नई दिल्ली। केंद्र सरकार की स्टॉक लिमिट लागू करने और कच्ची चीनी आयात की घोषणा के बावजूद बाजार में चीनी के दाम घटने का नाम नहीं ले रहे। चीनी के दाम में चालू सप्ताह के पहले दिन मिल स्तर पर कुछ वृद्धि दर्ज की गई जबकि थोक बाजार भाव में गिरावट आई मगर खुदरा बाजार मूल्य 60 रुपए प्रति किलो से ऊपर ही बरकरार रहा।
एक अग्रणी उद्योग विश्लेषक के अनुसार त्यौहारी सीजन की मांग को पूरा करने के लिए व्यापारी / स्टॉकिस्ट काफी आक्रामक ढंग से चीनी की खरीद कर रहे हैं ताकि इसका ऊंचा स्टॉक बनाया जा सके। उसे आगामी समय में चीनी का दाम उछलकर नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने की उम्मीद है। लेकिन ऐसा शायद नहीं हो सकेगा क्योंकि उपभोक्ताओं की मांग कमजोर रहने की आशंका है।
मिलों को चालू माह के लिए नियत फ्री सेल कोटे की 40 प्रतिशत चीनी की बिक्री 7 सितम्बर तक अनिवार्य रूप से करने का निर्देश दिया गया था लेकिन ऐसा नहीं हो सका क्योंकि इसके लिए उसे चीनी का दाम घटाने के लिए विवश होना पड़ता जो उसे मंजूर नहीं था।
व्यापारियों एवं बल्क खरीदारों की आक्रामक लिवाली का फायदा उठाते हुए कुछ मिलों ने चीनी का दाम 2 प्रतिशत तक बढ़ा दिया। मिलों को लाभ कमाने का जो भी अवसर मिल रहा है वे उसका भरपूर इस्तेमाल कर रही हैं। व्यापारियों को भी चीनी की जरूरत है।
यह देखना आवश्यक होगा कि 15 सितम्बर तक 13 लाख टन चीनी की बिक्री का जो निर्देश मिलर्स को दिया गया है उसका पालन किस हद तक होता है और बाजार पर उसका कितना असर पड़ता है।

