शहर में आए दिन शटडाउन को केईडीएल का सबसे बड़ा घोटाला कहा
कोटा। ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने शनिवार को कोटा शहर के विभिन्न ग्रिड सब-स्टेशन (जीएसएस), विद्युत लाइनों और ट्रांसफार्मरों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान बिजली वितरण का कार्य संभाल रही फ्रेंचाइजी कंपनी केईडीएल की गंभीर लापरवाही और मेंटेनेंस की बदहाली उजागर होने पर मंत्री ने मीडिया के सामने अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई।
इतना ही नहीं उन्होंने शहर में मेंटिनेंस के नाम पर अलग एरिया में आए दिन होने वाले शटडाउन को केईडीएल का सबसे बड़ा घोटाला भी कहा। उन्होंने पूरे मामले की जयपुर स्तर से उच्च स्तरीय समिति गठित कर जांच कराने तथा कंपनी से सरकारी संपत्तियों को हुए नुकसान का खर्च वसूलने के स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं।
निरीक्षण के दौरान ऊर्जा मंत्री के साथ स्थानीय जनप्रतिनिधि और बिजली विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इनमें विधायक संदीप शर्मा, भाजपा शहर जिलाध्यक्ष राकेश जैन, महापौर अनुसूया गोस्वामी, उपमहापौर विवेक राजवंशी, पार्षद गोपाल राम मंडा शामिल थे।
वहीं प्रशासनिक व विभागीय अधिकारियों में केईडीएल के टेक्निकल हेड कोड़ी वेंकटेशन, पीआरओ राजेश पटौदी, सीईओ मनीष अरोड़ा, जेवीवीएनएल के अधिशासी अभियंता आशीष जौहरी और टीए टू चीफ इंजीनियर हेमंत चतुर्वेदी, एईएन रविंद्र गौतम, जेईएन हिमांशु भी साथ रहे।
मंत्री ने इंद्र विहार, संतोषी नगर, जवाहर नगर 33/11 केवी जीएसएस, तीन बत्ती सर्किल और वसंत विहार सहित विभिन्न इलाकों में बिजली ढांचे की स्थिति का गहन मुआयना किया। निरीक्षण में सामने आई अव्यवस्थाओं पर गहरा रोष जताते हुए ऊर्जा मंत्री ने कहा कि सरकार द्वारा केईडीएल को सौंपे गए 38 जीएसएस रखरखाव के अभाव में पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं।
परिसरों में झाड़-झंखाड़ उग आए हैं, साफ-सफाई का अभाव है और भवनों का समय पर पेंट तक नहीं कराया गया है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि ट्रांसफार्मरों पर सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं हैं और न ही नियमित सेफ्टी ऑडिट कराई जा रही है। जिससे हादसों की आशंका बनी हुई है।
मंत्री ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि कंपनी ने पिछले 10 वर्षों में राजस्थान सरकार की परिसंपत्तियों की बेसिक देखभाल तक नहीं की और उन्हें बर्बादी की कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है, जो बेहद शर्मसार करने वाला विषय है।
ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने कंपनी द्वारा विजिलेंस चेकिंग रिपोर्ट वीसीआर के नाम पर की जा रही गड़बड़ियों पर भी कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि कंपनी द्वारा गलत वीसीआर भरी जा रही हैं और उन्हें ऑनलाइन दर्ज किए बिना गलत तरीके से सेटल किया जा रहा है। जबकि केईडीएल के पास इसका कोई कानूनी अधिकार नहीं है।
वीसीआर सेटलमेंट का अधिकार केवल जेवीवीएनएल के अधिशासी अभियंता के पास है। इस मामले में कंपनी को पहले ही नोटिस जारी किया जा चुका है। जिस पर कार्रवाई विचाराधीन है।
इसके अलावा खुले पड़े बिजली के पैनलों को देखकर मंत्री ने अधिकारियों की जमकर क्लास ली और साफ किया कि सेवाएं बेहतर करने के नाम पर जिम्मेदारी पाने वाली कंपनी अपनी बुनियादी जिम्मेदारियों में पूरी तरह विफल रही है।
ऊर्जा मंत्री ने घोषणा की कि कोटा में केईडीएल के कामकाज के साथ-साथ राज्य के भरतपुर और बीकानेर में कार्यरत फ्रेंचाइजी कंपनियों के कामकाज की भी जयपुर से गठित विशेष टीम द्वारा उच्च स्तरीय जांच कराई जाएगी।
उन्होंने आश्वस्त किया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी पाई जाने वाली कंपनी के खिलाफ नियमानुसार सख्त कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही पिछले 10 वर्षों में राजस्थान सरकार की परिसंपत्तियों को पहुंचाए गए संपूर्ण नुकसान की शत-प्रतिशत राशि केईडीएल कंपनी से ही वसूल की जाएगी।

