अब नहीं चलेगी बैंकों व NBFC की मनमानी, एक ही नियम से तय होंगी ब्याज दर:

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नई दिल्ली। कर्ज की ब्याज दरें तय करने में अब बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) और अन्य सभी विनियमित वित्तीय संस्थानों की मनमानी नहीं चलेगी। एक ही नियम से इन संस्थानों में अब कर्ज की ब्याज दरें तय होंगी। इसके लिए आरबीआई ने नियमों में एकरूपता और मानकीकरण लाने का प्रस्ताव पेश किया है।

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को चालू वित्त वर्ष की तीसरी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा पेश करते हुए कहा, इस कदम का उद्देश्य कर्जदारों के लिए कर्ज लागत को अधिक पारदर्शी और सुसंगत बनाना है। इसका मसौदा सार्वजनिक परामर्श के लिए जल्द जारी किया जाएगा।

मौजूदा व्यवस्था में संस्थान ब्याज दरें तय करने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाते हैं। उदाहरण के लिए, बैंक एमसीएलआर और ईबीएलआर जैसे मानकों पर काम करते हैं, जबकि एनबीएफसी एवं अन्य संस्थानों के अपने अलग नियम हैं। इससे ग्राहकों के लिए विभिन्न संस्थानों की ब्याज दरों की सटीक तुलना करना मुश्किल होता है।

ग्राहकों को ऐसे होगा लाभ

  • सभी संस्थानों में ब्याज तय करने के नियम व गणना के दिन समान होने से कर्ज प्रक्रिया में छिपी शर्तें खत्म होंगी और पारदर्शिता बढ़ेगी।
  • उपभोक्ता ब्याज दरों की आसानी से तुलना कर सही संस्थान से कर्ज ले सकेंगे। 
  • रेपो रेट में कटौती का सीधा फायदा ग्राहकों तक पहुंचेगा। री-सेट तिथियों के मानकीकरण से फ्लोटिंग रेट लोन की दरें समय पर घटेंगी।
  • एनबीएफसी की ओर से वसूले जाने वाले मनमाने ब्याज या जुर्माने की गुंजाइश खत्म होगी, जिससे ग्राहक अधिकारों को मजबूती मिलेगी।

22 साल बाद फिर से मिलेंगे सहकारी बैंक खोलने के लाइसेंस
शहरी इलाकों में करीब 22 साल के बाद फिर से नए सहकारी बैंक खुल सकेंगे। इसके लिए आरबीआई ने ऑन-टैप (किसी भी समय आवेदन की खुली व्यवस्था) आधार पर दोबारा नए लाइसेंस जारी करने का फैसला किया है।

आरबीआई गवर्नर ने कहा, हितधारकों से मिले सुझावों की समीक्षा के बाद नए लाइसेंस जारी करने पर 2004 से लगी रोक हटाने का फैसला किया गया है। इस संबंध में मसौदा दिशानिर्देश जल्द जारी होंगे।