नई दिल्ली। Stock Market Closed: भारतीय शेयर बाजार एक बार फिर से रिकवरी के ट्रैक पर लौट रहा है। सप्ताह के चौथे दिन गुरुवार को सेंसेक्स 900 अंक से ज्यादा उछला और यह 74 हजार अंक के स्तर को एक बार फिर पार कर लिया। इस तेजी की वजह से निवेशकों को 5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का मुनाफा हो गया।
सेंसेक्स की तरह निफ्टी ने भी 250 अंकों की लंबी छलांग लगाई और यह 24 हजार अंक के करीब जा पहुंचा। कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 905.01 अंक उछलकर 74,151.04, एनएसई निफ्टी 237.90 अंक की बढ़त के साथ 22,936.75 अंक पर बंद हुआ। आइए जानते हैं कि बाजार में तेजी क्यों आई है?
अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने अपनी प्रमुख ब्याज दर को करीब 3.9 फीसदी पर स्थिर रखा। इस वजह से निवेशकों का बाजार पर भरोसा बढ़ा है। बता दें कि फेड चेयरमैन केविन वॉर्श ने संकेत दिया कि मौजूदा नीतियों का असर दिखने लगा है। हालांकि, महंगाई का दबाव अभी बना हुआ है।
बीते कुछ दिनों बाजार में आई बड़ी गिरावट के बाद कई सेक्टरों और शेयरों के वैल्यूएशन पहले की तुलना में आकर्षक हुए हैं। इससे निवेशकों का उत्साह बढ़ा है और खरीदारी कर रहे हैं।
LTCG टैक्स पर राहत की उम्मीद: भारतीय बाजार में तेजी की एक वजह लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन यानी LTCG टैक्स में संभावित बदलाव की उम्मीद भी है। दरअसल, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इसी महीने कहा था कि निवेशकों की ओर से कई सुझाव आए हैं और LTCG और सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स को लेकर चर्चा भी हो रही है।
उन्होंने कहा था कि इस विषय पर चर्चा होना अच्छा है और मैं इस पर आने वाले विचारों को ध्यान से सुनूंगी। इसके बाद निवेशकों के बीच टैक्स में राहत की संभावना को लेकर उम्मीद बढ़ी है। ब्रोकरेज फर्म जेफरीज के मुताबिक, LTCG टैक्स में संभावित कटौती से विदेशी निवेशकों को भारतीय बाजार में दोबारा निवेश करने का प्रोत्साहन मिल सकता है।
इसके अलावा, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की खरीदारी से भी बाजार को सहारा मिला है। एनएसई आंकड़ों के मुताबिक बीते बुधवार को निवेशकों ने भारतीय शेयरों में करीब 872 करोड़ रुपये की खरीदारी की। इससे पहले मंगलवार को उन्होंने 4,198 करोड़ रुपये और शुक्रवार को 2,098 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे थे।
वहीं, अमेरिका के 10 साल के ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड 5 फीसदी के अहम स्तर से नीचे आ गई। इसके अलावा, 30 साल के बॉन्ड की यील्ड घटकर करीब 5.3 फीसदी और दो साल के बॉन्ड की यील्ड 4.69 फीसदी पर है। इस गिरावट से शेयर बाजार को समर्थन मिल सकता है क्योंकि इससे निवेशकों के लिए इक्विटी की तुलना में बॉन्ड का आकर्षण कुछ कम हो सकता है।

