Sunday, June 28, 2026
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अब गूगल एप को यूजर्स बिना इंटरनेट के भी कर पाएंगे इस्तेमाल

नई दिल्ली । स्मार्टफोन में एप्स का इस्तेमाल हर कोई करता है। लेकिन बिना इंटरनेट के ज्यादातर एप्स चलाना संभव नहीं है। स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वाला हर यूजर गूगल एप का इस्तेमाल जरुर करता है। जाहिर है कि इसके लिए भी इंटरनेट की आवश्यकता होती है। लेकिन आज हम आपको एक ऐसी जानकारी देने जा रहे हैं जिसके जरिए आप बिना इंटरनेट के गूगल एप चला पाएंगे।

दरअसल, गूगल ने एक ऐसा फीचर जारी किया है जिसके जरिए फोन में बिना इंटरनेट के भी गूगल की सभी सेवाओं का फायदा उठाया जा सकता है।ऐसे बिना इंटरनेट चलाएं गूगल एप:रिपोर्ट की मानें तो गूगल ने एक फीचर पेश किया है जिसका नाम फ्री जोन है। यहां यूजर्स बिना डाटा इस्तेमाल किए गूगल एप इस्तेमाल कर पाएंगे।

इसके लिए यूजर का जीमेल अकाउंट होना अनिवार्य है। इसके बाद यूजर्स को फोन के ब्राउजर में जाकर “g.co/freezon” टाइप करना होगा। यहां से यूजर बिना डाटा सर्फिंग कर पाएंगे। सबसे अहम बात यह कि जब तक यूजर को फोन में हरे रंग की पट्टी दिखाई देगी तब तक ही वो फ्री सर्फिंग कर पाएंगे।

यह प्रक्रिया केवल गूगल एप पर ही काम करेगी। बाकि के एप्स चलाने के लिए डाटा की जरुरत होगी।इससे पहले गूगल ने अपने कीबोर्ड में कुछ खास बदलाव किए थे। इसे यूजर्स के लिए और भी फ्रेंडली बना दिया गया है। ये फीचर्स यूजर्स के लिए उपयोगी साबित होंगे। ‘एंगैजेट’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, गूगल के जीबोर्ड में हैंड-ड्रॉ इमोजी फीचर को शामिल किया गया है जो यूजर्स को उनके मन मुताबिक इमोजी ढूंढने में मदद करेगा।

सिर्फ इतना ही नहीं, गूगल ने अपने सिग्नेचर सर्च फीचर को और बेहतर बनाने के लिए उसमें नए बदलाव किए हैं। गूगल का सिग्नेचर सर्च अब यूजर को और भी बेहतर परिणाम देगा। इसके साथ ही गूगल ने कई भाषाओं को अपने फीचर में जोड़ा है। इनमें हवाई, माओरी और बेल्जियम, फ्रेंच जैसी भाषाओं को शामिल किया गया है।

किसान आंदोलन अब संभाग मुख्यालयों के बजाए गांवों से

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जयपुर। राजस्थान में चल रहा किसान आंदोलन अब संभाग मुख्यालयों के बजाए गांवों से ही चलेगा। किसान अब गांवों से सब्जियों और दूध की आपूर्ति रोकेंगे, मंडियां बंद रहेंगी और सड़कें जाम की जाएंगी। सभी संभाग मुख्यालयों पर आयुक्त कार्यालय का घेराव कर गिरफ्तारियां दी जाएंगी। वहीं 20 जून से ग्राम से संग्राम अभियान शुरू करेंगे।

 राजस्थान में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में किसानों ने 15 जून से महापड़ाव शुरू किया था। इसके तहत राजस्थान के आठ बड़े शहरों जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, उदयपुर, कोटा, भरतपुर, अजमेर और सीकर में महापड़ाव दिया जा रहा था। किसान संघ ने अनिश्चितकालीन महापड़ाव का दावा किया था, लेकिन चार दिन में सरकार की ओर से कोई सुनवाई नहीं किए जाने पर अब संघ ने आंदोलन की रणनीति बदल दी है।

संघ के जोधपुर प्रांत के अध्यक्ष हीरालाल चौधरी ने बताया कि शनिवार को हुई संघ की बैठक में अब आंदोलन को तेज करने का निर्णय किया गया है, लेकिन यह आंदोलन अब संभागों के बजाए गांवों से ही चलेगा। किसान 20 जून से ग्राम से संग्राम अभियान के तहत गांव बंद किए जाएंगे। मंडियां बंद रहेंगी। गांवों से सब्जियों और दूध की आपूर्ति के साथ सड़कें रोकी जाएंगी।

चौधरी ने बताया कि चार दिन के महापड़ाव के बाद भी सरकार की ओर से कोई सुनवाई नहीं किए जाने से साफ है कि सरकार शांतिप्रिय आंदोलन की सुनवाई नहीं करती। ऐसे में अब किसान के पास बंद के अलावा और कोई लोकतांत्रिक उपाय नहीं बचा है।

जहाँ हाजिरी लगाने से पहले देखनी पड़ती है अश्लील फिल्म

कोटा। राजस्थान सरकार की महिला कर्मचारियों की जमकर फजीहत हो रही है। महिला सुरक्षा का दम भरने वाला सरकारी सिस्टम ही उनका मानसिक उत्पीड़न कर रहा है। हालत इस कदर खराब हैं कि महिला कर्मचारियों को हाजिरी लगाने के अश्लील तस्वीरें देखने के लिए मजबूर किया जा रहा है। 

राजस्थान के मेडिकल कॉलेजों में मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) ने इस साल की शुरुआत में बायोमेट्रिक हाजिरी अनिवार्य कर दी थी, लेकिन मशीन लगाने वाली निजी कंपनी ने इन्हें कमाई का जरिया बना डाला। जैसे ही कोई कर्मचारी बायोमेट्रिक मशीन की स्क्रीन पर थम्ब इम्प्रेशन लगाने जाता है, स्क्रीन पर विज्ञापन दिखाई देने लगते हैं। शुरुआत में तो सब कुछ ठीक था, लेकिन अब मशीन की स्क्रीन अश्लील विज्ञापनों ने घेर ली है। 

रोजाना होना पड़ता है शर्मसार 
कोटा के एमबीएस अस्पताल में लगी बायोमेट्रिक मशीन पर महिला ही नहीं पुरुष कर्मचारियों से लेकर चिकित्सकों तक को शर्मसार होना पड़ता है। वह जैसे ही बायोमेट्रिक मशीन पर उपस्थिति दर्ज करवाने के लिए थम्ब इम्प्रेशन लगाते हैं, उस पर अश्लील विज्ञापन आना शुरू हो जाता है।सबसे ज्यादा बुरी हालत महिला कर्मचारियों और चिकित्सकों की होती है। उन्हें पुरुष कर्मचारियों की मौजूदगी में ही यह विज्ञापन देखने पड़ते हैं, इसके बाद ही वह अपनी हाजिरी लगा पाती हैं। मेडिकल कॉलेज में 150 से ज्यादा फैकल्टी है, जिनमें 30 फीसदी महिलाएं है।

शिकायत मिल चुकी है-प्रभारी अधिकारी 
एमबीएस हॉस्पीटल ही नहीं मेडिकल कॉलेज, प्रशासनिक खण्ड, सुल्तानपुर सीएचसी, दीगोद पीएचसी, जेके लोन हॉस्पीटल, और नए अस्पताल तक में लगी करीब 22 मशीनों का यही हाल है। एमबीएस हॉस्पीटल के प्रभारी अधिकारी डॉ. नवीन सक्सेना ने बताया कि यह मशीनें निजी कंपनी ने लगाई हैं। इन पर अश्लील तस्वीरें दिखाने की शिकायत मिल चुकी है। जिसकी जानकारी एमसीआई और सरकार को दे दी गई है। साथ ही मशीन स्थापित करने वाली फर्म को भी इसे ठीक करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। 

हैंगिंग ब्रिज जुलाई के पहले सप्ताह में शुरू होगा

कोटा | हाइवे-27पर बना हैंगिंग ब्रिज जुलाई के पहले सप्ताह में शुरू हो जाएगा। उद्‌घाटन से दो दिन पहले इसे कोटावासियों के लिए खोलने की योजना है, ताकि वे इसे देख सकें और सेल्फी ले सकें। क्योंकि ट्रैफिक शुरू होने पर कोई भी यहां पैदल नहीं घूम पाएगा। कोरिया की जिस कंपनी ने इसका परीक्षण किया है, उसकी रिपोर्ट आना बाकी है। रिपोर्ट हुंडई कंपनी के पास आएगी, वह एनएचएआई को इसे लेने के लिए कहेगी, तब पूरी रिपोर्ट देखने के बाद इसे चालू किया जाएगा।

थोड़ा काम अभी भी बाकी : एनएचएआईके आरओ एम के जैन ने बताया कि इसे शुरू करने में जल्दबाजी नहीं कर सकते। यह जुलाई के पहले या दूसरे सप्ताह में लोगों के आवागमन के लिए खोल दिया जाएगा। अभी कुछ काम है जो हो रहा है।

अमिताभ बच्चन होंगे जीएसटी के ब्रांड एंबेसडर

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नई दिल्ली। बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन माल एवं सेवाकर (GST) का प्रचार करते नजर आएंगे। उल्लेखनीय है कि देश में जीएसटी की नई अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था एक जुलाई से लागू होनी है। केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क विभाग बच्चन को जीएसटी का ब्रांड एंबेसडर बनाएगा। उनके साथ 40 सेकेंड की एक विज्ञापन फिल्म पहले ही शूट कर ली गई है।

वित्त मंत्रालय ने इस वीडियो को साझा करते हुए ट्वीट में लिखा है,  जीएसटी-एक पहल एकीकत बाजार बनाने के लिए। इससे पहले बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधू जीएसटी की ब्रांड एंबेसडर थीं।

10 दिन में जमा कराओ 709 करोड़, सुब्रत राय सहारा को सुप्रीम कोर्ट के आदेश

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सुब्रत राय सहारा की अंतरिम जमानत की अवधि पांच जुलाई तक बढ़ाई है। उन्हें दस कार्यदिवस दिए गए हैं, ताकि वह 709.82 करोड़ रुपये सेबी-सहारा के खाते में जमा करा सकें।सुब्रत राय की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील पेश की कि 790.18 करोड़ रुपये पहले ही जमा कराए जा चुके हैं।

उन्होंने बाकी की रकम जमा कराने के लिए दस कार्यदिवसों की मांग की।जस्टिस रंजन गोगोई व दीपक मिश्र की बेंच ने अंतरिम जमानत की अवधि बढ़ाने का फैसला लिया। सुप्रीम कोर्ट ने सुब्रत राय को आदेश दिया था कि वह 15 सौ करोड़ रुपये सेबी-सहारा के खाते में जमा कराए।इससे पहले राय ने 15 सौ करोड़ व 552.22 करोड़ के दो चेक जमा कराए थे।

ये 15 जून व 15 जुलाई को जमा कराए गए थे।17 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने सुब्रत राय को फटकार लगाते हुए आदेश दिया था कि सहारा ग्रुप की महाराष्ट्र में स्थित 34 हजार करोड़ रुपये की एंबी वैली को बेचा जाए।अदालत ने राय को उपस्थित होने का आदेश भी दिया था। सुब्रत राय को चार मार्च 2014 को तिहाड़ जेल में भेजा गया था। छह मई 2016 को उन्हें चार सप्ताह की पेरोल दी गई थी, जिससे वह अपनी मां के अंतिम संस्कार में शिरकत कर सकें।

उसके बाद से पेरोल की अवधि लगातार बढ़ाई जाती रही है। राय के अलावा सहारा ग्रुप के दो और निदेशकों को गिरफ्तार किया जा चुका है।रवि शंकर दुबे व अशोक राय चौधरी सहारा ग्रुप की कंपनियों के निदेशक हैं। उन्हें निवेशकों के 24 हजार करोड़ रुपये लौटाने के लिए कहा गया था पर वह रकम जुटाने में असफल रहे थे।

मीसा भारती की 4 संपत्तियां बेनामी एक्ट में अटैच

नई दिल्ली। बेनामी संपत्ति मामले में फंसी मीसा भारती की संपत्ति को आयकर विभाग ने बेनामी संपत्ति एक्ट के अंतर्गत अटैच्ड किया है। अटैच्ड संपत्ति को न बेचा जा सकता है ना ही किराए पर दिया जा सकता है। आयकर विभाग ने मीसा की 4 संपत्तियों को अटैच किया है। मीसा पर यह कार्रवाई ‘वित्तीय अनियमितताओं’ के आरोपों को लेकर की गई है।

बिहार के पूर्व सीएम लालू प्रसाद यादव की बेटी मीसा भारती पर बेनामी संपत्ति के मामले में दो बार आयकर विभाग के सामने हाजिर नहीं हुईं हैं। इससे पहले आयकर विभाग मीसा भारती और उनके पति शैलेश के खिलाफ समन जारी किया था। अब मीसा भारती को यह साबित करना होगा कि यह चारों संपत्तियां वैध तरीके से खरीदी गईं हैं।

आयकर विभाग ने मीसा को 6 जून और 12 जून को पेश होने का आदेश दिया था लेकिन मीसा दोनों ही बार पेश नहीं हुईं थीं। लालू प्रसाद और उनके परिवार की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। इससे पहले लालू के बेटे और मंत्री तेज प्रताप यादव के पेट्रोल पंप का लाइसेंस भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) ने रद्द कर दिया था। तेज प्रताप को गलत तरीके से लाइसेंस लेने के आरोपों के बाद नोटिस जारी किया गया था।

आधी रात को लॉन्च होगा जीएसटी, संसद में होगा भव्य कार्यक्रम

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नई दिल्ली। 15 अगस्त 1947 की आधी रात को मिली आजादी के जश्न के लिए आयोजित समारोह ट्रिस्ट ऑफ डेस्टिनी (भाग्य से साक्षात्कार) की तरह ही नरेंद्र मोदी सरकार 1 जुलाई को गुड्स ऐंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) का शुभारंभ संसद के केंद्रीय कक्ष से करने की योजना बना रही है। रविवार को सभी राज्यों ने आजादी के बाद कर सुधार की इस सबसे महत्वाकांक्षी पहल के समर्थन में एकजुटता प्रदर्शित की।

सरकारी सूत्रों ने कहा कि जीएसटी के मेगा लॉन्च की योजना है, जिसमें सारा ध्यान टैक्स की कम दरों और कई करों की जटिलता से मुक्ति के जरिए कन्जयूमर्स को लाभ प्राप्ति सुनिश्चित करने पर है। जीएसटी में सेंट्रल एक्साइज और वैट से लेकर सर्विस टैक्स और एंट्री टैक्स तक, कई करों को समाहित कर दिया गया है।

सूत्रों के मुताबिक, हालांकि दशकों की प्रक्रिया के बाद तैयार हुए जीएसटी सिस्टम को पहले विज्ञान भवन से लॉन्च करने की योजना थी, जहां केंद्र और राज्यों के वित्त मंत्रियों से बनी जीएसटी काउंसिल की ज्यादातर बैठकें हुई हैं। लेकिन, अब पार्ल्यामेंट के सेंट्रल हॉल जैसे दूसरे विकल्पों पर भी विचार हो रहा है जहां राज्यों के नेतृत्व को भी आमंत्रित किया जाएगा।

रविवार को जीएसटी मीटिंग के बाद संवाददाताओं से कहा, ‘हमारे पास जीएसटी को टालने का वक्त नहीं है। काउंसिल ने स्पष्ट निर्णय ले लिया है कि इसे 1 जुलाई से लागू कर दिया जाएगा।’ रविवार की मीटिंग में सभी वस्तुओं एवं सेवाओं के लिए टैक्स की दरें तय हो गईं और करीब-करीब सभी नियमों को भी हरी झंडी मिल गई। लॉन्चिंग के लिहाज से अब जो थोड़ी-बहुत कमियां बच गई होंगी, उन्हें दूर करने के लिए 30 जून को जीएसटी काउंसिल की एक और मीटिंग होगी।

मीटिंग से निकलते वक्त केरल के वित्त मंत्री थॉमस आइजक ने कहा कि जीएसटी 1 जुलाई से ही लागू होगा।’ कुछ राज्य ही हैं जिन्हें अपना कानून बनाना है जबकि अकेले जम्मू और कश्मीर को ही बाधा के रूप में देखा जा रहा है। इधर, नोटबंदी के बाद से ही केंद्र के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे पश्चिम बंगाल अध्यादेश लाया है और माना जा रहा है कि राज्य सरकार ने जीएसटी के समर्थन का भरोसा दिलाया है। 

उधर, जम्मू और कश्मीर में जीएसटी लागू नहीं होने जा रहा क्योंकि वहां पीडीपी-बीजेपी की सरकार तो कानून लाने को तैयार है, लेकिन नैशनल कॉन्फ्रेंस इसे राज्य को संविधान में विशेष दर्जे के तहत मिली स्वायत्ता के लिए खतरा मान रहा है।

जीएसटी के बाद हम देंगे दुनिया में सबसे ज्यादा टैक्स

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नई दिल्ली। 1 जुलाई से गुड्स एंड सर्विस टैक्स लागू होने के बाद आप और हम दुनिया के अन्य देशों की तुलना में सबसे ज्यादा टैक्स देने लगेंगे। भारत में जीएसटी काउंसिल ने पांच दरें तय की हैं जो कि 0 से लेकर के 28 फीसदी तक हैं। इसमें 28 फीसदी की दर सबसे ज्यादा है।

भारत में टैक्स स्लैब 0, 5, 12,18 और 28 फीसदी तय की है। भारत ने कनाडा में लागू जीएसटी को अपना रोल मॉडल बनाकर के टैक्स लागू किया है, जिसका टैक्स रेट सबसे कम है। विश्व के कई देश जैसे कि ऑस्ट्रेलिया, ऑस्ट्रिया, कनाडा, जॉर्डन, मोरक्को, न्यूजीलैंड, सिंगापुर आदि में भी वस्तुओं पर जीएसटी वसूला जाता है, लेकिन यह दर भारत के मुकाबले काफी कम है।

कई देशों में यह 5 से लेकर के 20 फीसदी के बीच है। खास बात यह है भारत एकमात्र ऐसा देश पूरे विश्व में हो जाएगा जिसने जीएसटी में कई सारे स्लैब रखें हैं। अन्य देशों में ज्यादातर गुड्स एंड सर्विसेज पर एक टैक्स वसूला जाता है। 
ये है प्रमुख देशों में टैक्स की दर
LEN-DEN NEWS  बता रहा है प्रमुख देश और उनमें लगने वाली टैक्स की दर

देश                       टैक्स दर (फीसदी में)
ऑस्ट्रेलिया               10
ऑस्ट्रिया                  20
बेल्जियम                  21
कनाडा                    05
डेनमार्क                  25
फ्रांस                       20
जर्मनी                     19
हंगरी                       27
इंडोनेशिया              10
इजरायल                 17
इटली                      22
केन्या                      16
मलयेशिया               06
मॉरिशस                  15
मेक्सिको                  16

मजदूरी संहिता विधेयकः 18 हजार से अधिक वेतन वाले भी कहे जाएंगे मजदूर

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नयी दिल्ली। श्रम मंत्रालय अगले महीने शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र में मजदूरी संहिता विधेयक को ला सकती है। इस संहिता से सभी प्रकार के उद्योगों में श्रमिकों को सब जगह लागू एक न्यूनतम मजदूरी दिलाने का प्रस्ताव है। इसमें वह श्रमिक भी शामिल होंगे जिन्हें 18 हजार रुपये से अधिक का मासिक वेतन मिलता है।   अभी जो कानून है उसके तहत 18 हजार  रुपये से अधिक मासिक वेतन पाने वाले श्रमिक नहीं आते हैं।

मजदूरी संहिता विधेयक के बारे में प्रश्न करने पर श्रम सचिव एम़ साथियावथी से  कहा, हम इस लक्ष्य को लेकर चल रहे हैं। हम इसे अगले महीने संसद के मानसून सत्र में पारित कराने की कोशिश करेंगे। श्रम के मुद्दों पर वित्त मंत्री अरूण जेटली की अध्यक्षता में बनायी गई मंत्रालयी समिति इस संहिता को पहले ही मंजूरी दे चुकी है।

श्रम मंत्रालय विधि मंत्रालय की अनुमति के बाद इसके मसौदे को केंद्रीय मंत्रिमंडल से पास कराने की प्रक्रिया में है। यह संहिता केंद्र सरकार को विभिन्न क्षेंत्रों के लिए न्यूनतम मजदूरी तय करने की शक्ति प्रदान करेगी और राज्यों को उसका पालन करना होगा। हालांकि राज्य सरकार अपने अधिकार क्षेत्र में इससे अधिक न्यूनतम मजदूरी तय कर सकते हैं।