मोदी सरकार की नया श्रम कानून लाने की योजना, जानिए क्या होगा

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नई दिल्ली। निवेशकों की सहूलियत और आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मोदी सरकार नया श्रम विधेयक पेश करने की योजना बना रही जिसमें 44 पुराने श्रम कानूनों को वेतन, सामाजिक सुरक्षा, औद्योगिक सुरक्षा एवं कल्याण और औद्योगिक संबंध, इन चार श्रेणियों के कानूनों में मिला दिया जाएगा।

गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई अंतर-मंत्रीस्तरीय बैठक में यह फैसला लिया गया। इस बैठक में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, श्रम मंत्री संतोष गंगवार, वाणिज्य एवं रेल मंत्री पीयूष गोयल भी शामिल थे। गंगवार ने बैठक के बाद संवाददाताओं को बताया, ‘संसद के आगामी सत्र में नया श्रम विधेयक पेश किया जाएगा।’

गंगवार ने कहा कि इस विधेयक के मसौदे को मंत्रिमंडल के सामने रखा जाएगा जिसके बाद इसे संसद के आगामी सत्र के संभवत: दूसरे सप्ताह में पेश किया जाएगा। उन्होंने बताया कि सरकार ने नए श्रम कानूनों को लेकर देश के सभी बड़े लेबर यूनियनों से संपर्क किया।

किसमें मिलेंगे कौन-कौन से कानून
कर्मचारी भविष्य निधि एवं विविध प्रावधान अधिनियम (एंप्लॉयीज प्रविडेंट फंड ऐंड मिसलेनियम प्रविजंस ऐक्ट), कर्मचारी राज्य बीमा निगम अधिनियिम (एंप्लॉयीज स्टेट इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऐक्ट), मातृत्व लाभ अधिनियम (मैटरनिटी बेनिफिट्स ऐक्ट), भवन और अन्य निर्माण अधिनियम (बिल्डिंग ऐंड अदर कंस्ट्रक्शन वर्कर्स ऐक्ट)के साथ-साथ कर्मचारी मुआवजा अधिनियम (एंप्लॉयीज कंपेनसेशन ऐक्ट)जैसे सामाजिक सुरक्षा सबंधी कानूनों को मिलाकर एक सामाजिक सुरक्षा कानून या संहिता बना दिया जाएगा।

इसी तरह, फैक्ट्रीज ऐक्ट, माइन्स ऐक्ट, डॉक वर्कर्स (सेफ्टी, हेल्थ ऐंड वेलफेयर) ऐक्ट जैसे कुछ औद्योगिक सुरक्षा और कल्याण कानूनों को मिलाकर एक नया कानून बनाया जाएगा। वहीं, न्यूनतम मजदूरी कानून (मिनिमम वेजेज ऐक्ट), मजदूरी भुगतान अधिनियम (पेमेंट्स ऑफ वेजेज ऐक्ट), बोनस भुगतान कानून (द पेमेंट ऑफ बोनस ऐक्ट), समान पारितोषिक अधिनियम (इक्वल रिम्यूनरेशन ऐक्ट) और कुछ अन्य संबंधित कानूनों को मिलाया जाएगा।उधर, लेबर कोड ऑन इंडस्ट्रियल रिलेशंस में औद्योगिक विवाद कानून, 1947, ट्रेड यूनियंस ऐक्ट, 1926 और इंडस्ट्रियल एंप्लॉयमेंट (स्टैंडिंग ऑर्डर) ऐक्ट, 1946 को समाहित किया जाएगा।