Friday, July 10, 2026
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ONGC की 60 फीसद हिस्सेदारी निजी कंपनियों को देने की तैयारी

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नई दिल्ली । सरकार ओएनजीसी के 11 तेल एवं गैस क्षेत्रों में उत्पादन की जिम्मेदारी निजी कंपनियों के हाथ में देने की तैयारी कर रही है।

पेट्रोलियम मंत्रालय ने ओएनजीसी और ऑयल इंडिया लिमिटेड (ओआइएल) के 15 तेल एवं गैस क्षेत्रों में 60 फीसद हिस्सेदारी निजी कंपनियों को देने का प्रस्ताव रखा है। माना जा रहा है कि इससे इन क्षेत्रों से उत्पादन बढ़ाया जा सकेगा।

सूत्रों के मुताबिक, सरकारी कंपनियों के इन तेल व गैस क्षेत्रों में कुल 79.12 करोड़ टन कच्चे तेल (क्रूड) और 333.46 अरब घनमीटर गैस रिजर्व की पहचान की गई है।

इन 15 में से 11 क्षेत्र ओएनजीसी और चार ऑयल इंडिया लिमिटेड के हैं। इनमें गुजरात के कलोक, अंकलेश्वर, गंधार और संथाल स्थित ओएनजीसी के चार बड़े तेल फील्ड शामिल हैं।

सरकारी कंपनियों को नामांकन के आधार पर ये क्षेत्र आवंटित किए गए थे। मौजूदा नियमों के अनुसार, निजी कंपनियों को ऐसे नामांकन वाले ब्लॉक में हिस्सेदारी लेने की अनुमति नहीं है। अभी निजी कंपनियां केवल उन्हीं ब्लॉकों में हिस्सेदारी ले सकती हैं, जिनके लिए खुली बोली लगाई गई हो।

इसीलिए इनमें निजी कंपनियों को हिस्सेदारी देने से पहले नीतियों में बदलाव की जरूरत होगी। मंत्रालय ने इस संदर्भ में केंद्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष सिफारिश रखी है। इन 15 क्षेत्रों के लिए वर्तमान उत्पादन के आधार पर एक बेसलाइन तय की जाएगी।

इनमें 60 फीसद हिस्सेदारी लेने वाली निजी कंपनियों को केवल उस बेसलाइन से ऊपर के उत्पादन पर अधिकार दिया जाएगा। इन क्षेत्रों के लिए बोली लगाई जाएगी।

दस साल की अनुबंध अवधि के दौरान सर्वाधिक पूंजी लगाने व अपने कुल राजस्व का अधिकतम हिस्सा सरकार को देने का प्रस्ताव रखने वाली निजी कंपनी को वह क्षेत्र सौंपा जाएगा।

मंत्रालय तेल एवं गैस उत्पादन में स्थिरता से निराश है। उसका मानना है कि निजी क्षेत्र के हाथ में देकर इन तेल व गैस ब्लॉकों से उत्पादन बढ़ाया जा सकता है। निजी कंपनियां तकनीक और पूंजी लगाकर उत्पादन में इजाफा कर सकती हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2022 तक पेट्रोलियम के क्षेत्र में आयात निर्भरता को 10 फीसद तक कम करने का लक्ष्य रखा है। 2014-15 में देश 77 फीसद जरूरत के लिए आयात पर निर्भर था। इस समय यह निर्भरता बढ़कर 80 फीसद के ऊपर निकल गई है।

2025 तक भारत में फूड प्रोसेसिंग कारोबार दोगुने से ज्यादा की उम्मीद

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नई दिल्ली । खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में निवेश की अपार संभावनाएं हैं। भारत में खानपान सभ्यता के साथ विशाल कारोबार भी है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने यह बात कही। कोविंद के अनुसार देश में वर्ष 2025 तक खाद्य उत्पादों की खपत बढ़कर दोगुनी से भी अधिक हो जाएगी।

समूचे देश के फूड प्रोसेसिंग उद्योग क्षेत्र में घरेलू व विदेशी निवेशकों लिए बड़ी कारोबारी संभावनाएं पैदा हो जाएंगी। राष्ट्रपति रविवार को ‘वर्ल्ड फूड इंडिया’ के समापन समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि यह एक ऐसा वृहद क्षेत्र है, जहां व्यवसाय के असीमित अवसर हैं।

इससे महिलाओं और युवाओं के लिए खूब रोजगार सृजित होंगे। फसलों की कटाई के बाद उपज के होने वाले नुकसान को कम करने की दिशा में खाद्य प्रसंस्करण (फूड प्रोसेसिंग) क्षेत्र को ध्यान करना चाहिए। इससे किसानों की आमदनी को दोगुना करने में भी मदद मिलेगी।

देसी-विदेशी निवेश की अपार संभावनाएं
भारत में 24 लाख करोड़ रुपये के खाद्य उत्पादों की कुल खपत होती है। इसके 2025 तक बढ़कर 65 लाख करोड़ रुपये तक हो जाने की उम्मीद है। इससे भारत में फूड वैल्यू चेन बनाने को लेकर बड़े मौके मिलेंगे।

राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि इन संभावनाओं के मद्देनजर देश में पोस्ट हार्वेस्ट सुविधाएं, परिवहन, कोल्ड चेन विकसित करने और खाद्य उत्पाद के क्षेत्र में घरेलू के साथ विदेशी निवेश के लिए बेहतरीन मौके आएंगे।

रखरखाव बेहतर कर रोकें बर्बादी
ग्लोबल स्तर पर भारतीय खाद्य उत्पादों की वृहद श्रृंखला है। पूर्वोत्तर के विविध व्यंजनों के साथ सुदूर पश्चिम के पंजाब में सरसों साग, गुजरात का ढोकला और दक्षिण में तमिलनाडु का डोसा समेत अन्य व्यंजनों का विस्तृत दायरा है। भारतीय खाद्य उद्योग निवेशकों के लिए मैदान तैयार कर चुका है।

घरेलू स्तर पर कृषि उपज का बड़ा हिस्सा कटाई के साथ ही रखरखाव के अभाव में नष्ट हो जाता है। अमरूद जैसी फसल का 16 फीसद और आम व सेब का 10 प्रतिशत हिस्सा नष्ट हो जाता है। इसे संरक्षित करने की जरूरत है।

युवाओं के लिए असीमित संभावनाएं
कोविंद ने कहा कि ग्रामीण भारत में महिलाएं पहले से ही खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में सक्रिय हैं। लेकिन इस उद्योग क्षेत्र में नई तकनीकी ने युवाओं व महिलाओं के लिए संभावनाएं असीमित रूप से बढ़ाई हैं।

उन्होंने फूड इंडिया को ‘भारतीय पकवानों का कुंभ मेला’ करार दिया। राष्ट्रपति ने कहा कि तीन दिनों तक चले इस महाकुंभ से फसलों को चौपट होने से बचाने में मदद मिलेगी।

आएगा 70,000 करोड़ का निवेश: हरसिमरत
केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने वर्ल्ड फूड इंडिया की सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि इससे देश में 70 हजार करोड़ रुपय से अधिक के निवेश का रास्ता खुला है। इससे लाखों युवाओं के लिए रोजगार पैदा होंगे। पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों को सबसे ज्यादा निवेश प्राप्त हुआ है।

कमजोरी के साथ खुले सेंसेक्स और निफ्टी

नई दिल्ली। एशियाई शेयर बाजारों में गिरावट की वजह से सोमवार को नए सत्र में देश के इक्विटी बेंचमार्क्स में थोड़ी कमजोरी देखी गई। 30 शेयरों का बीएसई सेंसेक्स 39.69 अंक गिरकर 33,645.87 पर खुला। वहीं, 50 शेयरों का एनएसई निफ्टी 17.50 पॉइंट्स की गिरावट के साथ 10,435 अंक पर खुला।

सोमवार के शुरुआती कारोबार में भारती एयरटेल, रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचपीसीएल और डॉ. रेड्डीज लैब्स जैसे शेयरों में गिरावट आई जबकि एमऐंडएम, इंडियाबुल्स हाउजिंग, भारती इन्फ्राटेल और ओएनजीसी जैसे शेयरों ने तेजी पकड़ी। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) पर शुरुआती कारोबार में कुल मिलाकर 730 शेयर मजबूत होते दिखे तो 525 शेयरों में टूट गए।

इधर, दूसरी तिमाही के अच्छे आंकड़े आने की वजह से टाइटन कंपनी के शेयरों में 20 प्रतिशत उछाल आई। पीसी जूलर्स, ऐमटेक ऑटो, किटेक्स गारमेंट्स और वीआरएल लॉजिस्टिक्स जैसे शेयरों ने 2 से 13 प्रतिशत की मजबूती हासिल की। इधर, शुरुआती कारोबार में एससीआई, सिकल लॉजिस्टिक्स, यूको बैंक, इनोक्स विंड और एमबीएल इन्फ्रा के शेयरों में कमजोरी दिखी।

48 अपग्रेडेड ट्रेनों में यात्रा हुई महंगी, रेलवे ने जोड़ा सुपरफास्ट चार्ज

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नई दिल्ली। इंडियन रेलवे ने जिन 48 मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों को सुपरफास्ट घोषित किया, उनके किराए भी बढ़ा दिए गए हैं। अब इन ट्रेनों से यात्रा करने पर स्लीपर के लिए 30 रुपये, सेकंड और थर्ड एसी के लिए 45 रुपये और फर्स्ट एसी के लिए 75 रुपये अतिरिक्त सुपरफास्ट चार्ज देना होगा।

इन 48 ट्रेनों की किराया वृद्धि से रेलवे को 70 करोड़ रुपये की कमाई होने की उम्मीद है। 48 ट्रेनों को अपग्रेड करने के बाद सुपरफास्ट ट्रेनों की संख्या अब 1,072 हो गई है।

 इन ट्रेनों से यात्रा मंहगी
नए सुपरफास्ट ट्रेनों में ये ट्रेनें शामिल हैं- पुणे-अमरावती एसी एक्सप्रेस, पाटलीपुत्र-चंडीगढ़ एक्सप्रेस, विशाखापत्तनम-नांदेड़ एक्सप्रेस, दिल्ली-पठानकोट एक्सप्रेस, कानपुर-उधमपुर एक्सप्रेस, छपरा-मथुरा एक्सप्रेस, रॉक फोर्ट चेन्नै-तिरुचिलापल्ली एक्सप्रेस, बेंगलुरु-शिवमोगा एक्सप्रेस, टाटा-विशाखापत्तनम एक्सप्रेस, दरभंगा-जालंधर एक्सप्रेस, मुंबई-मथुरा एक्सप्रेस, मुंबई-पटना एक्सप्रेस।

बिना सुविधा दिए सुपरफास्ट चार्ज वसूलता है रेलवे
ध्यान देनेवाली बात यह है कि रेलवे ने इन ट्रेनों की स्पीड महज 5 कि.मी/घंटा की दर से बढ़ाकर 50 से 55 कि.मी./घंटा की है। इसके सिवा किसी दूसरी सेवा में कोई सुधार नहीं किया गया है। हालांकि इसकी कोई गारंटी नहीं है कि अपग्रेड होने के बाद ये ट्रेनें समय पर चलने लगेंगी।

वैसे भी सर्दी के मौसम में कोहरे की वजह से ट्रेनों की लेट-लतीफी आम बात हो जाती है। हाल यह है कि अभी राजधानी, दुरंतो और शताब्दी समेत कई टॉप की ट्रेनें लगातार लेट हो रही हैं।

यह सुपरफास्ट ट्रेनों की हालत
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने जुलाई महीने में पेश अपनी पिछली रिपोर्ट में सुपरफास्ट चार्ज पर रेलवे की कड़ी आलोचना की। कैग ने कहा, ‘जांच के दौरान पाया गया कि 2013-14 से 2015-16 के बीच उत्तर-मध्य और दक्षिण मध्य रेलवे ने यात्रियों से 11.17 करोड़ रुपये सुपफास्ट चार्ज वसूले गए, जबकि 21 सुपरफास्ट ट्रेनें 55 कि.मी./घंटा की तय रफ्तार से नहीं चलीं।’

रेलवे के पास उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, इस साल जुलाई, अगस्त और सितंबर महीनों में 890 सुपरफास्ट ट्रेनें देरी सें चलीं। जुलाई में 129, अगस्त में 145 और सितंबर में 183 सुपरफास्ट ट्रेनें एक से तीन घंटे की देरी से चली थीं। हालांकि, जुलाई महीने में 31 और अगस्त महीने में 37 सुपरफास्ट ट्रेनें अपने शेड्यूल से 3 घंटे से भी ज्यादा लेट थीं।

सीएजी ने लगाई लताड़
कैग ने पिछली रिपोर्ट में रेलवे की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि यात्रियों से सुपरफास्ट चार्ज तो वसूल लिए जाते हैं, लेकिन ट्रेनें तय रफ्तार से नहीं चलती हैं और न ही अन्य वांछित सुविधाएं ही दी जाती हैं। कैग ने यह भी कहा कि रेलवे बोर्ड ने सुपरफास्ट सेवाएं नहीं मिलने की स्थिति में यात्रियों को सुपरफास्ट चार्ज वापस करने का नियम नहीं बनाया है।

15 मिनट की देरी, यानी ऑन टाइम
रेलवे के नियमों के मुताबिक, 15 मिनट की देरी को देरी नहीं माना जाता है। यानी जो ट्रेन तय वक्त से 15 मिनट लेट पहुंचती है, उसे ऑन टाइम ही मान लिया जाता है।

इसके बाद पंक्चुअल्टि परामीटर को मिनट के आधार पर चार भागों में बांटा गया है- 16 से 30, 31 से 45 और 46 से 60 मिनट। आखिरी और सबसे अहम सेगमेंट 1 घंटे से ऊपर की देरी वाली है। इसमें वे ट्रेनें आती हैं जो एक घंटे से ज्यादा कितना भी वक्त की देरी से चलती हैं।

आ गई रेलवे की ‘गोल्ड’ स्टैंडर्ड ट्रेन, जानें क्या मिलेंगी सुविधाएं

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नई दिल्ली। रेल मंत्रालय सोमवार को अपनी पहली ‘स्वर्ण’ ट्रेन (गोल्ड स्टैंडर्ड) से पर्दा हटाएगा। भारत सरकार के रेल मंत्रालय द्वारा प्रीमियम ट्रेनों को रेनॉवेट करने के लिए शुरू किए गए ‘स्वर्ण प्रॉजेक्ट’ के तहत नई दिल्ली- काठगोदाम शताब्दी एक्सप्रेस पहली ट्रेन होगी।

ट्रेनों में कैटरिंग के लिए ट्रोली सर्विस, यूनिफॉर्म में विनम्र स्टाफ और यात्रा के दौरान मनोरंजन इत्यादि देने के लिए हर ट्रेन पर सरकार 50 लाख रुपए खर्च कर रही है।

रेल यात्रा को मनोरंजक और आरामदायक बनाने के लिए पूर्व रेलमंत्री सुरेश प्रभु के कार्यकाल के दौरान रेलवे ने 30 प्रीमियर ट्रेनों का हुलिया बदलने के लिए 25 करोड़ का यह प्रॉजेक्ट शुरू किया था। इस प्रॉजेक्ट में 15 राजधानी और 15 शताब्दी ट्रेनें शामिल हैं।

इस प्रॉजेक्ट में ट्रेनों में आरपीएफ जवानों की पर्याप्त तैनाती के साथ सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था भी की गई है। प्रॉजेक्ट के तहत कोच के अंदरूनी हिस्से को आकर्षक बनाने, शौचालय व्यवस्था में सुधार और कोचों की सफाई पर भी काफी ध्यान दिया गया है।

कायाकल्प की प्रक्रिया में स्टाफ को साफ-सफाई और खाना पहुंचाने के लिए ट्रोली के इस्तेमाल का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। प्रीमियर ट्रेनों के स्टाफ के लिए नए यूनिफॉर्म डिजाइन किए गए हैं।

वहीं, यात्रियों को ट्रेनों में फिल्म, सीरियल, म्यूजिक समेत मनोरंजन के अन्य साधन उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके अलावा यात्री ट्रेन में वाई-फाई हॉटस्पॉट्स के द्वारा एचडी स्ट्रीमिंग का आनंद भी ले पाएंगे।

कानून आपके लिए ढाल है, तलवार नहीं -जस्टिस अग्रवाल

जागरूकता रैली के साथ शहर में विधिक सेवा सप्ताह का भव्य शुभारंभ, 12 दिसंबर तक होंगे कई आयोजन

अरविन्द, कोटा। एससी-एसटी कोर्ट के न्यायाधीश गिरीश अग्रवाल ने कहा कि देश में कानून ढाल की तरह हैं, तलवार नहीं। समाज में किसी भी घटना के समय साक्ष्य के साथ सही पक्ष का साथ दें।

बच्चों के साथ कोई अन्याय हो तो सहते न रहें, सच्चाई को सामने लाने का साहस करें। क्यांकि अपराध सहना भी जुर्म के समान है। जब समाज में कानूनी जागरूकता आएगी तो नागरिक संकोच छोडेंगे और अपराधी डरेंगे।

रविवार को रंगबाडी स्थित मधु स्मृति संस्थान में विधिक सेवा सप्ताह-2017 का शुभारंभ करते हुए उन्होंने कहा कि विधी शिक्षा को जीवन से जोड़ें । हम अधिकारों की रक्षा तो करते हैं लेकिन दायित्व भूल जाते हैं। बीमारी होने पर हम सामान्य उपचार की जानकारी रखते है,

वैसे ही कानून की जानकारी भी रखें। परिवार, स्कूल या संस्था के संचालन में हम नियमों का पूरा पालन करते हैं जबकि समाज चलाने के लिए नियमों से विमुख हो जाते हैं। देश में कानून की पालना करने में आज भी जागरूकता की कमी है।

एसीजीएम कोर्ट-7 के न्यायाधीश राकेश कटारा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने देश में राष्ट्रीय स्तर (नाल्सा) से तालुका स्तर तक कानूनी जागरूकता पैदा करने के लिए विधिक सेवा का दायित्व न्यायपालिका को दिया। इनमें तीन चरण हैं।

ऐसे परिवादी जिनके उपर मुकदमा दर्ज कर दिया लेकिन वो मुकदमा लड़ने में सक्षम नहीं हैं, उनके सामंजस्य के लिए लोक अदालत है। हर माह इनमें दोनों पक्षों की सुलह-वार्ता से समाधान किया जाता है। विधिक सहायता शिविर से कानूनी जानकारी आम आदमी तक पहुंच रही है।

जरूरतमंदों को निःशुल्क कानूनी मदद भी
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के पूर्णकालिक सचिव न्यायाधीश प्रमोद कुमार शर्मा ने कहा कि विधिक सप्ताह में कई उपयोगी जानकारियों आम जनता तक पहुंचती है।

राष्ट्रीय लोक अदालत से न्यायिक समस्याएं हल हुई। बच्चे, महिला, वरिष्ठ नागरिक, बुजुर्ग, विधवा-विधुर, परित्यक्ता व पीडितों को पैनल वकीलों द्वारा निःशुल्क मदद की जाती है।

गरीब के पास अधिवक्ता की फीस न हो तो उन्हें निःशुल्क सेवा दी जाती है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार, ‘कनेक्टिंग टू सर्व’ पर अमल करते हुए डोर-टू-डोर विधिक जानकारी, शिविर तथा परिवहन बसों आदि से जन-जागरूकता लाई जाएगी। 9 नवंबर को देश में विधिक सेवा दिवस मनाते हैं।

समारोह में पहुंचे 15 से अधिक जज
उद्घाटन समारोह में महिला उत्पीड़न कोर्ट-1 के न्यायाधीश मनीष अग्रवाल, एसीजीएम-1 की न्यायाधीश दमयंती पुरोहित, एसीजीएम-5 के न्यायाधीश संतोष जाट, एसीजीएम-6 के न्यायाधीश सुमरथ लाल मीणा, दक्षिण-2 की जज सीमा अग्रवाल, दक्षिण-3 के जज रमेश करौल, दक्षिण-5 कोर्ट की जज हेमलता भारती व उत्तर-2 के जज अंकुर अग्रवाल, उत्तर-3 की जज गरिमा बंसल मौजूद थीं।

उत्तर-5 की जज शिल्पी बंसल, रेलवे कोर्ट के न्यायाधीश अटल चम्पावत, प्रशिक्षु जज जया अग्रवाल एवं रचना वैष्णव, साइकोलॉजिस्ट डॉ पूर्ति शर्मा व दीप्ति राजावत, फॉरेंसिक लैब के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. विनोद गर्ग तथा प्राधिकरण के पैनल सदस्य, चाइल्ड लाइन, स्काउट गाइड व एनजीओ के प्रतिनिधी, स्कूल व कॉलेज विद्यार्थी मौजूद रहे।

मधु स्मृति संस्थान की संचालिका बृजबाला निर्भीक ने बताया कि उन्होंने 1983 में निराश्रित बाल गृह से संस्थान की शुरूआत की। यहां के निराश्रित बच्चे बीएड स्तर तक पढ़ाई कर रहे हैं।

बेटी बचाओ नाटक प्रस्तुत करती छात्राएं।

कोटा में बेटियों का अनुपात बढ़ा
स्काउट-गाइड के यज्ञदत्त हाड़ा ने बताया कि कोटा में 2011 की जनगणना के समय प्रति 1000 लडकों के अनुपात में 898 लड़कियां थीं लेकिन बेटी बचाओ की जागरूकता के बाद हुए ताजा सर्वे में शहर में प्रति 1000 लड़कों के अनुपात में 913 लडकियां हैं।

कार्यक्रम में बीएड छात्राओं गायत्री, पदमा, भारती, एकता, अनिता व माया ने बेटी बचाओ पर भावनात्मक नुक्कड़ नाटक ‘बेटा अंश है तो बेटी वंश है’ प्रस्तुत किया तो सभी की आंखे नम हो गई। सभी जजों ने खड़े होकर करतल घ्वनि से उनका हौसला बढ़ाया और उन्हें मंच पर सम्मानित किया।

छात्र रवि ने ‘जिम्मेदारी का बोझ परिवार पर बढ़ने लगा तो ऑटोरिक्शा से ट्रेन भी चलाने लगी बेटियां…’ वीर की शहादत को अपना कंधा देती बेटियां, अब तो अंतिम संस्कार तक जाने लगी बेटियां..’ काव्यपाठ सुनाया तो खूब दाद मिली।

पैनल अधिवक्ता भुवनेश शर्मा ने कहा कि आबादी में एक तिहाई बच्चे हैं, लेकिन हम शिशु संरक्षण में विफल रहे। शहर में जेके लोन अस्पताल में प्रायः कई घटनाएं ध्यान खींचती हैं।

छात्राओं ने जागरूकता रैली निकाली
डॉ.अंजली निर्भीक ने बताया कि इससे पूर्व रंगबाड़ी में बालाजी इंस्टीट्यूट व बीएड छात्राओं ने ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ का संदेश देते हुए जागरूकता रैली निकाली। निराश्रित बच्चों ने न्यायाधीशों का ताइक्वांडो करते हुए स्वागत किया। निराश्रित सायबीन, राधिका व कोमल ने राजस्थानी स्वागत गीत प्रस्तुत किया।

बच्चों ने भावपूर्ण गणेश नृत्य प्रस्तुत कर सबका मन मोह लिया। विधिक सेवा सप्ताह में शहर के स्कूलों व संस्थाओं में विभिन्न कार्यक्रमों से विधिक सेवा के लिए जन-जागरूकता पैदा की जाएगी।

मौसमी बीमारियों से हुई मौतों की जांच होगी

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अब एंटी लार्वा छिड़काव के लिए घर-घर देंगे दस्तक, अस्पतालों में आयुष डॉक्टर देंगे सेवाएं

कोटा। हाड़ौती में डेंगू, स्वाइन फ्लू, मलेरिया व स्क्रब टाइफस से हुई मौतों का सिलसिला थम नहीं रहा। इधर, जिला कलक्टर ने कोटा जिले में मौसमी बीमारियों से हुई मौतों की जांच करने के लिए रविवार को एक समिति गठित कर दी।

नगर निगम के आयुक्त डॉ.विक्रम जिंदल की अध्यक्षता में गठित समिति में सीएमएचओ, मेडिकल कॉलेज के डॉ.मनोज सलूजा, प्राइवेट हॉस्पिटल से डॉ.एसके गोयल सदस्य बनाए गए।

कमेटी मौसमी बीमारियों से हुई मौतों के कारणों की जांच कर स्थानीय विधायक को फीडबैक देगी। समिति की रिपोर्ट सरकार को भी भेजी जाएगी। वायरस की जांच के लिए 150 रोगियों के सैम्पल पुणे की लैबोरेट्री में भिजवाये जा रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि राज्य के चिकित्सा व स्वास्थ्य मंत्री कालीचरण सर्राफ की कोटा यात्रा में हुई समीक्षा बैठक में भाजपा विधायक भवानीसिंह राजावत ने डेंगू से हुई मौतों के आंकड़ां को झूठा बताते हुए कहा था कि अफसर मंत्री को गलत जानकारी देकर भ्रमित कर रहे हैं।

वे यह कहकर बैठक से चले गए थे कि डेंगू से मौतें जनप्रतिनधियों के माथे पर कलंक है। विधानसभा में जो आंकडे़ रखे गए उनकी जांच होनी चाहिए। भाजपा विधायक प्रहलाद गुंजल ने भी मौतों के आंकडों पर सवाल उठाया था। इसके बाद मंत्री ने इसकी जांच करवाने का भरोसा दिया था।

फोगिंग व एंटी लार्वा के लिए 1800 प्रेरक
जिला कलक्टर रोहित गुप्ता ने मौसमी बीमारियां रोकने के लिए सघन अभियान चलाने के निर्देष दिए। नगर निगम उपायुक्त श्वेता फगेडिया नोडल अधिकारी के साथ फोगिंग एवं एन्टी लार्वा के लिए 1800 प्रेरकों की टीम बनाकर उन्हें घर-घर दस्तक देकर सघन अभियान चलाने के निर्देश दिये।

उन्होंने कहा कि आशा, एएनएम, एनसीसी, स्काडट, नर्सिंग कॉलेज विद्यार्थी समूचे शहर को 12 भागों में बांटकर घर-घर जाएंगे तथा एन्टीलार्वा अभियान को पूरा करेंगे। वार्डवार फोगिंग कार्यक्रम जनप्रतिनिधियों व एनजीओ के सहयोग से जारी रहेगा।

मंगलवार से अभियान शहर में एकसाथ चलाया जाएगा। प्रेरकों को 6 नवम्बर तक प्रशिक्षण देंगे। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे एन्टी लार्वा के लिए पानी भराव वाले स्थलों को खाली कराने में मदद करेंं।

हडताल के दौरान आयुष डॉक्टर लगाए
डॉक्टर्स की प्रस्तावित हडताल को देखते हुए जिला कलक्टर ने 6 नवम्बर से जिले के सभी आयुष चिकित्सकों को अस्पतालों में उपस्थित होने के निर्देश दिए। उन्होंने मेडिकल कॉलेज से सभी जिला अस्पतालों में 11 विशेषज्ञ चिकित्सकों को ड्यूटी देने के निर्देश दिए।

व्यापार महासंघ ने छावनी से शुरू किया सफाई का जनजागृति अभियान

कोटा। स्वच्छ कोटा, स्वस्थ कोटा को ध्यान में रखते हुए रविवार को कोटा व्यापार महासंघ ने नगर निगम के साथ छावनी क्षेत्र से सफाई और जनजागृति अभियान की शुरुआत की।  

समारोह में 150 से अधिक संस्थाओं के प्रतिनिधि पार्षद मौजूद रहे। जिसमें छावनी चौराहा दुकानदार संघ, आदर्श छावनी व्यवसायिक संगठन छावनी, वाणिज्य संगठन छावनी व्यापार संगठन का विशेष सहयोग रहा।

समारोह में व्यापार महासंघ अध्यक्ष क्रांति जैन ने कहा कि शहर में बीमारियां फैल रही हैं। इस बीमारी को देखते हुए यह अभियान चलाया गया है। महासचिव अशोक माहेश्वरी ने डेंगू से हुई मौतों के लिए उनके परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट की।

कोटा व्यापार महासंघ के स्वच्छ कोटा, स्वस्थ कोटा अभियान समारोह को सम्बोधित करते महापौर महेश विजय।

उन्होंने कहा आम जान सजग हो जाये तो इस तरह की पुनरावृति को रोका जा सकता है। उन्होंने बताया कि अगला अभियान तलवंडी में होगा। इस दौरान महापौर महेश विजय महापौर महेश विजय ने कहा कि जन चेतना और जान सहभागिता से सफाई व्यवस्था को स्थाई रखा जा सकता है। महासंघ ने पूर्व में निगम का सहयोग कर अनूठी मिसाल कायम की है। 

उपमहापौर सुनीता व्यास ने पार्षदों को आह्वान किया कि वह महासंघ के सहयोग से इस अभियान को सफल बनायें।  निगम आयुक्त डॉ. विक्रम जिंदल ने व्यापारियों से अपने प्रतिष्ठानों पर डस्टबिन रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जल्दी ही शहर में डोर तो डोर कचरा उठाने की व्यवस्था की जाएगी।  

उपायुक्त राजेश डागा ने कहा की व्यापारी शहर को साफ सुथरा रखने में निगम का सहयोग करें। इस अवसर पर कोटा ग्रेन एण्ड सीड्स मर्चेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष अविनाश राठी ने भी सम्बोधित किया। 

छावनी में बांटे डस्टबिन और चलाया सफाई अभियान : व्यापार महासंघ की ओर से दुकानों पर 400 डस्टबिन बांटे गए। यश मालवीय, नरेंद्र चौहान, देवेंद्र गुप्ता, हामिद कुरैशी, भगवान सहाय, आरिफ नागरा, शीतल जैन दीपक मलगानी ने बाजारों में डस्टबिन बांटे और सफाई अभियान भी चलाया। पूरे बाजार में बाइक से फोगिंग भी की गई। व्यापारियों को अभियान की जागरूकता पोस्टर पैम्फलेट भी बांटे।

इंदिरा ने वक्त रहते नोटबंदी की होती तो, हमें जरूरत नहीं पड़ती: मोदी

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पालमपुर/कुल्लू/ऊना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को हिमाचल प्रदेश के ऊना, पालमपुर और कुल्लू में एक के बाद एक 3 चुनावी रैलियां कीं। चुनावी भाषणों में पीएम ने कांग्रेस का यह कहकर मजाक उड़ाया कि भ्रष्टाचार ही इस पार्टी की एक मात्र पहचान है।

नोटबंदी के एक साल पूरा होने पर कांग्रेस के प्रस्तावित विरोध पर भी प्रधानमंत्री ने तंज कसा। पीएम मोदी ने कहा कि आनेवाले दिनों में कांग्रेस के पास दुख मनाने के सिवाय कुछ नहीं बचा है।

नोटबंदी को जरूरी बताते हुए उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पर भी वार किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि इंदिरा गांधी ने नोटबंदी लागू करने से मना कर दिया था। अगर वह जरूरत के वक्त नोटबंदी की होतीं तो हमें इस बड़े काम को अंजाम नहीं देना पड़ता।

‘इंदिरा ने देश नहीं कांग्रेस का भला सोचा’
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘हम सच के सामने साष्टांग दंडवत होना जानते हैं लेकिन झूठ के सामने हमें झुकना मंजूर नहीं।’ नोटबंदी पर पीएम मोदी ने कहा, ‘यह नोटबंदी, यह बात पहली बार नहीं आई…जब इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री थीं, तब तो 500 और हजार के नोट भी नहीं थे, तब 100 रुपये के नोट थे।

इन नोटों को बंद करने के लिए इंदिरा के जमाने में एक समिति ने रिपोर्ट दी थी। तब उनके एक साथी मंत्री यशवंत राव चह्वाण बड़े उत्साह के साथ वह रिपोर्ट लेकर इंदिराजी के पास गए थे कि देश का भला करना है तो ये 100 रुपये के नोट बंद करने होंगे। यह रिपोर्ट है।

उस समय यह हाल हो गया था…100 रुपये का नोट बंद करने की जरूरत महसूस हुई थी…चह्वाण इंदिराजी के सामने देखते रहें कि मैडम कुछ बोलेंगी…थोड़ी देर के बाद मैडम ने पूछा हमें कांग्रेस को ताले लगा देने हैं क्या? क्या हमें चुनाव नहीं लड़ने हैं? क्या भविष्य के चुनाव हमें हारने हैं?..

चह्वाण अगर चुनाव जीतना है तो ये नोटबंदी जैसी बातें लेकर मत आइए…इसे ठंडे बस्ते में डाल दो। उस समय इंदिराजी ने कांग्रेस के बजाय हिंदुस्तान की चिंता की होतीं…अगर उसी समय सफाई की होतीं तो मोदी को यह करने की जरूरत नहीं पड़ी होती।’

‘मैं लुटेरों की सफाई कर रहा हूं’
प्रधानमंत्री ने कहा कि नोटबंदी के बाद 3 लाख कंपनियां बंद हो गईं। उन्होंने कहा कि अगर कुल्लू में कोई एक कंपनी बंद हो जाए तो अखबारों के पहले पन्नों में हफ्ते भर तक सिर्फ उसी की चर्चा रहती लेकिन इतनी कंपनियां बंद हो गईं, जिसकी कोई चर्चा नहीं हुई।’

पीएम मोदी ने कहा, ‘3 लाख कंपनियां बंद हुईं…3 लाख कंपनियों पर ताले लगा दिए और आज किसी के आंखों में आंसू नहीं आए…टीवी डिबेट नहीं हो रहे…अखबारों में नहीं छप रहे….एक कंपनी तो ऐसी कि जिसके ऑफिस में 3 कुर्सी और एक टेबल की जगह है…इतनी छोटी कंपनी…लेकिन उसके बैंकों में 2100 अकाउंट है…ये सब पकड़ा…3 लाख कंपनियों में जो कुछ हुआ उसकी जांच हो रही है…

अभी तक 5 हजार कंपनियों का डीटेल देखा गया है…5 हजार कंपनियों में 4 हजार करोड़ रुपये का घपला पाया गया…जिस दिन 3 लाख कंपनियों का कच्चा-चिट्ठा खुलेगा तब क्या-क्या सामने आएगा….क्या इसे चलने देंगे…स्वच्छता अभियान चला रहा हूं…आप गली-मुहल्ले की सफाई कर रहे हैं, मैं इन लुटेरों की सफाई कर रहा हूं।’

‘हिमाचल को लूटनेवालों को दंडित करना चाहते हैं लोग
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पालमपुर रैली में कहा कि हिमाचल बदलाव के लिए तैयार है। उन्होंने कहा, ‘लोग सिर्फ बदलाव ही नहीं चाहते, बल्कि हिमाचल प्रदेश को लूटने वालों के लिए दंड भी चाहते हैं।’ पीएम मोदी ने कहा कि उन्हें अपने पुतले जलाए जाने का डर नहीं है, लेकिन भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी लड़ाई नहीं रुकेगी।

मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और उनकी पत्नी पर 10 करोड़ रुपये के आय से अधिक संपत्ति मामले में चल रही जांच को लेकर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘कांग्रेस पार्टी की भ्रष्टाचार ही एक मात्र पहचान है। हिमाचल प्रदेश के कांग्रेसी मुख्यमंत्री भ्रष्टाचार के लिए जाने जाते हैं।’

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हिमाचल के लोग पूर्व मुख्यमंत्री धूमल को सूबे में पर्यटन को बढ़ावा देने के उनके योगदान के लिए याद करेंगे और पूर्व सीएम शांता कुमार को वॉटर पाइपलाइनों को बिछाने के लिए याद करेंगे लेकिन कांग्रेस की सरकार को भ्रष्टाचार के लिए याद किया जाएगा।

शादी के बाद फाइनेंशियल प्लानिंग कैसे करें, देखिए वीडियो

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कोटा। आम तौर पर व्यक्ति शादी के बाद हनीमून, बच्चे, एक प्यारा सा बंगला और गाडी की सोचता है। सोचना भी चाहिए। क्योंकि आज के समय में सुखी वैवाहिक जीवन के लिए यह सब तो जरुरी है ही। परन्तु भविष्य के लिए बचत भी जरूरी है।

शादी के बाद फाइनेंशियल प्लानिंग भी उतनी ही जरूरी है, जितनी शादी के पहले शादी और हनीमून की। क्योंकि अगर आपने सही तरह से प्लानिंग नहीं की तो हो सकता है आप फाइनेंशियल प्रॉब्लम में उलझ जाएं। इसके लिए सही फाइनेंशियल प्लानिंग जरूरी है।

सही तरीके से प्लानिंग के लिए अच्छे अनुभवी सीए या इन्वेस्टमेंट प्लानर की सलाह लेना चाहिए। इस संबंध में LEN DEN NEWS चैनल आपके लिए लेकर आया है विशेष जानकारी। जानने के लिए देखिये यह वीडियो।