Monday, July 27, 2026
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सोने के आयात में 47 फीसदी की कमी, अक्षय तृतीया पर तेजी की संभावना कम

नई दिल्ली । अक्षय तृतीया के मौके पर सोना खरीदना शुभ माना जाता है। इसी के चलते सोने की इस दौरान सोने की मांग में तेजी देखने को मिलती है। लेकिन इस साल का ट्रेंड कुछ बदला नजर आ रहा है।

एक्सपर्ट मान रहे हैं कि इस साल अक्षय तृतीय के मौके पर सोने की डिमांड में किसी बड़ी तेजी की संभावना कम है। अक्षय तृतीया पर कारोबार सामान्य रहने की उम्मीद है। आपको बता दें कि भारत चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गोल्ड कंज्यूमर देश है।

कमजोर इंपोर्ट से मिले संकेत
अक्षय तृतीया 18 अप्रैल को है। इससे ठीक पहले मार्च 2018 के दौरान सोने का आयात 47 फीसद कम हुआ है।मार्च महीने में कुल 64.2 टन सोना भारत में आयात किया गया है, जबकि मार्च 2017 में यह आंकड़ा 121 टन का रहा था। अक्षय तृतीया पर सोने के कारोबार में ज्वैलर्स किसी बड़ी तेजी की उम्मीद नहीं लगा रहे हैं इसी के चलते आयात में कमी देखने को मिली है।

आपको बता दें कि साल 2018 के शुरूआती तीन महीनों में सोने का आयात 159 टन पर आ गया है, जो कि बीते वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 42 फीसद की गिरावट है। अगर बीते साल की बात की जाए तो साल 2017 के शुरूआती महीनों में मांग और आयात में अच्छी खासी तेजी देखने को मिली थी।

ज्वैलर्स का नजरिया
पीएन गैडजिल ज्वैलर्स के चेयरमैन सौरभ गैडजिल के मुताबिक, “हालांकि इस बार अक्षय तृतीया के मौके पर सोने की खरीदारी को लेकर लोगों में उतना उत्साह और पागलपन देखने को नहीं मिलेगा, जैसा कि हमने पूर्व के सालों में देखा है। अक्षय तृतीया के मौके पर हमेशा के पहले ही ऑर्डर बुक किए जाते रहे हैं।

अर्थव्यवस्था में मंदी के चलते सोने में उपभोग की दर में भी गिरावट देखने को मिली है क्योंकि लोगों ने अपने खर्चों को कम कर दिया है। सही मायनों में हमारी निगाह दिवाली के त्यौहार पर टिकी हैं जब डिमांग की स्थिति में सुधार दिख सकता है।”

बीते साल क्यों बढ़ा था गोल्ड इंपोर्ट
केडिया कमोडिटी के अजय केडिया ने बताया बीते साल गोल्ड इंपोर्ट बढ़ने की प्रमुख वजह नोटबंदी रही थी और अगर इस साल के शुरुआती तीन महीनों की साल 2017 के शुरूआती तीन महीनों से तुलना करेंगे तो आप पाएंगे कि आयात में कमी आई है। हालांकि ओवरऑल इंपोर्ट (सालाना आधार पर) में ज्यादा गिरावट नहीं आई है।

अक्षय तृतीया के मौके पर कितनी हो सकती है खरीदारी?
केडिया ने बताया कि इस गिरावट के बावजूद अक्षय तृतीया के मौके पर यानी अप्रैल के महाने के दौरान कुल 90 टन से 100 टन के बीच आयात हो सकता है। यानी अक्षय तृतीया के मौके पर ठीक ठाक खरीदारी रह सकती है क्योंकि यह सोने की खरीद का एक अच्छा मौका होता है। वहीं केडिया ने यह भी बकाया कि अप्रैल तिमाही के दौरान सोना 32,500 प्रति 10 ग्राम का स्तर छू सकता है वहीं इसके 30,000 का निचला स्तर छूने की भी संभावना है।

जाँच में स्कूल के नाम की प्रिंटेड कॉपियां गायब

कोटा। प्राइवेट स्कूलों द्वारा किताबों, कॉपियों और यूनिफॉर्म के कमीशनखोरी के मामले को लेकर कलेक्टर के निर्देशन पर दूसरे दिन भी शिक्षाधिकारियों की टीम ने स्कूलों का निरीक्षण किया। स्कूलों में स्थिति यह रही कि बैग से स्कूल के नाम से प्रिंटेड कॉपियां भी गायब तक करवा दी। बच्चों के पास कॉपियां नहीं मिलीं।

टीम ने पता किया तो जानकारी मिली कि कॉपियाें में स्कूल का नाम प्रिंट था। यही नहीं एक स्कूल संचालक ने भी तो अपने यहां स्कूल में नर्सरी के फ्री में एडमिशन देने की लिखित में टीम को सूची तक दे दी। दूसरे दिन भी पांच दलों की टीम ने एक दर्जन से अधिक स्कूलों का निरीक्षण किया।

अधिकांश स्कूलों में शहर की प्रमुख स्टेशनरी और रेडीमेड यूनिफॉर्म की दुकान से खरीदने की बात सामने आई। शिक्षाधिकारियों की टीम ने किए गए निरीक्षण में यह बात सामने आई कि बुक सेलर और स्कूल संचालकों के बीच कमीशनखोरी का खेल है।

रमसा के एडीपीसी संजय मीणा के नेतृत्व में नालंदा अकेडमी, कौटिल्य सीनियर स्कूल, सेंट जोसेफ, लक्की सीनियर स्कूल और एंडोरेंस एनी, एडीईओ प्रारंभिक नरेंद्र शर्मा के नेतृत्व में निर्मला सीनियर स्कूल, प्रगति स्कूल, द आर्यन नव रचना स्कूल आैर सहायक उप निदेशक प्रारंभिक कानसिंह के नेतृत्व में सेंट्रल अकेडमी, शिव ज्योति, मिकासा, सुमन भारती, होली एंजिल्स स्कूल सहित अन्य स्कूलों का अधिकारियों की टीम ने निरीक्षण किया।

नियमों की पेचीदगी में समर्थन मूल्य से नीचे बेच रहे गेहूं, किसानों का हंगामा

कोटा। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) ने पहली बार समर्थन मूल्य पर ऑनलाइन गेहूं खरीद की व्यवस्था शुरु की। लेकिन एफसीआई के हर दिन नए फरमान से किसान असमंजस में हैं। उन्हें मजबूरी में व्यापारियों को समर्थन मूल्य से नीचे के भाव 1735 से गेहूं बेचना पड़ रहा है।

शुक्रवार को एफसीआई ने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन में तकनीकी खराबी बताते हुए ऑफ लाइन खरीद के टोकन देना शुरु किए। इस बात को लेकर किसानों ने भामाशाहमंडी कमेटी के पूर्व उपाध्यक्ष देवा भड़क के नेतृत्व में किसान भवन के बाहर हंगामा भी किया।

एफसीआई की सुबह 10 शुरु होने वाली खरीद दोपहर साढ़े 12 बजे तक खरीद शुरु नहीं हुई। इसके साथ ही ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के बावजूद किसानों को ऑफ लाइन टोकन लेने के लिए कहा गया। इतना ही नहीं 10 बजे से लेकर साढ़े 11:30 बजे तक खरीद कब और कैसे शुरु होने की जानकारी देने के लिए कोई एफसीआई अधिकारी भी मौजूद नहीं था।

किसान भवन का काउंटर खाली पड़ा हुआ था। भड़क ने इस बात की शिकायत एफसीआई उच्चाधिकारियों को दी। उसके बाद एफसीआई के अधिकारी व कर्मचारी मौके पर पहुंचे।  ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन खरीद प्रक्रिया में ऑफ लाइन प्रक्रिया को जोड़ने से मंडी में किसानों को लाइनों में धक्के खाने पड़े।

दीगोद से 400 बोरी गेहूं लेकर आए किसान घनश्याम मेघवाल ने बताया कि 20 मार्च को ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन पर खरीद की तारीख 11 अप्रैल मिली थी। लेकिन शुक्रवार तक उसका गेहूं नहीं तुला। किसानों के साथ बड़ी समस्या यह कि ऑफ लाइन टोकन के लिए मूल दस्तावेज मांगे जा रहे हैं, जिसे वे साथ लेकर नहीं आए हैं। ऐसे में मजबूरी में उसे अपने गेहूं मंडी में व्यापारियों को बेचने पड़ेंगे। एेसी ही दिक्कत दीगोद से आए किसान राम नारायण बंजारा ने बताया कि वह 362 बोरी गेहूं मंडी में लेकर आया था।

समर्थन मूल्य गेहूं खरीद के ऑन लाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया के साफ्टवेयर में तकनीकी खराबी के कारण एक साथ दो से तीन गुना किसानों को एक ही दिन की तारीख मिल गई। ऐसे में एफसीआई ने निर्णय लिया है भामाशाहमंडी में अब ऑफ लाइन ही किसानों का रजिस्ट्रेशन करते हुए उनका गेहूं खरीदा जाएगा।

दस्तावेज वहीं देने होंगे जो ऑन लाइन प्रक्रिया में दिए गए है। आगे का सिस्टम यह रहेगा, जिन किसानों ने अभी तक कोई रजिस्ट्रेशन नहीं करवाया है और उन्हें भामाशाहमंडी आकर गेहूं बेचना है तो उन्हें ऑफ लाइन रजिस्ट्रेशन करवाना होगा।

विधायक नहीं दे पाए जवाब :मंडी में किसानों के परेशान होने की सूचना मिलने पर विधायक हीरालाल नागर मौके पर पहुंचे। जिन्हें किसान भवन में किसानों ने घेरते हुए खरी खोटी सुनाई। प्रेमपुरा गांव से महिला किसान रिंपी सिंह ने कहा एफसीआई ने ऑन लाइन प्रक्रिया को ऑफ लाइन क्यों किया। किसानों को वापस कागजी कार्रवाई से गुजरना पड़ रहा है। इस सवाल का विधायक नागर से जवाब देते नहीं बना।

बंटाईदारों को अभी तक नहीं मिल रहा अधिकार : खेड़ारसूलपुर गांव के बंटाईदार किसान युवराज व दौलतराम 4 ट्रॉली गेहूं लेकर मंडी पहुंचे। किसानों ने कहा उनसे 6 माह पुराना एग्रीमेंट मांगा जा रहा है। जबकि उन्होंने खेत मालिक का शपथ पत्र बनवा लिया। किसानों ने कहा उन लोगों को अभी तक समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने का अधिकार नहीं मिला। ऐसे में उन्हें 1500 से 1600 के भाव में गेहूं बेचने पड़ेंगे।

दूसरी ओर जिन किसानों ने ऑन लाइन रजिस्ट्रेशन करवा रखा है। उन किसानों को भी ऑफ लाइन रजिस्ट्रेशन करवाना होगा। पेमेंट ऑन लाइन होगा किसानों को। यह व्यवस्था सिर्फ भामाशाहमंडी के केंद्र के लिए ही लागू होगी। बंटाईदारों के गेहूं खरीद के सरकार की ओर से कोई आदेश नहीं आए है। -पवन बोथरा, रीजनल मैनेजर, एफसीआई

विधायक ने की मंत्री से बात
किसानों की समस्या जानकर विधायक नागर ने खाद्य मंत्री बाबूलाल वर्मा से फोन पर वार्ता की, बंटाईदार किसानों को समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने में राहत देने का आग्रह किया। नागर ने कहा किसानों की समस्याओं को लेकर कलेक्टर से वार्ता करेंगे।

बाजार हस्तक्षेप योजना के तहत 12 मई तक होगी लहसुन खरीद

कोटा। केंद्र सरकार ने लहसुन उत्पादक किसानों को बड़ी राहत दी है। बाजार हस्तक्षेप योजना के तहत राज्य सरकार किसानों से 3257 रुपए प्रति क्विंटल के भाव से लहसुन खरीदेगी।

गुरुवार को इसके आदेश जारी हो गए जिसमें कहा गया है कि 13 अप्रैल से 12 मई तक लहसुन की खरीद करें। हालांकि अभी आदेश नहीं पहुंचे हैं। इसके चलते सोमवार तक ही खरीद शुरू होने की संभावना है।

राजफेड 1 लाख 54 हजार टन लहसुन खरीदेगा। प्रदेश में लहसुन हाड़ौती संभाग के अलावा प्रतापगढ़ जिले में पैदा होता है। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस बार संभाग में 7 लाख 16 हजार 120 टन लहसुन हुआ है। किसानों का 25 एमएम मोटाई का लहसुन खरीदा जाएगा। जबकि पिछले साल 20 एमएम की क्वालिटी का लहसुन खरीदा था।

खरीद के आदेश जारी
लहसुन की खरीद के लिए केंद्रीय मंत्रियों से मिले। इसके बाद यह मामला वित्त विभाग में पहुंच गया। वहां से भी रोजाना फॉलोअप करते रहे और आज सरकार ने लहसुन खरीद के आदेश जारी कर दिए। किसान माल को बाजार में नहीं बेचें।- ओम बिरला, सांसद

कोटा से दिल्ली की विमान सेवा बंद, क्लियरेंस नहीं होने पर आपत्ति

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कोटा। दिल्ली की उड़ान शुरू होने के 2 दिन बाद ही कोटा से विमान सेवा बंद कर दी गई है। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) की आपत्तियों के बाद सुप्रीम एयरलाइंस ने फिलहाल कोटा से ऑपरेशन रोक दिया है। दोपहर में जैसे ही एएआई ने कंपनी को पत्र थमाया तो शाम को दिल्ली से कोटा आने वाली फ्लाइट भी रद्द करनी पड़ गई।

इस फ्लाइट में कोटा आने के लिए 8 यात्री बैठे हुए थे, जिन्हें कंपनी को पैसा रिफंड करना पड़ा और स्थिति से अवगत कराते हुए सभी पैसेंजर को दिल्ली एयरपोर्ट से वापस भेजना पड़ा। इससे पहले सुबह दिल्ली की फ्लाइट फुल गई।
पूरे मामले में कंपनी और एयरपोर्ट प्रबंधन एक-दूसरे पर इसका ठीकरा फोड़ रहे हैं।

एयरपोर्ट प्रबंधन का कहना है कि कंपनी के पास डीजीसीए और बीसीएस समेत अन्य जरूरी िक्लयरेंस नहीं है। इसे एएआई मुख्यालय ने गंभीरता से लेते हुए ऑपरेशन बंद किया है। वहीं, कंपनी का कहना है कि एयरपोर्ट प्रबंधन बेवजह अड़ंगा लगा रहा है। जयपुर की फ्लाइट भी कोटा से नहीं उड़ पाएगी।

सुप्रीम एयरलाइंस के जीएम भगवत प्रसाद ने कहा कि पिछले साल अगस्त से कोटा-जयपुर की फ्लाइट संचालित है। एयरपोर्ट प्रबंधन को अब क्लीयरेंस की याद आई है। यदि ऐसा ही था तो पहले हमें कोटा में लैंड क्यों करने दिया? अब बेवजह ऑपरेशन को प्रभावित किया जा रहा है।

प्रबंधन का कहना है कि शुक्रवार को दिल्ली की फ्लाइट में यात्री बैठ चुके थे, तब हमें कहा गया कि आप कोटा में लैंड नहीं कर पाएंगे, क्योंकि आपके पास क्लीयरेंस नहीं है। हमें पैसेंजर को पैसा लौटाकर भेजना पड़ा। अब क्लीयरेंस मिलेगी, तभी सेवा शुरू कर पाएंगे। 

हम आपको बता दें कि तीन दशक बाद 11 अप्रैल से दिल्ली के लिए भी फ्लाइट शुरू की गई थी। जयपुर व दिल्ली से एयर कनेक्ट होने के बाद कोटावासी दूसरे बड़े शहरों से एयर कनेक्ट होने की उम्मीद लगाए बैठे थे, लेकिन इससे पहले ही सारी उम्मीदों पर पानी फिर गया।

सुरक्षा से समझौता नहीं कर सकते : निर्वाण
एयरपोर्ट प्रभारी लोकेश निर्वाण ने बताया कि यह सारा मामला एएआई मुख्यालय के स्तर का है। पहले इन्हें यहां से उड़ान की अनुमति भी मुख्यालय के आदेश से थी, अब रोका भी वहीं के आदेश से है। हमारे पास मुख्यालय से मेल आया कि इनके पास जरूरी क्लीयरेंस नहीं है, इसलिए इस तरह के ऑपरेशन को अनुमति नहीं दी जा सकती।

मैं कंपनी के प्रतिनिधियों से रोजाना रिक्वेस्ट करता रहा कि आप जरूरी क्लीयरेंस दीजिए। कोटा एयरपोर्ट उस स्तर का नहीं है, जैसा जयपुर या अन्य जगह का है। पैसेंजर्स की सेफ्टी से हम लोग समझौता नहीं कर सकते।

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन का शुरुआती किराया हो सकता है 250 रु.

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नई दिल्ली/पटना।. प्रस्तावित मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन का किराया 250 रुपए से 3 हजार रुपए के बीच हो सकता है। हालांकि यह किराया मौजूदा वक्त के हिसाब से की गई कैलकुलेशन के आधार पर अनुमानित है। यह जानकारी देते हुए इस प्रोजेक्ट से जुड़े एक अधिकारी ने कहा कि इसका निर्माण कार्य इस साल दिसंबर से शुरू हो जाएगा और लगभग 5 साल यानी 2023 तक इसके ऑपरेशन होने की उम्मीद है।

बिजनेस क्लास के लिए ज्यादा होगा किराया
नेशनल हाई-स्पीड रेल कॉरपोरेशन (एनएचआरसी) के चेयरमैन अचल खरे ने रिपोर्टर्स को बताया कि बुलेट ट्रेन में आम नागरिकों के लिए किराया बिल्कुल सामान्य रखा जाएगा, लेकिन बिजनेस क्लास में इसके लिए ज्यादा पैसे देने पड़ सकते हैं।

हालांकि, अगर फ्लाइट के मुकाबले बात की जाए तो किराए के लिहाज से बुलेट ट्रेन यात्रियों के लिए फायदे वाला सौदा रहेगा। इसके अलावा उन्होंने दावा किया कि अगर फ्लाइट के टाइम में एयरपोर्ट तक जाने का समय, बोर्डिंग पास और सिक्युरिटी चेक का समय भी जोड़ दिया जाए तो बुलेट ट्रेन यात्रियों का काफी समय भी बचाएगी।

2023 तक चलने लगेगी बुलेट ट्रेन
वहीं पटना में एक कार्यक्रम के दौरान रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अश्वनी लोहानी ने कहा कि अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन 2023 तक पूरी तरह ऑपरेशन हो जाएगी। हालांकि उन्होंने कहा कि 500 किमी लंबे रूट के कुछ सेक्शन 2022 से ही ऑपरेशनल हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि इस प्रोजेक्ट पर प्लान के अनुरूप ही काम चल रहा है।

जमीन अधिग्रहण पूरा होते ही शुरू हो जाएगा निर्माण कार्य
एनएचआरसी चीफ खरे ने बताया कि प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहण का काम दिसंबर तक पूरा होने की उम्मीद है, जिसके बाद प्रोजेक्ट शुरू कर दिया जाएगा। बता दें कि मंत्रालय योजना के लिए 10 हजार हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित करेगा, इसमें 10 हजार करोड़ रुपए लागत आने का अनुमान है।

खरे ने कहा, “महाराष्ट्र सरकार पहले ही जमीन अधिग्रहण के लिए एक नोटिफिकेशन जारी कर चुकी है। इसके तहत जिन लोगों से भी प्रोजेक्ट के लिए जमीन ली जाएगी, उन्हें राज्य सरकार की तरफ से निर्धारित सर्किल रेट से 25% ज्यादा कीमत अदा की जाएगी।”

40 से 50 हजार लोगों को मिलेंगी नौकरियां
खरे के मुताबिक, बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के तहत 3 से 4 हजार लोगों की सीधे तौर पर बोर्ड की तरफ से भर्ती किया जाएगा। इसके अलावा करीब 30 से 40 हजार लोगों को निर्माण के दौरान प्रोजेक्ट से जोड़ा जाएगा।

वर्षा जल प्रबंधन को प्राथमिकता देने की जरूरत

कोटा। भारत में जल ग्रहण विकास की आवश्यकता और वर्षा जल प्रबंधन पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार शुक्रवार को यहां इंजीनियर्स भवन में शुरू हुई।

मुख्य वक्ता देहरादून के इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट अमेरिका स्टेट सेंटर के पूर्व चेयरमेन डॉ. केपी त्रिपाठी ने उद्घाटन सत्र में कहा है कि जल ग्रहण विकास वर्षा जल प्रबंधन की आत्मा है और इसके बिना जल ग्रहण का कोई मतलब नहीं है। खेत का पानी खेत में और गांव का पानी गांव में की बाते बहुत होती है, लेकिन इस काम को कोई करता है क्या?

परियोजना पूरी होते ही स्वयंसहायता समूह भी गायब हो जाते है। पारदर्शिता और सशक्तिकरण और भागीदरी इसमें बड़ी आवश्यक है। नए तालाब बनाने के साथ ही पुराने तालाबों को बहाल करना जरूरी है दुर्भाग्य से इस पर काम नहीं हो रहा। गांवों में भूल बढ़ाने के लिए खेतों के मेड़ो की ऊंचाई 30 सीमी तक रखनी चाहिए।

मुख्य अतिथि कृषि विभाग के पूर्व निर्देशक वीके बगड़ा ने कहा कि वर्षा जल संग्रहण को अनिवार्य करने की आवश्यकता है अन्यथा भूगर्भ जल का गहरा संकट हो जाएगा। महानरेगा पानी के संग्रहण की अवधारणा पर ही बना था,लेकिन जिला परिषदों के द्वारा इसकी मूल भावना पर काम नहीं हुआ और सड़कों आदि के विकास पर काम हुआ।

कार्यक्रम के विशिष्ठ अतिथि राजस्थान सरकार के मुख्यमंत्री जल स्वालम्बन योजना के अतिरिक्त निर्देशक सीताराम बंजारा ने कहा कि प्रदेश में 100 एमएम औसत वर्षा होती है। 12 जिले रेगिस्तान में है। 30 प्रतिशत भूमि बंजर है तथा 80 प्रतिशत पानी संग्रहण नहीं होता।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सीडा परियोजना के पूर्व मुख्य अभियंता कैलाश भार्गव ने कहा कि सघन वृक्षारोपण ही जल संवर्द्धन का कारक है। नीम, पीपल, बड़, सीसम आदि के परम्परागत वृक्षों को बढ़ावा दिया जाए। बेहतर वन प्रबंध नही जल प्रबंधन की कुंजी है।

स्वागत भाषण में इंस्टीट्यूट के चेयरमेन सीकेएस परमार ने कहा कि जल ग्रहण की धारा को नई दिशा देने की जरूरत है। जल ग्रहण के नाम पर हाईड़ोलोजिकल ढांचे बनाए गए है। तकनीक सत्र में कोटा एनवायरमेंटल सेनीटेशन सोसायटी की अध्यक्ष डॉ. सुसेन राज ने ईको इंजीनियरिंग डिजायन पर प्रजेंटेशन दिया।

गेल के अभियंता महेंद्र प्रताप ने कहा कि पानी की एक बूंद भी समुद्र में नहीं जाने दी जाए। समुद्र में मीठा पानी जाना पानी की हत्या के बराबर है।एनआरएम के अतिरिक्त आयुक्त सीएम पांडे ने भूमि क्षरण एवं सामाजिक आर्थिक विकास के लिए सतत फूडग्रेन प्रोडक्शन पर जोर दिया।

जेसीआई कोटा स्टार का स्पीच क्राफ्ट आयोजन

कोटा। जेसीआई कोटा स्टार आज से तीन दिवसीय स्पीच क्राफ्ट कार्यक्रम की शुरुआत हुई। संस्था के अध्यक्ष आशुतोष जैन ने बताया की यह जोन-5 का कार्यक्रम है। जिसमें पूरे राजस्थान से 30 प्रतिभागी प्रशिक्षण ले रहे हैं।

कार्यक्रम कोर्डीनेटर आशीष जैन ने बताया की कार्यक्रम में पूना से आये कमलेश टक्कर, जयपुर के सत्येन्द्र कोनारिया, कोटा की रोहणी कोहली ,यह तीनों तीन दिन तक प्रशिक्षण देंगे। कार्यक्रम निदेशक मोहित जैन ने बताया कि कार्यक्रम की मुख्य अतिथि जोन अध्यक्ष मेघना शक्तावत ने कहा की इस कार्यक्रम में पर्सनालिटी डेवलपमेंट, पर्सनालिटी डेवलपमेंट कार्यक्रम के तहत स्टेज पर बोलने के गुर सिखाये जाते हैं।

इस अवसर पर अध्यक्ष आशुतोष जैन, सचिव विशाल रस्तोगी चेयरपर्सन मोनिका जैन, सचिव किरण गोयल,  पूर्व जॉन अध्यक्ष पवन चित्तौडा, नवीन डागा, योगेश चांडक, प्रीतम गोस्वामी, संस्था के पूर्व अध्यक्ष संजय गोयल, संदीप बाकलीवाल,  संजय शर्मा, मनोज जैन, आशीष जैन, स्पीच क्राफ्ट के चेयरमैन लोकेश महेश्वरी,  पूर्व चेयरपर्सन कल्पना चित्तौडा, अनामिका गुप्ता, दीपा बाकलीवाल, ममता शर्मा और स्वाति जैन सहित अनेक सदस्य उपस्थित थे

मांग घटने से सोना 350 रुपये सस्ता, चांदी की चमक भी पड़ी फीकी

नई दिल्ली। स्थानीय बाजार में मांग गिरने और विदेशी बाजारों में सुस्त रुख के चलते शुक्रवार को सोना 350 रुपये सस्ता होकर 31,800 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। औद्योगिक इकाइयों एवं सिक्का निर्माताओं की ओर से मांग घटने से चांदी भी 250 रुपये गिरकर 39,750 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई ।

दिल्ली के सर्राफा बाजार में 99.9 फीसदी और 99.5 फीसदी शुद्धता वाले सोने की कीमत 350 रुपये घटकर क्रमश: 31,800 रुपये और 31,650 रुपये प्रति 10 ग्राम रही। सोने की आठ ग्राम वाली एक गिन्नी की कीमत भी 100 रुपये टूटकर 24,800 रुपये हो गई।

चांदी सिक्कों के भाव में प्रति सैकड़ा 1,000 रुपये की गिरावट रही। इसका लिवाली दाम 74,000 रुपये और बिकवाली दाम 75,000 रुपये प्रति सैकड़ा रहा। चांदी हाजिर 250 रुपये गिरकर 39,750 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज की गई। जबकि चांदी साप्ताहिक डिलीवरी 355 रुपये टूटकर 38,645 रुपये प्रति किलोग्राम रही।

विदेशी बाजार में भी लुढ़का सोना
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक सोने की कीमतों में गिरावट की मुख्य वजह हाजिर बाजार में स्थानीय आभूषण निर्माताओं की ओर से मांग का गिरना है। साथ ही विदेशी बाजारों में रुख का नरम रहना है। न्यूयॉर्क में सोने का भाव 1.37 फीसदी गिरकर 1,334.30 डॉलर प्रति औंस रहा। चांदी 1.35 फीसदी गिरकर 16.43 डॉलर प्रति औंस रही। 

कोटा सर्राफा
चांदी 39400 रुपये प्रति किलोग्राम।
सोना केटबरी 31900 रुपये प्रति दस ग्राम, सोना 37210 रुपये प्रति तोला। 
सोना शुद्ध 32050 रुपये प्रति दस ग्राम, सोना 37380 रुपये प्रति तोला। 

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 424.867 बिलियन डॉलर के साथ रिकॉर्ड हाई पर

नई दिल्ली। देश का फॉरेक्स रिजर्व (विदेशी मुद्रा भंडार) 503 मिलियन डॉलर के इजाफे की मदद से 424.864 बिलियन डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। ये आंकड़े 6 अप्रैल को खत्म हुए सप्ताह में सामने आए हैं। रिजर्व बैंक के मुताबिक यह इजाफा विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में वृद्धि के चलते देखने को मिला है।

इसके पिछले सप्ताह देश का फॉरेक्स रिजर्व 1.828 बिलियन डॉलर के इजाफे के साथ 424.366 बिलियन डॉलर के स्तर पर पहुंच गया था।

देश के फॉरेक्स रिजर्व ने 8 सितंबर 2017 को पहली बाक 400 बिलियन डॉलर का आंकड़ा पार किया था। जिसके बारे में मॉर्गन स्टैनले ने अनुमान भी लगाया था।

हालांकि उसके बाद इसमें काफी बार उतार-चढ़ाव देखने को मिला। वहीं समीक्षाधीन सप्ताह में फॉरेन करेंसी एसेट्स जो कि कुल रिजर्व का अहम हिस्सा होता है भी 657.7 मिलियन बढ़कर 399.776 बिलियन तक पहुंच गया।

वहीं अगर अमेरिकी डॉलर के संदर्भ में व्यक्त किया जाए तो विदेशी मुद्रा की संपत्ति में गैर-अमेरिकी मुद्राओं जैसे कि यूरो, पाउंड और येन के भंडार में मूल्यवृद्धि और मूल्यह्रास का प्रभाव भी शामिल होता है।

केंद्रीय बैंक ने कहा कि पिछले कुछ हफ्तों से स्थिर रहने के बाद, समीक्षाधीन सप्ताह में सोने का भंडार 130.7 मिलियन अमेरिकी डालर से 21.484 अरब डॉलर हो गया।