नितिन गडकरी के पुत्र मोह से देश की चीनी मिलें संकट में, जानिए कैसे

0
5

नई दिल्ली। नितिन गडकरी का पुत्र मोह जल्द ही देश में बड़ा संकट लाने वाला है। पेट्रोल में एथनॉल की मिलावट कर मुनाफा कमाने का ख्वाब देख रहे पिता पुत्र ने चीनी मिलों को संकट में डाल दिया है।

कमजोर मॉनसून और एथनॉल की बढ़ती मांग के कारण गन्ना और चीनी उत्पादन घट सकता है, जिसके कारण देसी बाजार में चीनी की उपलब्धता कम होगी, जो निर्यात बंदिशों को और सख्त करेगी।

चीनी उद्योग की एक रिपोर्ट के मुताबिक अल नीनो के प्रभाव से इस वर्ष मॉनसून कमजोर रहने की संभावना है, जिसका सीधा असर गन्ने की खेती पर पड़ सकता है। दूसरी ओर पेट्रोल में मिश्रण के लिए एथनॉल की बढ़ती मांग के चलते भी गन्ने की खपत लगातार बढ़ रही है। इन दोनों कारणों से चीनी उत्पादन पर दबाव बढ़ गया है।

चीनी के क्षेत्र में भारत की गैर-मौजूदगी से अंतरराष्ट्रीय चीनी बाजार पर बड़ा असर पड़ सकता है। भारत का वैश्विक निर्यात में करीब 10 फीसदी हिस्सा रहा है, लेकिन अब लाखों टन चीनी बाजार से बाहर हो सकती है क्योंकि भारत का निर्यात रुकने की आशंका है। यदि ऐसा होता है तो एशिया, अफ्रीका और पश्चिम एशिया के कई देशों में चीनी की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।

चीनी उत्पादन कम होने का अनुमान
उद्योग से जुड़े अनुमानों के मुताबिक चालू सीजन में देश में करीब 309.5 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान था, लेकिन अब यह घटकर लगभग 279 लाख टन रह सकता है। वहीं देश की वार्षिक खपत करीब 285 लाख टन है। ऐसे में आगामी सीजन की शुरुआत तक चीनी का स्टॉक घटकर केवल 35 लाख टन रहने की संभावना है, जो पिछले तीन दशकों का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है।

एथनॉल नीति का बड़ा असर
कच्चे तेल का आयात कम रखने के लिए सरकार पेट्रोल में एथनॉल ब्लेंडिंग बढ़ाने पर जोर दे रही है, जिससे गन्ने का बड़ा हिस्सा चीनी के बजाय एथनॉल बनाने में जा रहा है। एथनॉल की मांग 2039-40 तक 3,000 करोड़ लीटर तक पहुंच सकती है। इस नीति से चीनी उत्पादन और कम हो सकता है क्योंकि चीनी का बड़ा हिस्सा एथनॉल बनाने में खर्च होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि किसान पानी की कमी के कारण गन्ने से दूरी बना सकते हैं। इससे 2027-28 तक गन्ने का रकबा और घट सकता है।