कोटा। रिद्धि-सिद्धि नगर, कुन्हाड़ी स्थित श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में गणधर मुनि विवर्धनसागर महाराज ने बुधवार को अपने प्रवचन में कहा कि भोग-विलास की चीजें हमेशा साथ नहीं रहतीं। सच्चा सुख चीजों का असली स्वरूप समझने से ही मिलता है।
गणधर श्री ने द्रव्य संग्रह ग्रंथ के आधार पर बताया कि हर प्राणी अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहा है। यह राज्य मेरा है, जैसी सोच असली अस्तित्व नहीं है। उन्होंने कहा कि हम सिर्फ़ दुनियावी जीवन को देखते हैं और जीवन को भोग-विलास तक सीमित कर लेते हैं। इसी वजह से मुश्किलें आने पर दुखी हो जाते हैं। धन और मकान किसी की शरण नहीं हैं। आत्मा हमेशा रहने वाली है, जबकि शरीर और परिस्थितियाँ बदलती रहती हैं।
मंदिर अध्यक्ष राजेन्द्र गोधा और मंत्री पंकज खटोड़ ने बताया कि चित्र अनावरण, दीप प्रज्ज्वलन और पाद प्रक्षालन समिति सदस्यों और बाहर से आए भक्तों ने किया। बसंती लाल दोषी, टीकम पाटनी, जम्बू बज , रामबाबू जैन, महेंद्र गोधा, प्रदीप पापड़ीवाल, नितेश खटोड़, महावीर वेद, प्रकाश पहाड़िया और रमेश बड़जात्या सहित कई लोग मौजूद रहे।

