नई दिल्ली। लिवाली और बिकवाली दोनों सुस्त बनी रहने से आज चना कीमतों में सीमित उतार-चढ़ाव देखा गया। पिछले उत्पादन में कमी के कारण पाइपलाइन में भी चने की उपलब्धता सीमित बनी हुई है। इस वजह से स्टॉकिस्ट चने की बिकवाली हाथ रोककर कर रहे हैं। एल नीनो के प्रभाव से इस वर्ष देशी चने की बिजाई कम रहने की संभावना है।
इसके चलते दाल मिलों को कच्चा माल आसानी से उपलब्ध नहीं हो रहा है। पिछले करीब एक माह में उत्पादक एवं वितरण मंडियों में देशी चने की आवक काफी कमजोर हुई है। आपूर्ति में कमी और मजबूत मांग के कारण पिछले 10 दिनों के दौरान चने के भाव में करीब 400 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी दर्ज की गई है।
आगे चलकर चने के भाव 8,000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। ऑस्ट्रेलिया में चने के भाव बढ़कर करीब 790 डॉलर प्रति टन के स्तर पर पहुंच गए हैं। इससे आयात पड़ताल महंगी बैठ रही है और घरेलू तथा आयातित चने के बीच डिस्पैरिटी भी बढ़ गई है।
ऐसे में आयातकों की सक्रियता सीमित रहने की संभावना है। वहीं, राजस्थान, महाराष्ट्र, कर्नाटक और मध्य प्रदेश की प्रमुख उत्पादक मंडियों में भी देशी चने की उपलब्धता सीमित बनी हुई है। कमजोर आवक और स्टॉकिस्टों की सीमित बिकवाली के कारण बाजार को फिलहाल मजबूत समर्थन मिल रहा है।
इन परिस्थितियों को देखते हुए नई फसल की आवक शुरू होने तक दिल्ली लॉरेंस रोड पर चने के भाव 9,000 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर तक पहुंचने की संभावना बन रही है।
इसके अलावा एल नीनो के प्रभाव से महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक सहित प्रमुख चना उत्पादक क्षेत्रों में आगामी फसल पर भी असर पड़ने की आशंका है। यदि बिजाई और उत्पादकता दोनों प्रभावित रहती हैं, तो अगले सीजन में भी चने की उपलब्धता सीमित रह सकती है, जिससे बाजार भाव पर तेजी का दबाव बने रहने की संभावना है।

