Oil Seeds: इस बार तिलहनी फसलों का बिजाई क्षेत्र गत वर्ष से एक लाख हेक्टेयर पीछे

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सोयाबीन का रकबा 1.23 लाख, अरंडी का 1.18 लाख हेक्टेयर घट गया

नई दिल्ली। खरीफ कालीन तिलहन फसलों की बिजाई अब बिल्कुल अंतिम चरण में पहुंच गई है जबकि इसका कुल रकबा गत वर्ष से 1 लाख हेक्टेयर पीछे चल रहा है। सोयाबीन का उत्पादन क्षेत्र 1.23 लाख हेक्टेयर तथा अरंडी का बिजाई क्षेत्र 1.18 लाख हेक्टेयर घट गया है। मूंगफली का रकबा भी कुछ पीछे है।

केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के नवीनतम साप्ताहिक आंकड़ों से पता चलता है कि चालू वर्ष के दौरान 28 अगस्त 2026 तक खरीफ कालीन तिलहन फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र 190.45 लाख हेक्टेयर पर अटक गया जो पिछले साल की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 191.45 लाख हेक्टेयर से 1 लाख हेक्टेयर कम है। अल नीनो के प्रभाव एवं कमजोर मानसून को देखे हुए तिलहन फसलों के इस बिजाई क्षेत्र को काफी हद तक संतोषजनक माना जा रहा है।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार पिछले साल की तुलना में चालू खरीफ सीजन के दौरान देश में सोयाबीन का उत्पादन क्षेत्र 122.95 लाख हेक्टेयर से घटकर 121.72 लाख हेक्टेयर, अरंडी का बिजाई क्षेत्र 8.38 लाख हेक्टेयर से गिरकर 7.20 लाख हेक्टेयर तथा मूंगफली का क्षेत्रफल 49.71 लाख हेक्टेयर से फिसलकर 49.09 लाख हेक्टेयर रह गया लेकिन तिल का रकबा 9.43 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 10.84 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया। सूरजमुखी की बिजाई भी कुछ बढ़ी है। फसल की हालत सामान्य बताई जा रही है।

गुजरात, राजस्थान, कर्नाटक एवं तेलंगाना जैसे शीर्ष उत्पादक राज्यों में मूंगफली के बिजाई क्षेत्र में मिश्रित रुख देखा गया। यही स्थिति सोयाबीन की भी है जिसका बिजाई क्षेत्र मध्य प्रदेश में बढ़ा है जबकि महाराष्ट्र में घट गया है। तिल की खेती में इस बार किसानों में विशेष दिलचस्पी देखी जा रही है।

सोयाबीन की बिजाई इस बार कुछ देर से शुरू हुई इसलिए नए माल की जोरदार आवक में कुछ विलम्ब हो सकता है। तिलहन फसलों का बाजार भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य से ऊंचा चल रहा है।