Kota Dussehra: मलखंभ पर 8 से 18 वर्ष के बच्चों ने दिखाया संतुलन का बेजोड़ संगम

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कोटा। Kota Dussehra 2026: कोटा दशहरा मेले के अंतर्गत शनिवार को विजयश्री रंगमंच पर परंपरागत भारतीय खेल मलखंभ की प्राचीन और रोमांचक कला का जीवंत प्रदर्शन देखने को मिला। फिसलन भरे और ऊर्ध्वाधर खंभे पर बच्चों द्वारा दिखाए गए अद्भुत योग और पहलवानी के करतबों ने मैदान में मौजूद हर दर्शक को कौतूहल और आश्चर्य से भर दिया।

खिलाड़ियों ने लकड़ी के 9 फीट ऊंचे खंभे पर अकल्पनीय संतुलन और ताकत का परिचय देते हुए शानदार पिरामिड बनाए, जिसे देखकर हर कोई दंग रह गया। कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ महापौर अनुसुइया गोस्वामी और उपमहापौर विवेक राजवंशी द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।

​पिरामिड का रोमांचक प्रदर्शन
हरदौल व्यायामशाला ​मलखंभ एवं योग एकेडमी के कुशल प्रशिक्षक गोपाल सिसोदिया के मार्गदर्शन में 8 से 18 वर्ष आयु वर्ग के 30 बच्चों के दल ने ऐतिहासिक प्रस्तुतियां दीं। इस दौरान बच्चों ने पश्चिमोत्तानासन, नटराज आसन, चक्रासन, एक हस्त मयूरासन, पद्मासन, वृक्षासन, शीर्षासन और धनुरासन जैसे कठिन और विशिष्ट आसनों का प्रदर्शन किया। शरद पूर्णिमा के चांद सी चमकती इन कलाओं ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। बच्चों ने तेजी से खंभे के शीर्ष पर पहुंचकर कभी एक पैर पर तो कभी उल्टे खड़े होकर ऐसा संतुलन दिखाया कि पूरा विजयश्री रंगमंच तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

एकल प्रस्तुतियों ने मनमोहा
​”एकल प्रस्तुतियों के दौरान बच्चों ने हाथों में मशाल लेकर और कपाल पर दीपक रखकर आसन किए, जिसे देखकर दर्शक स्तब्ध रह गए। मलखंभ पर एक पैर से खड़े होकर किए गए वृक्षासन के दौरान पूरा प्रांगण ‘जय भवानी, जय शिवाजी’ के नारों से गूंज उठा।”

​सांस्कृतिक धुनों और शौर्य गीतों से सजी शाम
​इस अनूठे प्रदर्शन को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए पृष्ठभूमि में ‘रक्त चरित्र’ जैसी फिल्मों के जोशीले गीत बजाए गए। इसके साथ ही, दुर्गा चालीसा की पंक्तियाँ—“जय जय जय दुर्गे… महिषासुर मर्दिनी…” ने इन योग क्रियाओं और साहसिक करतबों में अद्भुत शौर्य और ऊर्जा भर दी।