Wednesday, July 15, 2026
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इलेक्ट्रॉनिक कांटे की जगह धर्मकांटे पर हो कृषि जिंस की तुलाई: भारतीय किसान संघ

लोकसभा अध्यक्ष बिरला ने ली मंडी समिति की बैठक में हुए हंगामे की जानकारी

कोटा। भारतीय किसान संघ के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमण्डल ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से भेंट कर उन्हें क्षेत्र के किसानों की समस्याओं से अवगत कराते हुए एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा।

इस दौरान बिरला ने मंडी समिति की बैठक में हुए हंगामे और विवादित घटनाक्रम पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए संघ के पदाधिकारियों से इसकी पूरी जानकारी ली। उन्होंने पूछा कि बैठक में किन बिंदुओं पर सहमति नहीं बन पाई और हंगामा किन कारणों से हुआ।

प्रतिनिधिमण्डल में प्रान्त प्रचार प्रमुख आशीष मेहता, सम्भाग अध्यक्ष गिरिराज चौधरी, जिला अध्यक्ष जगदीश कलमंडा और जिला मंत्री रूपनारायण यादव शामिल थे। उन्होंने स्पीकर बिरला को बताया कि मंडी प्रशासन और किसानों के बीच तुलाई और हम्माली की राशि को लेकर गतिरोध बना हुआ है।

संघ ने स्पष्ट किया कि भामाशाह मंडी में किसानों के साथ हो रही ज्यादती और नियमों के विरुद्ध वसूली के कारण ही रोष व्याप्त है। बिरला ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि किसानों के हितों के साथ खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा।

प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन में कहा कि मंडी में प्रति कट्टा 200 से 300 ग्राम अतिरिक्त वजन लेने की प्रथा को तुरंत बंद किया जाए और महिला श्रमिकों के नाम पर की जा रही 2 रुपए प्रति कट्टा की अवैध वसूली पर रोक लगे। इसके साथ ही, खरीफ 2025 की फसल बीमा राशि और अतिवृष्टि के मुआवजे का भुगतान न होने का मुद्दा भी पुरजोर तरीके से उठाया गया। संघ ने मांग की है कि किसानों के समय और धन की बचत के लिए मंडी में नीलामी की प्रक्रिया किसानों के वाहनों पर ही की जाए और धर्म कांटे पर तुलाई सुनिश्चित की जाए। ताकि बम्पर आवक के समय मंडी में जाम की स्थिति न बने।

लोकसभा अध्यक्ष बिरला ने प्रतिनिधि मण्डल को आश्वस्त किया कि वे मंडी समिति के हंगामे और ज्ञापन में वर्णित अन्य समस्याओं को लेकर स्वयं प्रशासनिक अधिकारियों से फीडबैक लेंगे। उन्होंने विश्वास दिलाया कि मंडी में पारदर्शिता लाने और किसानों को उनके हक का पूरा दाम व सम्मान दिलाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।

बिरला ने कहा कि जल्द ही मंडी प्रशासन के साथ व्यवस्थाओं की समीक्षा की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसे विवाद की स्थिति उत्पन्न न हो। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सभी विषयों को गंभीरता से सुना और आश्वस्त किया कि वे इस संबंध में प्रशासनिक अधिकारियों और संबंधित विभागों से वार्ता कर समाधान सुनिश्चित करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसानों के हितों के साथ किसी भी स्तर पर समझौता नहीं होने दिया जाएगा।

ऑनलाइन गिरदावरी में खेत में दिखा रही शून्य फसल
प्रांत प्रचार प्रमुख आशीष मेहता ने बताया कि लोकसभा स्पीकर बिरला को बताया कि ऑनलाइन की गई गिरदावरी में खेत में शून्य फसल दर्ज हो रही है। जबकि खेतों में फसल खड़ी है। यह तकनीकी कारणों से हो रहा है।भारतीय किसान संघ ने यह भी मांग की कि ऑनलाइन गिरदावरी में तकनीकी त्रुटियों के कारण जो फसलें ‘शून्य’ दिखाई दे रही हैं, उन्हें पोर्टल खोलकर दुरुस्त किया जाए।

इसके साथ ही, किसान संघ ने न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीद में गुणवत्ता शर्तों में छूट देने और सरसों व चने की खरीद सीमा को 25 क्विंटल से बढ़ाकर 40 क्विंटल प्रति किसान करने का आग्रह किया है। जिसे हर बार किसान की उपज बिकने के बाद बढ़ाया जाता है। साथ ही, चंद्रेशल में पूर्व निर्धारित भूमि पर थोक फल-सब्जी मंडी का निर्माण कार्य शीघ्र शुरू करने की भी मांग रखी गई।

ईरानी बंदरगाह पर अमेरिकी हमले से भारत-रूस के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को झटका

7 दिन में मुंबई से मॉस्को पहुंचने वाला 100 अरब डॉलर का प्लान खतरे में

नई दिल्ली। अमेरिका और इजरायल ने ईरान के बंदर अंजाली पर मिसाइल हमला किया है। यह मुंबई से रूस के सेंट पीटर्सबर्ग को जोड़ने वाले 7,200 किमी लंबी इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) का अहम ट्रांजिट हब है।

भारत और रूस ने इस कॉरिडोर के जरिए 2030 तक अपने द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। लेकिन जानकारों का कहना है कि ईरानी बंदरगाह पर मिसाइल हमले से भारत और रूस के इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को झटका लग सकता है।

इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर स्वेज नहर को बाइपास करता है और माना जा रहा है कि इससे एशिया और यूरोप के बीच ट्रेड में तेजी आएगी। इजरायल और अमेरिका ने कैस्पियन सागर के तट पर स्थित बंदर अंजाली पर 18 मार्च को मिसाइल हमला किया। इससे वहां कस्टम हाउस और दूसरे स्ट्रक्चर्स को नुकसान पहुंचा है।

मुंबई से मॉस्को 7 दिन में
मॉस्को यूनिवर्सिटी में इंस्टीट्यूट ऑफ एशिया, अफ्रीका स्टडीज के प्रोफेसर रेनात कारामुरजोव ने कहा कि स्वेज नहर को बाइपास करने वाले इस रूट से सुरक्षित माना गया था लेकिन इजरायली और अमेरिकी हमलों के कारण अब इंश्योरेंस और फ्रेट के रेट में तेजी आएगी। इससे रूस और सीआईएस के दूसरे देशों पर नकारात्मक असर होगा।

रूस के पॉलिटिकल एनालिस्ट सर्गेई स्ट्रोकन ने एक टीवी डिबेट में कहा, ‘यह कॉरिडोर भारत के साथ हमारे द्विपक्षीय संबंधों के लिए बहुत अहम है क्योंकि इसमें मॉस्को से मुंबई के बीच ट्रांजिट टाइम 25-30 दिन से घटकर महज 7 दिन रह जाता है।’ रूस के डिप्टी पीएम विताली सेवलियेव ने कहा कि 2025 के अंत तक इस रूट से 7.5 मिलियन टन से अधिक कार्गो की आवाजाही हुई थी।

क्या है यह प्रोजेक्ट
INSTC के तहत रूस एक ऐसी रेल लाइन बना रहा है जो रूस को सीधे ईरान के बंदरगाहों से जोड़गी। इससे मुंबई तक उसकी पहुंच आसान जाएगी। रूस ने इस प्रोजेक्ट के लिए ईरान को 1.4 अरब डॉलर का लोन देने पर सहमति जताई थी। इस रूट के जरिए सामान को सेंट पीटर्सबर्ग से मुंबई पहुंचने में महज 10 दिन का समय लगेगा। अभी इसमें 30 से 45 दिन का समय लगता है।

सनकी डोनाल्ड ट्रंप के बयान से क्रिप्टो मार्केट लड़खड़ाया, बिटकॉइन 68000 डॉलर से नीचे

नई दिल्ली। Bitcoin Price: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान से क्रिप्टो मार्केट में हाहाकार मचा हुआ है और ताबड़तोड़ बिकवाली शुरू हो गई। ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान ने 48 घंटे के भीतर होर्मुज की खाड़ी को नहीं खोला तो अमेरिका उसके पावर प्लांट तबाह कर देगा।

इससे पश्चिम एशिया में 23 दिन से चल रहे युद्ध को और भीषण होने की आशंका बढ़ गई है और दुनियाभर में निवेशकों के हाथपांव फूल गए हैं। दुनिया की सबसे बड़ी, सबसे पुरानी और सबसे लोकप्रिय क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन की कीमत 68,000 डॉलर से नीचे आ गई और पूरे क्रिप्टो मार्केट में भूचाल आ गया।

ट्रंप ने महज 24 घंटे में ईरान मामले में यू-टर्न लिया है। इससे पहले उन्होंने कहा था कि वह ईरान में लड़ाई खत्म करने पर विचार कर रहे हैं। लेकिन उनके आज के बयान ने पश्चिम एशिया में तनाव को और बढ़ा दिया है।

इससे पूरी दुनिया में निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई है। इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि ट्रंप के बयान के महज 60 मिनट के भीतर 240 मिलियन डॉलर की लेवर्ड क्रिप्टो पोजीशन लिक्विडेट हो गई। इससे बिटकॉइन $68,000 से नीचे आ गई।

क्यों गिर रही है बिटकॉइन
इस हफ्ते की शुरुआत में यानी 18 मार्च को बिटकॉइन $76,000 के ऊपर चली गई थी जो उसका छह हफ्ते का हाई लेवल था। मगर पिछले तीन दिन से इसमें गिरावट आई है। बिटकॉइन और क्रिप्टो मार्केट तेल की बढ़ती कीमत और पश्चिम एशिया में बढ़ रहे संकट का असर दिख रहा है। माना जा रहा है कि अगर ईरान युद्ध जल्दी समाप्त नहीं हुआ तो कच्चे तेल की कीमत 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है।

Stock Market: अगले सप्ताह शेयर बाजार गिरेगा या चमकेगा, जानिए एक्सपर्ट की राय

नई दिल्ली। Stock Market This Week : आने वाले सप्ताह में शेयर बाजार की दिशा पर कई अहम वैश्विक और घरेलू कारकों का असर देखने को मिल सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और उसके कारण कच्चे तेल की कीमतों में हो रहे उतार-चढ़ाव निवेशकों की धारणा को प्रभावित करते रहेंगे। यही वजह है कि बाजार में सतर्कता का माहौल बना रह सकता है।

यह सप्ताह छुट्टियों के कारण छोटा रहने वाला है, क्योंकि गुरुवार को श्री राम नवमी के अवसर पर शेयर बाजार बंद रहेगा। ऐसे में सीमित कारोबारी दिनों में ही बाजार की चाल तय होगी, जिससे उतार-चढ़ाव की संभावना भी बढ़ सकती है।

अजीत मिश्रा के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर जारी अनिश्चितता के बीच यह सप्ताह आंकड़ों के लिहाज से काफी अहम रहेगा। उनका कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से जुड़े घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव बाजार के लिए प्रमुख बाहरी कारक बने रहेंगे और यही निकट अवधि के ट्रेंड को तय करेंगे।

उन्होंने आगे कहा कि यदि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आती है तो इसका असर महंगाई और कंपनियों की लागत पर पड़ेगा, जिससे शेयर बाजार पर दबाव बन सकता है।

भारतीय शेयर बाजार में इस महीने विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी है। अब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक करीब 88,180 करोड़ रुपये निकाल चुके हैं। बाजार से इस बड़ी निकासी के पीछे पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव, रुपये की कमजोरी और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों को मुख्य वजह माना जा रहा है।

पोनमुडी आर के मुताबिक, आने वाले समय में बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है और यह पूरी तरह घटनाओं पर निर्भर रहेगा। उन्होंने कहा कि खासतौर पर मध्य पूर्व की स्थिति और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास के हालात पर बाजार की दिशा तय होगी।

अगर वहां तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रह सकती हैं। इससे महंगाई और चालू खाते का दबाव बढ़ेगा और निवेशकों का रुख जोखिम से दूर रहने वाला हो सकता है।

उन्होंने आगे कहा कि निवेशकों को विदेशी निवेशकों की गतिविधियों, रुपये की चाल और वैश्विक संकेतों पर नजर रखनी चाहिए। अमेरिकी डॉलर की मजबूती और अंतरराष्ट्रीय बाजार का माहौल भी अहम रहेगा। अगर तनाव कम होता है या कच्चे तेल की कीमतें गिरती हैं, तो बाजार में राहत देखने को मिल सकती है। वहीं, हालात बिगड़ने पर बाजार में और गिरावट आ सकती है।

पिछले हफ्ते भी शेयर बाजार में हल्की कमजोरी देखने को मिली थी। बीएसई सेंसेक्स करीब 31 अंक गिरा, जबकि एनएसई निफ्टी में लगभग 37 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। इससे साफ है कि फिलहाल बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है और निवेशक सावधानी बरत रहे हैं।

WhatsApp पर आ रहा ऑफ्टर रीडिंग टाइमर फीचर, जानिए कैसे करेगा काम

नई दिल्ली। WhatsApp After reading feature: वॉट्सऐप अपने यूजर्स को बेहतरीन एक्सपीरियंस देने के लिए अपने प्लेटफॉर्म को नए-नए फीचर्स के साथ तेजी से अपडेट कर रहा है। एक खबर है कि WhatsApp अपने ‘डिसअपीयरिंग मैसेज’ फीचर के लिए एक बड़े प्राइवेसी अपग्रेड पर काम कर रहा है।

इस अपग्रेड से यूजर्स किसी नए मैसेज को पढ़ने के कुछ ही देर बाद उसे अपने-आप डिलीट कर पाएंगे। इस नए फीचर को “After reading” नाम दिया गया है।

वॉट्सऐप के नए फीचर ट्रैक करने वाली वेबसाइट WABetaInfo ने ऐप के लेटेस्ट बीटा बिल्ड में इस फीचर को देखा है और उम्मीद है कि मेटा के इस पर्सनल मैसेजिंग ऐप में यह फीचर जल्द ही आ जाएगा। कैसे काम करेगा नया फीचर, चलिए एक नजर डालते हैं सामने आई डिटेल्स पर…

नया ‘ऑफ्टर रीडिंग’ टाइमर क्या है
वॉट्सऐप अभी यूजर्स को 24 घंटे, 7 दिन या 90 दिन के लिए ‘disappearing message timers’ चालू करने की सुविधा देता है। इसका मतलब है कि रिसीवर को भेजे गए कोई भी मैसेज उस तय समय-सीमा के अंदर अपने-आप गायब हो जाएंगे।

हालांकि यह समय-सीमा ज्यादातर लोगों के लिए काफी काम की है, लेकिन ‘one-time password’ (OTP), ‘verification code’ या ऐसी ही दूसरी संवेदनशील और गोपनीय जानकारी शेयर करने के लिए यह शायद उतनी सही न हो।

ऑफ्टर रीडिंग’ टाइमर फीचर
इस समस्या को हल करने के लिए, वॉट्सऐप कथित तौर पर “After reading” (पढ़ने के बाद) विकल्प पर काम कर रहा है। यह एक सख्त टाइमर सेट करेगा, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि मैसेज रिसीवर द्वारा देखे जाने के तुरंत बाद ही गायब हो जाए, ताकि वह किसी गलत व्यक्ति के हाथ न लगे।

खास बात यह है कि वॉट्सऐप में पहले से ही ‘View Once’ का ऑप्शन मौजूद है, जो इसी तरह का काम करता है, इसके जरिए यूजर्स किसी मीडिया फाइल या वॉयस नोट को सिर्फ एक बार देखने के लिए शेयर कर सकते हैं, लेकिन यह नया फीचर अब मैसेज के लिए भी यही फंक्शनैलिटी ले आएगा।

कैसे काम करेगा फीचर
खबरों के मुताबिक, यह फीचर 15 मिनट का एक सख्त काउंटडाउन शुरू करेगा। 15 मिनट बाद, मैसेज भेजने वाले और पाने वाले, दोनों की चैट से गायब हो जाएगा। हालांकि, अगर मैसेज पढ़ा नहीं जाता है, तो वह 24 घंटे तक चैट में बना रहेगा, इसके बाद वह अपने-आप खत्म हो जाएगा और गायब हो जाएगा।

दिलचस्प बात यह है कि WABetaInfo की रिपोर्ट में बताया गया है कि यह फीचर तब भी बिना किसी रुकावट के काम करेगा, भले ही यूजर्स ने अपनी ‘रीड रिसीट्स’ (ब्लू टिक्स) बंद कर रखी हों। सिस्टम तब भी यह ट्रैक करेगा कि मैसेज कब खोला गया है, ताकि पाने वाले के फोन पर 15 मिनट का ‘सेल्फ-डिस्ट्रक्ट’ काउंटडाउन शुरू हो सके, इस तरह, रिसीवर की ‘रीड रिसीट’ सेटिंग्स चाहे जो भी हों, भेजने वाले की प्राइवेसी बनी रहेगी।

खबरों के अनुसार, यूजर्स के पास यह सुविधा होगी कि वे इस फीचर को या तो हर चैट के लिए अलग से चालू कर सकें या फिर सभी बातचीत के लिए एक साथ।

कब उपलब्ध होगा यह फीचर
WABetaInfo ने Android 2.26.12.2 अपडेट के लिए वॉट्सऐप बीटा में ‘After reading’ फीचर को देखा। हालांकि, यह फिलहाल अभी डेवलपमेंट के दौर में है और अभी बीटा टेस्टर्स के लिए उपलब्ध नहीं है। खबरों के मुताबिक, वॉट्सऐप इस नए टाइमर को लागू करने के तरीके को बेहतर बना रहा है ताकि यह भरोसेमंद तरीके से काम करे, ऐसा माना जा रहा है कि यह ऐप के आने वाले किसी अपडेट के साथ रोल आउट किया जा सकता है।

MCap: सेंसेक्स की शीर्ष 10 कंपनियों में से पांच का मार्केट कैप एक लाख करोड़ घटा

नई दिल्ली। Market Cap: शेयर बाजार की शीर्ष कंपनियों के लिए बीता सप्ताह ज्यादा अनुकूल नहीं रहा। सेंसेक्स की 10 सबसे मूल्यवान कंपनियों में से पांच के संयुक्त बाजार पूंजीकरण में करीब 1 लाख करोड़ रुपये की गिरावट दर्ज की गई।

इस गिरावट में सबसे ज्यादा नुकसान एचडीएफसी बैंक को हुआ, जिससे यह सप्ताह उसके लिए सबसे कमजोर साबित हुआ। अगर बाजार के समग्र प्रदर्शन की बात करें तो प्रमुख सूचकांक लगभग स्थिर रहे, लेकिन हल्की गिरावट का रुख दिखाई दिया।

बीएसई का सेंसेक्स बीते सप्ताह 30.96 अंक यानी 0.04 प्रतिशत नीचे बंद हुआ। वहीं एनएसई का निफ्टी 36.6 अंक या 0.15 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ। यह संकेत देता है कि बाजार में निवेशकों का रुझान सतर्क बना हुआ है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, सप्ताह की शुरुआत सकारात्मक माहौल के साथ हुई थी और शुरुआती तीन कारोबारी सत्रों में बाजार ने अच्छी बढ़त दिखाई। हालांकि, गुरुवार को आई तेज गिरावट ने पूरे सप्ताह की कमाई को खत्म कर दिया। इसके बाद आखिरी कारोबारी दिन बाजार में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला, जिससे निवेशकों की चिंता और बढ़ गई।

Religare Broking Ltd के रिसर्च प्रमुख अजीत मिश्रा के अनुसार, बाजार का रुख पूरे सप्ताह सपाट रहा, लेकिन इसमें हल्की नकारात्मकता साफ दिखी। उनका कहना है कि निवेशक फिलहाल सतर्क हैं और किसी बड़े संकेत का इंतजार कर रहे हैं। यही वजह है कि बाजार में मजबूती के बावजूद टिकाऊ बढ़त नहीं बन पा रही है।

शेयर बाजार में बीते सप्ताह टॉप कंपनियों के प्रदर्शन में साफ तौर पर दो अलग तस्वीरें देखने को मिलीं। एक तरफ कुछ दिग्गज कंपनियों के बाजार पूंजीकरण में बड़ी गिरावट दर्ज की गई, वहीं दूसरी ओर कुछ कंपनियों ने मजबूत बढ़त हासिल कर निवेशकों को राहत दी।

जिन कंपनियों पर दबाव बना रहा, उनमें एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, बजाज फाइनेंस और हिंदुस्तान यूनिलीवर शामिल रहे। इन पांच कंपनियों के संयुक्त बाजार पूंजीकरण में कुल 1,02,771.87 करोड़ रुपये की गिरावट आई। इस गिरावट में सबसे बड़ा योगदान एचडीएफसी बैंक का रहा, जिसका मार्केट कैप 56,124.48 करोड़ रुपये घटकर 12,01,267.28 करोड़ रुपये पर आ गया।

इसके अलावा हिंदुस्तान यूनिलीवर के बाजार मूल्य में 18,009.62 करोड़ रुपये की कमी आई और यह घटकर 4,89,631.32 करोड़ रुपये रह गया। बजाज फाइनेंस का मूल्यांकन भी 15,338.42 करोड़ रुपये कम होकर 5,16,715.12 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के मार्केट कैप में 7,127.63 करोड़ रुपये की गिरावट आई, जिससे इसका मूल्य 8,64,940 करोड़ रुपये रह गया। वहीं आईसीआईसीआई बैंक का बाजार पूंजीकरण 6,171.72 करोड़ रुपये घटकर 8,91,673.06 करोड़ रुपये पर आ गया।

दूसरी ओर, कुछ कंपनियों ने बाजार में मजबूती दिखाई और उनके मूल्यांकन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। रिलायंस इंडस्ट्रीज ने सबसे ज्यादा उछाल दिखाया, जिसका मार्केट कैप 45,942.75 करोड़ रुपये बढ़कर 19,14,235.92 करोड़ रुपये हो गया। इसके साथ ही कंपनी देश की सबसे मूल्यवान कंपनी के रूप में अपनी स्थिति बनाए रखने में सफल रही।

टेलीकॉम सेक्टर की प्रमुख कंपनी भारती एयरटेल का बाजार पूंजीकरण 24,462.03 करोड़ रुपये बढ़कर 10,52,893.75 करोड़ रुपये पहुंच गया। वहीं स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के मूल्यांकन में 10,707.52 करोड़ रुपये की बढ़त दर्ज की गई और इसका मार्केट कैप 9,76,968.57 करोड़ रुपये हो गया।

आईटी सेक्टर की कंपनी इंफोसिस और बीमा क्षेत्र की दिग्गज कंपनी एलआईसी ने भी हल्की लेकिन सकारात्मक बढ़त दर्ज की। एलआईसी का बाजार पूंजीकरण 2,624.88 करोड़ रुपये बढ़कर 4,91,610.45 करोड़ रुपये हो गया, जबकि इंफोसिस का मार्केट कैप 2,473.79 करोड़ रुपये बढ़कर 5,08,789.37 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।

सप्ताह के अंत में बाजार पूंजीकरण के आधार पर कंपनियों की रैंकिंग में रिलायंस इंडस्ट्रीज पहले स्थान पर रही। इसके बाद एचडीएफसी बैंक, भारती एयरटेल, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, आईसीआईसीआई बैंक, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, बजाज फाइनेंस, इंफोसिस, एलआईसी और हिंदुस्तान यूनिलीवर का स्थान रहा।

ग्लोबल संकट के बीच FPI ने भारतीय शेयर बाजार से 88180 करोड़ रुपये निकले

नई दिल्ली। FPI Withdrawal: भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। मार्च 2026 में अब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी एफपीआई ने भारतीय इक्विटी बाजार से 88,180 करोड़ रुपये की निकासी कर ली है।

इस भारी बिकवाली के पीछे पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव, कमजोर होता रुपया और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को प्रमुख कारण माना जा रहा है।डिपॉजिटरी आंकड़ों के मुताबिक, मार्च के पहले तीन हफ्तों में एफपीआई हर कारोबारी दिन शुद्ध विक्रेता बने रहे।

हालांकि यह निकासी अक्टूबर 2024 में हुए रिकॉर्ड 94,017 करोड़ रुपये के आउटफ्लो से थोड़ी कम है, लेकिन मौजूदा हालात निवेशकों की चिंता बढ़ाने के लिए काफी हैं। इस ताजा बिकवाली के साथ ही साल 2026 में अब तक एफपीआई की कुल निकासी 1 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर चुकी है।

दिलचस्प बात यह है कि फरवरी में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार में जोरदार वापसी की थी। उस दौरान एफपीआई ने 22,615 करोड़ रुपये का निवेश किया था, जो पिछले 17 महीनों में सबसे बड़ा मासिक निवेश था। लेकिन मार्च में परिस्थितियां तेजी से बदल गईं और निवेशकों ने मुनाफावसूली के साथ जोखिम से दूरी बनानी शुरू कर दी।

वकारजावेद खान के अनुसार, इस बिकवाली की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव है। उनका कहना है कि संघर्ष के लंबा खिंचने और होरमुज जलडमरूमध्य में संभावित बाधा की आशंका ने ब्रेंट क्रूड की कीमत को 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचा दिया है, जिससे निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से दूरी बनानी शुरू कर दी।

वहीं हिमांशु श्रीवास्तव का मानना है कि अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी भी एक बड़ा कारण है। उनका कहना है कि उच्च यील्ड के चलते डॉलर आधारित निवेश ज्यादा आकर्षक हो गए हैं, जिससे उभरते बाजारों जैसे भारत से पूंजी बाहर जा रही है। इसके साथ ही मजबूत डॉलर और वैश्विक तरलता में कमी ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया है।

इसी तरह वी के विजयकुमार ने कहा कि पश्चिम एशिया का भू-राजनीतिक तनाव एफपीआई की बिकवाली को और तेज कर रहा है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि वैश्विक बाजारों में कमजोरी, रुपये में गिरावट और महंगे कच्चे तेल का भारत की आर्थिक वृद्धि और कॉरपोरेट आय पर संभावित असर निवेशकों की चिंता बढ़ा रहा है।

इसके अलावा रुपये की कमजोरी भी विदेशी निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 92 के करीब बना हुआ है, जिससे निवेश पर रिटर्न प्रभावित होता है।

वहीं फरवरी में आई तेज खरीदारी के बाद मार्च में मुनाफावसूली का दौर भी देखने को मिला है। कंपनियों के चौथी तिमाही के नतीजों को लेकर भी मिश्रित संकेत मिल रहे हैं, जिससे मार्जिन पर दबाव की आशंका जताई जा रही है।

सेक्टोरल स्तर पर देखें तो वित्तीय सेवाओं के शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव रहा। 15 मार्च तक के पखवाड़े में एफपीआई ने इस सेक्टर से 31,831 करोड़ रुपये की निकासी की, जो कुल बिकवाली का बड़ा हिस्सा है।

Soybean: मध्य प्रदेश में सोयाबीन की कीमतें नरम, महाराष्ट्र और राजस्थान में बढ़ीं

नई दिल्ली। डिमांड और सप्लाई के हिसाब से, 14-20 मार्च के हफ़्ते में मध्य प्रदेश में सोयाबीन की कीमतों में 150 रुपये प्रति क्विंटल तक की गिरावट देखी गई। इसके उलट, महाराष्ट्र में प्लांट डिलीवरी की कीमतें 125 रुपये प्रति क्विंटल और राजस्थान में 250 रुपये प्रति क्विंटल तक बढ़ गईं।

खास बात यह है कि इन तीनों टॉप-प्रोड्यूसिंग राज्यों में, सोयाबीन की प्लांट डिलीवरी कीमत अभी सरकार के मिनिमम सपोर्ट प्राइस (MSP) से ऊपर ट्रेड कर रही है।

सोया रिफाइंड तेल
अच्छी डिमांड की वजह से रिफाइंड सोया तेल की कीमतों में भी 6 से 10 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी हुई। कोटा में कीमतें 60 रुपये बढ़कर 1,500 रुपये प्रति 10 kg हो गईं, जबकि कांडला में कीमतें 105 रुपये बढ़कर *1,505 रुपये प्रति 10 kg हो गईं।

मुंबई और हल्दिया में भी कीमतों में 4 से 5% का सुधार देखा गया। फरवरी में सोयाबीन तेल का इंपोर्ट कम हुआ, और मार्च में भी इंपोर्ट में संभावित रुकावटों को लेकर चिंता बनी हुई है। घरेलू बाज़ारों में सोयाबीन का इनफ्लो कम होने लगा है।

ग्लोबल मार्केट में सोयाबीन तेल की कीमतें ऊपर जा रही हैं; नतीजतन, कमोडिटी के लिए बेस इंपोर्ट प्राइस भी बढ़ा दिया गया है। इसके अलावा, रुपये की कीमत में गिरावट ने इंपोर्ट को और महंगा कर दिया है। सोया DOC (डी-ऑइल केक) में ट्रेडिंग एक्टिविटी सुस्त रही, जिससे कीमतों में थोड़ी नरमी आई।

स्टॉकिस्टों की मजबूत डिमांड से बीते सप्ताह सरसों की कीमतों में भारी तेजी रही

नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि मंत्रालय और अलग-अलग इंडस्ट्री और ट्रेड एसोसिएशन ने इस सीजन में घरेलू सरसों के प्रोडक्शन में काफी बढ़ोतरी का अनुमान लगाया है। हालांकि, बड़े उत्पादक राज्यों के खास बाजारों में नई सरसों की फसल की भारी आवक शुरू हो गई है, लेकिन 14-20 मार्च के हफ्ते में तेल मिलर्स, ट्रेडर्स और स्टॉकिस्टों की मजबूत डिमांड के कारण कीमतों में जबरदस्त उछाल आया।

42% कंडीशन सरसों
समीक्षाधीन सप्ताह के दौरान, दिल्ली और जयपुर दोनों में 42% कंडीशन सरसों की कीमत 400 रुपए प्रति क्विंटल बढ़कर क्रमशः 6,900 रुपए और 7,250 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच गई।

इसी तरह, औसत क्वालिटी वाली सरसों की कीमतें बूंदी में 900 रुपए प्रति क्विंटल, भरतपुर में 600 रुपए, आगरा में 575 रुपए, कुम्हेर, डीग और नदबई में 554, अलवर में 500 रुपए, खैरथल में 425 रुपए और गंगानगर में 400 रुपए बढ़ गईं।

देश भर के दूसरे बाज़ारों में भी सरसों की कीमतों में बढ़ोतरी देखी गई, जो 150 से बढ़कर 375 रुपए प्रति क्विंटल हो गईं। सिर्फ़ हिसार अपवाद रहा, जहाँ कीमतों में 50 रुपए की थोड़ी नरमी आई।

सरसों तेल
सरसों के बीज की कीमतों में तेज़ उछाल के बाद, एक्सपेलर और कच्ची घानी (कोल्ड-प्रेस्ड) सरसों तेल के रेट भी 100 रुपये प्रति 10 kg तक बढ़ गए। दिल्ली में, एक्सपेलर तेल की कीमत 70 रुपए बढ़कर 1,450 रुपये प्रति 10 kg हो गई।

मुरैना में, एक्सपेलर और कच्ची घानी तेल की कीमतें 100-100 रुपए बढ़कर क्रमशः 1,490 और 1,500 रुपये प्रति 10 kg हो गईं। जयपुर में, कच्ची घानी तेल की कीमतें 100 रुपए बढ़कर 1,500 रुपये पर पहुंच गईं, जबकि आगरा में, वे 120 रुपए बढ़कर 1,510 रुपये पर पहुंच गईं। सरसों खली (DOC) सरसों खली और DOC का बाज़ार भी मज़बूत रहा; इसका मुख्य कारण सरसों की कीमतों में तेज़ उछाल माना जा रहा है।

उठाव कमजोर रहने से धनिया की कीमतों में ज्यादा तेजी की संभावना नहीं

नई दिल्ली। इस हफ़्ते, हालांकि प्रोड्यूसिंग सेंटर्स के मार्केट में धनिया के दाम ज़्यादा थे, लेकिन इन बढ़ी हुई कीमतों पर असल ट्रेडिंग वॉल्यूम कम रहा। ज़्यादातर मार्केट में, प्रोड्यूस की रोज़ाना की पूरी इनफ्लो ट्रेडिंग नहीं हो रही है; नतीजतन, हर दिन मार्केट में बिना बिका स्टॉक बचा रहता है।

डोमेस्टिक ट्रेड के अलावा, एक्सपोर्ट एक्टिविटी भी धीमी हो गई है। खास बात यह है कि इस सीज़न में, गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे बड़े प्रोड्यूसिंग राज्यों में 2.97 लाख हेक्टेयर में धनिया की बुआई हुई है, जबकि पिछले साल बुआई का एरिया 3.36 लाख हेक्टेयर था। मध्य प्रदेश और राजस्थान में बुआई के एरिया में क्रम से 17% और 15% की गिरावट दर्ज की गई है, जबकि गुजरात में 3% की गिरावट का अनुमान है।

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि बुआई के एरिया में कमी और खराब मौसम की वजह से, इस सीजन में देश में धनिया का प्रोडक्शन लगभग 94-95 लाख बैग होने का अनुमान है – जो पिछले साल के मुकाबले लगभग 14-15 लाख बैग कम है। इसके अलावा, बचा हुआ स्टॉक भी पिछले साल के मुकाबले कम माना जा रहा है। इस हफ्ते गुड़ी पड़वा और सिड के त्योहारों की वजह से, हफ्ते के आखिरी तीन दिन ज़्यादातर मार्केट बंद रहे, हालांकि शुरुआती दिनों में ट्रेडिंग ठीक-ठाक चली।

इस हफ़्ते, गुजरात के गोंडल, राजकोट, जूनागढ़ और जाम जोधपुर जैसे बाज़ारों में धनिया की आवक अच्छी रही। लेकिन, फ्यूचर्स मार्केट में बढ़ती कीमतों और सूखे फल-सब्ज़ियों की आवक शुरू होने से, धनिया की कीमतों में तेज़ी देखी गई। हफ़्ते की शुरुआत में ₹1,840-₹2,280 प्रति 20 kg की रेंज में, हफ़्ते के आखिर तक कीमतें बढ़कर ₹1,880-₹2,300 प्रति 20 kg हो गईं।

रामगंज की बड़ी मंडी तीन दिन तक बंद रही, जबकि बारां और कोटा में ट्रेडिंग ठीक-ठाक रही। पैदावार कम होने की वजह से राजस्थान की मंडियों में धनिया की आवक में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई है।

कोटा मंडी (मार्केट) में अभी 1,000 से 1,200 बैग की आवक हो रही है, जबकि बारां में एवरेज आवक 1,500 से 2,000 बैग की चल रही है। क्वालिटी के आधार पर, ‘ईगल’ वैरायटी के लिए कीमतें ₹9,800-₹10,300 प्रति क्विंटल और ‘बादामी’ वैरायटी के लिए ₹9,600-₹9,800 प्रति क्विंटल पर मज़बूती से बताई गईं।

इस हफ़्ते की शुरुआत में, मध्य प्रदेश के बाज़ारों में नई उपज की आवक अच्छी रही। लेकिन, नवरात्रि शुरू होने के बाद, हफ़्ते के आखिरी तीन दिन बाज़ार बंद रहे। मिली जानकारी के मुताबिक, मौसम अच्छा रहने से, गुना की मुख्य मंडी में नए धनिये की आवक 40,000-45,000 बोरी तक पहुँच गई, जबकि कुंभराज में यह 35,000-40,000 बोरी रही।

अशोक नगर में भी आवक 9,000-10,000 बोरी दर्ज की गई। बढ़ी हुई आवक के बावजूद, बाज़ार का माहौल मज़बूत रहा। मध्य प्रदेश के बाज़ारों में, ‘ईगल’ क्वालिटी के दाम ₹9,800-₹10,300 प्रति क्विंटल और ‘बादामी’ क्वालिटी के दाम ₹9,600-₹9,900 प्रति क्विंटल रहे।

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि अभी धनिया की कीमतों पर कोई खास मंदी का दबाव नहीं है। हालांकि, अगले हफ्ते मार्केट खुलने पर, सप्लाई का दबाव बढ़ने से कीमत में ₹2-5 प्रति किलोग्राम की गिरावट आ सकती है; इस रेंज से ज़्यादा गिरावट की उम्मीद कम है। सूत्रों का कहना है कि गुजरात के कुल धनिया प्रोडक्शन का लगभग 50 परसेंट पहले ही मार्केट में आ चुका है।

इसलिए, आने वाले दिनों में गुजरात के मार्केट में आवक कम होने की उम्मीद है। इसके अलावा, यह देखते हुए कि मौजूदा प्रोडक्शन और कैरी-ओवर स्टॉक दोनों पिछले साल की तुलना में कम हैं, धनिया की कुल उपलब्धता कम होने की उम्मीद है। इसलिए, ट्रेड अनुमान बताते हैं कि 2026 में धनिया की कीमतें स्थिर रहने की संभावना है।

निर्यात: चालू फाइनेंशियल ईयर (2025-26) के पहले नौ महीनों में धनिया एक्सपोर्ट में 10 परसेंट की बढ़ोतरी हुई, जबकि इस एक्सपोर्ट से होने वाले रेवेन्यू में 13 परसेंट की बढ़ोतरी हुई। स्पाइसेस बोर्ड के जारी डेटा के मुताबिक, अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान धनिया एक्सपोर्ट 47,891 टन हुआ, जिससे ₹519.23 करोड़ का रेवेन्यू मिला।

पिछले साल इसी समय में एक्सपोर्ट 43,609 टन हुआ था, जिससे 458.69 करोड़ का रेवेन्यू मिला था। साल 2024-25 के लिए कुल धनिया एक्सपोर्ट 60,324 टन हुआ। साल 2023-24 में रिकॉर्ड 108,624 टन धनिया एक्सपोर्ट किया गया।