Friday, June 26, 2026
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संस्कृति गौरव सम्मान समारोह में 153 सनातन धर्म योद्धाओं का हुआ अभिनंदन

  • 1008 परिवारों और 51 गणेश मंडलों को निशुल्क मिलेंगी गणेश प्रतिमाएं
  • इको-फ्रेंडली प्रतिमा स्थापित करने वाले श्रेष्ठ 21 मंडलों को मिलेगा नगद पुरस्कार
  • सर्व हिंदू समाज सोशल क्रांतिकारी महासंघ ने की घोषणा

कोटा। सर्व हिंदू समाज सोशल क्रांतिकारी महासंघ की ओर से रविवार को गीता भवन में सम्मान समारोह आयोजित किया गया। जिसमें शहर के 51 प्रमुख गणेश मंडलों से आमंत्रित 3-3 सदस्यों से कुल 153 सदस्यों को “सनातन धर्म संस्कृति गौरव सम्मान” से अलंकृत किया गया।

मुख्य संयोजक गोविंद नारायण अग्रवाल ने बताया कि समारोह को आशीर्वाद देने के लिए मौजी बाबा पावन धाम आश्रम की महामंडलेश्वर साध्वी डॉ. हेमा सरस्वती, कुलम शक्ति पीठ की महामंडलेश्वर माता नीति अंबा विशेष रूप से उपस्थित हुईं। मुख्य अतिथि के रूप में संदीप चांदीवाला थे। विशिष्ट अतिथि के रूप में संजय गोयल एवं आरएल विजय मौजूद रहे।

इस अवसर पर आमंत्रित अतिथियों का अभिनंदन करने के लिए आयोजन समिति से मुख्य संयोजक गोविंद नारायण अग्रवाल, संस्थापक महामंत्री राजाराम जैन कर्मयोगी, दिनेश कुमार बंसल, परमानंद गर्ग, अश्वत्थामा दाधीच, बसंत भरावा, महेश पंचोली, अनिल कुमार शर्मा, लक्ष्मी नारायण गर्ग, महावीर जैन, योगेश शर्मा, हेमंत सिंह, कमल सिंह सोलंकी, धर्मपाल सिंह, नरेंद्र सिंह जादौन और लक्ष्मण सिंह हाडा सहित कई गणमान्य पदाधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन नरेश कारा द्वारा किया गया।

इको फ्रेंडली श्री गणपति क्लब’ की होगी स्थापना
महासंघ के मुख्य संयोजक एवं अध्यक्ष गोविंद नारायण अग्रवाल ने कोटा के गणेश महोत्सव को ‘जिला महोत्सव’ घोषित करने के साथ ही स्थानीय गणेश मंडलों को राज्य सरकार एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा आर्थिक अनुदान प्रदान करने की पुरजोर मांग उठाई।

उन्होंने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि ‘इको फ्रेंडली श्री गणपति क्लब’ की स्थापना करते हुए जन जागृति अभियान चलाया जाएगा इसके अंतर्गत आगामी 2026 के गणेश महोत्सव में इको फ्रेंडली प्रतिमा स्थापित करने वाले 21 सर्वश्रेष्ठ गणेश मंडलों का चयन किया जाएगा। भामाशाहों के सहयोग से प्रत्येक मंडल को 5100 रुपए की राशि का नगद पुरस्कार देकर प्रोत्साहित किया जाएगा।

निशुल्क मिलेंगी इको फ्रेंडली प्रतिमाएं
संस्थापक महामंत्री राजाराम जैन ‘कर्मयोगी’ (रावण सरकार) ने बताया कि महासंघ के संयोजन में प्रथम चरण के तहत कोटा के 51 प्रमुख गणेश मंडलों को ‘सनातन धर्म संस्कृति गौरव सम्मान’ से अलंकृत किया गया है। ​उन्होंने बताया कि महासंघ ने इस वर्ष पर्यावरण अनुकूल उत्सव मनाने के लिए 15 लाख रुपए की भारी-भरकम राशि का बजट निर्धारित किया है।

इस बजट के माध्यम से कोटा के विभिन्न गणेश मंडलों को 3 फीट से 5 फीट तक की 51 इको फ्रेंडली गणेश प्रतिमाएं पूरी तरह से निशुल्क उपलब्ध करवाई जाएंगी। इसके अतिरिक्त, आम परिवारों में स्थापना के लिए 6 इंच, 8 इंच एवं 10 इंच की कुल 1008 इको फ्रेंडली गणपति प्रतिमाएं भी निशुल्क बांटी जाएंगी। इन निशुल्क प्रतिमाओं को प्राप्त करने के लिए आगामी अगस्त माह में एक विशेष संपर्क नंबर जारी कर पंजीकरण की प्रक्रिया विधिवत रूप से प्रारंभ की जाएगी।

कोटा गणेश महोत्सव की बनेगी स्मारिका
महामंत्री राजाराम जैन के नेतृत्व में 440 विभिन्न गणेश मंडलों से संपर्क स्थापित कर उन्हें महासंघ की पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी भावी कार्य योजनाओं की जानकारी दी गई थी। जिन्हें समारोह का निमंत्रण दिया गया था। कोटा जिले में लगभग 1000 से अधिक ऐसे गणेश मंडल हैं जो 3 फुट से अधिक ऊंची प्रतिमा स्थापित करते हैं। इस वर्ष भी महासंघ की 10 सदस्यों की एक विशेष टीम गणेश महोत्सव के अवसर पर पंडालों में जाकर संपर्क स्थापित करेगी और सभी मंडलों को जोड़ते हुए एक भव्य स्मारिका का प्रकाशन किया जाएगा।

नामी कोचिंग को टॉपर्स की सफलता का श्रेय लेना पड़ा महंगा, लगा सात लाख का जुर्माना

नई दिल्ली। संघ लोक सेवा आयोग की आईएएस जैसी कठिन परीक्षा की तैयारी करने वाले लाखों छात्र हर साल उन कोचिंग संस्थानों की ओर देखते हैं, जो अपने विज्ञापनों में टॉपर्स और सफल उम्मीदवारों के नाम दिखाकर बेहतर नतीजों का दावा करते हैं।

ऐसे दावों की सच्चाई पर सरकारी जांच ने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने देश के चर्चित IAS कोचिंग संस्थानों में से एक वाजीराम एंड रवि आईएएस स्टडी सेंटर एलएलपी पर सात लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।

आरोप है कि संस्थान ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा के सफल उम्मीदवारों को लेकर ऐसे विज्ञापन प्रकाशित किए जिनमें महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई गई।

CCPA के अनुसार, संस्थान ने अपनी वेबसाइट और प्रचार सामग्री में दावा किया था कि UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2023 में टॉप 10 रैंक धारकों में से 8 उम्मीदवार वाजीराम एंड रवि से जुड़े थे। इसके अलावा टॉप 50 में 37 उम्मीदवारों को भी संस्थान से जुड़ा बताया गया था।

कोचिंग संस्थान यह भी दावा करता रहा कि हर साल UPSC के जरिए चुने जाने वाले अधिकारियों में 30 प्रतिशत से अधिक उसके छात्र होते हैं। इन दावों ने स्वाभाविक रूप से उन छात्रों और अभिभावकों को प्रभावित किया जो UPSC की तैयारी के लिए सही संस्थान की तलाश कर रहे थे।

CCPA की जांच में पाया गया कि जिन उम्मीदवारों को संस्थान अपनी सफलता के उदाहरण के तौर पर पेश कर रहा था, उनमें से अधिकांश ने संस्थान का पूरा कोचिंग कोर्स नहीं किया था। जांच के मुताबिक टॉप 10 में शामिल 8 उम्मीदवारों में से 7 केवल संस्थान के इंटरव्यू गाइडेंस प्रोग्राम (IGP) का हिस्सा थे।

इसी तरह टॉप 50 में शामिल 37 उम्मीदवारों में से 29 ने भी सिर्फ यही कार्यक्रम लिया था। यानी ये उम्मीदवार पहले ही UPSC की प्रारंभिक परीक्षा और मुख्य परीक्षा अपने दम पर पास कर चुके थे और अंतिम चरण यानी इंटरव्यू की तैयारी के लिए संस्थान से जुड़े थे।

इंटरव्यू गाइडेंस प्रोग्राम UPSC चयन प्रक्रिया के अंतिम चरण के लिए चलाया जाता है। इसमें केवल वे उम्मीदवार शामिल हो सकते हैं जो प्रीलिम्स और मेन्स परीक्षा सफलतापूर्वक पास कर चुके हों।

ऐसे में यह कार्यक्रम पूरी तैयारी कराने वाले कोर्स से अलग माना जाता है। CCPA का कहना है कि जब किसी उम्मीदवार ने केवल इंटरव्यू गाइडेंस लिया हो, तब उसे पूर्ण कोचिंग कार्यक्रम की सफलता के रूप में प्रचारित करना भ्रामक तस्वीर पेश कर सकता है।

जांच के दौरान पिछले वर्षों के आंकड़ों का भी अध्ययन किया गया। इनमें पाया गया कि संस्थान से जुड़े सफल उम्मीदवारों का बड़ा हिस्सा केवल इंटरव्यू गाइडेंस प्रोग्राम में शामिल हुआ था।

आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021 में 86.36 प्रतिशत, वर्ष 2022 में 78.31 प्रतिशत, वर्ष 2023 में 97.56 प्रतिशत और वर्ष 2024 में 71.69 प्रतिशत सफल उम्मीदवार सिर्फ IGP से जुड़े थे। इन आंकड़ों के आधार पर प्राधिकरण ने माना कि विज्ञापनों में उम्मीदवारों के वास्तविक जुड़ाव की प्रकृति स्पष्ट नहीं की गई, जिससे छात्रों के बीच गलत धारणा बन सकती थी।

Hernia Surgery: हाड़ौती में अब जटिल हर्निया का उन्नत उपचार संभव

ईथोस अस्पताल में एडवांस लैप्रोस्कोपिक हर्निया सर्जरी कार्यशाला आयोजित

कोटा। Hernia Surgery: हाड़ौती क्षेत्र में आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सकीय प्रशिक्षण को नई दिशा देते हुए ईथॉस सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में रविवार को “एडवांस्ड लैप्रोस्कोपिक मैनेजमेंट ऑफ एब्डॉमिनल वॉल हर्नियाज” विषय पर एक दिवसीय लाइव CME सर्जिकल वर्कशॉप का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में 70 से अधिक चिकित्सकों और पीजी विद्यार्थियों ने भाग लेकर उन्नत हर्निया सर्जरी तकनीकों का प्रत्यक्ष प्रशिक्षण प्राप्त किया। निदेशक प्रदीप दाधीच ने बताया कि यह कार्यशाला नई दिल्ली के वरिष्ठ मिनिमल एक्सेस एवं जीआई सर्जन डा प्रवीण भाटिया व ईथॉस हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट एवं क्लिनिकल लीड डॉ. रोहित दाधीच के मार्गदर्शन मे सम्पन्न हुई।

डॉ. रोहित दाधीच ने बताया कि CME का उद्देश्य सर्जनों को हर्निया उपचार की नवीनतम और वैज्ञानिक तकनीकों से परिचित कराना है। वर्कशॉप में टीईपी, टैप, ई-टीईपी, आईपीओएम प्लस, जटिल वेंट्रल हर्निया रिपेयर और कम्पोनेंट सेपरेशन जैसी उन्नत लैप्रोस्कोपिक सर्जिकल उन्नत प्रक्रियाओं का लाइव प्रदर्शन किया गया।

डॉ. दाधीच ने बताया कि पिछले 18 माह में ईथोस हॉस्पिटल में 700 से अधिक हर्निया सर्जरी सहित लगभग 2,500 जटिल मामलों का सफल उपचार किया जा चुका है।

डॉ. दाधीच ने कहा कि दूरबीन तकनीक से की जाने वाली हर्निया शल्य चिकित्सा में रोगी को कम पीड़ा, न्यूनतम रक्तस्राव, त्वरित स्वास्थ्य लाभ एवं संक्रमण का कम जोखिम रहता है। जिससे ईथॉस अस्पताल क्षेत्रीय स्तर पर एडवांस्ड लैप्रोस्कोपिक सर्जरी का महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरा है।

ईथॉस हॉस्पिटल के निदेशक प्रदीप दाधीच ने कहा कि ऐसे शैक्षणिक आयोजन हाड़ौती में आधुनिक चिकित्सा तकनीकों के विस्तार और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि ईथॉस हॉस्पिटल में अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटर, एडवांस डायग्नोस्टिक सुविधाएं, क्रिटिकल केयर तथा विशेषज्ञ चिकित्सकीय सेवाओं के माध्यम से क्षेत्रीय मरीजों को महानगरों जैसी चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।

ईथॉस अस्पताल में अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होने से अब कोटा, बूंदी, बारां एवं झालावाड़ एवं मध्यप्रदेश के सीमावर्ती जिलों के रोगियों को स्थानीय स्तर पर ही समय पर उपचार मिल सकेगा।

OSM Portal: लाखों छात्रों की आंसर शीट्स को लेकर बड़ी चूक, CBSE ने मानी गलती

नई दिल्ली। सीबीएसई ने पोर्टल में सिक्योरिटी की बड़ी चूक की गलती मान ली है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने लाखों छात्रों की आंसरशीट्स के सार्वजनिक होने और पोर्टल की सुरक्षा में चूक को लेकर एक आधिकारिक बयान जारी किया है। यह बयान 12वीं क्लास के दो छात्रों के सीबीएसई क्लाउड स्टोरेज मैनेजमेंट पर बेहद गंभीर सवाल उठाने के बाद आया है।

निसर्ग अधिकारी और सार्थक सिद्धांत, 12वीं क्लास के दो छात्रों ने सीबीसएई बोर्ड पर लाखों छात्रों की आंसरशीट्स की सुरक्षा को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। निसर्ग का दावा है कि सीबीएसई ने अपने अमेजन वेब सर्विसेज (AWS) क्लाउड स्टोरेज बकेट को ठीक से सिक्योर नहीं किया है। बिना किसी ऑथेंटिकेशन के डेटा एक्सेस किया जा सकता है।

निसर्ग ने एक्स (पहले ट्विटर) पर आंसर शीट्स का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए लिखा, ‘CBSE वालों ने अपने AWS बकेट को ठीक से कॉन्फिगर नहीं किया, और अब हम उनके सारे मीडिया को पेज-दर-पेज देख और गिन सकते हैं, जिसमें 2026 की आंसर शीट्स और क्वेश्चन पेपर शामिल हैं।

ListObjectsV2 बिना किसी ऑथेंटिकेशन के काम करता है और बकेट का रूट भी लिस्ट किया जा सकता है। इंटरनेट पर कोई भी व्यक्ति किसी भी स्कैन की हुई आंसर शीट को डाउनलोड कर सकता है। चाहे वह किसी भी संस्थान की हो। कई संस्थान एक ही बकेट का इस्तेमाल कर रहे हैं, यह सुरक्षा के लिहाज से बेहद खतरनाक है।’

भारी बारिश एवं तूफान के कारण रोकी गई केदारनाथ यात्रा फिर शुरू

रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड की केदारनाथ यात्रा को एक बार फिर शुरू कर दिया गया है। लगातार हो रही भारी बारिश और मौसम विभाग की ओर से जारी ऑरेंज अलर्ट को देखते हुए रविवार सुबह प्रशासन ने एहतियातन केदारनाथ यात्रा को अस्थायी रूप से रोक दी थी। यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए प्रशासन की ओर से यह निर्णय लिया गया था।

रुद्रप्रयाग जिले के विभिन्न पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार बारिश के बाद यह निर्णय लिया गया। रुद्रप्रयाग डीएम विशाल मिश्रा की ओर से मौसम के रुख में बदलाव और बारिश रुकने के बाद एक बार फिर केदारनाथ यात्रा को शुरू किए जाने के बारे में जानकारी दी गई है।

रुद्रप्रयाग के डीएम विशाल मिश्रा ने बताया कि बारिश रुकने और मौसम में सुधार होने के बाद केदारनाथ ट्रेकिंग मार्ग पर तीर्थयात्रियों की आवाजाही फिर से शुरू हो गई है।

खराब मौसम के कारण अलग-अलग चेकपॉइंट पर सुरक्षित रूप से रोके गए तीर्थयात्रियों को अब आगे बढ़ने की अनुमति दे दी गई है। खराब मौसम के कारण एहतियाती कदम के तौर पर आज सुबह केदारनाथ यात्रा पर लगाया गया अस्थायी रोक हटा दिया गया है।

डीएम ने कहा कि केदारनाथ यात्रा फिर से शुरू हो गई है। इसको लेकर श्रद्धालुओं से लगातार अपील की जा रही है। अधिकारी लगातार श्रद्धालुओं से अपील कर रहे हैं कि वे सावधानी से यात्रा करें। प्रशासन की ओर से जारी किए जाने वाले सभी सुरक्षा दिशा-निर्देशों का पालन करें।

स्थगित की गई थी यात्रा
मौसम विभाग ने केदारनाथ और आसपास के इलाकों में भारी बारिश, तेज हवाएं और तूफान की संभावना को देखते हुए केदारनाथ यात्रा को स्थगित कर दी गई थी। मौसम के संभावित खतरे को देखते हुए केदारनाथ धाम की ओर जाने वाले श्रद्धालुओं को विभिन्न पड़ावों और होल्डिंग क्षेत्रों में रोककर सुरक्षित ठहराया गया। पैदल यात्रा मार्ग पर मौजूद यात्रियों को भी निकटतम सुरक्षित स्थानों और निर्धारित होल्डिंग एरिया में रखा गया।

श्रीनगर क्षेत्र में केदारनाथ धाम की ओर जाने वाले वाहनों की आवाजाही भी फिलहाल रोक दी गई थी। वाहनों को निर्धारित होल्डिंग क्षेत्रों में खड़ा कराया गया, ताकि मौसम सामान्य होने तक किसी प्रकार की दुर्घटना की आशंका न रहे।

ऊर्जा मंत्री ने जांची ‘वंदे गंगा जल संरक्षण अभियान’ की हकीकत,

कनवास क्षेत्र का दौरा, वैज्ञानिक पद्धति से वाटर रिचार्जिंग पर दिया जोर

कोटा। ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर रविवार को कनवास विधानसभा क्षेत्र के एक दिवसीय दौरे पर रहे। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र की विभिन्न ग्राम पंचायतों में स्थानीय विकास कार्यों और मूलभूत सुविधाओं का जायजा लिया।

मंत्री नागर ने मुख्य रूप से ‘वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान’ के तहत विभिन्न ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर चल रहे स्वच्छता अभियान की प्रगति और व्यवस्थाओं की गहन समीक्षा की।

उन्होंने बालूहेड़ा, झालरी, हिंगोनिया, कनवास, सावनभादो, जालिमपुरा और मोरूकलां गांवों का धरातल पर निरीक्षण किया और स्थानीय जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों तथा प्रशासनिक अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठकें कीं।

ऊर्जा मंत्री नागर ने आमजन के अभाव-अभियोग और स्थानीय समस्याओं को संवेदनशीलता से सुना तथा उनके त्वरित निस्तारण के लिए मौके पर ही अधिकारियों को पाबंद किया।

​ऊर्जा मंत्री ने स्वच्छता और जल संरक्षण को लेकर अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि यह अभियान कोई कर्मकांड या सिर्फ फोटो खिंचाने का जरिया नहीं बनना चाहिए, बल्कि धरातल पर इसके वास्तविक और जमीनी बदलाव दिखने चाहिए।

ग्रामीण विकास और स्वच्छता के कार्यों में किसी भी स्तर पर लीपापोती बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने घोषणा की कि बेहतर काम करने वाले ग्राम सेवकों को सरकार की ओर से पारितोषिक दिया जाएगा। जबकि अपने कर्तव्यों में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों को सीधे चार्जशीट थमाई जाएगी।

​मंत्री हीरालाल नागर ने जल संकट से निपटने के लिए जल संचयन की तकनीकों को बढ़ावा देने और ठोस व तरल कचरा प्रबंधन पर विशेष ध्यान केंद्रित करने को कहा। उन्होंने भूजल स्तर को सुधारने के लिए गांवों में वैज्ञानिक पद्धति से सोखता गड्ढों के निर्माण पर जोर दिया, ताकि व्यर्थ बहने वाले पानी से वाटर रिचार्जिंग प्रभावी ढंग से हो सके।

जल स्रोतों के पुनरुद्धार व संरक्षण को अनिवार्य बताते हुए उन्होंने पारंपरिक कुओं व बावड़ियों के जीर्णोद्धार पर बल दिया। इसके साथ ही उन्होंने कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों से अपील की कि वे हर गांव में जाएं और जन भागीदारी के साथ जल स्रोतों पर श्रमदान करें। उन्होंने ग्रामीणों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करते हुए इस अभियान को एक जन आंदोलन बनाने का आह्वान किया।

शिकायत पर लाइन मेन को कराया एपीओ
राजस्थान सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति को धरातल पर उतारते हुए ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने भ्रष्टाचार और कार्य में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त रुख अख्तियार किया है।

कनवास के दौरे के दौरान ग्रामीणों ने लाइनमैन द्वारा काम के बदले पैसे मांगने और ड्यूटी में घोर लापरवाही बरतने की गंभीर शिकायतें सीधे ऊर्जा मंत्री से कीं। ग्रामीणों की जनसुनवाई के बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए मंत्री नागर ने मौके पर ही आरोपी कार्मिक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश जारी कर दिए।

ऊर्जा मंत्री के निर्देशों के तुरंत बाद जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के सांगोद कार्यालय द्वारा आदेश जारी कर दिए गए हैं। सहायक अभियंता कनवास कार्यालय में तैनात लाइनमैन-द्वितीय जगदीश गहलोत को तत्काल प्रभाव से एपीओ कर दिया गया है।

इसके साथ ही उन्हें कनवास कार्यालय से कार्यमुक्त करके सहायक अभियंता सांगोद कार्यालय में संबद्ध कर दिया गया है। इस अवधि के दौरान उन्हें कोई जॉइनिंग टाइम नहीं मिलेगा।

ऊर्जा मंत्री नागर ने स्पष्ट संदेश दिया है कि हमारी सरकार भ्रष्टाचार और लापरवाही को कतई बर्दाश्त नहीं करेगी और जनता को परेशान करने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा।

Stock Market: इस सप्ताह कैसी रहेगी शेयर बाजार की चाल, जानिए एक्सपर्ट से

नई दिल्ली। Stock Market This Week : स्थानीय शेयर बाजार की दिशा इस सप्ताह अमेरिका-ईरान संबंधों से जुड़े घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समीक्षा से तय होंगे।

एक्सपर्ट्स ने यह राय जताई है। इसके अलावा प्रमुख आर्थिक आंकड़ों की घोषणा, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां तथा रुपये-डॉलर की विनिमय दर पर भी निवेशकों की निगाह रहेगी।

रेलिगेयर ब्रोकिंग के रिसर्च प्रमख अजित मिश्रा ने कहा कि बाजार भागीदारों की नजर अमेरिका-ईरान की स्थिति और कच्चे तेल की कीमतों पर बनी रहेगी। ये दोनों कारक मुद्रास्फीति की अपेक्षाओं, रुपये की स्थिरता और विदेशी निवेश प्रवाह को सीधे प्रभावित करते हैं।

उन्होंने बताया कि सोमवार को मई माह का अंतिम एचएसबीसी मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई (पीएमआई) आंकड़ा जारी होगा, जबकि बुधवार को सेवा क्षेत्र और समग्र पीएमआई के आंकड़े आएंगे। इनसे मांग, कारोबारी गतिविधियों और विभिन्न क्षेत्रों में आर्थिक मजबूती का संकेत मिलेगा।

मिश्रा के अनुसार, सप्ताह की सबसे महत्वपूर्ण घटना शुक्रवार को होने वाली आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक का निर्णय होगा। निवेशक ब्याज दरों, मुद्रास्फीति और नकदी प्रबंधन को लेकर केंद्रीय बैंक के रुख पर विशेष ध्यान देंगे।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर तथा विदेशी मुद्रा भंडार के आंकड़े भी अर्थव्यवस्था की गति और बाहरी क्षेत्र की स्थिति का आकलन करने में मदद करेंगे।

पिछले सप्ताह बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 639.61 अंक यानी 0.84 प्रतिशत और एनएसई निफ्टी 171.55 अंक यानी 0.72 प्रतिशत टूटा था।

स्वस्तिका इन्वेस्टमार्ट के रिसर्च हेड मीणा ने कहा कि घरेलू स्तर पर आरबीआई की नीतिगत बैठक सबसे महत्वपूर्ण रहेगी। बढ़ती महंगाई और मुद्रा बाजार की परिस्थितियों के बीच निवेशक केंद्रीय बैंक के संकेतों का बारीकी से विश्लेषण करेंगे।

उन्होंने कहा कि एक जून को मई माह के वाहन क्षेत्र के बिक्री आंकड़े भी आएंगे। इससे इस क्षेत्र की उपभोक्ता मांग की स्थिति का अंदाजा लगेगा।

जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स के रिसर्च हेड विनोद नायर के अनुसार, निकट अवधि में भारतीय शेयर बाजार की दिशा मुख्य रूप से आरबीआई के नीतिगत निर्णय और जीडीपी आंकड़ों पर निर्भर करेगी।

वहीं पीएमआई और औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के आंकड़े वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में औद्योगिक गतिविधियों की शुरुआती तस्वीर पेश करेंगे।

Market Cap: सेंसेक्स की शीर्ष 7 कंपनियों के 1.54 लाख करोड़ डूबे, RIL टॉप पर

नई दिल्ली। Market Cap: भारतीय शेयर बाजार के लिए पिछला हफ्ता सुस्ती भरा रहा। छुट्टियों के कारण कम कामकाजी दिनों वाले इस हफ्ते में देश की टॉप 10 सबसे मूल्यवान कंपनियों में से 7 के मार्केट कैप (बाजार पूंजीकरण) में भारी गिरावट देखने को मिली।

इन सात कंपनियों के निवेशकों को सामूहिक रूप से करीब 1.54 लाख करोड़ (1.54 ट्रिलियन) रुपये का चटका लगा। इस गिरावट में सबसे बड़ा नुकसान दिग्गज कारोबारी मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज को उठाना पड़ा।

पिछले हफ्ते के कारोबार के दौरान बीएसई (BSE) का बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स 639.61 अंक यानी 0.84 फीसदी टूट गया। वहीं, एनएसई (NSE) के निफ्टी में भी 171.55 अंक यानी 0.72 फीसदी की कमजोरी दर्ज की गई।

मार्केट कैप के लिहाज से देखें तो रिलायंस इंडस्ट्रीज के मूल्यांकन में सबसे बड़ी गिरावट आई। कंपनी की मार्केट वैल्यू 46,078.3 करोड़ रुपये घटकर 17,87,039.40 करोड़ रुपये पर आ गई। बैंकिंग सेक्टर की बात करें तो HDFC बैंक के निवेशकों को भी बड़ा नुकसान हुआ और इसका मार्केट कैप 33,333.06 करोड़ रुपये घटकर 11,46,641.84 करोड़ रुपये रह गया।

इसी तरह टेलीकॉम सेक्टर की दिग्गज कंपनी भारती एयरटेल की बाजार हैसियत 25,408.96 करोड़ रुपये घटकर 11,14,886.53 करोड़ रुपये पर सिमट गई। IT सेक्टर की बड़ी कंपनी TCS का वैल्यूएशन भी 22,920.58 करोड़ रुपये कम होकर 8,15,480.75 करोड़ रुपये रह गया।

इसके अलावा, हिंदुस्तान यूनिलीवर का मार्केट कैप 13,169.46 करोड़ रुपये घटकर 5,04,210.54 करोड़ रुपये, बजाज फाइनेंस का 7,253.24 करोड़ रुपये घटकर 5,63,262.33 करोड़ रुपये और ICICI बैंक का मूल्यांकन 6,311.41 करोड़ रुपये की गिरावट के साथ 9,00,589.91 करोड़ रुपये रह गया।

बाजार की इस चौतरफा गिरावट के बीच तीन बड़ी कंपनियों के निवेशकों के लिए राहत की खबर रही। L&T (लार्सन एंड टुब्रो) के मार्केट कैप में सबसे शानदार उछाल आया और यह 20,608.43 करोड़ रुपये बढ़कर 5,60,836.64 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।

सरकारी क्षेत्र के सबसे बड़े बैंक SBI का वैल्यूएशन भी 13,753.62 करोड़ रुपये बढ़कर 8,89,831.54 करोड़ रुपये हो गया, जबकि सरकारी बीमा कंपनी LIC का मार्केट कैप 6,040.37 करोड़ रुपये की बढ़त के साथ 5,20,484.06 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।

इस पूरे उतार-चढ़ाव के बाद भी देश की टॉप 10 कंपनियों की रैंकिंग में रिलायंस इंडस्ट्रीज पहले पायदान पर मजबूती से टिकी हुई है। इसके बाद क्रमशः HDFC बैंक, भारती एयरटेल, ICICI बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, TCS, बजाज फाइनेंस, लार्सन एंड टुब्रो, LIC और हिंदुस्तान यूनिलीवर का स्थान आता है।

विदेशी निवेशकों ने शेयर बाजार से 2026 में रिकॉर्ड 2.25 लाख करोड़ निकाले

नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों (FPIs) का मोहभंग होता दिख रहा है। मई के महीने में भी विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय बाजार से अपने पैर पीछे खींचना जारी रखा और इस महीने कुल 32,963 करोड़ रुपये की बिकवाली की।

कमजोर कॉरपोरेट मुनाफे, रुपये में लगातार आ रही गिरावट और दुनिया के दूसरे बाजारों में मिल रहे बेहतर रिटर्न के चलते विदेशी निवेशक लगातार भारत से अपना पैसा निकाल रहे हैं।

नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) के आंकड़ों के मुताबिक, इस ताजा बिकवाली के साथ ही साल 2026 में अब तक भारतीय इक्विटी मार्केट से कुल 2.25 लाख करोड़ रुपये बाहर निकल चुके हैं। यह आंकड़ा पिछले पूरे साल 2025 में हुई 1.66 लाख करोड़ रुपये की कुल निकासी से भी कहीं ज्यादा है।

अगर इस साल के रुझान पर नजर डालें, तो फरवरी महीने को छोड़कर विदेशी निवेशक हर महीने नेट सेलर्स (बिकवाल) बने रहे। साल की शुरुआत यानी जनवरी में FPIs ने 35,962 करोड़ रुपये निकाले थे। इसके बाद फरवरी में बाजार को थोड़ी राहत मिली और विदेशी निवेशकों ने 22,615 करोड़ रुपये का निवेश किया, जो पिछले 17 महीनों का सबसे बड़ा मासिक इनफ्लो (आवक) था।

लेकिन यह राहत ज्यादा दिन नहीं टिकी और मार्च में पासा पूरी तरह पलट गया। मार्च महीने में विदेशी निवेशकों ने रिकॉर्ड 1.17 लाख करोड़ रुपये की भारी-भरकम बिकवाली की।

बाजार से पैसा निकालने का यह सिलसिला अप्रैल में भी जारी रहा, जब 60,847 करोड़ रुपये बाहर गए, और मई आते-आते यह आंकड़ा करीब 33,000 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। हालांकि, अच्छी बात यह रही कि पिछले महीनों के मुकाबले मई में बिकवाली की रफ्तार थोड़ी थमी है।

बाजार के जानकारों का मानना है कि इस बड़ी बिकवाली के पीछे तीन मुख्य कारण हैं: कंपनियों के कमजोर नतीजे, रुपये का कमजोर होना और विदेशी बाजारों का बेहतर प्रदर्शन।

जिओजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी के विजयकुमार के अनुसार, भारत में कंपनियों की अर्निंग ग्रोथ (मुनाफे की रफ्तार) धीमी रही है। इसके उलट अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे देशों में कॉरपोरेट परफॉर्मेंस काफी मजबूत है। खासकर दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की वजह से आई तेजी विदेशी निवेशकों को अपनी ओर खींच रही है, जिससे भारत का पैसा उन देशों में शिफ्ट हो रहा है।

दूसरी बड़ी वजह रुपये की कमजोरी है। सेंट्रिसिटी वेल्थ टेक के हेड ऑफ इक्विटीज और फाउंडिंग पार्टनर सचिन जासूजा बताते हैं कि साल 2026 में अब तक रुपया करीब 6 फीसदी और पिछले एक साल में लगभग 10 फीसदी तक टूट चुका है। RBI की तमाम कोशिशों के बावजूद रुपया 80 के स्तर से गिरकर डॉलर के मुकाबले 95.5 के आसपास पहुंच गया है। रुपया कमजोर होने से विदेशी निवेशकों का डॉलर में मिलने वाला रिटर्न सीधे तौर पर प्रभावित होता है।

इसके अलावा, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भी भारत की चिंता बढ़ा रही हैं। भारत अपनी जरूरत का 80 फीसदी से ज्यादा क्रूड ऑयल इम्पोर्ट करता है। होर्मुज में जारी तनाव और रुकावटों के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतें 70 डॉलर प्रति बैरल के दायरे से उछलकर 95-105 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। इससे भारत का इम्पोर्ट बिल और करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) दोनों बढ़ गए हैं।

राहत की बात यह है कि मई में बिकवाली की आक्रामकता थोड़ी कम हुई है। मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के प्रिंसिपल मैनेजर रिसर्च, हिमांशु श्रीवास्तव का कहना है कि आउटफ्लो की रफ्तार धीमी होने का मतलब है कि विदेशी निवेशक अब भारत में अपना एक्सपोजर कम करने को लेकर पहले जितने आक्रामक नहीं हैं।

इसकी मुख्य वजह वैश्विक स्तर पर रिस्क सेंटीमेंट (जोखिम की भावना) में धीरे-धीरे हुआ सुधार है। वैश्विक व्यापार तनाव, टैरिफ और विकास से जुड़ी अनिश्चितताएं अभी पूरी तरह खत्म तो नहीं हुई हैं, लेकिन कुछ महीने पहले के मुकाबले अब थोड़ी शांत जरूर हैं।

आने वाले समय को लेकर सचिन जासूजा का मानना है कि जब तक देश की मैक्रो-इकोनॉमिक स्थितियों (आर्थिक मोर्चे) में कोई बड़ा और सकारात्मक बदलाव नहीं आता, तब तक FPI फ्लो का रुख पूरी तरह पलटने यानी विदेशी निवेशकों की भारी वापसी की उम्मीद कम ही है।

Soya: ऊंचे भाव पर मांग घटने से सोयाबीन नरम, प्लांट डिलीवरी की कीमत बढ़ी

नई दिल्ली। Soybean Price सोयाबीन के सबसे ज़्यादा उत्पादन वाले राज्यों मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान में हाल के हफ़्तों में सोयाबीन की प्लांट डिलीवरी की कीमत तेज़ी से बढ़ी है, जो 7,000 रुपये प्रति क्विंटल से भी ज़्यादा हो गई है और कुछ जगहों पर तो 7,500 रुपये प्रति क्विंटल के निशान को भी पार कर गई है।

नतीजतन, सोयाबीन तेल और सोयामील की कीमतों में भी उछाल आया है। इंटरनेशनल मार्केट में, भारतीय सोया DOC (डी-ऑइल केक) कम कॉम्पिटिटिव हो गया है, जिससे इसके एक्सपोर्ट परफॉर्मेंस पर असर पड़ने लगा है।

सोयबीन प्लांट डिलेवरी भाव
23-29 मई के हफ़्ते के दौरान, मध्य प्रदेश में सोयाबीन की प्लांट डिलीवरी कीमत ₹50-100 प्रति क्विंटल, महाराष्ट्र में 100-200 प्रति क्विंटल और राजस्थान में ₹50-125 प्रति क्विंटल कम हुई।

सोया रिफाइंड तेल
सोयाबीन की कीमतों में नरमी के बाद, रिफाइंड सोया तेल की कीमत में भी 1-2 रुपये प्रति किलोग्राम की गिरावट आई। इस कमी के बावजूद, सभी प्लांट में कीमतें 145 रुपये प्रति किलोग्राम के निशान से ऊपर रहीं।

इस बीच, कोटा में रिफाइंड सोया तेल की कीमत 10 रुपये बढ़कर 1,520 रुपये प्रति 10 किलोग्राम हो गई; मुंबई में, यह 1,500 रुपये प्रति 10 किलोग्राम के अपने पिछले लेवल पर स्थिर रही; जबकि कांडला में, यह 15 रुपये गिरकर 1,465 पर आ गई, और हल्दिया में, यह 20 रुपये गिरकर ₹1,460 और 1,465 रुपये प्रति 10 किलोग्राम के बीच आ गई।

इस हफ़्ते, बड़े उत्पादक राज्यों के थोक बाज़ारों (मंडियों) में सोयाबीन की आवक इस तरह दर्ज की गई। 23 मई को 70,000 बैग; 26 मई को 185,000 बैग; 27 मई को 185,000 बैग; और 29 मई को 190,000 बैग (हर बैग का वज़न 100 किलोग्राम)। सप्लाई का ऑफ़-सीज़न होने के बावजूद, सोयाबीन की आवक अच्छी बनी हुई है।

सोयाबीन (डीओसी)
सोयाबीन DOC की डिमांड में कमी देखी गई, जिससे कीमत में 1,500 रुपये प्रति टन तक की गिरावट आई। नई फसल की बुआई जल्द ही शुरू होने वाली है।