नगर निगम चुनाव: इस बार आसान नहीं होगा कोटा में कांग्रेस का बोर्ड बनना

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-दिनेश माहेश्वरी-

कोटा। जैसे-जैसे मतदान की तारीख नजदीक आ रही है, नगर निकाय चुनाव की सरगर्मियां तर्ज हो गई हैं। कोटा नगर निगम की कमान किसके हाथ में होगी। इसको लेकर राजनीतिक हलकों में अलग-अलग दावे किये जा रहे हैं।

राजनितिक दिग्गज इस बार बीजेपी का बोर्ड बनने की बात कह रहे हैं, तो कुछ कांग्रेस का। दोनों पार्टियों में गुटबाजी है। इसका खामियाजा दोनों दलों को उठाना पड़ता है। इस बार लॉटरी सिस्टम ने कई दिग्गज नेताओं के हाथ से चुनाव की कमान छीन ली है। ऐसे में बीजेपी और कांग्रेस, दोनों के लिए मैदान में अपने विश्वसनीय उम्मीदवारों को उतारना बड़ी चुनौती बन गया है।

नगर निकाय चुनाव में इस बार बीजेपी और कांग्रेस, दोनों के लिए ही मुकाबला आसान नहीं होगा। जहां एक ओर कोटा दक्षिण क्षेत्र बीजेपी का गढ़ माना जाता है, वहीं कोटा उत्तर में कांग्रेस अधिकतर सीटों पर जीत हासिल करती आई है। लेकिन बीजेपी के दिग्गज नेता रहे प्रहलाद गुंजल के कांग्रेस में शामिल होने के बाद अब कोटा उत्तर में बीजेपी के पास कोई बड़ा चेहरा नजर नहीं आ रहा है।

वहीं, कोटा उत्तर में पूर्व मंत्री शांति धारीवाल की पकड़ हमेशा से मजबूत रही है। हालांकि, एक नगर निगम होने के बाद अब सभी की निगाहें कोटा दक्षिण पर टिकी हैं। यहां बीजेपी एक ओर चुनाव जीतने के लिए पूरी ताकत लगाएगी, वहीं प्रहलाद गुंजल बीजेपी के चुनावी समीकरण को बिगाड़ने की कोशिश कर सकते हैं।

कोटा नगर निगम के 100 वार्डों के लिए 11 सितंबर को मतदान कराया जाएगा। सभी चुनावों के परिणाम 14 सितंबर को घोषित किए जाएंगे। इसके बाद मेयर, नगर पालिका और नगर परिषद अध्यक्ष का चुनाव 21 सितंबर को होगा। वहीं, नगर निकायों के उपाध्यक्ष और उपमहापौर का चुनाव 22 सितंबर को कराया जाएगा।

इस बार कोटा नगर निगम के 100 वार्डों के लिए 8 लाख 24 हजार 491 मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। इनमें 4 लाख 18 हजार पुरुष और 4 लाख 50 हजार महिला मतदाता शामिल हैं।

चुनाव के लिए 721 मतदान केंद्र बनाए जाएंगे। इस बार मेयर का पद ओबीसी महिला वर्ग के लिए आरक्षित किया गया है। कोटा नगर निगम के इतिहास में यह चौथी बार होगा, जब शहर की कमान किसी महिला के हाथ में होगी।

हाल ही में कोटा उत्तर और कोटा दक्षिण नगर निगम का कार्यकाल समाप्त हुआ है। दोनों निगमों में कांग्रेस का बोर्ड था। कोटा उत्तर में महिला मेयर पद पर थी। परिसीमन के बाद अब कोटा उत्तर और कोटा दक्षिण नगर निगम को एक कर दिया गया है। नए कोटा नगर निगम में कुल 100 वार्ड होंगे।

आरक्षित सीटों की बात करें तो 100 वार्डों में 20 सीटें ओबीसी के लिए आरक्षित हैं। इनमें 13 ओबीसी ओपन और 7 ओबीसी महिला सीटें हैं। अनुसूचित जाति के लिए कुल 18 सीटें आरक्षित हैं, जिनमें 12 एससी ओपन और 6 एससी महिला सीटें शामिल हैं।

अनुसूचित जनजाति के लिए 5 सीटें आरक्षित हैं। इनमें 3 एसटी ओपन और 2 एसटी महिला सीटें हैं। वहीं, 57 सीटें अनारक्षित रखी गई हैं। इनमें 38 अनारक्षित ओपन और 19 अनारक्षित महिला सीटें शामिल हैं।

पिछले नगर निगम चुनाव में कोटा उत्तर में भाजपा की अंदरूनी गुटबाजी का असर साफ दिखाई दिया था। 70 वार्डों में भाजपा सिर्फ 14 सीटें जीत सकी थी, जबकि कांग्रेस ने 47 सीटों पर कब्जा किया था। 8 वार्डों में निर्दलीय और एक वार्ड में अन्य प्रत्याशी विजयी रहा था।

कांग्रेस ने बहुमत के साथ कोटा उत्तर में अपना बोर्ड बनाया था। वहीं, कोटा दक्षिण के 80 वार्डों में भाजपा और कांग्रेस दोनों को 36-36 सीटें मिली थीं, जबकि 8 निर्दलीय पार्षद चुने गए थे। क्रॉस वोटिंग के बाद कांग्रेस ने यहां भी अपना बोर्ड बना लिया था।