राजस्थान में खरीफ की बुवाई 25% कम, सोयाबीन और मक्का में सबसे बड़ी गिरावट

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जयपुर। राजस्थान में खरीफ फसलों की बुवाई 3 जुलाई तक 63.10 लाख हेक्टेयर में हुई है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 83.70 लाख हेक्टेयर की तुलना में लगभग 25% कम है। राज्य का सामान्य खरीफ रकबा 164.10 लाख हेक्टेयर है, जिसमें अब तक करीब 38% क्षेत्र में ही बुवाई हो सकी है।

धान की बुवाई घटकर 46,715 हेक्टेयर रह गई, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 78,875 हेक्टेयर थी। मक्का का रकबा 6.00 लाख हेक्टेयर से घटकर 2.52 लाख हेक्टेयर रह गया, जबकि बाजरा की बुवाई 26.90 लाख हेक्टेयर से घटकर 16.70 लाख हेक्टेयर पर आ गई।

दलहनों में मूंग का रकबा 12.50 लाख हेक्टेयर से घटकर 11.20 लाख हेक्टेयर रह गया, जबकि उड़द की बुवाई में बड़ी गिरावट दर्ज हुई और यह 1.44 लाख हेक्टेयर से घटकर केवल 43,360 हेक्टेयर रह गई। कुल दलहन बुवाई 17.60 लाख हेक्टेयर से घटकर 15.40 लाख हेक्टेयर रही।

तिलहनों का कुल रकबा भी पिछले वर्ष के 13.50 लाख हेक्टेयर से घटकर 11.30 लाख हेक्टेयर रह गया। हालांकि मूंगफली की बुवाई बढ़कर 8.15 लाख हेक्टेयर हो गई, जो पिछले वर्ष 6.90 लाख हेक्टेयर थी। इसके विपरीत सोयाबीन का रकबा लगभग आधा होकर 5.96 लाख हेक्टेयर से घटकर 3.00 लाख हेक्टेयर रह गया।

कपास की बुवाई भी घटकर 4.93 लाख हेक्टेयर रह गई, जबकि पिछले वर्ष यह 6.02 लाख हेक्टेयर थी। दूसरी ओर, गन्ने का रकबा मामूली बढ़कर 3,902 हेक्टेयर हो गया। प्रमुख खरीफ फसल ग्वार की बुवाई बढ़कर 8.01 लाख हेक्टेयर रही, जो पिछले वर्ष 7.10 लाख हेक्टेयर थी।

मौसम विभाग के अनुसार 1 जून से 6 जुलाई के बीच राजस्थान में 77.4 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जो सामान्य से थोड़ी कम रही। दक्षिण-पश्चिम मानसून इस वर्ष 2 जुलाई को राज्य में पहुंचा, जो सामान्य तिथि 25 जून से सात दिन की देरी से था। हालांकि, मानसून पूर्व सक्रिय मौसम के कारण शुरुआती वर्षा की कमी की आंशिक भरपाई हुई है।

यदि आने वाले दिनों में मानसून की रफ्तार तेज होती है, तो बुवाई में सुधार संभव है। लेकिन यदि वर्षा सामान्य से कम रहती है, तो सोयाबीन, मक्का, बाजरा और दलहन उत्पादन पर दबाव बढ़ सकता है, जिसका असर संबंधित कृषि जिंसों के बाजार पर भी देखने को मिल सकता है।