोड़ रुपए लिक्विड कैटेगरी और 13,719 करोड़ रुपए इनकम कैटेगरी से निकाला गया है।

सरकारी खरीद केंद्र से गेहूं नहीं उठने से भामाशाह मंडी जाम

कोटा। तीन दिन से गेहूं से पूरी भामाशाह मंडी अटी पड़ी हुई है। इसमें सबसे बड़ी लापरवाही एफसीआई की ओर से हुई है। एफसीआई की ओर से प्रतिदिन 200 टोकन जारी करने का था, लेकिन सॉफ्टवेयर में हुई खराबी के चलते कई दिन तक 500-500 टोकन जारी कर दिए।

किसान भी अपना माल लेकर मंडी में आ गए। जहां 40 से 50 हजार क्विंटल माल आना था, वहां 1 लाख 25 हजार क्विंटल माल आ गया। इससे पूरी मंडी जाम हो गई। इससे निपटने के लिए किसी के पास कोई प्लान नहीं था।

वेयर हाउस पर विवाद होने से वहां भी 40 से ज्यादा ट्रक खाली नहीं हो पाए और व्यवस्था बिगड़ती चली गई। इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। किसान तीन दिन से मंडी के अंदर और बाहर गेहूं लेकर बैठा है। बुधवार को केवल 25 हजार कट्टों की तुलाई हो सकी। इसके अलावा पुलिस की मदद से 270 ट्रकों का लदान हो सका।

वहीं बुधवार को मौसम खराब होने से किसानों की जान सांसत में आ गई। राहत की बात यह रही कि मंडी के केवल छीटे ही आए। अव्यवस्था होने पर प्रशासनिक अधिकारियों ने सुध ली । गुरुवार को एफसीआई की खरीद बंद की है और ऑनलाइन जारी टोकनों को अब ऑफ लाइन टोकन जारी करके उन्हें नई डेट देंगे। उसके अनुसार ही खरीद की जाएगी। इसमें एक दिन में 200 टोकन ही जारी होंगे। इसको देखते हुए एडीएम सिटी ने एफसीआई, मंडी सचिव के साथ मीटिंग की।

मंडी दिनभर रही जाम
भामाशाहमंडी में बुधवार को भी जाम की स्थिति रही। किसान आसपास के गांवों से तीन दिन से गेहूं लेकर यहां आए हुए हैं। उनका नंबर ही नहीं आ पा रहा है। एफसीआई और मंडी प्रशासन ने सुबह पुलिस की मदद लेकर गेट नंबर दो से गेहूं के लदान के लिए 270 ट्रकों को अंदर लिया और गेहूं भरवाया। तब कहीं जाकर 25 हजार कट्टों की खरीद की जा सकी।

ठेकेदार फर्म का कहना है कि अभी भी 1 लाख 70 हजार से ज्यादा कट्टे मंडी में पड़े हुए हैं। इसके अलावा करीब 500 ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में 1 लाख कट्टे जिंस पड़ा हुआ है। अब गुरुवार को खरीद बंद की है और जितना माल अंदर आ गया है। उसकी तुलाई की जाएगी। शुक्रवार को फिर तुलाई होगी।

आज खरीद बंद
भारतीय खाद्य निगम क्षेत्रीय प्रबंधक पवन कुमार बोथरा ने बताया कि एफसीआई पोर्टल पर ऑनलाइन टोकन जारी होने की प्रक्रिया में तकनीकी त्रुटि आ जाने के कारण निर्धारित संख्या से अधिक टोकन जारी हो गए हैं। इससे सभी कृषकों की उपज को निर्धारित समय पर खरीद पाना संभव नहीं हो पा रहा है।

ऑनलाइन रजिस्टर्ड करवा चुके किसानों के उपज की खरीद प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने हेतु 12 अप्रैल को कोटा स्थित भामाशाह मंडी में समर्थन मूल्य खरीद प्रक्रिया बंद रहेगी। 14 अप्रैल से ऑनलाइन रजिस्टर्ड किसान अपना ऑफ लाइन टोकन नंबर व गेहूं खरीद की नई तिथि किसान भवन, भामाशाह मंडी से प्राप्त कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि जिले की शेष मंडिया नियमित खुली रहेगी तथा ऑनलाइन टोकन प्रक्रिया से ही खरीद की जाएगी। 15 जून तक खरीद केन्द्र जारी रहेंगे।

कोटा की बेटी दिव्या बनी मॉडल ऑफ राजस्थान की फाइनलिस्ट

कोटा। कोटा की एक और बेटी ने मॉडलिंग वर्ल्ड में कोटा का नाम रोशन किया है। उदयपुर में आयोजित मॉडल ऑफ राजस्थान के सेमीफाइनल राउंड में दिव्या ने शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल में जगह पक्का कर ली है।

सेमीफाइनल में ट्रेडिशनल व वेस्टर्न कॉस्ट्यूम के साथ इंट्रो राउंड हुआ था। इन तीनों में दिव्या ने अच्छी परफॉरमेंस दी। फाइनल राउंड के कुल दस प्रतिभागियों का सलेक्शन किया गया है। दिव्या इससे पहले मिस कोटा भी रह चुकी है। उनके द्वारा डिजाइन किए गए कपड़ों को डिजाइनर वीक दिल्ली में प्रदर्शित किया जा चुका है। 

कलाकार इवेंट संस्थान के डायरेक्टर सुभाष सोरल व मनीष आर्य ने बताया कि मोडल्समे श्वेता तामा बेस्ट रैम्पवॉक,बरखा सक्सेना बेस्ट हेयर, ताइवान मिर्जा मिस फ़ोटो जनिक में चयनित हुई। सोरल ने बताया कि चयनित मॉडल्स को फ़िल्म, धारावाहिक तथा ब्रांड शूट करने का अवसर दिया जायेगा

जयपुर में 6 से 8 अप्रेल 3 दिवसीय फाइनल राउंड को संस्थान के कॉर्डिनेटर आयशा वर्मा, फैजल खान,व चरंजीत द्वारा संचालित किया गया।

विनर मिस इंडिया चंडीगड़ की मालविका शर्मा मिस 2018 रही, जो कि कोटा की संस्था द्वारा इवेंट में भाग लेने चंडीगढ़ से आई थी।

लिवाली निकलने से सोयाबीन और धान 50-50 रुपये क्विंटल तेज

कोटा। भामाशाह अनाज मंडी में बुधवार को लिवाली निकलने से सोयाबीन और धान 50-50 रुपये क्विंटल तेज रहे।आवक का प्रेशर बढ़ने और एनसीडेक्स पर धनिया वायदा ढीला रहने से हाजिर में धनिया 100 रुपये मंदा बोला गया। कोटा मंडी में 2500और रामगंजमंडी में 22 हजार बोरी की आवक रही 

गेहूं मिल 1480 से 1531 लोकवान नया 1600 से 1700 पीडी नया 1600 से 1700 गेहूं नया 1500 से 1900 रुपये प्रति क्विंटल रहे। धान सुगंधा 2600 से 2930 पूसा 1 2500 से 2700 पूसा 4 (1121) 2500 से  (1509) 2000 से 3150 रुपये प्रति क्विंटल रहे।

सोयाबीन 2400 से 3801 सरसो 3400 से 3651 तिल्ली 6000 से 7200 रुपये प्रति क्विंटल रहे। मैथी पुरानी 2000 से 2800 मैथी नई 2800 से 3600 धनिया बादामी नया 3400 से 4300 ईगल 3800 से 4600 रंगदार 5000 से 7500 धनिया पुराना 3000 से 4100 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंग 3300 से 3800 उडद 2000 से 3600 चना 3200से 3450 चना काबुली 5000 से 5500 चना पेपसी 3300 से 3550 चना मौसमी 3000 से 3430 मसूर 3000 से 3450 रुपये प्रति क्विंटल। ग्वार 3000से 3600 मक्का 1000 से 1300 जौ 1100 से 1200 ज्वार 1300 से 2400 रुपये प्रति क्विंटल । लहसुन नया 250 से 2400 रुपये प्रति क्विंटल रहा। लहसुन की आवक 15 हजार कट्टे की रही । माल की कुल आवक 70 हजार बोरी की रही ।

बेमौसम की बारिश से नहीं बिका 6 हजार बोरी धनिया
रामगंजमंडी। बुधवार देर शाम तक धनिया 18 से 20 हजार बोरी के लगभग बिक पाया जिसमे 4 से 6 हजार बोरी बै मौसम की बारिश के कारण पेंडिग रह गया मौसम का मिजाज सुबह से ही बिगड़ा हुआ था व बादल छाए हुए थे।

शाम होने से पहले ही 4 बजे के लगभग अचानक तेज बारिश के आ जाने से किसानों व व्यापारियों की काफी मात्रा में कृषि जिंसों के साथ धनिया भी भीग गया व बहुत सा धनिया बारिश में बह भी गया। .जिससे लाखो रुपये का किसानों व व्यापारियों को नुकसान हुआ है। बाजार बारिश की संभावना व उसके बीच में ओर भी मंदे नजर आए व व्यापारी माल की खरीद से दूरी बनाते दिखाई दिए यही कारण रहा कि ऑक्शन बीच मे ही रोकना पड़ा।।

तेल कंपनियां पेट्रोल-डीजल की कीमत नहीं बढ़ाए, सरकार ने कहा

नई दिल्ली। केंद्र ने सरकारी तेल कंपनियों से कहा है कि वे डीजल और पेट्रोल की खुदरा कीमतों को न बढ़ाएं। सूत्रों के मुताबिक सरकार ने तेल कंपनियों से यह भी कहा है कि ग्लोबल क्रूड ऑइल की कीमतों में हाल के समय में इजाफा हो रहा है और तेल कंपनियां इस नुकसान का कुछ हिस्सा उठाने को तैयार रहें।

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है इंडियन ऑइल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन को डीजल और पेट्रोल की बिक्री में प्रति लीटर 1 रुपये का नुकसान उठाना होगा। इंडियल ऑइन के शेयर मंगलवार को 7.6 प्रतिशत तक गिरे थे, जो नवंबर 2016 के बाद एक दिन के कारोबार में सबसे बड़ी गिरावट है। हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के शेयरों में भी 8.3 प्रतिशत की गिरावट देखी गई।

सरकार इस साल कई राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों की वजह से पेट्रोल-डीजल की कीमतों को काबू में रखना चाहती है। क्रूड ऑइल की सालाना जरूरतों का 80 प्रतिशत आयात करने वाला भारत चाहता है कि क्रूड की कीमत 50 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहे, ताकि अर्थव्यवस्था बेहतर हो सके।

उम्मीद के मुताबिक जीएसटी कलेक्शन नहीं होने की वजह से इसकी संभावना बहुत कम है कि सरकार पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कम कर आम लोगों को राहत दे सके। अगर कच्चे तेल की कीमतों में आगे चलकर और उछाल आने की सूरत में तेल मंत्रालय को सब्सिडी पेमेंट के लिए तैयार रहने को कहा गया है।

हालांकि हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड का कहना है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों को नहीं बढ़ाने से जुड़े सरकार के किसी निर्देश की उसे जानकारी नहीं है। नई दिल्ली में इंटरनैशनल एनर्जी फोरम की बैठक से इतर HPCL के चेयरमैन एम. के. सुराना ने यह बात कही।

2014 में सत्ता में आने के बाद से मोदी सरकार कच्चे तेल की कीमतों में सबसे बड़ी गिरावट के दौर को भुना चुकी है। 2016 में कच्चे तेल की कीमत 27.1 डॉलर प्रति बैरल के न्यूनतम स्तर पर पहुंच चुकी थी लेकिन अब इसमें तेजी से रिकवरी हो रही है। फिलहाल अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 70 रुपये प्रति डॉलर है।

कच्चे तेल की कीमतों में फिर से इजाफे का दौर ऐसे वक्त शुरू हुआ है जब मोदी सरकार 2019 के आम चुनावों की तैयारी में है। जाहिर है तेल की बढ़ती कीमत सरकार के लिए चिंता की बात है।

कच्चे तेल में आया उबाल: 2014 के बाद उच्चतम स्तर पर

नई दिल्ली। पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतें अगर आपको परेशान कर रही हैं तो फिलहाल किसी बड़ी राहत की उम्मीद न लगाएं। ऐसा इसलिए क्योंकि कच्चे तेल की कीमतें बीते तीन साल में सबसे ऊपरी स्तर पर है।

एक्सपर्ट मान रहे हैं कि कच्चे तेल की कीमतों में यह तेजी आने वाले सत्रों में भी जारी रहेगी और ब्रेंट क्रूड 80 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को छू सकता है। गौरतलब है कि मंगलवार को ब्रेंट क्रूड 3 फीसद के उछाल के साथ 71.34 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया, जो 2014 के बाद अब तक का सबसे ऊपरी स्तर है।

विशेषज्ञ का नजरिया: ब्रोकिंग फर्म कार्वी कमोडिटी के हेड रिसर्च डॉ रवि सिंह के मुताबिक मौजूदा अंतराष्ट्रीय परिदृश्य में कच्चे तेल की कीमतों को सपोर्ट देने वाले कई फैक्टर एक साथ काम कर रहे हैं। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी जारी रहने की पूरी संभावना है। इस तेजी में ब्रेंट क्रूड 80 डॉलर प्रति बैरल तक के स्तर छू सकता है।

कच्चे तेल की कीमत 18 महीने के उच्चतम स्तर पर
इस तेजी के कारण बताते हुए रवि सिंह ने कहा कि अमेरिका और चीन के बीच छिड़ा ट्रेड वार और रूस और ओपेक देशों की ओर से कच्चे तेल की सप्लाई को जानबूझकर बाधित करना समेत कई फैक्टर्स कीमतों को सपोर्ट दे रहे हैं।

उनके मुताबिक बुधवार को अमेरिका में जारी होने वाले इंवेंट्री के आंकड़ों से पहले कच्चे तेल की कीमतों में यह तेजी बनती है। इंवेट्री का लगातार घटना भी कच्चे तेल की कीमतों को सपोर्ट दे रहा है।

केडिया कमोडिटी के प्रमुख अजय केडिया का भी मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का बड़ा कारण जियो पॉलिटिकल टेंशन ही है। इसके कम होने या बढ़ने से ही कच्चे तेल की कीमतों में आगे की दिशा तय होगी। फिलहाल 75 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर अहम है इसके टूटने पर कीमतें 80 डॉलर के स्तर तक जा सकती हैं।