Wednesday, July 15, 2026
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Oil Import: क्या भारत में फिर बढ़ेगा रूसी तेल का आयात, जानिए क्यों

नई दिल्ली। भारत के तेल आयात में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। फरवरी महीने में रूस को पीछे छोड़ते हुए इराक भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बन गया। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि मार्च में रूस फिर से पहले स्थान पर आ सकता है। फरवरी में रूस से तेल आयात में 32 फीसद की गिरावट आई। आयात घटकर करीब 10 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया।

वहीं इराक से आयात बढ़कर 11.8 लाख बैरल प्रति दिन पहुंच गया। सऊदी अरब से भी आयात बढ़कर करीब 9.98 लाख बैरल प्रति दिन हो गया। इस दौरान भारत के कुल तेल आयात में मध्य पूर्व की हिस्सेदारी बढ़कर 59 फीसद हो गई।

फरवरी में ब्राजील भारत का चौथा सबसे बड़ा तेल सप्लायर बनकर उभरा। वैश्विक तनाव और सप्लाई में बदलाव के बीच भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अलग-अलग देशों से तेल खरीदने की रणनीति अपना रहा है। इसमें रूस की भूमिका फिर से मजबूत होती दिख रही है।

पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज जलसंधि में बाधा के कारण सप्लाई प्रभावित हुई है। इसके बाद भारत फिर से रूस से ज्यादा तेल खरीदने लगा है। मार्च में रूस से तेल आयात बढ़कर 18 से 22 लाख बैरल प्रति दिन तक पहुंच सकता है। इसके पीछे अमेरिकी फैसले की भी अहम भूमिका है।

अमेरिका ने 6 मार्च को भारत के लिए रूसी तेल पर कुछ प्रतिबंधों में छूट दी। इससे आयात बढ़ने में मदद मिली। विशेषज्ञों का कहना है कि सस्ती कीमत और स्थिर सप्लाई के कारण रूस भारत की तेल आयात रणनीति में अब भी महत्वपूर्ण बना हुआ है।

सऊदी अरब के अधिकारियों का अनुमान है कि अगर ईरान युद्ध और उससे पैदा हुई ऊर्जा संकट की स्थिति अप्रैल के अंत तक जारी रहती है, तो कच्चे तेल की कीमत 180 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जा सकती है। यह जानकारी द वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट में सामने आई है।

रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध की वजह से तेल की सप्लाई प्रभावित हो रही है। खासतौर पर मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने से वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है। सऊदी अरब के ये अनुमान रियाद में बढ़ती चिंता को उजागर करते हैं।

शुक्रवार को तेल की कीमतें एक फीसद से ज्यादा गिर गईं, क्योंकि अमेरिका ने तेल सप्लाई संकट को संभालने के लिए कदम उठाए। प्रमुख यूरोपीय देशों, जापान और कनाडा ने होर्मुज जलसंधि से जहाज़ों के सुरक्षित गुजरने को सुनिश्चित करने के प्रयासों में शामिल होने की पेशकश की। इसके बाद मई के लिए ब्रेंट क्रूड वायदा 1.58 डॉलर या 1.45 फीसदी गिरकर 107.07 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया।

भारत के दो और LPG टैंकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने को तैयार

नई दिल्ली। देश में एलपीजी संकट के बीच एक राहत भरी खबर सामने आई है। जहाजरानी सूत्रों के मुताबिक भारतीय ध्वज वाले दो एलपीजी गैस टैंकर आने वाले दिनों में स्ट्रेट ऑफ होर्मु से गुजरने की तैयारी कर रहे हैं।

अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक ये दो टैंकर वर्तमान में गल्फ की खाड़ी में फंसे हुए हैं, जल्द ही रास्ता क्लियर होने की उम्मीद है। मार्केट सोर्सेज के मुताबिक, पिछले 24 घंटे में किसी क्रूड ऑयल टैंकर ने यात्रा नहीं की। एक खाली क्रूड टैंकर, जिस पर अमेरिकी प्रतिबंध लगे थे, 18 मार्च को होर्मुज की खाड़ी से वापस ईरानी जल में लौट गया।

इंडियन नेवी सुरक्षित मार्ग उपलब्ध करा रहा
जानकारी के लिए बता दें कि ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमले के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव बढ़ गया है। ईरान ने अब साफ-साफ कहा है कि वह अपने दुश्मन देशों को किसी भी हालत में इस क्षेत्र से गुजरने नहीं देगा। अब ऐसी स्थिति में भारत ने अपने ऊर्जा हितों की सुरक्षा के लिए बड़ा कदम उठाते हुए ईरान से लगातार संपर्क में बना हुआ है। काफी मशक्कत से भारतीय नौसेना भारतीय झंडे वाले जहाजों को सुरक्षित मार्ग उपलब्ध करा रही है। वहीं, एलपीजी और कच्चे तेल से लोडेड भारतीय जहाजों की सुरक्षा के लिए अब इंडियन नेवी ने अपना अतिरिक्‍त वॉरशिप तैनात किया है।

जानकारी के अनुसार भारतीय झंडे वाले 22 जलीय जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पश्चिमी हिस्से में फंसे हुए हैं। इसे निकालने के लिए भारत की सरकार के साथ-साथ इंडियन नेवी भी ईरानी सरकार के संपर्क में बनी हुई है। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही बाकी फंसे जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से पार करा लिया जाएगा। वहीं, इससे पहले एक भारतीय युद्धपोत ने यूएई के फुजैरा पोर्ट से रवाना हुए एक कच्चे तेल टैंकर को सुरक्षित तरीके से भारत के पश्चिमी तट तक सुरक्षा प्रदान की।

वहीं, कुछ दिन पहले ही ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ नाम के दो LPG कैरियर करीब 92,712 मीट्रिक टन गैस लेकर भारत पहुंचे। इन जहाजों ने पिछले सप्ताह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पार किया था, जिसके बाद भारत के लोगों को बड़ी राहत थी।

अंतरराष्ट्रीय वानिकी दिवस पर शिक्षा सहकारी का वानिकी सप्ताह आज से

कोटा। पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के प्रति जन-जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से इस वर्ष शिक्षा विभाग कर्मचारी गण सहकारी सभा 696 आर (कोटा-बारां) एवं राजस्थान राज्य भारत स्काउट व गाइड स्थानीय संघ (कोटा दक्षिण) द्वारा विभिन्न संस्थाओं के समन्वय से ‘विश्व वानिकी दिवस’ को एक व्यापक ‘विश्व वानिकी सप्ताह’ के रूप में मनाया जाएगा। यह विशेष अभियान 21 मार्च से प्रारंभ होकर 31 मार्च तक निरंतर चलेगा।

​स्थानीय संघ कोटा दक्षिण के सचिव प्रकाश जायसवाल ने बताया कि सप्ताह के प्रथम दिन 21 मार्च को स्काउट गाइड कोटा जिला यूथ कमेटी के संयुक्त तत्वावधान में एक विशेष संगोष्ठी एवं क्विज प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा।

इसके तुरंत पश्चात आंवली वन क्षेत्र में वृहद स्तर पर पौधारोपण किया जाएगा। जिसका नेतृत्व कार्यक्रम संयोजक और यूथ कमेटी के अध्यक्ष मनराज गुर्जर करेंगे। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य युवाओं को सीधे तौर पर वनीकरण की प्रक्रिया से जोड़ना है।

शिक्षा सहकारी के उपाध्यक्ष महेंद्र नागर एवं मंत्री जमनालाल गुर्जर ने बताया कि 11 दिवसीय आयोजन के दौरान जन-जागरण हेतु रैलियों, मानव श्रृंखला, साइकिल रैली और वन हाइक जैसे साहसिक कार्यक्रमों का संचालन होगा।

विद्यार्थियों और आमजन की रचनात्मकता को प्रोत्साहित करने के लिए रंगोली, चित्रकला, स्लोगन लेखन, भाषण और नारा लेखन जैसी प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाएंगी। साथ ही, भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नई नर्सरी विकसित करने की दिशा में भी ठोस प्रयास किए जाएंगे।

सप्ताह के समापन चरणों में पर्यावरण, वन एवं वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट सेवाएँ देने वाले व्यक्तियों, स्वयंसेवी संस्थाओं, कर्मठ कार्मिकों और अधिकारियों को उनके उल्लेखनीय कार्यों के लिए विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, वन एवं वन्यजीव संरक्षण पखवाड़े के अंतर्गत आयोजित की गई विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को भी पुरस्कृत कर उनका उत्साहवर्धन किया जाएगा।

ईरान ने अमेरिकी F-35 लड़ाकू विमान पर हमला कर इतिहास रच दिया

तेहरान। ईरान ने अमेरिकी F-35 लड़ाकू विमान पर हमला कर इतिहास रच दिया है। अभी तक F-35 लड़ाकू विमान को अजेय माना जाता रहा है। अमेरिका का दावा है कि दुनिया का कोई भी एयर डिफेंस सिस्टम F-35 को डिटेक्ट नहीं कर सकता है।

ऐसे में मार गिराने या हमला करने की बात दूर की है। लेकिन, ईरान ने अमेरिकी F-35 पर हमला कर अमेरिका के इस घमंड को तोड़ दिया है। अमेरिका ने भी माना है कि सैन्य अभियान के दौरान उसके एक F-35 विमान को गंभीर नुकसान पहुंचा है।

हालांकि, उसने यह भी कहा है कि यह विमान अपने बेस पर सुरक्षित रूप से लैंड करने में कामयाब रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि ईरान ने कौन सी मिसाइल से अमेरिकी F-35 जेट पर हमला किया है।

मिलिट्री वॉच मैगजीन की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने अमेरिकी F-35 लड़ाकू विमान पर हमले के लिए माजिद शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल किया था। इसे AD-08 के नाम से भी जाना जाता है।

हालांकि, ईरान की ओर से माजिद एयर डिफेंस सिस्टम के इस्तेमाल को लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इसके बावजूद सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि F-35 पर ईरान के हमले से इजरायल और अमेरिका के मौजूदा हवाई सैन्य अभियान पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा।

यह भी आशंका जताई गई है कि इस घटना के बाद ईरान के अंदरूनी हिस्सों में घुसकर हमले करने के लिए स्टेल्थ विमानों का उपयोग करने के अमेरिकी और इजरायली प्रयासों में कमी आएगी।

माजिद एयर डिफेंस सिस्टम कितना शक्तिशाली?
AD-08 माजिद ईरान का एक शॉर्ट-रेंज एयर डिफेंस सिस्टम है। यह इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल और थर्मल सेंसर के जरिए ड्रोन, क्रूज मिसाइल और कम ऊंचाई वाले विमानों को मार गिरा सकता है। यह 8 किमी की दूरी और 6 किमी की ऊंचाई तक सटीक निशाना लगा सकता है। माजिद एयर डिफेंस सिस्टम रडार को चकमा देने वाले स्टील्थ लड़ाकू विमानों के खिलाफ भी कारगर है।

यह रडार के बजाय इन्फ्रारेड गाइडेंस का उपयोग करता है, जिससे दुश्मन के रडार सिस्टम इसे जल्दी नहीं पहचान पाते। यह सिस्टम 360-डिग्री कवरेज के साथ कई तरह के खतरों के प्रति प्रभावी है।

क्या ईरान युद्ध होगा खत्म, ट्रंप ने मिलिट्री ऑपरेशन समेटने के दिए संकेत

वॉशिंगटन। US-Iran War: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि वह ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान समेटने पर विचार कर रहे हैं। ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में ट्रंप ने कहा कि ईरान के खिलाफ युद्ध में अमेरिका अपने लक्ष्य हासिल करने के बहुत करीब है।

इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा दूसरे देशों को करनी होगी। ट्रंप की ये टिप्पणियां 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद इस संघर्ष के अंत का सबसे मजबूत संकेत हैं। हालांकि, वैश्विक तेल व्यापार का एक अहम रास्ता होर्मुज स्ट्रेट में अभी भी बंद है। वहीं, हजारों और अमेरिकी मरीन मध्य पूर्व की ओर बढ़ रहे हैं।

ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म पर लिखा, हम अपने लक्ष्यों को पाने के बहुत करीब पहुंच रहे हैं और हम ईरान के आतंकवादी शासन के संबंध में मध्य पूर्व में अपने महान सैन्य प्रयासों को समेटने पर विचार कर रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने पोस्ट में कई बातों का जिक्र किया, जिन्हें ईरान के खिलाफ बड़ी सैन्य उपलब्धियां बताया।

  1. ईरान की मिसाइल क्षमता को पूरी तरह नष्ट करना
  2. ईरान के रक्षा औद्योगिक आधार को नष्ट करना
  3. ईरान की नौसेना और वायु सेना को खत्म करना
  4. यह सुनिश्चित करना कि ईरान कभी परमाणु हथियार बनाने के करीब न पहुंच पाए
  5. मध्य पूर्व में अपने सहयोगियों- इजरायल, सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, कुवैत और अन्य को उच्चतम स्तर पर सुरक्षा प्रदान करना।

ट्रंप का युद्ध को समेटने का दावा उनके प्रशासन के कदमों में मेल नहीं खाता है। इसी सप्ताह ट्रंप प्रशासन ने इलाके में युद्ध के लिए कांग्रेस से 200 अरब डॉलर मांगने का फैसला किया था।

इस बीच एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से एसोसिएटेड प्रेस ने बताया कि अमेरिका मध्य-पूर्व में तीन और एम्फीबियस असॉल्ट शिप और लगभग 2500 अतिरिक्त मरीन सैनिक भेज रहा है। दो अन्य अमेरिकी अधिकारियों ने भी जहाज भेजे जाने की पुष्टि की लेकिन यह नहीं बताया कि कहां जा रहे हैं।

होर्मुज स्ट्रेट पर ट्रंप का बयान
ट्रंप के संदेश का अहम हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर था, जिसमें उन्होंने इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी उन देशों से संभालने की अपील की जो इस अहम तेल मार्ग पर निर्भर हैं। उन्होंने कहा, होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा और निगरानी, जरूरत पड़ने पर, उन देशों को ही करनी होगी जो इसका इस्तेमाल करते हैं। अमेरिका ऐसा नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि हालांकि अमेरिका मदद कर सकता है, लेकिन इसकी जरूरत नहीं पड़नी चाहिए।

हालांकि, अमेरिका ने अभी तक औपचारिक रूप से वापसी का ऐलान नहीं किया है, लेकिन ट्रंप की ताजा पोस्ट इस ओर इशारा करती है। अमेरिका ऐसी रणनीति अपना सकता है जिसमें रणनीतिक दबदबा बनाए रखा जाए और फ्रंटलाइन पर मौजूदगी कम की जाएगी।

सोगरिया-मथुरा-सोगरिया साप्ताहिक सुपरफास्ट विशेष ट्रेन 22 मार्च से

कोटा। कोटा मंडल के यात्रियों की सुविधा एवं अतिरिक्त भीड़ को नियंत्रित करने के उद्देश्य से रेलवे प्रशासन द्वारा सोगरिया–मथुरा–सोगरिया के मध्य द्वि-साप्ताहिक सुपरफास्ट विशेष ट्रेन का संचालन किया जा रहा है।

यह गाड़ी कोटा मंडल के इंदरगढ़, सवाई माधोपुर, गंगापुर सिटी, श्री महावीरजी, हिंडौन सिटी, बयाना एवं भरतपुर स्टेशनों से होकर गुजरेगी।

वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ जैन ने बताया कि ट्रेन संख्या 02921/02922 सोगरिया–मथुरा–सोगरिया सुपरफास्ट विशेष ट्रेन का संचालन 22 मार्च से 12 अप्रैल तक (कुल 07 ट्रिप) अतिरिक्त भीड़ के मद्देनज़र किया जाएगा।

ट्रेन संख्या 02921 सोगरिया–मथुरा सुपरफास्ट विशेष ट्रेन प्रत्येक गुरुवार एवं रविवार को सोगरिया से प्रस्थान कर 08:30 बजे रवाना होगी तथा मार्ग में 09:28 बजे इंदरगढ़, 10:00 बजे सवाई माधोपुर, 10:45 बजे गंगापुर सिटी, 11:13 बजे श्री महावीरजी, 11:28 बजे हिंडौन सिटी, 11:48 बजे बयाना जंक्शन एवं 12:18 बजे भरतपुर जंक्शन होकर 14:05 बजे मथुरा पहुंचेगी।

ट्रेन संख्या 02922 मथुरा–सोगरिया सुपरफास्ट विशेष ट्रेन प्रत्येक गुरुवार एवं रविवार को मथुरा से 17:10 बजे प्रस्थान कर मार्ग में 17:38 बजे भरतपुर जंक्शन, 18:08 बजे बयाना जंक्शन, 18:33 बजे हिंडौन सिटी, 18:45 बजे श्री महावीरजी, 19:13 बजे गंगापुर सिटी, 19:58 बजे सवाई माधोपुर एवं 20:28 बजे इंदरगढ़ होकर 22:50 बजे सोगरिया पहुंचेगी।

भामाशाह मंडी विस्तार के लिए लैंड डायवर्जन और डीपीआर प्रक्रिया जल्द शुरू होगी

बिरला की संबंधित अफसरों के साथ बैठक, एग्रो पार्क के लिए भूमि चिन्हित करने के निर्देश

कोटा। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शुक्रवार को कोटा स्थित कैंप कार्यालय में प्रशासन, वन विभाग, केडीए, नगर निगम और मंडी अधिकारियों के साथ बैठक कर शहर और क्षेत्र के विकास कार्यों की समीक्षा की।

बैठक में भामाशाह मंडी विस्तार, एग्रो पार्क की स्थापना, बरसाती पानी की निकासी, पार्कों का विकास और सिंचाई जैसे विषयों पर चर्चा हुई। उन्होंने सभी विभागों को बेहतर समन्वय के साथ योजनाओं को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए।

बिरला ने कहा कि भामाशाह कृषि उपज मंडी के विस्तार के लिए विस्तृत रोडमैप तैयार किया जाए और डीपीआर बनाने की प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जाए, ताकि टेंडर प्रक्रिया भी समय पर आगे बढ़ सके।

सभी आवश्यक सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए वित्तीय स्वीकृतियों के लिए राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजने और लैंड डायवर्जन की प्रक्रिया तेज करने को कहा। साथ ही अतिक्रमण हटाने और मंडी को रेलवे लाइन से जोड़ने के लिए रेलवे अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए।

उन्होंने भामाशाह मंडी के निकट एग्रो इंडस्ट्री पार्क स्थापित करने के लिए भूमि चिन्हित करने को कहा। साथ ही फल-सब्जी मंडी के विस्तार और आवश्यकता अनुसार अन्य स्थान पर स्थानांतरण की संभावनाओं पर भी प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए।

लोकसभा अध्यक्ष ने परवन परियोजना से सिंचाई के लिए आवश्यक कार्ययोजना तैयार करने को कहा, ताकि परियोजना पूर्ण होने पर किसानों को तुरंत लाभ मिल सके और अधिक से अधिक क्षेत्र सिंचाई के दायरे में आए।

बैठक में देवली अरब रोड स्थित स्मृति वन के विकास, वहां वॉकिंग ट्रैक और योग शेड जैसी सुविधाएं विकसित करने पर चर्चा हुई। इसके अलावा विभिन्न क्षेत्रों में नए पार्क विकसित करने और झालावाड़ रोड पर साइकिल ट्रैक बनाने के संबंध में भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

कोटा मंडी में नए चने की आवक शुरू, पहले दिन ही 200 रुपये ऊंचा बिका

कोटा। Kota Mandi Price Today: भामाशाह अनाज मंडी में शुक्रवार को नए चने की आवक शुरू हुई, जो 200 रुपये ऊंचा बिका। मिलर्स की लिवाली से गेहूं 30 रुपये, सोयाबीन 50 रुपये और सरसों 150 रुपये उछल गई। मंडी में सभी कृषि जिंसों की मिलाकर करीब सवा लाख कट्टे और लहसुन की 5000 कट्टे की आवक रही। जिंसों के भाव रुपये प्रति क्विंटल इस प्रकार रहे-

गेहूं पुराने 2130 से 2401, गेहूं नया 2250 से 2550, ज्वार शंकर 1700 से 2300, ज्वार सफेद 2800 से 5000, बाजरा 1800 से 2050, मक्का लाल 1400 से 1650, मक्का सफेद 1600 से 2200, जौ नया 1900 से 2150 रुपये प्रति क्विंटल।

धान सुगन्धा 2800 से 3351, धान (1509) 3200 से 3900, धान (1847) 3200 से 3801, धान (1718-1885) 3900 से 4300, धान (पूसा-1) 3600 से 4050, धान (1401-1846) 3800 से 4250, धान दागी 1500 से 3400 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन 5000 से 5575, सरसों 5800 से 7050, अलसी 6000 से 6700, तिल्ली 7000 से 8500 रुपये प्रति क्विंटल। मूंग 6000 से 6500,उड़द 4500 से 8150, चना देशी पुराना 4700 से 5101, चना मौसमी 4700 से 5100, चना पेप्सी 4800 से 5151, चना डंकी 3500 से 4500,चना काबुली 5500 से 7500, नया चना 5000 से 5300 रुपये प्रति क्विंटल।

नया लहसुन 1500 से 10500, मैथी 4000 से 5200, मैथी नयी 5300 से 5600, धनिया बादामी पुराना 7500 से 9800, धनिया ईगल 10200 से 11000, धनिया नया गीला 7500 से 1000, धनिया रंगदार 10000 से 16000 रुपये प्रति क्विंटल।

Forex Reserve: भारत का विदेशी मुद्रा भंडार गिरकर 709 अरब डॉलर पर पहुंचा

नई दिल्ली। Forex Reserve: भारतीय रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को बताया कि 13 मार्च को समाप्त हुए सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार घट गया है। यह 7.052 अरब डॉलर की गिरावट के साथ 709.759 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। यह लगातार दूसरा सप्ताह है जब विदेशी मुद्रा भंडार में कमी दर्ज की गई है।

पिछले रिपोर्टिंग सप्ताह में कुल भंडार 11.683 अरब डॉलर घटकर 716.81 अरब डॉलर हो गया था। हालांकि, 27 फरवरी को समाप्त हुए सप्ताह में यह 4.885 अरब डॉलर बढ़कर 728.494 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया था। केंद्रीय बैंक द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 13 मार्च को समाप्त सप्ताह के लिए विदेशी मुद्रा संपत्ति में कमी आई है। यह भंडार का एक प्रमुख घटक है। विदेशी मुद्रा संपत्ति 7.678 अरब डॉलर घटकर 555.568 अरब डॉलर रह गई।

डॉलर के संदर्भ में व्यक्त की गई विदेशी मुद्रा संपत्ति में गैर-अमेरिकी इकाइयों के मूल्य में उतार-चढ़ाव शामिल होता है। इसमें यूरो, पाउंड और येन जैसी मुद्राएं शामिल हैं।

आरबीआई ने बताया कि इस सप्ताह के दौरान स्वर्ण भंडार का मूल्य बढ़ गया है। यह 664 करोड़ डॉलर बढ़कर 130.681 अरब डॉलर हो गया है। यह वृद्धि भंडार को कुछ हद तक सहारा देती है। विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) में 23 करोड़ डॉलर की कमी आई है। यह घटकर 18.697 अरब डॉलर पर आ गया है।

बेमौसम बारिश से फसल खराब, सरसों की कीमतों में जोरदार तेजी

नई दिल्ली। सरसों कीमतों में बीते सप्ताह जोरदार तेजी देखी गई। प्रमुख मंडियों में सरसों के भाव 200 से 575 रुपये क्विंटल तक उछल गया।

कारोबारी सूत्रों के अनुसार जयपुर 42% कंडीशन 7,250 रुपये और आगरा सलोनी में 7,900 रुपये के उच्च स्तर पर पहुंची। इसके अलावा सरसों तेल में भी सुधार रहा। कच्ची घानी व एक्सपेलर में 55 से 100 रुपये प्रति 10 किलो तक तेजी दर्ज की गई है।

जहां तक उत्पादन की बात है तो 117.5 लाख टन रहने की संभावना है, जबकि पहले इससे अधिक उत्पादन की उम्मीद थी। बारिश और तेज हवाओं से फसल को नुकसान होने की खबर है। खेतों में खुले पड़ी सरसों भी खराब हुई। दानों में नमी अधिक, जिससे ऑयल कंटेंट प्रभावित हुआ।

कटाई में 10-15 दिन की देरी होने से मंडियों में आवक घटी है। खराब क्वालिटी के कारण मिलर्स द्वारा पुरानी फसल की खरीद बढ़ी। सरसों के भाव MSP 6,200 रुपये से ऊपर चल रहे हैं। ऐसे में सरकारी खरीद की संभावना कम है।

इस बार सरकारी स्टॉक का दबाव कम रहने की उम्मीद है। यदि बारिश जारी रही तो कीमतों में और तेजी संभव है। मौसम सुधरने पर आवक बढ़ेगी, बाजार स्थिर हो सकते हैं।

मौजूदा ऊंचे स्तर पर प्रॉफिट बुकिंग की सलाह दी जाती है। आवक पीक पर होने पर माल खरीदना बेहतर रहेगा। यह सिर्फ पूर्वानुमान है, कोई दावा नहीं है।

नोट -आप अपने सौदे सूझ -बुझ और विवेक से करें, किसी भी नुकसान के लिए लेनदेन न्यूज़ जिम्मेदार नहीं है