नई दिल्ली। देश में अब E20 पेट्रोल की क्वालिटी पर सवाल उठने लगे हैं। ऑटोमोबाइल कंपनियों की संस्था सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) का कहना है कि खराब क्वालिटी वाले E20 पेट्रोल की वजह से गाड़ियों के कई जरूरी पार्ट्स तेजी से खराब हो रहे हैं।
संस्था के मुताबिक, पेट्रोल में क्लोराइड और नमी की मात्रा तय सीमा से कहीं ज्यादा मिल रही है। इससे इंजन और फ्यूल सिस्टम के पार्ट्स में जंग लग रही है और वे जल्दी खराब हो रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने भी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) को पेट्रोल पंपों पर फ्यूल की जांच और सख्त करने के निर्देश दिए हैं।
SIAM का कहना है कि सबसे ज्यादा असर फ्यूल इंजेक्टर, फ्यूल पंप, EGR वाल्व, एग्जॉस्ट सिस्टम और उन पार्ट्स पर पड़ रहा है जो सीधे पेट्रोल या इंजन से निकलने वाली गैसों के संपर्क में रहते हैं। इन पार्ट्स के खराब होने के मामले पहले के मुकाबले काफी बढ़ गए हैं।
संस्था के मुताबिक, जांच में पता चला कि पेट्रोल में क्लोराइड की मात्रा ज्यादा होने की वजह से पार्ट्स में जंग लग रही है। धीरे-धीरे यह जंग पार्ट्स को कमजोर कर देती है और वे समय से पहले खराब हो जाते हैं।
जांच में क्या मिला
SIAM के मुताबिक, गाड़ियों के फ्यूल टैंक से लिए गए कुछ सैंपल में क्लोराइड का स्तर 500 mg/kg तक मिला। वहीं, पेट्रोल पंपों से लिए गए सैंपल में यह 350 mg/kg तक पाया गया। संस्था का कहना है कि यह स्तर इंजन और एग्जॉस्ट सिस्टम के लिए नुकसानदायक है।
सिर्फ क्लोराइड ही नहीं, नमी भी बनी परेशानी
SIAM ने यह भी कहा है कि कई जगहों पर E20 पेट्रोल में नमी की मात्रा भी तय सीमा से काफी ज्यादा मिली। कुछ सैंपल में नमी 10,000 mg/kg तक पहुंच गई, जबकि इसकी तय सीमा 3,000 mg/kg है। ज्यादा नमी होने पर पेट्रोल और इथेनॉल अलग-अलग परतों में बंट सकते हैं। ऐसे में पेट्रोल भरवाने के तुरंत बाद भी गाड़ी बंद पड़ सकती है।
SIAM ने सरकार से क्या मांग की है
ऑटो उद्योग की संस्था चाहती है कि सरकार फ्यूल में क्लोराइड की तय सीमा अनिवार्य करे और इसे भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के नियमों में शामिल करे। SIAM का सुझाव है कि E20 और E85 पेट्रोल में क्लोराइड की मात्रा 1 mg/kg से कम होनी चाहिए। साथ ही, ब्लेंडिंग में इस्तेमाल होने वाले इथेनॉल में भी इसकी सीमा तय की जाए। संस्था का कहना है कि वह पिछले दो साल से यह मांग कर रही है, लेकिन अभी तक नियमों में बदलाव नहीं हुआ है।
लोगों पर क्या असर पड़ सकता है
अगर पेट्रोल की क्वालिटी में जल्द सुधार नहीं हुआ तो गाड़ियों के पार्ट्स जल्दी खराब हो सकते हैं। इससे लोगों का मेंटेनेंस खर्च बढ़ेगा और बार-बार सर्विस सेंटर जाना पड़ सकता है। SIAM का कहना है कि अगर ऐसी शिकायतें बढ़ती रहीं तो लोगों का E20 पेट्रोल पर भरोसा भी कमजोर पड़ सकता है। इसलिए संस्था ने सरकार से पूरे देश में पेट्रोल की क्वालिटी की सख्त निगरानी करने और खराबी की असली वजह जल्द पता लगाने की मांग की है।
क्या है पूरा मामला
CNBC-TV18 की रिपोर्ट के मुताबिक, SIAM ने पेट्रोलियम मंत्रालय को चिट्ठी लिखकर बताया है कि E20 पेट्रोल पूरे देश में लागू होने के बाद गाड़ियों के कई पार्ट्स बदलने के मामले तेजी से बढ़े हैं। इसके बाद मंत्रालय, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों और वाहन निर्माताओं के बीच कई बैठकें हुईं। अब सरकार ने OMCs से कहा है कि वे पेट्रोल पंपों पर फ्यूल की क्वालिटी पर ज्यादा नजर रखें।

