Monday, July 27, 2026
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पॉल्ट्री उद्योग ने तेजी बता कर सोयामील आयात की अनुमति मांगी, सोपा का विरोध

इंदौर। ऊंचे दाम पर हवा का देकर पॉल्ट्री उद्योग केन्द्र सरकार से विदेशों से जी एम सोयामील के आयात की अनुमति देने की मांग कर रहा है। मगर सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) यह कहते हुए इसका विरोध कर रहा है

कि यह कोई स्थायी मुद्रा नहीं है क्योंकि सोयामील का घरेलू बाजार भाव मुख्यतः सोयाबीन तथा क्रूड सोया तेल के दाम में आने वाले उतार-चढ़ाव के साथ घटता-बढ़ता रहता है। एसोसिएशन ने अपनी बात को साबित करने के लिए आंकड़ों का सबूत भी दिया है।

एसोसिएशन के अनुसार 17 अप्रैल 2025 को जब इंदौर मार्केट में सोयाबीन का प्लांट डिलीवरी मूल्य 46,000 रुपए प्रति टन तथा इंदौर में क्रूड सोया तेल का एक्स फैक्टरी भाव 1,21,000 रुपए प्रति टन चल रहा था वहां सोयामील का दाम भी 32,715 रुपए प्रति टन दर्ज किया गया था

लेकिन 1 मई 2025 को जब सोयाबीन और सोया तेल का दाम कमजोर पड़ा तब सोयामील का भाव भी घटकर 30,732 रुपए प्रति टन पर आ गया।

इसके बाद 2 जून से 1 दिसम्बर 2025 तक सोयामील के मूल्य में सीमित उतार-चढ़ाव देखा गया 30-32 हजार रुपए प्रति टन के बीच घूमता रहा।

कुछ समय के लिए सोयामील का दाम 34,000-35,000 रुपए प्रति क्विंटल पर भी पहुंचा था लेकिन वहां यह टिक नहीं पाया और दोबारा नीचे आ गया।

इसके बाद 2 जनवरी 2026 को सोयाबीन का प्लांट डिलीवरी मूल्य बढ़कर 49,300 रुपए प्रति टन तथा क्रूड सोया तेल का दाम 1,20,500 रुपए प्रति टन पर पहुंचा तो सोयामील का भाव भी सुधरकर 36,845 रुपए प्रति टन हो गया।

इसी तरह 31 जनवरी 2026 को सोयाबीन का दाम उछलकर 56,900 रुपए प्रति टन तथा क्रूड सोया तेल का भाव बढ़कर 1,31,000 रुपए प्रति टन पर पहुंचने से सोयामील का मूल्य भी बढ़कर 43,872 रुपए प्रति टन हो गया जो वास्तविक ही था।

घरेलू प्रभाग में सोयामील का उत्पादन तमाम औद्योगिक मांग एवं जरूरत को पूरा करने के लिए पर्याप्त होता है और यदि विदेशों से सस्ते जीएम सोयामील का भारी आयात शुरू हुआ तो सोयाबीन उत्पादकों एवं क्रशर्स-प्रोसेसर्स को गहरा आघात लग सकता है।

Black Pepper: नई कालीमिर्च की आवक शुरू, उत्पादन कम होने से कीमतों में तेजी

नई दिल्ली। Black Pepper Price: हालांकि वर्तमान में उत्पादक केन्द्रों पर नई कालीमिर्च की आवक शुरू हो गई है। लेकिन इस वर्ष पैदावार में कमी आने के कारण नए मालों की आवक आशानुरूप नहीं हो रही है। इसके अलावा वर्तमान में आयात भी नहीं हो रहा है।

जबकि हाजिर में मांग अच्छी चल रही है जिस कारण से हाल ही में कालीमिर्च के भाव 10/15 रुपए प्रति किलो तेजी के साथ बोले जाने लगे हैं। सूत्रों का मानना है कि अभी बाजार में मजबूती बनी रहेगी। हो सकता 15 फरवरी के पश्चात मंडियों में आवक बढ़ने के पश्चात कीमतों में कुछ गिरावट आए लेकिन अधिक मंदे के आसार नहीं है।

व्यापारियों का कहना है कि प्रतिकूल मौसम के चलते इस वर्ष देश में कालीमिर्च का उत्पादन 55/58 हजार टन होने के अनुमान लगाए जा रहे हैं जबकि गत वर्ष उत्पादन का अनुमान 75/77 हजार टन का मसाला बोर्ड द्वारा लगाया गया था। उल्लेखनीय है कि मुख्यतः कालीमिर्च का उत्पादन कर्नाटक एवं केरल में होता है। तमिलनाडु एवं मेघालय में भी छिटपुट मात्रा में पैदावार होती है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्तमान में कोचीन बाजार में कालीमिर्च के भाव बढ़कर 710/740 रुपए प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गए हैं जबकि चिकमगलूर मंडी में भाव 710 रुपए बोला जा रहा है। ग्वालियर में कालीमिर्च का भाव 740/745 रुपए पर बोला जाने लगा है।

देश में कालीमिर्च का उत्पादन कम होने के कारण वियतनाम, श्रीलंका आदि देशों से कालीमिर्च का आयात किया जाता है। मसाला बोर्ड द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024-25 (अप्रैल-मार्च) के दौरान कालीमिर्च का आयात 48085 टन का किया गया। जबकि वर्ष 2023-24 में आयात 34211 टन का रहा था। चालू सीजन 2025-26 के दौरान आयात ओर बढ़ सकता है।

चालू सीजन के शुरुआती 8 माह के दौरान कालीमिर्च के मात्रात्मक रूप में 5 प्रतिशत कमी दर्ज की गई है जबकि भाव ऊंचे होने के कारण आय में 20 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है।

मसाला बोर्ड द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार अप्रैल-नवम्बर 2025 में कालीमिर्च का निर्यात 12926 टन का किया गया और निर्यात से प्राप्त आय 783.88 करोड़ रुपए की रही। जबकि अप्रैल-नवम्बर- 2024 में निर्यात 13655 टन का रहा था और प्राप्त आय 651.04 करोड़ की रही थी।

Motorola का यह फ़ोन हो गया 5000 रुपये सस्ता, जानिए कीमत और ऑफर्स

नई दिल्ली। Motorola Edge 60 fusion का नया 8GB+128GB वेरिएंट प्लेटफॉर्म पर 6 फरवरी दोपहर 12PM से खरीदने के लिए उपलब्ध हो गया है । बैंक ऑफर के बाद यह 19,999 रुपये की प्रभावी कीमत में मिलेगा। यह चार कलर्स – पैनटोन अमेजोनाइट, स्लिपस्ट्रीम, जेफ्री और मायकोनोस में उपलब्ध है। बता दें कि इसे अप्रैल 2025 में भारत में लॉन्च किया गया था, उस समय इसके 8GB+256GB वेरिएंट 22,999 रुपये में और 8GB+256GB वेरिएंट 24,999 रुपये थी।

डिस्प्ले
मोटोरोला एज 60 फ्यूजन में 6.7 इंच का ऑल-कर्व्ड POLED डिस्प्ले है, जो 120 हर्ट्ज तक रिफ्रेश रेट, 300 हर्ट्ज तक टच सैंपलिंग रेट, 4500 निट्स तक की पीक ब्राइटनेस, वॉटर टच 3.0 और HDR10+ सपोर्ट के साथ आता है। डिस्प्ले पर कॉर्निंग गोरिल्ला ग्लास 7i प्रोटेक्शन मिलता है। इसे SGS लो ब्लू लाइट और लो मोशन ब्लर सर्टिफिकेशन के साथ-साथ पैनटोन वैलिडेटेड ट्रू कलर सर्टिफिकेशन भी मिला है।

रैम, प्रोसेसर और सॉफ्टवेयर सपोर्ट
फोन मीडियाटेक डाइमेंसिटी 7400 प्रोसेसर से लैस है, जो 12GB तक LPDDR4X रैम और 256GB uMCP ऑनबोर्ड स्टोरेज के साथ आता है। स्टोरेज को माइक्रोएसडी कार्ड के जरिए 1TB तक स्टोरेज बढ़ाया जा सकता है। यह एंड्रॉयड 15 पर बेस्ड हैलो यूआई के साथ आता है और इसे तीन साल के एंड्रॉयड ओएस अपग्रेड के साथ-साथ चार साल तक सिक्योरिटी पैच अपडेट भी मिलेंगे।

कैमरा
फोन में OIS के साथ 50-मेगापिक्सेल का Sony LYT700C प्राइमरी सेंसर, 13-मेगापिक्सेल का अल्ट्रावाइड सेंसर और एक डेडिकेटेड 3-इन-1 लाइट सेंसर है। सेल्फी के लिए, फ्रंट में 32-मेगापिक्सेल कैमरा है। यह 4K तक वीडियो रिकॉर्डिंग को भी सपोर्ट करता है।

AI फीचर्स
फोन मोटो एआई फीचर्स को सपोर्ट करता है, जिसमें इमेजिंग और प्रोडक्टिविटी टूल्स जैसे फोटो एन्हांसमेंट, एडाप्टिव स्टेबिलाइजेशन, मैजिक इरेजर और बहुत कुछ शामिल हैं। यह स्मार्टफोन गूगल के सर्किल टू सर्च और मोटो सिक्योर 3.0, स्मार्ट कनेक्ट 2.0, फैमिली स्पेस 3.0 और मोटो जेस्चर जैसे अन्य फीचर्स को भी सपोर्ट करता है। इसमें डॉल्बी एटमॉस सपोर्ट के साथ डुअल स्टीरियो स्पीकर्स लगे हैं। इसके कनेक्टिविटी ऑप्शन्स में 5G, 4G, वाई-फाई, ब्लूटूथ 5.4, जीपीएस, एजीपीएस, ग्लोनास, गैलीलियो, एनएफसी शामिल हैं।

बैटरी
फोन में टाइप-सी पोर्ट के साथ 5500mAh की बैटरी है, जो 68W वायर्ड टर्बो चार्जिंग को सपोर्ट करती है। फोन में इन-डिस्प्ले फिंगरप्रिंट सेंसर भी है। मजबूती के लिए इसे MIL-810H मिलिट्री-ग्रेड ड्यूरेबिलिटी बिल्ड के साथ आता है और धूल और पानी से सुरक्षित रहने के लिए इसे IP68 + IP69 रेटिंग दी गई है। 180 ग्राम वजनी इस फोन की मोटाई 8.2 एमएम है।

क्या चांदी में 1980 व 2011 जैसी गिरावट आने वाली है, जानिए एक्सपर्ट का अनुमान

नई दिल्ली। नई इस साल चांदी कीमतों में भारी उथल पुथल देखने को मिल रहा है। सबसे पहले इस जनवरी के अंत में इसके भाव तेजी से बढ़कर सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुए ऑल टाइम हाई पर पहुंच गए थे।

इस स्तर को छूने के दूसरे दिन से चांदी के भाव तेजी से गिरने लगे और अब इसके भाव क्रैश कर गए हैं। चांदी की कीमतों में यह गिरावट 1980 और 2011 में जैसी नजर आ रही है। लेकिन है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार कॉमेक्स पर चांदी के वायदा भाव 29 जनवरी को 121.79 डॉलर के ऑल टाइम हाई पर पहुंच गए थे। लेकिन इसके अगले दिन से भाव गिरने लगे और आज इसके भाव ने 63.90 डॉलर के भाव पर दिन का निचला स्तर छू लिया।

इस तरह चांदी के भाव ऑल टाइम हाई से 47.53 फीसदी गिर चुके हैं। हालांकि खबर लिखे जाने के समय चांदी सुधरकर 73.63 डॉलर प्रति औंस के भाव पर कारोबार कर रही थी।

घरेलू बाजार एमसीएक्स पर चांदी के वायदा भाव ने 29 जनवरी को 4,20,048 रुपये के भाव पर सर्वोच्च स्तर छुआ था। आज इसके भाव 2,29,187 रुपये के निचले स्तर तक चले गए। हालांकि 2 फरवरी को इसके भाव 2,25,805 रुपये किलो तक लुढ़क गए थे।

चांदी में 1980 व 2011 जैसी गिरावट
चांदी की कीमतों में आ रही गिरावट दशकों पहले की ऐतिहासिक गिरावट की ओर इशारा कर रही है। केडिया एडवाइजरी की रिपोर्ट में कहा कि चांदी की कीमतों में यह गिरावट चांदी के ऐतिहासिक पतनों 1980 (-65%) और 2011 (-35%) के साथ तुलना का कारण बन रही है। हालांकि गिरावट पहले जैसी ही दिखती है, लेकिन इसके पीछे की असली वजह अलग है।

1980 से तुलना मुख्यतः गिरावट के पैमाने को लेकर है। उस समय बाजार में अत्यधिक लीवरेज और सीमित खिलाड़ियों की भारी पोजिशनिंग थी, जिसका अंत नियामकीय हस्तक्षेप के साथ हुआ। इसके विपरीत 2026 की गिरावट व्यापक रही, जिसमें हेज फंड, ETF, रिटेल निवेशक और सिस्टमैटिक रणनीतियां सभी शामिल थे और किसी एक बड़े खिलाड़ी या नीतिगत सख्ती की भूमिका नहीं रही।

2011 का क्रैश मैकेनिकल तौर पर ज्यादा समान दिखता है, जहां मौद्रिक नीति की उम्मीदों में बदलाव, लगातार मार्जिन बढ़ोतरी और तेज लिक्विडेशन ने गिरावट को बढ़ाया था। हालांकि आज का सबसे बड़ा अंतर मांग की संरचना में है। 2011 में चांदी मुख्यतः निवेश-आधारित ट्रेड थी, जबकि 2026 में औद्योगिक उपयोग मांग की रीढ़ बन चुका है। जो पिछले चक्रों में मौजूद नहीं था।

कीमतों में गिरावट के पीछे क्या था ट्रिगर
केडिया एडवाइजरी के मुताबिक मुख्य रूप से यूएस मौद्रिक नीति में बदलाव ने इस गिरावट को प्रेरित किया। चांदी कीमतों में मोड़ तब आया जब अमेरिकी मौद्रिक नीति की उम्मीदों का अचानक री-प्राइसिंग हुआ। हॉकिश रुख के कारण वास्तविक यील्ड लगभग 40–50 बेसिस प्वाइंट बढ़ी और डॉलर इंडेक्स (DXY) सिर्फ 7 दिनों में 2.5% से अधिक मजबूत हो गया, जिससे जनवरी का जोखिम लेने वाला माहौल पलट गया।

वास्तविक यील्ड के प्रति ऐतिहासिक रूप से 2.5–3 गुना संवेदनशील रहने वाली चांदी में तेज गिरावट देखने को मिली। कीमतें प्रमुख तकनीकी स्तरों से नीचे टूटते ही एक्सचेंजों ने मार्जिन आवश्यकताओं को 20 से 25% बढ़ा दिया, जिससे मजबूरन पोजीशन काटने (फोर्स्ड लिक्विडेशन) शुरू हो गए। लंबी अवधि की मूविंग एवरेज टूटने पर एल्गोरिदम बिकवाली तेज हो गई और ETF रिडेम्पशन से ‘पेपर सप्लाई’ बढ़ गई। एक हफ्ते के भीतर फ्यूचर्स ओपन इंटरेस्ट 35 से 40% घट गया, जो क्लासिक डी लीवरेजिंग कैस्केड की पुष्टि करता है।

चांदी की कीमतों में अब क्या रहने वाला है स्तर
केडिया एडवाइजरी की रिपोर्ट के अनुसार तकनीकी दृष्टि से चांदी तब तक कमजोर बनी रह सकती है, जब तक यह प्रमुख रेजिस्टेंस के नीचे कारोबार कर रही है। यदि कीमतें लगातार 70 डॉलर प्रति औंस से नीचे टिकती हैं, तो 54.50 डॉलर प्रति औंस तक और दबाव बन सकता है। यह स्तर लंबी अवधि के रिट्रेसमेंट और पुराने कंसोलिडेशन का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है।

Stock Market: सेंसक्स 266 अंक उछलकर 83580 पर बंद, निफ्टी 25690 के पार 

नई दिल्ली। Stock Market Closed: सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को शेयर बाजारों में तेजी देखने को मिली है। सेंसेक्स और निफ्टी बढ़त के साथ बंद हुए। 30 संवेदी सूचकांक शुक्रवार को 0.32 प्रतिशत या फिर 266.47 अंक की उछाल के साथ 83,580.40 अंक पर और निफ्टी 50.90 अंक या फिर 0.20 प्रतिशत की तेजी के साथ 25693.70 अंक पर बंद हुआ है।

तीस शेयरों वाला बीएसई (BSE Sensex) मामूली गिरावट लेकर 83,249.32 पर खुला और यह खुलते ही इसमें गिरावट देखने कोई मिली। हालांकि, बाद में इंडेक्स में कुछ रिकवरी देखी गई और अंत में 266.47 अंक या 0.32% की बढ़त लेकर 83,580.40 पर बंद हुआ।

इसी तरह, नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी-50 (Nifty-50) 25,605 पर खुला और खुलते ही 25600 के नीचे फिसल गया। हालांकि, कारोबार में अंत में इंडेक्स में रिकवरी देखी गई और यह 50.90 अंक या 0.20 फीसदी की बढ़त के साथ 25,693.70 पर बंद हुआ।

टॉप गेनर्स एंड लूजर्स
आईटीसी, कोटक बैंक, एचयूएल, भारती एयरटेल, बजाज फाइनेंस और बजाज फिनसर्व सबसे ज्यादा बढ़ने वाले शेयर रहे। वहीं टीसीएस, टेक महिंद्रा, अडानी पोर्ट्स, इटरनल और एशियन पेंट्स सबसे ज्यादा गिरने वाले शेयर रहे। ब्रोडर मार्केट की बात करें तो निफ्टी मिडकैप 100 और स्मॉलकैप 100 इंडेक्स क्रमशः 0.02% और 0.27% नीचे बंद हुए।

एनएसई पर सेक्टोरल इंडेक्स में मिला-जुला कारोबार देखने को मिला। निफ्टी आईटी इंडेक्स सबसे कमजोर रहा और 1.47% गिरकर बंद हुआ। फार्मा, ऑटो, मेटल, रियल्टी और मीडिया इंडेक्स भी गिरावट के साथ बंद हुए। वहीं निफ्टी एफएमसीजी सबसे ज्यादा बढ़ने वाला सेक्टर रहा, जो 2.2% चढ़ा।

रेपो रेट 5.25% पर बरकरार
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने शुक्रवार (6 फरवरी) को रेपो रेट पर अपने फैसले का एलान कर दिया। समिति ने मौजूदा परिस्थितियों पर गौर करते हुए प्रमुख नीतिगत दर रीपो रेट (Repo Rate) को 5.25% पर बरकरार रखने का फैसला किया। यह समिति की चालू वित्त वर्ष की अंतिम द्विमासिक द्विमासिक मॉनेटरी पॉलिसी है।

आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति ने 4 से 6 फरवरी के बीच हुई अपनी पॉलिसी मीटिंग में ‘न्यूट्रल’ रुख बरकरार रखा। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने पॉलिसी बैठक के बाद इस निर्णय की घोषणा की। बता दें कि फरवरी 2025 से अब तक ब्याज दरों में 100 बेसिस पॉइंट की कटौती की जा चुकी है।

सांसदों के हंगामे पर स्पीकर बिरला बुरी तरह नाराज, बोले ऐसा सदन मैं नहीं चला सकता

नई दिल्ली। लोकसभा की कार्यवाही के दौरान सांसदों के हंगामे पर स्पीकर ओम बिरला बुरी तरह नाराज हो गए। उन्होंने यह तक कह दिया कि अगर ऐसे ही गतिरोध पैदा करना है, तो मैं ऐसा सदन नहीं चला सकता। उन्होंने बताया है कि इस बार संसद सत्र के 19 घंटे से ज्यादा समय बगैर चर्चा के निकल गए। हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब उन्होंने नारेबाजी को लेकर खुलकर नाराजगी जाहिर की है।

बिरला ने शुक्रवार को कहा कि 19 घंटे सदन के बर्बाद हुए हैं। उन्होंने कहा, ‘…माननीय सदस्यगण मेरा हमेशा प्रयास रहता है कि सदन चले। और प्रश्नकाल सभी माननीय सदस्यों का समय होता है…। आप नियोजित तरीके से सदन नहीं चलाना चाहते, गतिरोध पैदा करना चाहते हैं। अभी तक 19 घंटे 13 मिनट सदन का समय बर्बाद हुआ है। 140 करोड़ जनता की अपेक्षा रहती है कि सदन चले, चर्चा हो, संवाद हो।’

उन्होंने कहा, ‘लेकिन आप सभागृह की मर्यादा को समाप्त कर रहे हैं। देश की जनता सदन को चलती हुई देखना चाहती है। आपसे भी यही अपेक्षा करती है। पोस्टर और नारेबाजी के लिए आपको नहीं भेजा है। आपको चर्चा के लिए भेजा है।’

स्पीकर ने कहा, ‘अगर आप सदन नहीं चलाना चाहते, नियोजित तरीके से गतिरोध पैदा करना चाहते हैं, सभागृह की मर्यादा को समाप्त करना चाहते हैं। तो मैं ऐसा सदन नहीं चला सकता। आप जाना चाहते हैं? चर्चा करना चाहते हैं?…।’

कार्यवाही फिर स्थगित हुई
शुक्रवार को भी विपक्षी सदस्यों के शोर-शराबे के कारण प्रश्नकाल नहीं चल सका और कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही देर बाद दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी गई थी। सदन की बैठक शुरू हुई तो लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने प्रश्नकाल शुरू कराया और भारतीय जनता पार्टी के सांसद राजपाल सिंह का नाम पूरक प्रश्न पूछने के लिए पुकारा।

इस दौरान कांग्रेस समेत विपक्षी दलों के सदस्य नारेबाजी करते हुए आसन के समीप आ गए। बिरला ने कहा कि प्रश्नकाल सभी सदस्यों का समय होता है और आज कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी का प्रश्न भी सूचीबद्ध है।

सदन में सोमवार से गतिरोध की स्थिति बनी हुई है। कांग्रेस समेत विपक्ष के सदस्य राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को चीन से टकराव का मुद्दा नहीं उठाने देने, विपक्ष के आठ सदस्यों को आसन की अवमानना के मामले में निलंबित करने समेत कई मुद्दों पर हंगामा कर रहे हैं।

लोन रिकवरी के लिए धमकाने व डिजिटल धोखाधड़ी पर लगाम लगाएगा आरबीआई

नई दिल्ली। Loan Recovery: भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति यानी RBI MPC की बैठक में इस बार आम बैंक ग्राहकों की सुरक्षा को लेकर अहम फैसले लिए गए हैं। लोन रिकवरी के दौरान होने वाली शिकायतों और डिजिटल धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों को देखते हुए RBI ने नई गाइडलाइन लाने का फैसला किया है।

RBI MPC ने लोन रिकवरी की प्रक्रिया को नियमों के दायरे में लाने का फैसला किया है। इसके तहत बैंकों और वित्तीय संस्थानों के लिए रिकवरी एजेंट्स के कामकाज पर सख्त नियम बनाए जाएंगे।

मकसद यह है कि कर्जदारों को डराने, धमकाने या मानसिक दबाव बनाने जैसी शिकायतों पर रोक लगाई जा सके। इसके साथ ही रिकवरी से जुड़े पूरे सिस्टम को ज्यादा पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जाएगा।

MPC बैठक में यह भी तय किया गया है कि लोन और अन्य वित्तीय उत्पादों की गलत बिक्री को रोकने के लिए अलग से गाइडलाइन जारी की जाएंगी। कई बार ग्राहकों को पूरी जानकारी दिए बिना लोन या प्रोडक्ट बेच दिए जाते हैं, जिससे बाद में विवाद खड़े होते हैं। RBI का मानना है कि नई गाइडलाइन से ऐसी शिकायतों में कमी आएगी।

डिजिटल फ्रॉड में ग्राहकों को मुआवजा
डिजिटल लेनदेन से जुड़े फ्रॉड मामलों को लेकर RBI MPC ने बड़ा कदम उठाया है। अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजैक्शन के मामलों में ग्राहकों की जिम्मेदारी सीमित की जाएगी। इसके अलावा छोटे मूल्य की धोखाधड़ी में नुकसान उठाने वाले ग्राहकों को 25 हजार रुपये तक मुआवजा देने के लिए एक फ्रेमवर्क लाया जाएगा। इससे डिजिटल पेमेंट इस्तेमाल करने वाले आम ग्राहकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

RBI ने डिजिटल भुगतान को और सुरक्षित बनाने के लिए एक चर्चा पत्र जारी करने का भी फैसला किया है। इसमें लेनदेन की सुरक्षा से जुड़े नए उपायों पर विचार किया जाएगा। खास तौर पर सीनियर सिटीज़न्स जैसे संवेदनशील वर्ग के लिए अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था पर फोकस किया जाएगा।

ग्राहक हितों पर RBI MPC का फोकस
RBI MPC के इन फैसलों से साफ है कि केंद्रीय बैंक अब सिर्फ महंगाई और ब्याज दरों तक सीमित नहीं है, बल्कि बैंकिंग सिस्टम में ग्राहकों के अधिकार और सुरक्षा को भी प्राथमिकता दे रहा है। आने वाले समय में नई गाइडलाइन लागू होने के बाद लोन रिकवरी और डिजिटल लेनदेन से जुड़ी शिकायतों में कमी आने की उम्मीद की जा रही है।

शुरुआती गिरावट के बाद MCX पर सोना 1600 रुपए महंगा, चांदी भी चमकी

नई दिल्ली Gold Silver Price Update: सोना-चांदी की कीमतों में शुक्रवार को सुबह-सुबह बड़ी गिरावट आ गई। एमसीएक्स पर मार्च डिलीवरी वाली चांदी करीब 15 हजार रुपये की गिरावट के साथ करीब 2.29 रुपये प्रति किलो पर थी। वहीं अप्रैल डिलीवरी वाला सोना 1800 रुपये गिरकर 1.50 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर था।

हालांकि कुछ समय बाद दोनों धातुओं में तेजी आई। सुबह करीब 11:30 बजे सोना करीब 1600 रुपये उछल गया था। वहीं चांदी ने भी रफ्तार पकड़ ली है।

गोल्ड सिल्वर ईटीएफ में 10% तक गिरावट
सोने और चांदी पर आधारित कमोडिटी ईटीएफ (ETF) शुक्रवार को 10% तक गिर गए। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर कीमती धातुओं के वायदा कारोबार में भारी गिरावट आई। यह लगातार दूसरा दिन था जब कीमती धातुओं की कीमतों में गिरावट देखी गई। यह गिरावट टेक्नोलॉजी शेयरों में आई वैश्विक बिकवाली और अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने के कारण हुई।

सोने की कीमत में आने लगी तेजी
शुक्रवार को शुरुआती गिरावट के बाद सोने में तेजी आनी शुरू हो गई है। एमसीएक्स पर सुबह करीब 11:30 बजे अप्रैल डिलीवरी वाले सोने में 1600 रुपये से ज्यादा की तेजी आ गई। इस तेजी के साथ सोने का भाव प्रति 10 ग्राम करीब 1.54 लाख रुपये पर कारोबार कर रहा था। वहीं चांदी की कीमतों में भी कुछ तेजी देखी गई। हालांकि अभी भी यह लाल निशान के साथ 2.41 लाख रुपये प्रति किलो पर कारोबार कर रही थी।

सोना-चांदी के वायदा सौदों पर मार्जिन बढ़ा
सोना चांदी के वायदा सौदों पर मार्जिन में बढ़ोतरी हुई है। यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब 5 फरवरी को ही चांदी के वायदा सौदों पर 4.5% और सोने के वायदा सौदों पर 1% का मार्जिन बढ़ाया गया था। आज, पहले से लागू मार्जिन के ऊपर, चांदी के वायदा सौदों पर अतिरिक्त 2.5% और सोने के वायदा सौदों पर 2% का मार्जिन और बढ़ा दिया गया है।

इसके चलते, 6 फरवरी से चांदी के वायदा सौदों पर कुल अतिरिक्त मार्जिन 7% और सोने के वायदा सौदों पर 3% हो गया है। ज्यादा मार्जिन का मतलब है कि ट्रेडर्स को अपनी पोजीशन बनाए रखने के लिए ज्यादा पैसा लगाना पड़ता है। इससे कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है या दिन के दौरान उतार-चढ़ाव ज्यादा हो सकता है।

वर्ष 2026 के लिए जीडीपी ग्रोथ अनुमान बढ़ाकर 7.4% किया, रेपो रेट बरकरार

नई दिल्ली। RBI Monetary Policy : रिजर्व बैंक गवर्नर संजय मल्होत्रा ने नीतिगत दरों का ऐलान कर दिया है। इस बार रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसे 5.25% पर अपरिवर्तित रखा गया है।

केंद्रीय बैंक की छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक बुधवार 4 फरवरी से गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में शुरू हुई और आज इसमें लिए गए नीतिगत फैसलों का ऐलान हुआ।

रिजर्व बैंक के गवर्नर ने कहा कि पिछली बैठक के बाद से बाहरी चुनौतियां (एक्सटर्नल हेडविंड) बढ़ गई हैं। हालांकि, हाल में सफलतापूर्वक पूरे हुए ट्रेड डील आर्थिक संभावनाओं के लिए अच्छे संकेत हैं। कुल मिलाकर, उन्होंने कहा कि निकट भविष्य में घरेलू मुद्रास्फीति और विकास की दृष्टि सकारात्मक बनी हुई है।

RBI ने अगले फाइनेंशियल ईयर की पहली और दूसरी तिमाही के लिए ग्रोथ के अनुमान को बढ़ाकर क्रमशः 6.9 प्रतिशत और 7 प्रतिशत कर दिया है। वहीं RBI ने 2025-2026 के लिए महंगाई के अनुमान को 2% से बढ़ाकर 2.1% कर दिया है, जबकि पहले Q4 के लिए यह 3.2% रहने का अनुमान था।

रेपो रेट अपरिवर्तित रहने से, स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (एसडीएफ) दर 5 प्रतिशत पर बनी हुई है, जबकि मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (एमएसएफ) दर और बैंक दर 5.5 प्रतिशत पर जारी है।

मौद्रिक नीति समिति का यह फैसला घरेलू आर्थिक हालात और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सावधानीपूर्वक संतुलन बनाता है। देश में विकास और मुद्रास्फीति के रुझान सहायक हैं, लेकिन समिति वैश्विक घटनाक्रम और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं से आने वाले बदलते मौद्रिक नीति संकेतों को देखते हुए सतर्क बनी हुई है।

फरवरी 2026 में, प्रमुख केंद्रीय बैंकों के मौद्रिक नीति निर्णयों में स्पष्ट अंतर देखने को मिला। अमेरिकी फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ इंग्लैंड ने 2025 में की गई कई दर कटौतियों के बाद, अपनी लेटेक्स्ट मीटिंग में ब्याज दरें अपरिवर्तित रखने का फैसला किया।

वहीं, रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया ने दो साल में पहली बार ब्याज दर बढ़ाकर वित्तीय बाजारों को हैरान कर दिया, जिससे उसके नीतिगत रुख में बदलाव के संकेत मिलते हैं।

आरबीआई ने दोहराया है कि उसकी भविष्य की नीतिगत कार्रवाइयां आने वाले आंकड़ों और बदलते मैक्रोइकॉनॉमिक आउटलुक से निर्देशित होती रहेंगी, जिसमें आर्थिक विकास को समर्थन देते हुए कीमत स्थिरता बनाए रखना मुख्य लक्ष्य होगा।

ब्याज दरों में 125 बेसिस पॉइंट की कटौती
बता दें कि फरवरी 2025 से अब तक ब्याज दरों में 125 बेसिस पॉइंट की कटौती की जा चुकी है। दिसंबर की मीटिंग में एमपीसी ने रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की कटौती की थी। इससे रेपो रेट 5.50 प्रतिशत से घटकर 5.25 प्रतिशत हो गया था। यह फैसला दो मीटिंगों तक दरें स्थिर रखने के बाद लिया गया था। इससे पहले फरवरी से जून के बीच आरबीआई ने लगातार तीन बार दरें घटाकर रेपो रेट को 6.5 प्रतिशत से 5.5 फीसदी कर दिया था।

Stock Market: मौद्रिक नीति के बाद सेंसेक्स 83000 और निफ्टी 25500 के नीचे

नई दिल्ली। Stock Market 10:30 AM Updates 6 Feb.: सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को आरबीआई की मौद्रिक नीति के बाद सेंसेक्स 314 अंक लढ़क कर 82999 पर आ गया है। जबकि, एनएसई का 50 स्टॉक्स वाला बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी 144 अंक नीचे 25498 पर आ गया है। आज भी आईटी स्टॉक्स में गिरावट है।

आरबीआई के मौद्रिक नीति से पहले सेंसेक्स 268 अंक नीचे 83045 पर और एनएसई का 50 स्टॉक्स वाला बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी 105 अंक नीचे 25537 पर आ गया था। बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 64 अंक नीचे 83249 पर खुला। इसी तरह, नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी-50 (Nifty-50) 25,605 पर खुला और खुलते ही 25600 के नीचे फिसल गया। सुबह 9:36 बजे यह 84.15 अंक या 0.33 फीसदी की गिरावट लेकर 25,558.65 पर ट्रेड कर रहा था।

ग्लोबल मार्केट के संकेत
एशिया के शेयर बाजारों में शुक्रवार को गिरावट जारी रही। अमेरिका की टेक (तकनीकी) कंपनियों के शेयरों में नुकसान होने से दुनियाभर में निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ। दक्षिण कोरिया का कोस्पी करीब 3 प्रतिशत गिरा, जबकि हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स लगभग 2 प्रतिशत नीचे रहा।

वॉल स्ट्रीट पर भी टेक शेयरों में दबाव रहा। ब्लूमबर्ग के मुताबिक, टेक शेयरों वाला नैस्डैक 100 पिछले साल अप्रैल के बाद तीन दिनों में सबसे बड़ी गिरावट का सामना कर रहा है। इसकी एक वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर चिंता भी है। इस दौरान S&P 500 इंडेक्स 1.23% और नैस्डैक 1.59% नीचे बंद हुआ।