Wednesday, July 15, 2026
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Brent crude 30 दिन में 56% उछल कर 112 डॉलर के पार हुआ

नई दिल्ली। Brent crude Price: ग्लोबल एनर्जी मार्केट में भारी उथल-पुथल के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमतें 112 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। अमेरिका-ईरान-इजरायल युद्ध शुरू होने के बाद से तेल में 50% से ज्यादा तेजी आ चुकी है, जिसने दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं को चिंता में डाल दिया है।

महज 30 दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 56% का उछाल आया है। युद्ध से पहले जहां कीमतें लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल थीं, वहीं अब यह 112 डॉलर के स्तर को पार कर चुकी हैं। यह तेजी साफ संकेत देती है कि वैश्विक सप्लाई पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है।

इस तेजी की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव है। खासतौर पर हुर्मुज स्ट्रेट के आसपास हालात बिगड़ने से दुनिया की तेल सप्लाई पर खतरा मंडरा रहा है। यह स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है। इसके बाधित होने का असर सीधे कीमतों पर पड़ा है।

संकट सिर्फ तेल तक सीमित नहीं है, बल्कि एलएनजी (LNG) बाजार भी इसकी चपेट में आ गया है। कतर में ऊर्जा ढांचे पर हमलों के कारण उसकी निर्यात क्षमता का करीब 17% प्रभावित हुआ है। भारत के लिए यह स्थिति और गंभीर है, क्योंकि देश अपनी गैस जरूरतों का लगभग 47% कतर से आयात करता है।

एएनआई की रिपोर्ट्स के मुताबिक, मार्च की शुरुआत में भारत के कच्चे तेल के आयात में तेज गिरावट आई है। जहां फरवरी में साप्ताहिक आयात 25 मिलियन बैरल था, वहीं 6 मार्च को समाप्त सप्ताह में यह गिरकर सिर्फ 1.9 मिलियन बैरल रह गया। सऊदी अरब, इराक और यूएई जैसे प्रमुख सप्लायर्स से सप्लाई में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

सप्लाई में रुकावट और कीमतों में तेजी का सबसे बड़ा असर उन देशों पर पड़ता है, जो आयात पर निर्भर हैं। भारत भी इनमें शामिल है। तेल महंगा होने से परिवहन, बिजली और उत्पादन लागत बढ़ती है, जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है और आम लोगों की जेब पर सीधा असर पड़ता है।

आगे क्या होगा
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मध्य पूर्व में तनाव कम नहीं हुआ, तो तेल की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं। इसका असर सिर्फ पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि महंगाई, शेयर बाजार और पूरी

MCX पर सोना 7000 रुपये सस्ता, चांदी 13 हजार रुपये लुढ़की, जानें आज के भाव

नई दिल्ली। Gold Silver Price Today: मिडिल-ईस्ट में जारी युद्ध के बीच सोने की कीमतों में भारी गिरावट देखने को मिल रही है। सुरक्षित निवेश माने जाने वाला सोना इस बार निवेशकों को राहत देने के बजाय दबाव में आ गया है और यह इस साल की अपनी लगभग पूरी बढ़त गंवाने की कगार पर पहुंच गया है।

घरेलू मोर्चे पर, वैश्विक बाजारों में कमजोरी को देखते हुए एमसीएक्स पर चांदी की कीमतें 6% या 13,606 रुपये की गिरावट के साथ 2,13,166 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गईं, जबकि एमसीएक्स पर सोना भी लगभग 5% या 7,115 रुपये फिसलकर 1,37,377 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया।

सिंगापुर बाजार में स्पॉट गोल्ड 3.3% गिरकर 4,343 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया, जबकि चांदी भी 3.4% टूटकर 65.61 डॉलर पर आ गई। प्लैटिनम और पैलेडियम में भी गिरावट दर्ज की गई, जिससे साफ है कि पूरे कीमती धातु बाजार पर दबाव बना हुआ है।

सोने में इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह बढ़ती महंगाई और ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदें हैं। फेडरल रिजर्व समेत कई केंद्रीय बैंकों ने संकेत दिया है कि फिलहाल ब्याज दरों में कटौती जल्द संभव नहीं है।

मध्य पूर्व में संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ी हैं, जिससे महंगाई का खतरा और गहरा गया है। ऐसे माहौल में ब्याज दरें ऊंची रहने की संभावना बढ़ जाती है, जो सोने के लिए नकारात्मक है क्योंकि यह कोई ब्याज नहीं देता।

क्या अब आएगा उछाल
विशेषज्ञों का मानना है कि गिरावट के बाद अब सोना “ओवरसोल्ड” जोन में पहुंच गया है।14-दिवसीय RSI इंडिकेटर 30 से नीचे आ चुका है, जिसे आमतौर पर बाजार में ज्यादा बिकवाली का संकेत माना जाता है। ऐसे में शॉर्ट टर्म में कीमतों में उछाल की संभावना बन सकती है, हालांकि यह पूरी तरह भू-राजनीतिक हालात पर निर्भर करेगा।

आगे क्या करें निवेशक?
विश्लेषकों के मुताबिक, अभी बाजार में अनिश्चितता बहुत ज्यादा है। अगर युद्ध और तेल की कीमतों में तेजी जारी रहती है, तो सोने में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। वहीं, गिरावट के बाद लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह धीरे-धीरे खरीदारी का मौका भी बन सकता है।

Stock Market: शेयर बाजार में हाहाकार, निवेशकों के 8 लाख करोड़ रुपये डूबे

नई दिल्ली। Stock Market Crash: हफ्ते की शुरुआत भारतीय शेयर बाजार के लिए बेहद खराब रही। सोमवार (23 मार्च) को बाजार खुलते ही बिकवाली का दबाव इतना बढ़ गया कि प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी 50 करीब 2% तक लुढ़क गए।

सेंसेक्स 1,550 अंकों से ज्यादा गिरकर 72,977 के स्तर पर आ गया, जबकि निफ्टी 50 करीब 500 अंक टूटकर 22,634 के आसपास था। इस गिरावट से निवेशकों के कुछ ही मिनटों में करीब 8 लाख करोड़ रुपये डूब गए।

मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी भारी बिकवाली देखने को मिली, जिससे बाजार में डर का माहौल बन गया। इस तेज गिरावट का सीधा असर निवेशकों की संपत्ति पर पड़ा और

क्यों टूटा बाजार

  • अमेरिका-ईरान युद्ध से बढ़ा वैश्विक तनाव
    अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता टकराव बाजार के लिए सबसे बड़ा जोखिम बना हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर उसने होर्मुज स्ट्रेट नहीं खोला तो उसके ऊर्जा ठिकानों पर हमला किया जाएगा। जवाब में ईरान ने भी इसे पूरी तरह बंद करने की धमकी दी है। इस टकराव से वैश्विक सप्लाई चेन और ऊर्जा बाजार पर खतरा बढ़ गया है, जिससे निवेशकों की घबराहट बढ़ी है।
  • रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर
    भारतीय रुपया लगातार दबाव में है और सोमवार को यह 93.89 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। कमजोर रुपया विदेशी निवेशकों के लिए भारत में निवेश को कम आकर्षक बनाता है। इससे पूंजी निकासी बढ़ती है और बाजार पर दबाव आता है। साथ ही, आयात महंगा होने से महंगाई भी बढ़ने का खतरा रहता है।
  • कच्चे तेल की कीमतें बनी सबसे बड़ी चिंता
    ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है, जो भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए बड़ी चिंता है। ऊंचे तेल दाम से महंगाई बढ़ती है। चालू खाता घाटा बढ़ता है और कंपनियों का मुनाफा घटता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर तेल लंबे समय तक महंगा रहा तो भारत की GDP ग्रोथ पर भी असर पड़ सकता है।
  • विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली
    विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने बाजार में भारी बिकवाली की है। युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक विदेशी निवेशक करीब 1 लाख करोड़ रुपये के शेयर बेच चुके हैं। सिर्फ मार्च महीने में ही 86,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की निकासी हो चुकी है। लगातार बिकवाली से बाजार में कमजोरी और बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल बाजार में अनिश्चितता और वोलैटिलिटी बनी रहेगी।

ट्रंप की मूर्खता से अमेरिका ईरान युद्ध में फंस गया, निकलने का रास्ता नहीं: पूर्व CIA चीफ

वॉशिंगटन। ईरान के खिलाफ जंग अमेरिका की जंग शुरू हुए तीन सप्ताह से ज्यादा बीत चुके हैं लेकिन इसके खत्म होने के आसार नहीं दिख रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए इससे निकलने का कोई आसान रास्ता नहीं दिख रहा है। जैसे-जैसे युद्ध लंबा खिंच रहा है, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए घरेलू मोर्चे पर भी मुश्किलें बढ़ रही हैं।

ट्रंप को अब तीखी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिका के रक्षा मंत्री रहे और खुफिया एजेंसी CIA के पूर्व चीफ लियोन पैनेटा ने युद्ध के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आलोचना की है।

ब्रिटिश अखबार गॉर्डियन से बात करते हुए पैनेटा ने बताया कि ईरान युद्ध में डोनाल्ड ट्रंप बहुत मुश्किल स्थिति में फंस गए हैं और इसके लिए वह खुद ही जिम्मेदार हैं। पैनेटा ने कहा कई सालों से अमेरिकी सुरक्षा अधिकारियों को इस बात की जानकारी थी कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को रोककर दुनिया भर में तेल की सप्लाई रोक सकता है। उन्होंने कहा कि यह जाना-पहचाना खतरा था, जिसे संघर्ष के दौरान जानबूझकर नजरअंदाज कर दिया गया।

होर्मुज स्ट्रेट पर फंसे डोनाल्ड ट्रंप
पैनेटा ने कहा कि ट्रंप को एक बहुत ही मुश्किल मुद्दे का सामना करना पड़ रहा है, जो यह है कि क्या वह होर्मुज स्ट्रेट को खुलवाने की कोशिश करें और युद्ध का दायरा बढ़ाएं ताकि दबाव को खत्म कर सकें और शायद ईरान के साथ बातचीत कर सकें या फिर क्या वह बस पीछे हट जाएं और जीत की घोषणा कर दें, भले ही हर कोई साफ तौर पर समझ जाए कि वह असफल रहे हैं।

पैनेटा ने कहा कि युद्ध के मौजूदा हालात से अमेरिका की तैयारी में साफ पता चलता है। उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन ने ईरान की प्रतिक्रिया को कम करके आंका या मान लिया कि संघर्ष जल्दी खत्म हो जाएगा। वे इसके लिए तैयार नहीं थे और अब इसकी कीमत चुकानी पड़ रही है।

संत सुधासागर न्यू जीएमए प्लाजा में 317 दुकानों एवं फ्लेट्स का लॉटरी से आवंटन

हाडोती का सबसे बड़ा 9 मंजिला बाज़ार गणेश नगर में जल्द ही शुरू होगा

कोटा। रविवार को जी.एम.ए. अध्यक्ष राकेश जैन की उपस्थिति में संत सुधा सागर न्यू जी.एम.ए. की लाटरी पारदर्शिता अपनाते हुए आवेदक सदस्यों ने निकाली।

जी.एम.ए. सभागार, जी.एम.ए. प्लाजा में निकाली गई लॉटरी में सभी सदस्यों के चेहरों पर मुस्कान और खुशिया थी। लॉटरी में 25 वर्ग फुट की 93 दुकाने, 250 वर्ग फुट की 111 दुकाने, 500 वर्ग फुट की 42 दुकाने, इसके साथ ही 2 बी.एच. के 10 फ्लेट, 3 बी.एच.के 61 फ्लेट कुल 317 आवेदकों के पक्ष में लॉटरी निकाली गई |

जी.एम.ए. अध्यक्ष जैन ने बताया कि मेडिकल कालेज के पास हाडोती का सबसे बड़ा 9 मंजिला बाज़ार जल्द ही शुरू होगा। यह बाज़ार 1.25 लाख वर्ग फीट एरिया में पूर्णता की और है। बेसमेंट में पार्किंग और पहली तीन मंजिलो पर लगभग 350 दुकाने बनी हैं। दुकानों में रोजमर्रा के साथ प्रमुख उत्पाद सहित रोजमर्रा का प्रत्येक सामान वाजिब दरों पर मिलेगा।

साथ ही ऊपर की 6 मंजिलो में 104 फ्लेट बनाये गये हैं। इस प्रोजेक्ट में खरीदारों के लिए 300 कारों और 500 बाइक की भव्य पार्किंग के साथ जिम, योगा रूम, स्पॉर्ट्स रूम, कम्युनिटी हॉल, पार्टी हाल, बेडमिन्टन एरिया, मंदिर जैसी सुविधाओ के साथ फ्लेटो के लिए 6 लिफ्ट और दुकानों के लिए 2 बड़ी लिफ्ट, फायर फिटिंग सिस्टम, फ़िल्टर पानी, आदि सभी प्रकार की सुविधाएं रहेंगी |

कार्यक्रम में कोषाध्यक्ष प्रदीप अग्रवाल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष अशोक झमटानी, कनिष्ठ उपाध्यक्ष हनुमान मल दुग्गड, पुरुषोत्तम छाबड़िया, विकास नाकोडा, सहमंत्री राजकमल एरन, संस्कृतिक मंत्री नीरज मनचन्दा, कार्यकारिणी सदस्य अजय पंजवानी, अनुरोध विजय, अरुण अग्रवाल, हरीश टेकवानी, जगदीश भागवानी, लक्ष्मण झमटानी, महेश रावतानी, मुकेश जैन, नितिन अग्रवाल, राकेश नाकोडा, श्यामसुंदर अग्रवाल, विजय कुमार नेभनानी, विकास चावला, लोकेंद्र जैन, गिरीश सहजवानी सहित सभी सदस्य उपस्थित थे।

अखिल भारतीय अन्तरराष्ट्रीय वैश्य फेडरेशन ने समाज हित में बनाई कार्ययोजना

कोटा। अखिल भारतीय अन्तरराष्ट्रीय वैश्य फेडरेशन की एक बैठक रविवार को माहेश्वरी जलसा होटल पर सम्पन्न हुई। जिला अध्यक्ष अशोक माहेश्वरी एवं महामंत्री संदीप अग्रवाल ने बताया कि कार्यकारिणी के पुनर्गठन में वैश्य समाज के सभी 22 घटकों को प्रतिनिधित्व देने पर चिंतन हुआ। माहेश्वरी ने कहा कि शीघ्र ही इसकी घोषणा कर दी जाएगी।

बैठक में यह भी निर्णय हुआ कि सभी घटकों में आपस में विवाह संबंध बनाने के लिए एक परिचय सम्मेलन किया जाएगा एवं विवाह में मध्यम वर्गीय परिवारों को सहयोग करने एवं सामूहिक विवाह के आयोजन का भी प्रयास होगा।

बैठक में हुए निर्णय के अनुसार वैश्य समाज के प्रतिभावान छात्र- छात्राओं एवं अपने क्षेत्र में विलक्षण प्रतिभा के धनी लोगों को भी समाज के स्तर पर प्रोत्साहित करने के लिए विशेष सहयोग दिया जाएगा। समाज के सभी जरूरतमंद लोगों को सहयोग करने के लिए वैश्य महासम्मेलन द्वारा प्रयास किए जाएंगे।

उन्होंने बताया कि अखिल भारतीय अंतर्राष्ट्रीय वैश्य फेडरेशन द्वारा संभाग के समस्त जिलों में निशुल्क वैश्य मित्र सदस्य बनाए जाएंगे। शीघ्र ही प्रदेश स्तरीय वैश्य महासम्मेलन का आयोजन कोटा में हो, जिसमें 40 जिलों के प्रदेश एवं राष्ट्रीय स्तर के पदाधिकारियों को आमंत्रित किया जाएगा।

बैठक में सम्भागीय अध्यक्ष गोवर्धन खण्डेवाल, सम्भागीय महिला विंग की अध्यक्षा कुन्ती मूंदड़ा, जिला चेयरमेन विशाल माहेश्वरी, जिला महिला विंग की अध्यक्ष ममता गुप्ता, अखिल भारतीय अंतर्राष्ट्रीय वैश्य फेडरेशन के युवा अध्यक्ष मनोज टोंग्या, महामंत्री शैलेंद्र विजयवर्गीय, प्रदेश उपाध्यक्ष सुनील गर्ग सहित कई पदाधिकारी मौजूद थे।

लौकिक व आध्यात्मिक शिक्षा का केंद्र बनेगा भगवान ऋषभदेव गुरुकुलम

कक्षा 9वीं से 12वीं तक प्रवेश के लिए साक्षात्कार, 25 विद्यार्थियों को मिलेगा अवसर

कोटा। रिद्धि-सिद्धि नगर, कुन्हाड़ी स्थित भगवान ऋषभदेव गुरुकुलम में गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी के मंगल आशीर्वाद से नवीन शैक्षणिक सत्र के लिए कक्षा 9वीं से 12वीं तक प्रवेश की चयन प्रक्रिया के अंतर्गत रविवार को विद्यार्थियों के साक्षात्कार आयोजित किए गए। गुरुकुल में विद्यार्थियों को संस्कारयुक्त एवं आधुनिक शिक्षा का समन्वित वातावरण निशुल्क प्रदान किया जाएगा।

अध्यक्ष वीरेन्द्र कुमार पाण्ड्या ने बताया कि संस्थान में विद्यार्थियों के लिए आवास एवं भोजन की निःशुल्क व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी। गुरुकुल की दिनचर्या प्रातः 5 बजे से रात्रि 10 बजे तक निर्धारित रहेगी, जिसमें अनुशासित एवं नियमित जीवनशैली पर विशेष बल दिया जाएगा।

प्रतिदिन की शुरुआत प्रातःकालीन देवदर्शन एवं जिनदर्शन से होगी।महामंत्री ताराचंद जैन बड़ला ने स्पष्ट किया कि प्रवेश केवल जैन धर्म के विद्यार्थियों तक सीमित नहीं है, अन्य धर्मों के विद्यार्थी भी प्रवेश के पात्र होंगे।

महामंत्री बड़ला ने जानकारी दी कि गुरुकुल में धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ लौकिक शिक्षा भी प्रदान की जाएगी। कक्षा 9वीं से 12वीं तक पाठ्यक्रम में कक्षा 9वीं में जैन धर्म एवं संस्कार, कक्षा 10वीं में जैन धर्म आचार संहिता, कक्षा 11वीं में जैन गणित तथा कक्षा 12वीं में जैन इतिहास शामिल रहेगा।

कोषाध्यक्ष निर्मल कुमार अजमेरा ने बताया कि प्रथम चरण में प्रवेश हेतु ऑनलाइन परीक्षा आयोजित की गई थी। इसके आधार पर चयनित विद्यार्थियों के साक्षात्कार के पश्चात कक्षा 9वीं में 25 विद्यार्थियों को प्रवेश दिया जाएगा, जिनमें से 12 विद्यार्थियों को प्रथम चरण में प्रवेश प्रदान किया गया।

संस्थान द्वारा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए अंग्रेजी माध्यम से उच्च स्तरीय शिक्षा, कंप्यूटर शिक्षा, कंप्यूटर लैब, आर्ट एवं डांस रूम, डिजिटल स्मार्ट कक्षाएं तथा समय-समय पर ज्ञानवर्धक शैक्षणिक भ्रमण जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। साथ ही लौकिक शिक्षा के साथ चारित्रिक निर्माण पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।

साक्षात्कार प्रक्रिया में अधिष्ठाता पं. कमल कुमार, विषय विशेषज्ञ डॉ. पंकज जैन शास्त्री तथा अधीक्षक जगदीश शास्त्री ने सहभागिता करते हुए चयन प्रक्रिया सम्पन्न कराई। इस अवसर पर राजमल पाटौदी, अशोक सांवला, बाबूलाल जैन, महावीर प्रसाद बड़ला, राजेन्द्र गोधा, प्रकाश मेहरूवाला, अनिल ठौरा सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।

कंपनियों में बदल जाएगा अप्रैल से कर्मचारियों का सैलरी स्ट्रक्चर, जानिए कैसे

नई दिल्ली। Salary Structure change: अगले महीने 1 अप्रैल 2026 से नई वित्तीय साल की शुरुआत के साथ नौकरीपेशा लोगों की सैलरी स्लिप में बदलाव दिख सकता है। कंपनियां नए लेबर कानूनों और बजट में घोषित टैक्स नियमों के हिसाब से सैलरी स्ट्रक्चर अपडेट कर रही हैं। हालांकि कोशिश यही है कि हाथ में आने वाली सैलरी (टेक-होम) ज्यादा ना बदले, लेकिन टैक्स देने के तरीके और रकम में बड़ा फर्क आ सकता है।

इस बार सबसे बड़ा बदलाव ‘वेजेज’ की नई परिभाषा को लेकर है। नए नियम के अनुसार, किसी भी कर्मचारी की कुल सैलरी का कम से कम 50% हिस्सा बेसिक पे और उससे जुड़े कंपोनेंट्स में होना जरूरी है। इसका मतलब है कि कंपनियां बेसिक सैलरी बढ़ाएंगी और बाकी अलाउंसेस (जैसे स्पेशल अलाउंस) को कम या मर्ज कर सकती हैं। इससे PF और ग्रेच्युटी जैसे फायदे बढ़ेंगे, लेकिन इन-हैंड सैलरी पर थोड़ा असर पड़ सकता है।

सैलरी स्ट्रक्चर के सरल होने के साथ एक और ट्रेंड तेजी से सामने आ रहा है—नया टैक्स रिजीम (New Tax Regime) अब डिफॉल्ट ऑप्शन बनता जा रहा है। यानी अगर कोई कर्मचारी खुद से पुराना टैक्स रिजीम नहीं चुनता, तो उसे अपने आप नए रिजीम में डाल दिया जाएगा। नए रिजीम में कम टैक्स रेट होते हैं, लेकिन ज्यादातर छूट और डिडक्शन खत्म हो जाते हैं, जिससे यह कई लोगों के लिए आसान और सीधा विकल्प बन जाता है।

पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है पुराना टैक्स रिजीम
हालांकि, पुराना टैक्स रिजीम पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। कुछ खास लोगों के लिए यह अभी भी फायदेमंद साबित हो सकता है। खासकर वे लोग जिनकी सालाना इनकम 10 से 30 लाख के बीच है, जो मेट्रो शहरों में रहते हैं, ज्यादा किराया देते हैं या होम लोन चला रहे हैं, और 80C व NPS जैसी स्कीम्स का पूरा फायदा उठाते हैं—उनके लिए पुराने रिजीम में टैक्स बचत ज्यादा हो सकती है।

दूसरी ओर, जिन लोगों के पास ज्यादा डिडक्शन नहीं हैं, या जिनकी सैलरी स्ट्रक्चर पहले से ही सिंपल है, उनके लिए नया टैक्स रिजीम ज्यादा बेहतर और झंझट-फ्री रहेगा। फ्रीलांसर और कंसल्टेंट जैसे लोग भी आमतौर पर नए रिजीम को पसंद करते हैं क्योंकि इसमें कागजी काम और प्लानिंग कम करनी पड़ती है।

कुल मिलाकर, आने वाले समय में सैलरी स्लिप और टैक्स सिस्टम दोनों ही ज्यादा सरल होने वाले हैं। अलाउंसेस कम होंगे, स्ट्रक्चर सीधा होगा और टैक्स कैलकुलेशन आसान। ऐसे में हर कर्मचारी को अपनी इनकम, खर्च और निवेश को ध्यान में रखते हुए यह तय करना होगा कि उसके लिए नया टैक्स रिजीम सही है या पुराना।

मोदी सरकार का बड़ा फैसला, कमर्शियल LPG का कोटा बढ़ाकर दोगुना किया

कमर्शियल LPG के दबाव को कम करने के लिए अब 10 दिन में मिलेगा PNG कनेक्शन

नई दिल्ली। सरकार ने गैस की सप्लाई को पटरी पर लाने के लिए तेज कदम उठाए हैं। खासकर शहरों में पाइप्ड गैस पहुंचाने और कमर्शियल LPG के दबाव को कम करने पर जोर दिया जा रहा है।

पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन (PESO) ने अपने सभी ऑफिसों को आदेश दिया है कि सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) के आवेदनों को महज 10 दिनों के अंदर निपटाया जाए। इससे पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) को जल्दी घर-घर पहुंचाने में मदद मिलेगी।

साथ ही सरकार ने बड़े शहरों और कस्बों में कमर्शियल LPG यूजर्स को PNG अपनाने की सलाह दी है। इसका मकसद है LPG पर बोझ को धीरे-धीरे कम करना। सरकार ने दावा किया है कि अभी भी घरेलू सिलेंडर की सप्लाई बिल्कुल ठीक चल रही है।

किसी डीलरशिप पर गैस खत्म होने की शिकायत नहीं आई। डिलीवरी का सिस्टम पहले जैसा ही है, ज्यादातर अब डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (DAC) से हो रही है। पहले वाली अफरा-तफरी और बार-बार बुकिंग अब काफी कम हो गई है।

सरकार ने कमर्शियल LPG की मात्रा को लगातार बढ़ाया है। पहले 20 फीसदी सप्लाई बहाल हुई, फिर 18 मार्च को PNG से जुड़े सुधारों के तहत 10 फीसदी और जोड़ा गया। 21 मार्च को एक बार में 20 फीसदी और क्लियर कर दिया। अब कुल मिलाकर कमर्शियल LPG 50 फीसदी तक पहुंच गई है।

इस बढ़ोतरी का फायदा सबसे पहले रेस्टोरेंट, ढाबों, होटलों, फैक्ट्री कैंटीन, फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स, डेयरी वाले, कम्युनिटी किचन और सरकारी सब्सिडाइज्ड खाने के ठिकानों को मिल रहा है। माइग्रेंट मजदूरों के लिए 5 किलो के सिलेंडर भी मुहैया कराए गए हैं।

करीब 20 राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में नई व्यवस्था लागू हो चुकी है। बाकी इलाकों में पब्लिक सेक्टर की तेल कंपनियां सप्लाई संभाल रही हैं। पिछले आठ दिनों में करीब 15,440 टन कमर्शियल LPG उठाई गई है।

स्कूल-कॉलेज और अस्पतालों को टॉप प्राथमिकता बनी हुई है। ये दोनों सेक्टर कुल कमर्शियल LPG का लगभग आधा हिस्सा इस्तेमाल कर रहे हैं। दुनिया भर में सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, लेकिन सरकार का कहना है कि घरेलू स्तर पर चीजें कंट्रोल में हैं और शहरों में PNG की ओर शिफ्ट होने की कोशिशें तेज हैं।

यूजीसी के नए नियमों के विरोध में प्रादेशिक सेवारत वैश्य संस्था का हल्ला बोल

प्रबुद्धजनों ने सवर्ण समाज व शैक्षणिक व्यवस्था के हितों के विरुद्ध बताया

कोटा। Protest against UGC rules: प्रादेशिक सेवारत वैश्य संस्था के तत्वावधान में रविवार को यूजीसी द्वारा लागू किए जा रहे नए नियमों के विरोध में जवाहर नगर क्षेत्र में विरोध प्रदर्शन और आपातकालीन बैठक का आयोजन किया गया।

संस्था द्वारा इस कानून को ‘काला कानून’ करार देते हुए इसके विरुद्ध उग्र आंदोलन की चेतावनी दी गई। कार्यक्रम की शुरुआत जवाहर नगर थाना क्षेत्र के इंदिरा विहार में एक विशाल सभा के साथ हुई। जिसमें बड़ी संख्या में समाज के प्रबुद्धजन और पदाधिकारी सम्मिलित हुए।

सभा के दौरान मुख्य वक्ता सुरेंद्र शर्मा, राजेंद्र सिंह, हुकुमचंद मंगल, मनोहर खंडेलवाल, अनिल तिवारी और विजय भारद्वाज ने अपने संबोधन में यूजीसी के नए प्रावधानों की कड़ी आलोचना की। वक्ताओं ने एकजुट होकर इस कानून का विरोध करने का आह्वान किया और इसे सवर्ण समाज व शैक्षणिक व्यवस्था के हितों के विरुद्ध बताया।

प्रादेशिक अध्यक्ष हुकुमचंद मंगल ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि संस्था इन विसंगतिपूर्ण नियमों को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं करेगी और इसके लिए चरणबद्ध तरीके से संघर्ष जारी रखा जाएगा। सभा के पश्चात समाज के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने जवाहर नगर थाने के सामने से मुख्य मार्ग होते हुए तलवंडी और सेंट्रल पब्लिक स्कूल तक एक विशाल जुलूस निकाला।

जुलूस के दौरान प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार और यूजीसी के विरुद्ध जमकर नारेबाजी की। “यूजीसी मुर्दाबाद” और “काला कानून वापस लो” जैसे नारों के साथ प्रदर्शनकारियों ने अपना रोष प्रकट किया।

यह जुलूस वापस जवाहर नगर थाने के सामने पहुँचा। जहाँ एक संक्षिप्त सभा के बाद कार्यक्रम का विसर्जन किया गया। कोषाध्यक्ष मुकेश गुप्ता ने कहा कि यदि सरकार ने इन नियमों पर पुनर्विचार नहीं किया, तो आगामी दिनों में आंदोलन को और अधिक तीव्र किया जाएगा।

विरोध प्रदर्शन और बैठक में कोषाध्यक्ष मुकेश कुमार गुप्ता, कैलाश चंद मंगल, राकेश गुप्ता, मनोज गुप्ता (पार्षद), रमेश गुप्ता, ओपी बंसल, एसके गुप्ता, बालकिशन शर्मा, रूपेंद्र खंडेलवाल, किशन चंद गुप्ता, रमेश विजय, बद्री प्रसाद गुप्ता, श्यामलाल गुप्ता, पुरुषोत्तम चित्तौड़ा, गोपाल लाल गर्ग और सत्यनारायण शर्मा सहित अनेक गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे।