Friday, July 10, 2026
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फ्रिज, एसी और वॉशिंग मशीन 3-5% तक होंगे महंगे

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मुंबई। फ्रिज, एसी और वॉशिंग मशीन अगले महीने 3-5 प्रतिशत तक महंगे हो सकते हैं। हाई इनपुट कॉस्ट के चलते वाइट गुड्स कंपनियों पर दबाव बना है।

कन्ज्यूमर्स पर प्राइस हाइक का असर दिसंबर से ज्यादा दिखेगा क्योंकि रिटेलर्स के पास फिलहाल दिवाली में बिना बिका सामान पड़ा है। इंडस्ट्री के तीन सीनियर एग्जिक्युटिव्स ने कहा कि ऊंचे रेट पर फ्रेश स्टॉक खरीदने से पहले कंपनियां पुराना स्टॉक क्लीयर करेंगी।

इस साल जनवरी में इंडस्ट्री की तरफ से प्राइस हाइक होने के बाद से वाइट गुड्स कंपनियों की इनपुट कॉस्ट में लगभग 30 से 50 प्रतिशत तक उछाल आ चुकी है।

स्टील का दाम तब से अब तक 40 प्रतिशत चढ़ चुका है जबकि कॉपर 50 प्रतिशत महंगा हुआ है। ग्लोबल मार्केट में शॉर्टेज होने के चलते अहम केमिकल MDI का दाम डबल हो गया है। MDI खासतौर पर फ्रिज के लिए फोम बनाने के काम आता है।

गोदरेज अप्लायंसेज के बिजनस हेड कमल नंदी ने कहा, ‘लगभग 70 प्रतिशत इनपुट कॉस्ट इन्हीं तीन प्रॉडक्ट्स की होती है। इससे प्रॉडक्ट्स की लागत 5-6 प्रतिशत बढ़ी है।

हालांकि कुछ बोझ खुद उठाएंगे और बाकी कस्टमर्स पर डालेंगे। यह काम भी चरणबद्ध तरीके से होगा क्योंकि बाजार में खास तेजी नहीं है।’ नंदी ने कहा कि अगले महीने फ्रिज महंगा होगा। फिर वॉशिंग मशीन और अंत में जनवरी में एसी की बारी आएगी।

वाइट गुड्स मेकर एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया और उसकी प्रतिद्वंदी सैमसंग भी इंडस्ट्री की बाकी कंपनियों की तरह प्राइस हाइक की प्लानिंग में लगी हैं। एक रिटेल चेन के हेड ने बताई।

सैमसंग ने प्राइस हाइक की कोई योजना होने से इनकार किया है जबकि एलजी को इस बारे में डिटेल के लिए भेजे गए ईमेल का जवाब खबर लिखे जाने तक नहीं मिल पाया था।

आने वाले महीनों में 4 और 5 स्टार एसी का दाम भी बढ़ सकता है क्योंकि सरकार ने जनवरी से इंडियन सीजनल एनर्जी एफिसिएंसी रेशियो वाली नई रेटिंग को जरूरी कर दिया है।

इसके अलावा इनवर्टर एसी और सस्ते फिक्स्ड स्पीड एसी मॉडल्स की भी ऐसी ही रेटिंग हुआ करेगी। इसके चलते मौजूदा फाइव स्टार फिक्स्ड स्पीड एसी जनवरी से नए सिस्टम में थ्री स्टार हो जाएंगे।

एक दिग्गज एसी मैन्युफैक्चरिंग कंपनी के हेड ने कहा, ‘फोर और फाइव स्टार फिक्स्ड एसी मैन्युफैक्चरर की लागत बढ़ेगी और इस तरह के एसी के दाम बढ़ेंगे, लेकिन इनवर्टर एसी और इनका प्राइस डिफरेंस घट सकता है।

ऐसे में नए नॉर्म्स के तहत ऐसे ज्यादा फोर और फाइव स्टार एसी मॉडल्स बनाकर बेचना फाइनैंशल तौर पर फायदेमंद नहीं रह जाएंगे।’ कन्ज्यूमर्स पुराने मॉडल्स पर कुछ डिस्काउंट मिलने की उम्मीद कर सकते हैं क्योंकि रिटेलर्स के पास बड़े पैमाने पर दिवाली का बिना बिका माल पड़ा हुआ है।

मुंबई की शॉपिंग चेन कोहिनूर के एग्जिक्युटिव डायरेक्टर विशाल मेवानी के मुताबिक, ‘रिटेलर्स को बिना बिका माल डिस्काउंट पर निकालना होगा। एंट्री और मिड सेगमेंट प्रॉडक्ट्स की डिमांड ज्यादा प्रभावित हुई क्योंकि दिवाली में ज्यादातर प्रीमियम मॉडल बिकते हैं।’

सेंसेक्स पहली बार 33000 के पार, निफ्टी रेकॉर्ड ऊंचाई पर

नई दिल्ली। बाजार के लिए सोमवार की शुरुआत भी रेकॉर्ड के साथ हुई और सेंसेक्स, निफ्टी नए शिखर पर पहुंचने पर कामयाब रहे। सेंसेक्स और निफ्टी 0.3 प्रतिशत की बढ़त के साथ कारोबार कर रहे हैं। सेंसेक्स ने 100 अंकों से भी ज्यादा की बढ़त बनाते हुए 33,293 का स्तर छुआ वहीं निफ्टी 10,369 अंकों के साथ नया रेकॉर्ड बनाने में कामयबार रहा।

शुरुआती कारोबार में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी खरीदारी जारी है। बीएसई का मिडकैप इंडेक्स 0.75 फीसदी तक बढ़ा है, जबकि निफ्टी के मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.6 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई है। बीएसई का स्मॉलकैप इंडेक्स 0.7 फीसदी तक मजबूत हुआ है।

निफ्टी के सारे सेक्टर इंडेक्स हरे निशान में नजर आ रहे हैं। बैंक निफ्टी 0.5 फीसदी की तेजी के साथ 24,950 के ऊपर पहुंच गया है। ऑटो, मेटल, कंज्यूमर ड्युरेबल्स, कैपिटल गुड्स, ऑयल एंड गैस और पावर शेयरों में खरीदारी दिख रही है।

कंपोजीशन में मैन्युफैक्चरर और रेस्तरां पर 1% टैक्स लगाने की सिफारिश

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  • कंपोजीशन वाले ट्रेडरों के लिए दो अलग रेट की सिफारिश
  • 7,500 रु. से ज्यादा रूम टैरिफ वाले होटल पर 28% की जगह 18% टैक्समंत्री
  • समूह का सुझाव , दूसरे राज्यों में बिक्री करने वालों को भी मिले कंपोजीशन का लाभ 

नई दिल्ली। जीएसटी के तहत कंपोजीशन स्कीम में मैन्यूफैक्चरर और रेस्तरां सर्विसेज पर भी 1% टैक्स लग सकता है। असम के वित्त मंत्री हेमंत बिस्वा शर्मा की अध्यक्षता वाले मंत्री समूह ने इसकी सिफारिश की है।

कंपोजीशन स्कीम को आकर्षक बनाने के सुझाव देने के लिए इस मंत्री समूह का गठन किया गया था। अभी कंपोजीशन स्कीम में ट्रेडर के लिए पूरे टर्नओवर का 1%, मैन्युफैक्चरर के लिए 2% और रेस्तरां के लिए 5% टैक्स का प्रावधान है।

सूत्रों के मुताबिक मंत्री समूह ने कहा है कि दूसरे राज्यों में बिक्री करने वालों को भी कंपोजीशन का विकल्प मिलना चाहिए। अभी दूसरे राज्यों में सप्लाई करने वाले कंपोजीशन में नहीं जा सकते, भले ही उनका टर्नओवर 20 लाख रुपए की छूट सीमा से कम हो। नियम बदलने से खास तौर से जॉब वर्क करने वालों को फायदा होगा।

मंत्री समूह का गठन इसी महीने हुआ था। इसमें बिहार के उप-मुख्यमंत्री सुशील मोदी, जम्मू-कश्मीर के वित्त मंत्री हसीब द्रबु, पंजाब के वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल और छत्तीसगढ़ के वाणिज्य मंत्री अमर अग्रवाल शामिल हैं।

कंपोजीशन स्कीम के लिए सालाना टर्नओवर की सीमा पहले 75 लाख रुपए थी। इसे 1 अक्टूबर से एक करोड़ किया जा चुका है। जीएसटी में अभी तक करीब एक करोड़ कारोबारियों ने रजिस्ट्रेशन कराया है।

इनमें से 15 लाख कंपोजीशन में हैं। नियमित रजिस्ट्रेशन वालों को हर महीने रिटर्न फाइल करना पड़ता है, लेकिन कंपोजीशन वालों के लिए तिमाही रिटर्न का प्रावधान है। उसे इनवॉयस की डिटेल्स भी नहीं देनी है।

एसी रेस्तरां में खाने के बिल पर 12% टैक्स का सुझाव
मंत्रीसमूह ने एसी और नॉन-एसी रेस्तरां में फर्क भी खत्म करने का सुझाव दिया है। दोनों के लिए 12% जीएसटी की सिफारिश की है। अभी एसी रेस्तरां में खाने पर 18% टैक्स लगता है। 7,500 रुपए से ज्यादा रूम टैरिफ वाले होटल के लिए भी टैक्स रेट 28% से घटाकर 18% करने का सुझाव है।

आसान जीएसटीएन के लिए रोजाना 500 कारोबारियों से ले रहे फीडबैक
जीएसटीनेटवर्क को आसान बनाने के लिए एक सर्वे किया जा रहा है। रिटर्न फाइल करने वाले करीब 500 कारोबारियों को फोन करके उनसे फीडबैक लिए जा रहे हैं। जीएसटीएन चेयरमैन अजय भूषण पांडे ने यह जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि नेटवर्क को बेहतर बनाने के लिए लोगों से सुझाव भी मांगे जा रहे हैं। रिटर्न फाइलिंग में रही तकनीकी दिक्कतों के कारण सरकार इसकी तारीख कई बार बढ़ा चुकी है।

कंपोजीशन वाले कारोबारियों के लिए जल्द उपलब्ध होगा रिटर्न फॉर्म
कंपोजीशनस्कीम वाले कारोबारी जुलाई-सितंबर तिमाही का रिटर्न जल्दी ही भर सकेंगे। इसके लिए जीएसटी नेटवर्क पर जीएसटीआर-4 फॉर्म उपलब्ध होगा। नेटवर्क के सीईओ प्रकाश कुमार ने यह जानकारी दी।

इन तीन महीनों के लिए सालाना 75 लाख रुपए टर्नओवर की सीमा ही लागू होगी। एक करोड़ रुपए की सीमा 1 अक्टूबर से प्रभावी हुई है। आइसक्रीम, पान मसाला और तंबाकू उत्पाद बनाने वाले इस स्कीम में नहीं जा सकते

व्यापार महासंघ के दीवाली मिलन समारोह में जीएसटी का मुद्‌दा छाया

कोटा। कोटा व्यापार महासंघ का दीपावली स्नेह मिलन समारोह रविवार को बूंदी रोड स्थित रिसोर्ट में हुआ। समारोह में भी जीएसटी का मुद्दा छाया रहा। इस मौके पर व्यापार महासंघ के सभी 150 संस्थाओं के पदाधिकारियों ने भाग लिया।

महासंघ के अध्यक्ष क्रांति जैन महासचिव अशोक माहेश्वरी ने बताया कि जीएसटी ने उद्योग जगत को हिला दिया है। वहीं पिछले तीन माह से फैल रहे डेंगू की रोकथाम पर भी चिंतन किया।

राजस्थान जीएसटी सलाहकार बोर्ड के सदस्य एमएल पाटौदी ने बताया कि वर्तमान में जीएसटी में काफी विसंगतियां हैं। इससे पूरे उद्योग जगत पर असर पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि कमियों को दूर करने के लिए जीएसटी काउंसिल को सभी तरह के व्यापार उद्योग को तीन माह का रिटर्न भरने पांच करोड़ तक के व्यापार उद्योग को कंपोजिशन स्कीम में शामिल करने रिवर्स मैकेनिज्म कानून को खत्म किया जाना चाहिए। जीएसटी कानून की पूरी जानकारी भी नहीं है।

समारोह में विधायक चंद्रकांता मेघवाल ने कहा कि जीएसटी लागू होने के बाद व्यापारियों को कई तरीके की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इसके समाधान के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। विधायक संदीप शर्मा ने कहा कि व्यापार उद्योग विकसित है तो देश विकसित है। पूर्व महापौर रत्ना जैन ने ने कहा कि ऐसा लगता है कि जीएसटी की प्रीमेच्योर डिलेवरी है।

नगर निगम की उपमहापौर सुनीता व्यास ने बताया कि कोई भी नया कानून आता है तो उसमें कमी रह जाती है। सरकार तक व्यापार जगत की बात पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। विधायक हीरालाल नागर, नगर विकास न्यास अध्यक्ष आरके मेहता, पूर्व न्यास अध्यक्ष रविंद्र त्यागी ने सम्बोधित किया।

डेंगू को खत्म करने की ली शपथ
इस अवसर पर शहर में फैल चुकी डेंगू बीमारी से लड़ने खत्म में हरसंभव सहयोग प्रशासन और चिकित्सा विभाग को देने के लिए पदाधिकारियों ने शपथ ली। स्वच्छ कोटा और स्वस्थ कोटा का नारा दिया गया।

महासचिव अशोक माहेश्वरी ने कहा कि बाजारों में व्याप्त गंदगी को दूर करने, कचरा फैलाने गलत जगह पर कचरा डालने वालों पर रोक लगाने के लिए व्यापार महासंघ अपने स्तर पर बड़ा कदम उठाएगा।

एक मंच पर आए 18 समाजों के 650 युवक-युवती

  • सामाजिक पहल : वैश्य समाज के करीब 25 हजार समाजबंधु परिवार सहित अन्नकूट महोत्सव में पहुंचे।

  • युवा वर्ग ने रिश्ते-नाते के बंधन से सामाजिक एकता का किया शंखनाद।

अरविंद, कोटा। उमंग और उल्लास के माहौल में रोशनी से जगमगाते सीएडी ग्राउंड परिसर में रविवार को अखिल भारतीय वैश्य महासम्मेलन, कोटा जिला द्वारा आयोजित महाकुंभ में वैश्य समाज के 18 घटक खुले मन से एकजुट हुए।

वैवाहिक परिचय सम्मेलन में देशभर से आए 650 युवक-युवतियों ने एक ही मंच से परिचय दिया। एक-दूसरे से अपरिचित अभिभावक स्नेह-मिलन के साथ दिनभर अपने बेटे-बेटी के लिए रिश्ते ढूंढते रहे।

अ.भा.वैश्य महासम्मेलन के राष्ट्रीय महामंत्री गोपाल एम.मोर ने कहा कि परिचय सम्मेलन से कोटा की धरती पर वैश्य समाज ने सामाजिक एकता का सामूहिक दीप जलाया है। वैश्य समाज एकजुट होकर तेजी से आगे बढ़ रहा है।

आज देश में वैश्य समाज के 3 मुख्यमंत्री, 1 उपमुख्यमंत्री, 1 राज्यपाल तथा कई सांसद, विधायक एवं निकायों में जनप्रतिनिधी निर्वाचित हुए हैं। उप्र के निकाय चुनाव, हिमाचल व गुजरात में भी वैश्य समाज आगे बढ़ रहा है। हमें व्यवसाय के साथ अन्य क्षेत्रों में भी कदम रखने होंगे।

प्रदेश महामंत्री राजू अग्रवाल (मंगोड़ी वाले) ने कहा कि समाज के युवा एवं महिलावर्ग सामाजिक संगठनों को मजबूती से खड़ा करें। ऐसे आयोजन वैश्य घटकों में अनेकता से एकता का संदेश देंगे।

पूर्व मंत्री शांति धारीवाल ने कहा कि ऐसे अनुशासित व मर्यादित सामाजिक उत्सव वैश्य समाज की गरिमा को बढाते हैं। विशिष्ट अतिथी महापौर महेश विजय, यूआईटी चेयरमैन रामकुमार मेहता एवं कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री पंकज मेहता ने कहा कि कोटा में परिचय सम्मेलन से वैश्य समाज ने एकता का बिगुल बजाया। रोटी-बेटी व्यवहार एक स्वस्थ परंपरा है, जिससे कई परिवारों में खुशहाली आएगी।

युवा परिवार से जुडे़ रहें
शाम को प्रेरक उद्बोधन में प्रख्यात विचारक पं.विजयशंकर मेहता ने ‘तुम्हारे लिए’ विषय पर कहा कि युवावर्ग अपने पारिवारिक दायित्वों से जुडा रहा तो कभी अकेलापन कभी महसूस नहीं करेगा। इसलिए परिवार व समाज से हमेशा जुडे रहें। समारोह में वैश्य समाज की प्रतिभाओं तथा भामाशाहों को सम्मानित किया गया। कलाकार पंकज मारवाडी ने कच्ची घोड़ी पर राजस्थानी लोकनृत्य प्रस्तुत किया।

इस मौके पर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एके गुप्ता, प्रदेश महामंत्री प्रदीप काबरा, उद्यमी एलसी बाहेती, पूर्व महापौर डॉ रत्ना जैन, डॉ अशोक जैन, प्रदेश युवा अध्यक्ष महेश विजय, जिला युवा अध्यक्ष रामबाबू गुप्ता, महिला अध्यक्ष पुष्पाजंली विजय व महामंत्री गायत्री मित्तल, आयोजन समिति के संरक्षक गोविंद माहेश्वरी, रामविलास जैन, दिनेश विजय, रजनी गुप्ता, मदनलाल दलाल, सत्यप्रकाश गुप्ता सहित सभी पदाधिकारी एवं विभिन्न समाजों के अध्यक्ष उपस्थित रहे।

वैश्य महासम्मेलन के जिलाध्यक्ष डॉ वेदप्रकाश गुप्ता तथा महामंत्री पीसी मित्तल ने सभी का आभार जताया। परिचय सम्मेलन में सॉफ्टवेयर इंजीनियर सुनील बंसल तथा आयुषी जैन का इंटर-वैश्य रिश्ता तय होने पर तालियां गूंज उठी।

अन्नकूट महोत्सव के संयोजक दिनेश विजय ने बताया कि छप्पनभोग की झांकी सजाने के बाद 25 हजार से अधिक समाजबंधुओं ने पंक्तियों में अनुशासित ढंग से महाप्रसादी के रूप में भोजन किया। खास बात यह रही कि किसी ने झूंठन नहीं छोड़ी। परिसर में देर रात तक भजन प्रतियोगिता जारी रही।

18 घटकों को एकसूत्र में पिरोया
सभी 18 वैश्य घटकों के 650 से अधिक युवक-युवतियां विभिन्न राज्यों से कोटा पहुंचे। अंतर-वैश्य विवाह करने वालों को मंच पर पहली बार सम्मानित किया। बढ़ती उम्र और प्रोफेशन के मध्य यह सम्मेलन एक सेतु बनकर कार्य करेगा। इससे जो रिश्ते तय होंगे, उनके लिए समाजों में निःशुल्क सामूहिक विवाह करने की योजना है।
– रामविलास जैन, संयोजक, परिचय सम्मेलन

समाज नव-निर्माण का शंखनाद
अब तक 18 वैश्य घटकों में परस्पर शादियां बहुत कम होती थीं, देश में सबसे पहले कोटा से इसकी नई शुरुआत की गई। युवाओं में पढाई के साथ उम्र भी बढ़ रही है, जब सही समय पर परिवार की रचना होगी तो समाज के नव-निर्माण में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो जाएगी।
डॉ.वेदप्रकाश गुप्ता, जिलाध्यक्ष, अ.भा.वैश्य महासम्मेलन

अंतर-वैश्य विवाह को सामाजिक मान्यता
आज उच्च शिक्षा या व्यापार के चलते अविवाहित युवाओं की उम्र 30 से 35 वर्ष तक पहुंच जाती है। ऐसे में कई परिवारों के सामने नई समस्या खड़ी हो जाती है। हम व्यापार या प्रोफेशन के साथ देश की उन्नति में भागीदार बनें। वैश्य समाज पूरे देश में फैला है, यह परंपरा जल्द सभी राज्यों में प्रारंभ होगी।
– पीसी मित्तल , जिला महामंत्री, अ.भा.वैश्य महासम्मेलन

रोटी-बेटी संबंधों से बढ़ेगी प्रगाढ़ता
अन्नकूट में 56 भोगों के साथ ही 25 हजार बंधुओं की महाप्रसादी के लिए 200 बंधुओं की टीम जुटी रही। कोटा शहर से वैश्य समाज में सर्वप्रथम नई सोच के साथ साझा परिचय सम्मेलन की शुरूआत हुई। रोटी-बेटी व्यवहार की पहल से सम्पूर्ण वैश्य समाज की प्रतिष्ठा को नई उंचाइयां मिलेगी।
– दिनेश विजय, संयोजक, अन्नकूट महोत्सव

आधार नामांकन या अपडेशन फॉर्म पर अब बैंक स्टाफ का होगा बायॉमीट्रिक साइन

नई दिल्ली। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीआईए) जल्द ही आधार नामांकन और अपडेशन फॉर्म को लेकर बड़ा बदलाव करने जा रहा है।

इसके तहत बैंकों, डाकघरों और सरकारी कार्यालयों के अधिकृत कर्मचारियों को इन आवेदनों पर बायॉमीट्रिक साइन करना होगा। इस प्रक्रिया के तहत सुरक्षा चिंताओं को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।

बायॉमीट्रिक साइन होने से आगे संबंधित अधिकारी आधार नामांकन और अपडेशन फॉर्म की तस्दीक कर सकेंगे। गौरतलब है कि ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि आधार के लिए आवेदन को इन जगहों से भी शुरू किया जा सके।

आधार जारी करने वाली संस्था यूआईडीआईए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अजय भूषण पांडे ने बताया कि इस कदम का उद्देश्य बायॉमीट्रिक और अन्य सूचनाओं के कलेक्शन के बारे में सुरक्षा चिंताओं को दूर करना है।

इससे पहले यूआईडीआईए ने राज्यों से निजी एजेंसियों द्वारा किए जा रहे नामांकन को सरकारी या नगरपालिका के परिसर में स्थानातंरित करने के लिए कहा था। अब तक आधार नामांकन का पूरा काम बाहरी निजी परिसरों में होता आ रहा है।

इतना ही नहीं, यूआईडीआईए ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के साथ-साथ निजी बैंकों को 10 शाखाओं में से कम से कम एक में आधार नामांकन सेवा शुरू करने के निर्देश दिए थे।

पांडे ने कहा, ‘इस प्रणाली से बैंकों, डाकघरों तथा सरकारी परिसरों में नामांकन और अपडेशन की प्रक्रिया बडे़ पैमाने पर की जा सकेगी। इसके अलावा नामांकन के दौरान बैंकों, डाकघरों या सरकार के अधिकृत कर्मचारी आधार नामांकन और अपडेशन आवेदन की तस्दीक बायॉमीट्रिक हस्ताक्षर से कर सकेंगे।’

सुरक्षा और देखरेख की अतिरिक्त सुविधा के लिए यह नई प्रणाली लाई जाएगी। प्रस्तावित व्यवस्था के 1 जनवरी से शुरू होने की संभावना है। नई व्यवस्था के तहत बायॉमीट्रिक साइन करने के लिए एक कर्मचारी निर्धारित होगा।

अब तक डेटा कलेक्शन प्राइवेट ऑपरेटर द्वारा किया जा रहा है और फॉर्म की जांच सरकार द्वारा नियुक्त जांचकर्ता करता है। लेकिन अब संबंधित अधिकारी के बायॉमीट्रिक हस्ताक्षर से डेटा कलेक्शन की पूरी प्रक्रिया ज्यादा सुरक्षित हो जाएगी।

पांडे ने बताया कि पहले प्राइवेट ऑपरेटर (भले ही वह प्रमाणित ऑपरेटर हो) आवेदन पर हस्ताक्षर करता था पर अब उस पर किसी सरकारी, बैंक या पोस्ट ऑफिस के अधिकारी का बायॉमीट्रिक्स के द्वारा काउंटर साइन होगा।

स्किल इंडिया मिशन को बढ़ावा देगी ‘‘संकल्प’’ और ‘‘स्ट्राइव’’ परियोजनाएं

नई दिल्ली। आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति द्वारा विश्व बैंक समर्थित दो नई योजनाओं -आजीविका संवर्द्धन के लिए दक्षता हासिल करने और ज्ञान बढ़ाने (संकल्प) तथा औद्योगिक मूल्य संवर्द्धन हेतु दक्षता सुदृढ़ीकरण (स्ट्राइव) योजनाओं को मंजूरी प्रदान की गई।

4,455 करोड़ रूपये की केंद्रीय प्रायोजित संकल्प योजना में विश्व बैंक द्वारा 3,300 करोड़ रूपये ऋण की सहायता शामिल है, जबकि 2,200 करोड़ रूपये की केंद्रीय प्रायोजित स्ट्राइव योजना में विश्व बैंक से इस योजना की आधी राशि ऋण सहायता के रूप में दी जाएगी।

संकल्प और स्ट्राइव योजनाएं निष्कर्ष आधारित है, जिसमें व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण में सरकार की कार्यान्वयन रणनीति को आदानों के साथ परिणामों से जोड़ा गया है।

दक्षता प्रशिक्षण के प्रभावी सुशासन और विनियमन शुरू करने के लिए व्यावसायिक शिक्षा में औद्योगिक प्रयासों को चिन्हित करने के दृष्टिगत काफी लंबे समय से एक राष्ट्रीय रूपरेखा की आवश्यकता महसूस की जा रही थी।

इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय कौशल प्रशिक्षण में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए इस तरह की कई पहलें शुरू कर चुका है जैसे स्मार्ट पोर्टल के माध्यम से मान्यता, केन्द्रीकृत मूल्यांकन एवं प्रमाणीकरण प्रणाली, आईटीआई का आईएसओ प्रमाणीकरण, कुछ राज्यों में ऑनलाईन परीक्षणों की ओर संक्रमण आदि। ऐसे में संकल्प और स्ट्राइव जैसी परियोजनाएं ज़िला स्तर तक देश में सुधार लाने में मदद करेंगी।

संकल्प मान्यता और प्रमाणीकरण के लिए राष्ट्रीय निकायों की संस्थापना द्वारा इस आवश्यकता को पूरा करेगी। मान्यता एवं प्रमाणीकरण के लिए निकाय दीर्घकालिक एवं अल्पकालिक दोनों ही व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण (वीईटी) की मान्यता और प्रमाणनन का कार्य करेगा।

यह संरचना भारत में व्यवसायिक इतिहास में पहली बार विभिन्न केंद्रीय, राज्य और प्राइवेट क्षेत्र के संस्थानों पर ध्यान देगा। जिसके फलस्वरूप गतिविधियों के दोहराव का परिहार होगा और व्यावसायिक प्रशिक्षण में एकरूपता आएगी और इस प्रकार इसका बेहतर प्रभाव होगा।

ये दोनों परियोजनाएं संस्थागत स्तर पर सुधार लाएंगी तथा दीर्घकालिक एवं अल्पकालिक रूप से कौशल विकास प्रशिक्षण प्रोग्रामों की गुणवत्ता एवं प्रासंगिकता को बेहतर बनाएगी। स्ट्राइव परिणाम एवं सुधार लिंक्ड वित्तपोषण के ज़रिए 500 से अधिक आईटीआई का आधुनिकीकरण करेगी।

यह 100 से अधिक चुनिंदा आईटीआई को विश्वस्तरीय मानकों के अनुरूप भी बनाएगी। यह 100 उद्योग चैम्बर्स/क्लस्टर्स को प्रोत्साहित कर प्रशिक्षुता के लिए संस्थागत क्षमता निर्माण पर भी ध्यान केन्द्रित करेगी। ये इस निमित्त 700 औद्योगिक संस्थानों को लाखों महत्वकांक्षा रखने वाले लोगों को रोजगार उन्मुख दक्षता प्रशिक्षण संस्थान स्थापित किए जा रहे है।

संकल्प में प्रशिक्षकों एवं मूल्यांकनकर्ता अकादमियों के स्वतः प्रसूत मॉडलों की स्थापना पर विचार किया गया है। प्राथमिकता क्षेत्रों में 50 से ज्यादा ऐसी अकादमियों की स्थापना की जा जानी है।

डीजीटी, एमएसडीई ने सरकारी एवं निजी क्षेत्र में 35 से ज्यादा ट्रेडों में प्रशिक्षण का प्रस्ताव लेकर प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण (आईटीओटी) के लिए अनेक संस्थाओं की स्थापना हेतु इस दिशा में पहले ही उल्लेखनीय प्रगति की है।

RBI के पास नहीं था 2,000 और 200 के नोटों जारी करने का अधिकार ?

मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक को लेकर एक चौंका देने वाला खुलासा सामने आया है। आरटीआई से मिले जवाब के मुताबिक, भारतीय रिजर्व बैंक के पास यह प्रमाणित करने का कोई आधिकारिक दस्तावेज नहीं है कि नोटबंदी के बाद उसके पास 2,000 रुपये और 200 रुपये के नए नोट जारी करने का अधिकार था। 

मुंबई के आरटीआई कार्यकर्ता एम.एस. रॉय ने कहा, ‘आरबीआई के जवाब के मुताबिक केंद्रीय बैंक ने 200 रुपये और 2,000 रुपये के नोट जारी करने की तिथि तक कोई भी सरकारी प्रस्ताव (जीआर) या परिपत्र प्रकाशित नहीं किया था।’

नोटबंदी से लगभग छह महीने पहले 19 मई, 2016 का एक दस्तावेज दिखाता है कि भारतीय रिजर्व बैंक के कार्यकारी निदेशक द्वारा 18 मई, 2016 को पेश किए गए प्रस्ताव को केंद्रीय निदेशक मंडल ने मंजूरी दे दी थी।

यह प्रस्ताव नए बैंक नोटों के डिजाइन, पैमाने और मूल्यों से संबंधित था, जिसे बोर्ड ने कुछ ही मिनटों में मंजूरी के लिए केंद्र सरकार के पास भेज दिया था।

इस तरह का प्रस्ताव पहले 8 जुलाई, 1993 को भी तत्कालीन सरकार के पास भेजा गया था, जिसमें 10, 20, 50, 100 और 500 रुपये के आकार को कम कर नए भारतीय बैंक नोटों के एक नए ‘परिवार’ को शुरू करने का प्रस्ताव रखा गया था।

आरबीआई के मुंबई स्थित हेडक्वॉर्टर से भेजे गए एक ज्ञापन के मुताबिक 15 जुलाई, 1993 को निदेशक मंडल की एक बैठक में पुराने प्रस्ताव (8 जुलाई, 1993) को मंजूरी दी गई थी, जिस पर तत्कालीन कार्यकारी निदेशक ए.पी. अय्यर के हस्ताक्षर थे।

रॉय ने 27 फरवरी, 2017 को एक अलग आरटीआई भी दायर की थी, जिसमें एक रुपये के नोट पर महात्मा गांधी की तस्वीर मुद्रित न किए जाने के बारे में दस्तावेज मांगे गए थे, जबकि 5 रुपये से लेकर 2,000 तक के सभी नोटों पर महात्मा गांधी की तस्वीर मुद्रित की जा रही है।

इस विशेष प्रश्न के जवाब में आरबीआई ने 15 जुलाई, 1993, 13 जुलाई, 1994 और 19 मई, 2016 को हुई बोर्ड की बैठकों में पारित प्रस्ताव की प्रतियां मुहैया कराईं।

हालांकि, ये प्रस्ताव केवल 10, 20, 50, 100 और 500 रुपये के लिए डिजाइन फीचर के बारे में बताते हैं, जिन पर राष्ट्रपिता की तस्वीर मुद्रित हैं।

आरटीआई पर मिले जवाब में आरबीआई बोर्ड के प्रस्ताव के अंदर 1,000, 2,000 रुपये और हाल ही में जारी 200 रुपये के नोट के डिजाइन की विशेषताओं या महात्मा गांधी की तस्वीर के बारे में कोई संदर्भ मौजूद नहीं है।

‘बिना मंजूरी कैसे डिजाइन हुए और छपे नए नोट’
रॉय ने कहा कि यदि आरबीआई बोर्ड के प्रस्तावों में डिजाइन या 1000 रुपये में (नोटबंदी के बाद चलन में नहीं) 2,000 रुपये और बाद में 200 रुपये के नोटों पर महात्मा गांधी की तस्वीरों को छापने पर कोई चर्चा नहीं हुई।

इससे स्पष्ट है कि इसके लिए किसी तरह की आधिकारिक मंजूरी नहीं दी गई थी। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर इन नोटों को जारी करने के लिए कोई मंजूरी नहीं दी गई, तो इन नोटों को किसने डिजाइन, मुद्रण, वितरण और अधिकृत किया।

‘2000 के नोटों की कानूनी वैधता पर प्रश्नचिह्न’
रॉय ने कहा, ‘यदि आरबीआई बोर्ड ने सार्वजनिक डोमेन में किसी भी तरह की कोई मंजूरी नहीं दी और ना ही कोई समर्थन जीआर या कोई अन्य ज्ञात दस्तावेज मौजूद नहीं है, तो यह इन नोटों की कानूनी वैधता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न है।

साथ ही यह 200 और 2,000 रुपये के नोटों की आधिकारिक स्थिति पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। उन्होंने कहा कि इस मामले की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।’

जीएसटीएन की खामिया दूर करने के लिए टीम का विस्तार करेगी इंफोसिस

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नई दिल्ली । वस्तु एवं सेवा कर नेटवर्क विक्रेता और सॉफ्टवेयर प्रमुख इंफोसिस, जीएसटीएन में बग को ठीक करने के लिए अपनी टीम का विस्तार करेगी। यह जानकारी जीएसटीएन नेटवर्क की देखरेख करने लिए गठित किए गए मंत्रिसमूह (जीओएम) के चेयरमैन सुशील कुमार मोदी ने दी है।

सुशील कुमार मोदी जो कि बिहार के उपमुख्यमंत्री भी हैं ने अपनी जीओएम की तीसरी मीटिंग में कहा, “आईटी सेवा क्षेत्र की प्रमुख कंपनी इंफोसिस ने हमें बताया कि यह अपनी 100 सदस्यीय टीम का विस्तार करेगा। यह जीएसटीएन नेटवर्क को चलाती है और इसमें बग या तकनीकी खामी को दूर करने की दिशा में काम करती है।”

इंफोसिस पहले ही इस नेटवर्क पर 18 से 27 तकनीकी खामियों को दूर कर चुकी है और जीएसटी काउंसिल की ओर से आए परिवर्तनों के कारण टेक्निकल बग की समस्या को सुलझाते हुए पोर्टल को संचालन करने की स्थिति में ला चुकी है। जीएसटी काउंसिल अपनी हर बैठक में पोर्टल को और सहज बनाने की दिशा में काम कर रही है।

इंफोसिस ने साल 2015 के दौरान दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल कर प्रणाली को लागू करने के लिए 1,380 करोड़ का अनुबंध प्राप्त किया था। इंफोसिस को इसका रखरखाव अगले 5 सालों के लिए करना है।

सुशील मोदी ने कहा, “जीएसटी परिषद की हर बैठक में सदस्य राज्यों की ओर से दिए गए सुझाव को क्रियात्मक बनाया जा रहा है, जिसे इंफोसिस को सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म में बदलाव के साथ को नेटवर्क में शामिल करना है।”

जीएसटीएन करदाताओं से फोन पर पूछ रहा उनकी राय

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नयी दिल्ली। माल एवं सेवा कर जीएसटी प्रणाली के तहत आईटी सुविधाएं देने वाले जीएसटी नेटवर्क ने करदाताओं से पोर्टल पर उनके अनुभव के बारे में जानकारियां जुटानी शुरू की है। इस सर्वेक्षण का उद्देश्य जीएसटीएन को और सरल एवं सुविधाजनक बनाना है।

जीएसटीएन के चेयरमैन अजय भूषण पांडेय ने कहा कि पूरी तरह समर्पित कॉल सेंटर से रोजाना 500 कॉल किये जा रहे हैं। ये कॉल रिटर्न दाखिल कर चुके लोगों को किये जा रहे हैं। उनसे पोर्टल पर उनके अनुभव के बारे में पूछा जा रहा है।

पांडेय ने कहा, जीएसटी प्रणाली में हम लोगों से लगातार उनकी राय ले रहे हैं। हम रोज सर्वेक्षण करते हैं तथा रिटर्न दायर कर चुके करदाताओं को कॉल कर रहे हैं। हम उनसे उनका अनुभव पूछ रहे हैं और उन्हें हुई दिक्कतों की जानकारियां जुटा रहे हैं।

उन्होंने आगे कहा, जीएसटीएन एक नयी प्रणाली है और लोगों को इसकी आदत पड़ने की देर है। जब तक ऐसा नहीं होता है, हमें कारोबारियों को होने वाली दिक्कतों के प्रति सजग रहना होगा और उनके अनुभव को बेहतर बनाने के तरीकों पर काम करना होगा। अभी हमारी प्राथमिकता मौजूदा दिक्कतों को दूर करना है और चीजों को सरल बनाना है।

उल्लेखनीय है कि इस साल एक जुलाई से जीएसटी व्यवस्था लागू हुई है। इस व्यवस्था के तहत जीएसटीएन के जरिये रिटर्न दायर किये जाते हैं। इससे औसतन प्रति माह करीब 50 लाख रिटर्न दायर हुए हैं।