वोटर लिस्ट विवाद में सेशन कोर्ट के आदेश से सोनिया गांधी को झटका, जानिए मामला

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नई दिल्ली। दिल्ली की एक अदालत ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के मतदाता सूची में नाम शामिल होने से जुड़े मामले में मजिस्ट्रेट का पुराना आदेश रद्द कर दिया है। इस मामले में आरोप लगाया गया था कि सोनिया गांधी का नाम 1983 में भारतीय नागरिकता मिलने से करीब तीन साल पहले ही वोटर लिस्ट में दर्ज कर दिया गया था।

इसे लेकर वकील विकास त्रिपाठी ने शिकायत दर्ज कर जांच की मांग की थी। मजिस्ट्रेट ने 11 सितंबर 2025 को इस शिकायत पर जांच से इनकार कर दिया था। इसके खिलाफ त्रिपाठी ने अदालत में याचिका दायर की थी।

स्पेशल जज विशाल गोगने ने मजिस्ट्रेट के आदेश को सही प्रक्रिया के तहत नहीं दिया गया आदेश बताया। अदालत ने कहा कि मजिस्ट्रेट को पहले पुलिस अधिकारी की बात सुननी चाहिए थी और संबंधित थाने से मामले की स्थिति की रिपोर्ट भी मांगनी चाहिए थी।

अदालत के मुताबिक, ऐसा नहीं किया गया। साथ ही मजिस्ट्रेट ने यह भी साफ नहीं किया कि शिकायत मिलने के बाद पुलिस को प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया जाना चाहिए था या मामले में कानून के तहत कोई दूसरी कार्रवाई की जानी चाहिए थी।

अदालत ने कहा कि मजिस्ट्रेट ने शिकायत में किसी संज्ञेय अपराध के होने या न होने के मूल सवाल पर विचार नहीं किया। इसके बजाय, नागरिकता के मुद्दे पर ध्यान केंद्रित कर दिया गया।

न्यायाधीश ने कहा कि जांच के स्तर पर मुख्य सवाल यह होना चाहिए था कि शिकायत में ऐसे तथ्य सामने आते हैं या नहीं, जिनसे संज्ञेय अपराध का पता चलता है। अदालत के मुताबिक, इस पहलू पर सही तरीके से विचार नहीं किया गया। इसी आधार पर पहले दिए गए आदेश को कानूनी रूप से गलत माना गया।

अदालत ने मामले को वापस मजिस्ट्रेट के पास भेज दिया। साथ ही, यह निर्देश दिया कि शिकायत पर नए सिरे से दलीलें सुनी जाएं और उसके बाद कानून के मुताबिक कारण सहित आदेश पारित किया जाए। मामले में अब आगे की सुनवाई 29 सितंबर को होगी।

हालांकि, अदालत के इस आदेश से आरोप साबित नहीं हुए हैं और न ही सोनिया गांधी के खिलाफ किसी अपराध का निष्कर्ष निकाला गया है। अदालत ने फिलहाल केवल मजिस्ट्रेट के पहले आदेश को रद्द कर शिकायत पर कानून के अनुसार दोबारा विचार करने का निर्देश दिया है।