नई दिल्ली। Stock Market this week :अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने रूस और ईरान पर सख्ती बढ़ाने वाले नए कानून पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इस कानून के बाद रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदने वाले भारत पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगने का खतरा पैदा हो गया है।
बाजार के जानकारों के मुताबिक, इस हफ्ते शेयर बाजार में निवेशकों की नजर इस कानून के संभावित असर पर रहेगी। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, दुनिया भर के शेयर बाजारों का रुख और विदेशी निवेशकों की खरीद-बिक्री भी बाजार की चाल के लिए अहम रहेगी।
व्हाइट हाउस के मुताबिक, ट्रंप ने शुक्रवार, 18 सितंबर को H.R. 5334 पर हस्ताक्षर किए। इस कानून का नाम ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ है। इसके जरिए रूस पर लगाए जाने वाले प्रतिबंध, टैरिफ और दूसरी पाबंदियों का दायरा बढ़ाया गया है। ईरान पर पहले से लागू प्रतिबंधों को भी आगे बढ़ाया गया है।
अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने इस कानून को बुधवार को मंजूरी दी थी। इसके तहत रूस के नेतृत्व, उसके ऊर्जा क्षेत्र, रक्षा उद्योग में उसका साथ देने वालों और ‘शैडो फ्लीट’ के नाम से पहचाने जाने वाले जहाजों पर भी कार्रवाई के नियम शामिल हैं।
इस कानून के तहत रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों के सामान पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाया जा सकता है। भारत और चीन भी ऐसे देशों में शामिल हैं।
कानून के मुताबिक, इसके लागू होने से पहले के 12 महीनों में रूस से सबसे ज्यादा कच्चा तेल या प्राकृतिक गैस खरीदने वाले पांच देशों के सामान पर यह शुल्क लगाया जा सकेगा।
राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के 30 दिन बाद कानून प्रभावी हो जाएगा। हालांकि, इसे लागू करने को लेकर ट्रंप के पास काफी अधिकार हैं। वह तय करेंगे कि किन देशों पर टैरिफ लगाया जाए, इसकी दर कितनी हो और प्रतिबंधों में किसी तरह की छूट दी जाए या नहीं।
एनरिच मनी के CEO पोनमुदी आर का कहना है कि रूस से भारत की बड़ी तेल खरीद को देखते हुए देश इस कानून के दायरे में आ सकता है। उनके मुताबिक, इससे व्यापार के मोर्चे पर भारतीय बाजार के लिए अनिश्चितता बढ़ी है।
बीते हफ्ते शेयर बाजार में दबाव देखने को मिला। BSE सेंसेक्स 486.8 अंक यानी 0.65 फीसदी गिरा, जबकि NSE निफ्टी 51.7 अंक यानी 0.22 फीसदी नीचे आया।
सितंबर में अब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) भारतीय शेयर बाजार से 20,974 करोड़ रुपये निकाल चुके हैं। कच्चे तेल के बढ़ते दाम, अमेरिका में ज्यादा ब्याज दरें, बॉन्ड यील्ड और दुनिया भर में बनी अनिश्चितता को इसकी बड़ी वजहों में गिना जा रहा है।
रेलिगेयर ब्रोकिंग के SVP (रिसर्च) अजित मिश्रा के मुताबिक, आने वाले दिनों में अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड पर बाजार की नजर रहेगी।
वहीं, स्वस्तिका इन्वेस्टमार्ट के रिसर्च हेड संतोष मीना के अनुसार भारत, अमेरिका और यूरोजोन के फ्लैश PMI आंकड़े और अमेरिका से आने वाली श्रम बाजार की रिपोर्टें भी बाजार के लिए अहम होंगी। घरेलू बाजार में 24 सितंबर को NSE की लिस्टिंग पर भी निवेशकों की नजर रहेगी।
NSE का 22,569 करोड़ रुपये का IPO शुक्रवार को बोली के दूसरे दिन ही पूरी तरह सब्सक्राइब हो गया। इस इश्यू को गैर-संस्थागत निवेशकों और योग्य संस्थागत खरीदारों (QIB) की ओर से अच्छी प्रतिक्रिया मिली।

