कच्चा तेल फिर 100 डॉलर के पार, पेट्रोल-डीजल के महंगा होने का खतरा बढ़ा

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नई दिल्ली। कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तीसरे दिन भी तेजी देखने को मिली है। ईरान के साथ युद्ध के बीच अमेरिका मिडिल ईस्ट में एक और एयरक्राफ्ट कैरियर ग्रुप भेजने पर विचार कर रहा है। इससे क्षेत्र में तनाव बढ़ने और तेल की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है। ब्रेंट क्रूड अब 102.61 डॉलर और WTI 93.12 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है।

पिछले कारोबारी सत्र में WTI में करीब 3 फीसदी की तेजी आई थी। ऐसे में एक बार फिर पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने की आशंका बढ़ गई है। फिलहाल राहत की बात यह है कि आज 2 अक्टूबर को भारत की ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल के रेट नहीं बढ़ाई हैं। दिल्ली में आज भी पेट्रोल 112.12 और डीजल 95.20 रुपये लीटर पर स्थिर है। आखिरी बार दाम मई 2026 में बढ़े थे।

अगर मध्य पूर्व में तनाव बढ़ता है और तेल की सप्लाई या होर्मुज मार्ग प्रभावित होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत और बढ़ सकती है। इसका असर आगे चलकर भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों और महंगाई पर भी पड़ सकता है। हालांकि, घरेलू कीमतों पर असर इस बात पर निर्भर करेगा कि अंतरराष्ट्रीय कीमतें कितने समय तक ऊंची रहती हैं और भारतीय तेल कंपनियां कीमतों में कितना बदलाव करती हैं।

ब्लूमबर्ग ने एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से बताया है कि पेंटागन फारस की खाड़ी में एक और एयरक्राफ्ट कैरियर और करीब 10,000 नौसैनिकों व मरीन सैनिकों को भेज सकता है। इससे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई बढ़ाने के विकल्प बढ़ जाएंगे।

बाजार को सबसे ज्यादा चिंता इस बात की है कि ईरान जवाबी कार्रवाई में अमेरिकी ठिकानों या मध्य पूर्व के ऊर्जा ढांचे को निशाना बना सकता है। इससे तेल की सप्लाई पर बड़ा असर पड़ सकता है।

होर्मुज में टैंकर पर हमला
तनाव उस समय और बढ़ गया जब यूके मैरिटाइम ट्रेड ऑपरेशंस को सूचना मिली कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे एक टैंकर को किसी अज्ञात प्रोजेक्टाइल ने निशाना बनाया। फिलहाल नुकसान की वास्तविक स्थिति और पर्यावरण पर इसके असर की जानकारी स्पष्ट नहीं है। होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऑयल रूट्स में से एक है। यहां किसी बड़े व्यवधान का असर वैश्विक तेल कीमतों पर पड़ सकता है।

ईरान से तेल निर्यात पर भी असर
ब्लूमबर्ग की खबर के मुताबिक, सितंबर में ईरान ने टैंकरों पर लगभग कोई कच्चा तेल लोड नहीं किया। इसे अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी के कारण ईरान की ग्लोबल एनर्जी मार्केट तक पहुंच प्रभावित होने का संकेत माना जा रहा है। हालांकि, हाल के दिनों में मध्य पूर्व से तेल की सप्लाई युद्ध से पहले के स्तर के करीब पहुंचने के संकेत मिले थे। इसी वजह से बाजार में कुछ राहत आई थी, लेकिन अब सैन्य तनाव फिर बढ़ने से उस सुधार पर खतरा मंडरा रहा है।