Monday, June 29, 2026
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जीएसटी के बाद खेती करना हो जायेगा महंगा

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नई दिल्ली। 1 जुलाई से लागू होने वाले गुड्स एंड सर्विस टैक्स से किसानों पर दोहरी मार पड़ने की संभावना है। पहले से ही किसान कर्ज की मार से डूबे हुए हैं और देश भर में ऐसे किसानों द्वारा आत्महत्या की खबरें रोजाना आ रहीं हैं।

राज्य सरकारें भी किसानों का कर्ज माफ कर रही हैं, लेकिन इससे उनकी परेशानियों पर किसी तरह का कोई रहम नहीं मिल रहा है। अब जीएसटी के बाद किसानों के लिए खेती करना भी काफी महंगा हो जाएगा। 

केवल बीज पर नहीं लगेगा टैक्स
जीएसटी काउंसिल ने किसानों को केवल बीज खरीदने पर अतिरिक्त टैक्स देने से राहत दी है। बीज पर किसी तरह का कोई टैक्स नहीं लगाया गया है। हालांकि इससे किसानों को राहत नहीं मिलेगी। खेती करने के लिए किसानों को कई तरह अन्य वस्तुएं भी चाहिए होती हैं, जिनको जीएसटी काउंसिल ने 12 से 28 फीसदी टैक्स स्लैब में रखा है। 

इन पर लगेगा टैक्स
जीएसटी काउंसिल ने फर्टिलाइजर्स और ट्रैक्टर पर 12 फीसदी टैक्स लगाया है। इसके अलावा पेस्टीसाइड पर 18 फीसदी टैक्स लगाया है। पेस्टीसाइड का इस्तेमाल किसान फसल को कीड़ों से बचाने के लिए करते हैं। सिंचाई के लिए प्रयोग होने वाले रबर और प्लास्टिक पाइप पर 28 फीसदी टैक्स लगेगा। 

एक बीघे की खेती पर इतना पड़ेगा असर
मान लिजिए अगर किसान के पास एक बीघा जमीन है तो उसे लागत में 360 रुपये अतिरिक्त खर्चा पड़ेगा। अभी किसान को 680 रुपये का यूरिया पड़ता है जो जुलाई से 720 रुपये का हो जाएगा। वहीं डाई पर 1050 रुपये से बढ़कर 1300 रुपये देने होंगे। इसी तरह जिंक 250 से 270 रुपये और कीटनाशक 550 से 600 रुपये देने होंगे। इस हिसाब से देखा जाए तो हर एक बीघे पर 360 रुपये अतिरिक्त खर्चा आएगा।

‘मैं गरीब हूं, वसुंधरा सरकार ने 1.5 लाख लोगों के घरों पर लिखाया

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राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत राशन लेने वाले परिवारों को किया सरकार ने शर्मसार

जयपुर । हाल ही में स्वघोषित गौरक्षकों द्वारा लोगों की हत्या के बाद राजस्थान की वसुंधरा राजे सरकार एक बार फिर विवादों में है। गरीबों की सरकार ने इस बार गरीबी का ही मजाक बना दिया है। दरअसल, सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत राशन पाने वालों पर गरीबी का ठप्पा लगा दिया है।

तकरीबन डेढ़ लाख लोगों के घर के बाहर लिखा गया है, ‘मैं गरीब हूं और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत राशन पाता हूं।’ इसके साथ ही घर के मालिक का नाम भी लिखा गया है। इस अधिनियम के तहत राशन पाने वाले राज्य सरकार के इस असंवेदनशील रवैये से खुद को अपमानित महसूस कर रहे हैं।

NFSA पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल में शुरू हुआ था। इसके तहत गरीबों को प्रति व्यक्ति 5 किलोग्राम अनाज रियायती दरों पर मुहैया कराया जाता है। गांववालों ने यह भी कहा कि उनसे यह वादा किया गया था कि अगर वे अपने घरों के बाहर ऐसा लिखते हैं तो उन्हें इसके एवज में 750 रुपये दिए जाएंगे।

जम्मू-कश्मीर के अलावा सभी राज्यों में जीएसटी विधेयक पारित

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नई दिल्‍ली। जम्मू-कश्मीर को छोड़कर सभी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों ने राज्य जीएसटी विधेयक पारित कर दिया है जिससे 30 जून की मध्यरात्रि से वस्‍तु एवं सेवा कर को लागू करने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। केरल और पश्चिम बंगाल ने राज्य जीएसटी विधेयक को मंजूरी देने के लिए अध्यादेश जारी किया है जबकि बाकी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों ने अपनी अपनी विधानसभा से इसे पारित किया है।

वित्त मंत्रालय के बयान में कहा गया है, ‘आज की तारीख में जम्मू-कश्मीर को छोड़कर सभी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों ने राज्य वस्‍तु एवं सेवा कर विधेयक पारित किया है।’ केरल ने आज राज्य जीएसटी विधेयक को मंजूरी प्रदान करते हुए अध्यादेश जारी किया जबकि पश्चिम बंगाल ने 15 जून को अध्यादेश जारी किया था।

,अब केवल एक ही राज्य रह गया है और वह है जम्मू-कश्मीर जिसे राज्य वस्‍तु एवं सेवा विधेयक पारित करना बाकी है। इस प्रकार, सभी 30 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों समेत पूरा देश 1 जुलाई से जीएसटी लागू करने के लिए तैयार है।’ 30 जून की आधी रात को जीएसटी की शुरुआत के मौके पर संसद के ऐतिहासिक केंद्रीय हॉल में एक घंटे का कार्यक्रम होगा जो 14 अगस्त की अर्धररात्रि के भारत के ‘नियति के साथ मिलन’ कार्यक्रम की याद दिलाएगा।

सही दाम नहीं मिलने से परेशान किसान ने हाईवे पर फेंका लहसुन

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कोटा| लहसुन का सही दाम नहीं मिलने से किसान बर्बाद हो रहा है। इससे परेशान एक किसान  बुधवार सुबह एनएच 27 की बोरखंडी स्लिपलेन के किनारे एक ट्रॉली में भरा करीब 20 क्विंटल लहसुन फेंक गया। जानकारी होते ही आसपास की बस्ती के लोग दो घंटे में सारा लहसुन कट्‌टों में भरकर ले गए।

प्रत्यक्षदर्शी परमानंद कमाल मामू ने बताया कि सुबह करीब 8 बजे एक किसान ट्रैक्टर लेकर धाकड़खेड़ी की ओर से आया। उसने ट्रॉली में भरा लहसुन खाली कर दिया। ज्ञातव्य है कि इन दिनों लहसुन की मांग नहीं होने से दाम २० रुपये किलो के आसपास आ गए। सर्कार की ओर से बाजार हस्तक्षेप योजना में ३४ रुपये किलो खरीदने की घोषणा की गई है। किन्तु वहां भी किसान नहीं पहुंच रहे हैं। 

हुंडई ने नई वरना सेडान की टीजर इमेज़ जारी की

नई दिल्ली। हुंडई ने नई वरना सेडान की टीजर इमेज़ जारी की है, संभावना है कि आने वाले हफ्तों में कंपनी इसकी दूसरी जानकारियों से भी पर्दा उठायेगी। cardekho.com के मुताबिक, नई वरना का डिजायन काफी हद तक हुंडई की एलांट्रा से मिलता है, इस में हुंडई की नई कास्केडिंग ग्रिल दी गई है, इसके दोनों ओर स्वेप्टबैक प्रोजेक्टर हैडलैंप्स लगे हैं, एलांट्रा की तरह इन में भी जे आकार वाली डे-टाइम रनिंग एलईडी लाइटें दी गई हैं। नई वरना में प्रोजेक्टर फॉग लैंप्स भी लगे हैं।

मौजूदा मॉडल की तरह नई वरना में भी कूपे स्टाइल वाली रूफलाइन दी गई है, इस में एलांट्रा से मिलते-जुलते स्प्लिट एलईडी टेललैंप्स भी दिए गए हैं। पीछे वाले बंपर पर ड्यूल-टोन ट्रीटमेंट के साथ रिफ्लेक्टर्स दिए गए हैं, केबिन में एपल कारप्ले और एंड्रॉयड ऑटो सपोर्ट करने वाला हुंडई का नया 7 इंच इंफोटेंमेंट सिस्टम दिया गया है।

पुरानी वरना की तुलना में नई वरना की चौड़ाई को 29 एमएम, लंबाई को 15 एमएम और व्हीलबेस को 10 एमएम बढ़ाया गया है, ऊंचाई दोनों की एक समान है। इंजन से जुड़ी जानकारी अभी तक नहीं मिली है, संभावना है कि इस में मौजूदा मॉडल वाले 1.4 लीटर और 1.6 लीटर (पेट्रोल और डीज़ल) इंजन आ सकते हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि नई वरना में 4-स्पीड ऑटोमैटिक की जगह हुंडई क्रेटा वाला 6-स्पीड ऑटोमैटिक गियरबॉक्स दिया जा सकता है।

कर्ज में फंसी कंपनियों में हिस्सेदारी के अधिग्रहण के लिये नियमों में छूट

मुंबई। बाजार नियामक सेबी ने सूचीबद्ध कंपनियों की कर्ज में फंसी कंपनियों के बैंकों द्वारा अधिग्रहण के लिये नियमों को आज आसान बनाया। इसमें उनके लिये शेयरधारकों के लिये खुली पेशकश से छूट दी गयी है।यह छूट कुछ शर्तों पर निर्भर है जिसमें विशेष प्रस्ताव के जरिये हिस्सेदारी के अधिग्रहण के लिये शेयरधारकों की मंजूरी शामिल है।

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी)  का यह निर्णय ऐसे समय आया है जब सरकार तथा रिजर्व बैंक फंसे कर्ज की समस्या से निपटने का प्रयास कर रहे हैं जो 6 लाख करोड़ रुपये से उुपर पहुंच गया है। निदेशक मंडल की बैठक में सेबी ने कर्ज में फंसी सूचीबद्ध कंपनियों के पुनर्गठन के साथ-साथ दिवाला एवं णि शोधन अक्षमता संहिता के तहत मंजूर निपटान योजना के लिये नियमों को आसान बनाने का फैसला किया।

सेबी ने कहा कि इस पहल का मकसद संकट में फंसी सूचीबद्ध कंपनियों को पटरी पर लाने के रास्ते को सुगम बनाया है।इससे शेयरधारक तथा कर्जदाता दोनों लाभान्वित होंगे।फिलहाल रणनीति ण पुनर्गर्ठन :एसडीआर: योजना के तहत कर्ज में फंसी सूचीबद्ध कंपनियों के पुनर्गठन के लिये बैंकों के पास खुली पेशकश तथा तरजीही निर्गम जरूरतों से छूट उपलब्ध है।

सेबी के पास ये बातें आयी थी कि जिन बैंकों ने शेयरों का अधिग्रहण किया है और उसे नये निवेशकों को बेचने में कठिनाइयां आती है क्योंकि इसके लिये उन्हें खुली पेशकश करनी होती है। इस प्रकार की पेशकश से संबंधित कंपनी में निवेश के लिये कोष की उपलब्धता कम होता है।इन चिंताओं को देखते हुए सेबी ने उन नये निवेशकों के लिये यह छूट देने का फैसला किया है जो संकट में फंसी कंपनियों में हिस्सेदारी खरीदते हैं।

 

 

 

 

कॅरिअर पॉइंट यूनिवर्सिटी ने कोटा में लांच किए पेरा मेडिकल साइंस के नए कोर्स

कॅरिअर ऑप्शनः 12वीं साइंस के स्टूडेंट्स को सीपीयू कोटा में मिलेंगे रिसर्च, रोजगार व औंत्रप्रिन्योरशिप के अवसर। यूनिवर्सिटी ने किए इंटरनेशनल एमओयू व हॉस्पिटल से टाईअप।

कोटा। कॅरिअर पॉइंट यूनिवर्सिटी ने देश में हेल्थ साइंस व पेरा मेडिकल क्षेत्र में तेजी से बढ़़ती जॉब की संभावनाओं को देखते हुए नए सत्र से साइंस के विद्यार्थियों के लिए कोटा में पहली बार नए कोर्सेस लांच किए। कुलपति डॉ. डीएन राव ने बुधवार को पत्रकारों को बताया कि राज्य की वर्ल्डक्लास प्राइवेट यूनिवर्सिटी होने के से यहां रिसर्च के क्षेत्र में कई नये प्रोजेक्ट चल रहे हैं।

हाड़ौती में हेल्थ केअर व अलाइड साइंस के तहत औषधीय वनस्पति पर शोंध कर नई दवाइयां विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। हमारा लक्ष्य है कि प्रतिवर्ष 5 से 10 पेटेन्ट विभिन्न क्षेत्रां मे फाइल करें। यूनिवर्सिटी में हेल्थ केअर व अलाइड साइंस विभाग के डीन डॉ. आरएस घोष ने कहा कि आज हायर एजुकेशन में स्टूडेंटस को प्रयोगात्मक लर्निंग (म्गचमतपमदजपंस समंतदपदह) एवं ग्लोबल एक्सपोजर की जरूरत है।

यूनिवर्सिटी की अनुभवी फैकल्टी टीम ने शोध एवं मार्केट सर्वे कर लेटेस्ट कोर्सेस लांच किए ताकि कोटा में विशेषज्ञ व एक्सपर्ट मेनपॉवर तैयार हो। उन्होंने बताया कि यूनिवर्सिटी में चालू सत्र से पैरा मेडिकल साइंस में फिजियोथेरेपी, फार्मा, मेडिकल लेबोरेट्री कोर्स, मेडिकल हेल्थ टेक्नोलॉजी, ऑप्टोमेट्री कोर्स, हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन सहित कई कोर्सेस संचालित होंगे। यूनिवर्सिटी ने स्टूडेंट्स को प्रेक्टिस कराने के लिए कुछ प्रमुख हॉस्पिटल से टाइअप किए हैं।

अकादमिक विभाग के निदेशक डॉ गुरूदŸा कक्कड़ ने कहा कि हेल्थ साइंस में स्पेशलाइजेशन होने से आम नागरिकों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिलने लगेंगी। कोटा में बाहर से आने वाले साइंस के हजारों छात्र मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में प्रतिवर्ष सलेक्शन से वंचित रह जाते है। संस्थानों में सीटें सीमित होने से मात्र 2 से 3 प्रतिशत छात्रों को सीट मिल पाती है।

लेकिन शेष छात्रों का भी ब्रेन लेवल अच्छा होता है। एक एक्जाम से उनका भविष्य खत्म नहीं हो जाता। उन्हें समय पर बेहतर कॅरिअर ऑप्शन मिल जाए तो वे उंचाइयों को छू सकते हैं। रजिस्ट्रार डॉ.पीके देव ने कहा कि वर्ल्डक्लास सीपी यूनिवर्सिटी ने कई इंटरनेशनल एमओयू किए हैं। इनमें अमेरिकन यूनिवर्सिटी सहित राज्य में पहली बार एसोसिएशन ऑफ कॉमनवैल्थ यूनिवर्सिटी, लंदन की मेंबरशिप मिलने से सीपी यूनिवर्सिटी के ग्रेजुएट्स को प्रमुख कंपनियों में जॉब मिल रहे हैं।

हेल्थ केअर के नए फील्ड में डिमांड बढ़ी

विभाग के डीन डॉ. आरएस घोष ने कहा कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने ‘सबके लिए स्वास्थ्य‘ को नेशनल मिशन बनाया है। इसमें अलाइड हेल्थ सांइस की भूमिका महत्वपूर्ण है। एक रिपोर्ट के अनुसार, देश में 500 रोगी पर एक नर्स, 2000 पर एक फार्मासिस्ट, 30 हजार पर एक लैब टेक्निशियन, 20 हजार पर एक हेल्थ इंस्पेक्टर की अनुशंसा की गई।

कोटा के छात्रों को यह फायदा
कोटा में 12वीं सांइस बायोलॉजी व मैथ्स के सर्वाधिक विद्यार्थी होने से उन्हें अच्छे कॅरिअर विकल्प मिलेंगे। नए कोर्स करने के लिए अब बाहर नहीं जाना पड़ेगा। यूनिवर्सिटी में मॉडर्न लैबोरेट्री व रिसर्च के संसाधन मिलने से स्टूडेंट्स को फायदा मिलेगा। नई दवाओं पर रिसर्च एंड डेवलपमेंट कर पेटेंट फाइल करने की सुविधा भी दी जाएगी।

हैल्थ केअर में औंत्रप्रिन्योरशिप को बढ़ावा दिया जाएगा। ऐसे कोर्सेस के बाद स्टूडेंट को फिजियोथेरेपिस्ट, फार्मासिस्ट, केमिस्ट, लैब टेक्निशियन, मेडिकल टेक्निशियन, फिटनेस ट्रेनर, थेरेपिस्ट, पेशेंट केअर, मेडिकल ट्रांस्क्रिपशिस्ट, सर्जिकल टेक्नोलिस्ट,मेडिकल इमेजिग टेक्नोलॉजी , डायलिसिस आदि में नए अवसर मिलेंगे।

 

तिरुपति मंदिर के लड्डुओं पर GST नहीं लगेगा

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तिरुपति। कौन-कौन सी चीजे जीएसटी इसके दायरे में और कौन-सी चीजों को इससे राहत मिली है, इसे लेकर अभी भी संशय बना हुआ है। इस स्थिति से मंदिर के ट्रस्ट भी गुज़र रहे हैं, जो इस संशय में हैं कि क्या उन्हें जीएसटी से राहत मिलेगी।

माना जा रहा था कि जीएसटी के दायरे में तिरुपति मंदिर के लड्डुओं, किराये पर दिए जाने वाले कमरों सहित कई चीजों को रखा गया है।इस संबंध में आंध्र प्रदेश के फाइनेंस मिनिस्टर वाय. रामाकृष्णाडु ने 17वीं GST कॉउन्सिल मीटिंग में निर्णय लिया कि लड्डुओं को टैक्स के दायरे से बाहर रखा जायेगा।यानी तिरुमला तिरुपति देवस्थानम को 50-100 करोड़ रुपये जीएसटी टैक्स से मुक्त किया गया है।

जीएसटी के बाद रेल में एसी प्रथम श्रेणी सफर होगा थोड़ा महंगा

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नयी दिल्ली। नयी कर प्रणाली वस्तु व सेवा (जीएसटी) कर के कार्यान्वयन के बाद रेल में एसी व प्रथम श्रेणी में यात्रा करना थोड़ा महंगा हो जाएगा। जीएसटी का कार्यान्वयन एक जुलाई से होने जा रहा है।जीएसटी के कार्यान्वयन से टिकट शुल्क पर सेवा कर 4.5 प्रतिशत से बढ़कर 5.0 प्रतिशत हो जाएगा।

रेल मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार यह सेवा कर रेल में केवल एसी व प्रथम श्रेणी में यात्रा करने पर लगता है। इस लिहाज से अगर किसी टिकट की लागत इस समय 2000 रुपए है तो अगले महीने से वह 2010 रुपए की पड़ेगी।इस बीच रेलवे ने जीएसटी के कार्यान्वयन की तैयारियों को अंतिम रूप देते हुए हर राज्य में एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया है जो कि सुनिश्चित करेगा कि नयी कर प्रणाली को सुगम तरीके से कार्यान्वित किया जा सके।

अधिकारी ने कहा कि भारतीय रेलवे में जीएसटी के असर के आकलन के लिए भी एक परामर्शक की सेवाएं ली गई हैं।चूंकि जीएसटी का पंजीकरण पैन ब्यौरे पर आधारित है इसलिए रेलवे ने अपना पैन पहले ही हासिल कर लिया है। रेलवे ने प्रत्येक मंडल में महाप्रबंध को जीएसटी अनुपालन के लिए प्रधान अधिकारी नियुक्त किया है।

 

सट्टेबाजी मकसद से पी नोट जारी करने पर पाबंदी

मुंबई। बाजार नियामक सेबी ने पी-नोट नियम को कड़ा कर दिया है, लेकिन इस पर पूरी तरह पाबंदी लगाने की संभावना से इनकार किया है। इसके तहत प्रत्येक पी नोट पर 1,000 डालर का शुल्क लगाया जाएगा और हेजिंग को छोड़ कर सट्टेबाजी मकसद से पीनोट जारी करने पर पाबंदी होगी।

इन उपायों का इसका मकसद कालाधन को सफेद बनाने के लिये नियमों के दुरूपयोग पर लगामा लगाना है। साथ ही भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड  (सेबी) ने उन विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के लिये नियम को आसान बनाया है जो पार्टििसपेटरी नोट के बजाए सीधे भारतीय बाजार में आना चाहते हैं।

सेबी के निदेशक मंडल की बैठक के बाद बाजार नियामक के चेयरमैन अजय त्यागी ने हालांकि कहा कि नियामक पी-नोट पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने पर गौर नहीं कर रहा है क्योंकि कुछ नये निवेशक भारतीय बाजार में आने के लिये इसी रास्ते का उपयोग करना चाहते हैं। यह निर्णय ऐसे समय किया गया है जब पी-नोट या आफशोर डेरिवेटिव्स इंस्ट्रूमेंट (ओडीआई) के जरिये देश में होने वाले निवेश में पहले ही काफी कमी आ चुकी है।

अप्रैल में यह चार महीने के निम्न स्तर 1.68 लाख करोड़ रुपये रहा।त्यागी ने कहा कि सेबी के निदेशक मंडल ने नियामकीय शुल्क के जरिये पी-नोट के लिये नियमों को कड़ा करने को मंजूरी दे दी है। इसके तहत पी-नोट जारी करने वालों पर नियामकीय शुल्क लगेगा। हालांकि उन्होंने कहा कि इस पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने का कोई प्रस्ताव नहीं है क्योंकि यह उन नये निवेशकों के लिये अच्छा है जो भारतीय बाजार में आना चाहते हैं।

त्यागी ने संवाददाताओं से कहा, सेबी चाहेगा कि विदेशी निवेशक सीधे आयें लेकिन पी-नोट की अपनी उपयोगिता है। नियामक ने प्रत्येक पी-नोट अंशधारक पर 1,000 डालर का नियामकीय शुल्क लगाने का फैसला किया है। इसे एक अप्रैल 2017 से प्रत्येक तीन साल पर संग्रह और जमा जारीकर्ता एफपीआई :विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक: करेगा।

नियामक ने कहा, सेबी निदेशक मंडल के निर्णय को लागू करने के लिये सेबी (एफपीआई)  नियमन, 2014 में संशोधन करेगा।साथ ही बोर्ड ने डेरिवेटिव्स के एवज में ओडीआई जारी करने पर रोक लगाने का फैसला किया है। यह उस स्थिति में लागू नहीं होगा जब इसका उपयोग हेजिंग मकसद से किया गया हो। नियामक इस संदर्भ में परिपत्र जारी करेगा।