कोटा। रिद्धि-सिद्धि नगर, कुन्हाड़ी स्थित चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में मंगलवार को धर्मसभा से पूर्व मुनिश्री का मंगल प्रवेश हुआ। श्रद्धालुओं ने मंगल कलश एवं धार्मिक विधि-विधान के साथ मुनिसंघ का स्वागत किया।
प्रवचन में मुनि विवर्धनसागर महाराज ने काल द्रव्य की व्याख्या करते हुए कहा कि जो समय का ज्ञान कराता है, वह काल है। घड़ी, पहर, घंटा, दिन, पक्ष, माह और वर्ष आदि व्यवहार काल के रूप हैं। भूतकाल बीत चुका समय है, भविष्य आने वाला और वर्तमान जो समय चल रहा है, वह वर्तमान काल है।
मुनिश्री ने कहा कि प्रारंभिक तीन काल भोगभूमि के होते हैं, जहां मनुष्य की आवश्यकताओं की पूर्ति कल्पवृक्षों के माध्यम से होती है। यहां धर्म साधना का अवसर नहीं होता। चौथे काल से कर्मभूमि का प्रारंभ माना गया है। इसी कर्मभूमि में तीर्थंकरों सहित शलाका पुरुषों का जन्म और मोक्ष होता है।
उन्होंने बताया कि जैन दर्शन में कालाणु लोकाकाश के एक-एक प्रदेश में स्थित माने गए हैं। धर्म, अधर्म और आकाश द्रव्य अखंड हैं, जबकि काल द्रव्य पृथक-पृथक माना गया है। काल द्रव्य को समझना संसार में होने वाले परिवर्तन की प्रक्रिया को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
मंदिर अध्यक्ष राजेंद्र गोधा एवं मंत्री पंकज खटोड़ ने श्रद्धालुओं से धर्मसभा का लाभ लेने का आह्वान किया। इस अवसर पर निर्मल अजमेरा, महावीर सदारी, रमेश साकुनिया, रामबाबू जैन, टीकम पाटनी, पुष्प लुहाड़िया, प्रेमचंद दुगेरिया सहित महाराष्ट्र से आए गुरु भक्त एवं समाजजन उपस्थित रहे।

