Dubai Gold: ईरान युद्ध के चलते दुबई में भारी ड‍िस्‍काउंट पर बिकने लगा सोना

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नई दिल्‍ली। Dubai Gold Discount: दुबई में सोना भारी डिस्काउंट पर मिलने लगा है। इसकी वजह मिडिल ईस्‍ट में छिड़ी जंग है। इसके चलते फ्लाइट्स रुक गई हैं। सप्लायरों की सोने-चांदी को मुख्य ट्रेडिंग हब से बाहर ले जाने की क्षमता में रुकावट आई है। कई खरीदार नए ऑर्डर देने से पीछे हट गए हैं।

कारण है कि वे बहुत ज्‍यादा शिपिंग और इंश्योरेंस कॉस्ट देने को तैयार नहीं हैं। वहीं, जल्दी डिलीवरी की कोई गारंटी नहीं है। नतीजतन, स्टोरेज और फंडिंग के लिए अनिश्चित समय तक पेमेंट करने के बजाय ट्रेडर्स लंदन में ग्लोबल बेंचमार्क पर 30 डॉलर प्रति औंस तक का डिस्काउंट देने लगे हैं। ब्‍लूमबर्ग ने ऐसा मामले की जानकारी रखने वाले लोगों के हवाले से बताया।

लोगों ने कहा कि शुक्रवार को कई शिपमेंट फंसे रहे। हालांकि, इस हफ्ते के बीच से दुबई से निकलने वाली फ्लाइट्स में कुछ सोना-चांदी लोड किया गया था।

क्‍यों आ गया दुबई पर संकट

  • संयुक्‍त अरब अमीरात और खासकर दुबई पूरे एशिया में खरीदारों के लिए बुलियन रिफाइन और एक्सपोर्ट करने का महत्वपूर्ण सेंटर है।
  • स्विट्जरलैंड, ब्रिटेन और कई अफ्रीकी देशों से शिपमेंट के लिए एक रास्ता भी है।
  • ईरान की मिसाइलों की बौछार की वजह से इसका एयरस्पेस बंद कर दिया गया है।
  • तेहरान के साथ अमेरिका-इजरायली युद्ध सातवें दिन भी जारी है।
  • इसके हल का कोई संकेत नहीं दिख रहा है।

कैसे ट्रांसपोर्ट होता है सोना

  • सोना आमतौर पर पैसेंजर एयरक्राफ्ट के कार्गो होल्ड में ट्रांसपोर्ट किया जाता है।
  • यूएई से फ्लाइट्स पर बहुत ज्‍यादा रोक है।
  • इसके बावजूद ट्रेडर्स और लॉजिस्टिक्स फर्म सऊदी अरब और ओमान जैसे देशों के एयरपोर्ट्स तक ज्‍यादा कीमत वाले कार्गो को जमीन के रास्ते ट्रांसपोर्ट करने में हिचकिचा रहे हैं।
  • कारण है कि इसमें रिस्क और मुश्किलें शामिल हैं, खासकर जमीनी बॉर्डर पार करते समय।

भारत से है कनेक्‍शन

  • भारत के सबसे बड़े गोल्ड डीलर्स में से एक ऑगमोंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड की रिसर्च हेड रेनिशा चैनानी ने कहा:
  • कई कार्गो शिपमेंट में देरी हुई है या वे फंस गए हैं।
  • इससे भारत में फिजिकल बुलियन की अवेलेबिलिटी में शॉर्ट-टर्म किल्‍लत आई है।
  • भारत दुबई से भेजे जाने वाले सोने के सबसे बड़े कंज्यूमर्स में से एक है।
  • भारत में खरीदार इंतजार कर सकते हैं।
  • शॉर्ट-टर्म डिमांड तुलनात्मक रूप से कम है।
  • जनवरी में इम्पोर्ट की बड़ी मात्रा से इन्वेंट्री बढ़ गई है।