Tuesday, July 28, 2026
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हेलमेट लगाओ, वरना साथ ले जाऊंगा: यमराज

कोटा। तुम हेलमेट क्यों नहीं पहनते, ऊपर से तेज गाड़ी चलाते हो…. मुझे न्योता क्यों दे रहे हो…? मैं आ गया तो फिर साथ लेकर ही जाऊंगा…. समझे। परिजन बाद में रोना-पीटना करेंगे, लेकिन मुझे कुछ फर्क नहीं पड़ता…. हाहाहा।

एरोड्रम सर्किल पर शनिवार शाम सड़क सुरक्षा सप्ताह के तहत अचानक यमराज के रूप में आए कलाकार ने लोगों को रोक-रोककर ट्रैफिक नियमों की पालना करने के लिए कहा।

लोगाें ने मांगी माफी: दरअसल, 29 वें सड़क सुरक्षा सप्ताह के तहत हाड़ौती आर्टिसन डेवलपमेंट सोसाइटी द्वारा यमराज का भेष बनाकर आम लोगों में यातायात नियमों के प्रति जागृत पैदा की गई।

अध्यक्ष विकास जैन ने बताया कि लोगों ने यमराज से माफी मांगी और आगे से नियमों की पालना करने का संकल्प लिया। इस मौके पर डीएसपी ट्रैफिक श्योराजमल मीणा, लाइन प्रोड्युसरसुभाष सोरल आदि मौजूद रहे।

रातों रात धन दुगुना करने के ऑफर से बचो : अजय प्रताप

कोटा।  रिजर्व बैंक आॅफ इंडिया के एजीएम अजय प्रताप सिंह सिसोदिया ने वित्तीय सजगता, आॅनलाइन जॉॅब लुभावने वाले ऑफर, रातों रात धन दुगुना करने के ऑफर, फर्जी कंपनियों, अनाधिकृत चिट फंड फ्रॉड व गैर बैंकिंग संस्थानों के साथ निवेश करते समय बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में जानकारी दी।

वे शनिवार को गोबरिया बावड़ी स्थित पुरुषार्थ भवन में भारतीय रिजर्व बैंक जयपुर की ओर से निवेशक जागरूकता कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कई नॉन रजिस्‍टर्ड फाइनेंस कंपनियां मेल और फोन के जरिए प्रलोभन देती हैं। वे कई सारी डिटेल लेती है और डिपॉजिट कराने पर धोखाधड़ी होती है या कंपनी बंद हो जाती है।

ऐसे में कोई भी ऐसी कंपनी को अपनी कोई भी महत्वपूर्ण जानकारी नहीं दे। इसके लिए आरबीआई की वेबसाइट पर शिकायत की जा सकती है। उन्होंने कहा कि रजिस्टर्ड कंपनी भी ऐसा कर दें तो उसकी भी शिकायत के लिए अधिकारी नियुक्त किया हुआ है।

उन्होंने भारतीय रिजर्व बैंक व अन्य संबन्धित संस्थाओं की कार्य प्रणाली ग्राहक अधिकार तथा शिकायत व निवारण प्रक्रिया की भी जानकारी दी गई। उन्होंने कहा कि घर में 15 लाख रुपए से ज्यादा कैश नहीं रखना चाहिए और बाजार में 2.50 लाख रुपए से ज्यादा नहीं ले जा सकते हो। उन्होंने कहा कि बैंकों के लॉकर में रखे सामान की कोई जिम्मेदारी नहीं होती है। एफडीआर भी 1 लाख तक ही इंश्योर्ड होता है।

वेबसाइट पर दर्ज कराएं शिकायत
एक्सपर्ट साहिल साल्वे ने सचेत रहो सुरक्षित रहो का नारा देते हुए बताया कि इस तरह की किसी भी शिकायत को रिजर्व बैंक की वेबसाइट ‘सचेत’ पर दर्ज किया जा सकता है। संस्थापक अध्यक्ष गोविंद राम मित्तल ने भी कैश रखने व बाजार में ले जाने के बारे में विस्तार से बताया। इसके अलावा जाली नोटों की भी जानकारी दी। 

दुष्कर्मी आसाराम ने जमीन के अलावा 10 हजार करोड़ का साम्राज्य एेसे बनाया?

नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में सजा काट रहे आसाराम ने 10 हजार करोड़ रुपये की सम्पत्ति कैसे अर्जित की। आइये जानें – गिरफ्तार हुआ, उससे पहले तक आश्रम से दो मैग्जीन प्रकाशित हुआ करती थीं। ऋषिप्रसाद तथा लोक कल्याण सेतु नामक इन पत्रिकाओं की तकरीबन 14 लाख प्रतियां हर महीने बिक जाती थीं।

साल में 50 सत्संग होते थे। जिनकी लिखित प्रतियों, सीडी, वीसीडी तथा ऑडियो कैसेट्स की बड़ी संख्या में बिक्री होती थी। सत्संग के दौरान अन्य उत्पादों की भी बड़ी मात्रा में बिक्री होती थी। उसे आयुर्वेदिक साबुन, तेल और धूपबत्ती की बिक्री से भी मोटी रकम मिल जाती थी।

इससे कमाई का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि आश्रमों के उत्पादों की पैकेजिंग का सालाना ठेका ही 350 करोड़ रुपए में दिया गया था।  इन सभी तरीकों से आई नकदी का एक बड़ा हिस्सा वह अपने करीबियों की मदद से लोगों व कंपनियों को ब्याज पर दे देता था। जमानत के रूप में वह चेक या जमीनों के दस्तावेज रख लिया करता था।

इनकम टैक्स विभाग को 2013 का एक ऐसा दस्तावेज भी मिला है जो बताता है कि सालभर में ही आसाराम को ब्याज के रूप में ही 419 करोड़ रुपए की रािश मिली है। तब 163 करोड़ रुपए उसके पास नकद भी थे।

4 थैलों में आ सके लेन-देन के दस्तावेज
आश्रम के नाम पर हासिल या कब्जाई जमीन पर खेती से भी उसे आमदनी होती थी। बाकी पैसा कई तरीकों से खुदके या अनुयाइयों के नाम पर निवेश कर रखा था। निवेश रियल एस्टेट में, म्युचुअल फंड में, शेयर बाजार में, किसान विकास पत्रों में और फिक्स्ड डिपोजिट में किया गया था।

इस तरह जमीन को जोड़े बिना ही आसाराम की कुल संपत्ति करीब 10 हजार करोड़ रुपए आंकी गई है। यह बात 2014 में आसाराम के विभिन्न आश्रमों में छापों के दौरान बरामद दस्तावेजों से साबित भी हुई है। तब पुलिस के हाथ वित्तीय लेन-देन के इतने दस्तावेज लगे थे कि इन्हें चार बड़े थैलों में रखना पड़ा था।

आसाराम साल में 10 से 20 भंडारों के नाम पर देशभर से 150 से 200 करोड़ रुपए चंदा जुटा लिया करता था। साथ में श्रद्धालुओं से आने वाला अन्य तरह का चंदा उसकी आय का स्रोत थे। 10 करोड़ रुपए तक का मुनाफा सालाना होता था इनसे आसाराम को । 01 करोड़ रुपए दो-तीन दिन में आसाराम के खाते में आ जाते थे सत्संग के दौरान।

मिल वालों की लिवाली से गेहूं तेज, सोयाबीन, धनिया और सरसों ढीली

कोटा। भामाशाह अनाज मंडी में शनिवार को माल की कुल आवक 55 हजार बोरी और लहसुन  की  आवक 5000 कट्टे  की रही। मिल वालों की लिवाली से गेहूं 25 रुपये प्रति क्विंटल तेज बिका। कमजोर उठाव से सोयाबीन 50 रुपये, धनिया 100 रुपये और सरसो 50 ढीली रही।  

गेहूं मिल  1580 से 1645 लोकवान  नया 1600 से 1750 पीडी नया 1600 से 1800  गेहूं टुकडी 1550 से 1950 रुपये प्रति क्विंटल। धान सुगंधा  2600 से 2860 पूसा 1 2500 से 2700 पूसा 4  (1121) 2500 से  3331 धान (1509) 2000 से 3100 रुपये प्रति क्विंटल रहे।

सोयाबीन 2400 से 3600 सरसो 3300 से 3501 तिल्ली  5000 से 7000 रुपये प्रति क्विंटल रहे। मैथी पुरानी 2000 से 2500 मैथी नई 2500 से 3100 धनिया  बादामी नया 3400 से 4000 ईगल  3800 से 4300 रंगदार 5000 से 6500  धनिया पुराना 3000 से 3800 रुपये प्रति क्विंटल रहे।

मूंग 3300 से 3800 उडद  2000 से 3300 चना 3000 से 3251 रुपये प्रति क्विंटल रहे। चना काबुली 4000 से 5100 चना पेपसी 3300 से 3500 चना  मौसमी  3000 से 3350 मसूर 3000 से 3350 रुपये प्रति क्विंटल। ग्वार  3000 से 3600 मक्का  1000 से 1300 जौ 1100 से  1200 ज्वार  1300 से 2400 रुपये प्रति क्विंटल। लहसुन नया 200 से 2200 रुपये प्रति क्विंटल रहा।   

YouTube ने कंटेंट पॉलिसी के खिलाफ 80 लाख से ज्यादा वीडियो किए डिलीट

डिलीट किए वीडियो में से कई पोर्न वीडियो 

नई दिल्ली। यूट्यूब ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि उसने पिछले साल की आखिरी तिमाही में अपलोड किए 80 लाख से ज्यादा डिलीट किए है। इनमें से कई पोर्न वीडियो भी थे। यूट्यूब ने इन वीडियो को इसलिए डिलीट किया क्योंकि ये वीडियो उसकी कंटेंट पॉलिसी के खिलाफ थे।

बताया गया है कि इन वीडियोज को एक भी व्यूज आए बिना ही डिलीट कर दिया गया। इनमें अधिकतर वीडियोज भारत में है। इस क्रम में अमेरिका दूसरे और यूके छठें नंबर पर है।

इन वीडियोज को यूट्यूब ने इसलिए डिलीट किया गया क्योंकि कई बड़ी कंपनियों और संगठनों ने आपत्तिजनक कंटेंट के साथ उनके एड्स दिखने को लेकर शिकायत की थी और उसे अपने प्लेटफॉर्म को साफ सुथरा बनाने का आदेश दिया था।

जेवराती मांग बढ़ने से सोना 110 रुपये महंगा, चांदी स्थिर

नई दिल्ली। घरेलू स्तर पर खुदरा जेवराती ग्राहकी आने से शनिवार को दिल्ली सरार्फा बाजार में सोना 110 रुपये बढ़कर 32,320 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। हालांकि, औद्योगिक इकाइयों की मांग नरम होने से चांदी 40,450 रुपये प्रति किलोग्राम पर टिकी रही।

स्थानीय बाजार में सोना 99.9 फीसदी और 99.5 फीसदी 110 रुपये की तेजी के साथ क्रमश: 32,320 रुपये और 32,170 रुपये प्रति 10 ग्राम बोला गया। आठ ग्राम वाली गिन्नी हालांकि, 24,800 रुपये के भाव पर स्थिर रही। चांदी की मांग सामान्य रहने से चांदी तैयार 40,450 रुपये प्रति किलोग्राम पर टिकी रही।

हालांकि, चांदी साप्ताहिक डिलीवरी 205 रुपये फिसलकर 39,005 रुपये प्रति किलोग्राम रह गई। सिक्का लिवाली और बिकवाली भी पिछले स्तर क्रमश: 75 हजार और 76 हजार रुपये प्रति सैकड़ा पर रहे। कारोबारियों ने बताया कि दाम कम होने से जेवराती मांग में सुधार आया है जिससे पीली धातु की चमक लगातार दो दिन की गिरावट के बाद बढ़ी है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दोनों कीमती धातु तेजी के साथ बंद हुई। लंदन का सोना हाजिर शुक्रवार को सप्ताहांत पर बढ़त के साथ 1,324 डॉलर प्रति औंस बोला गया। अमेरिका सोना वायदा भी 6.2 डॉलर की बढ़त में 1324.10 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ। इस दौरान चांदी 0.1 डॉलर की तेजी में 16.46 डॉलर प्रति औंस पर रही।

कोटा सर्राफा
चांदी 40100 रुपये प्रति किलोग्राम।
सोना केटबरी 32300  रुपये प्रति दस ग्राम, सोना 37670 रुपये प्रति तोला।
सोना शुद्ध 32450  रुपये प्रति दस ग्राम, सोना 37850 रुपये प्रति तोला।

विकास दर 7.5 फीसदी से अधिक रहने की उम्मीद-नीति आयोग

नई दिल्ली। सरकारी थिंकटैंक नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार का कहना है कि चालू वित्त वर्ष में देश की आर्थिक वृद्धि दर 7.5% तक पहुंच सकती है। इसकी प्रमुख वजह निवेश चक्र में सुधार और उद्योगों की पूरी क्षमता का इस्तेमाल होना है। उन्होंने कहा कि सरकार को अब पिछले 47 महीने में की गई सुधार पहलों को एकजुट और मजबूत करने पर ध्यान देने की जरुरत है।

कुमार ने कहा, ”देश में आर्थिक माहौल सकारात्मक और आशान्वित है। निवेश चक्र भी ऊपर की ओर बढ़ रहा है। वहीं उद्योगों का क्षमता इस्तेमाल बढ़कर 74% हो गया और मुद्रास्फीति अभी भी लक्ष्य के भीतर बनी हुई है। कुमार ने कहा, ”प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) बढ़ रहा है और मुझे उम्मीद है कि 2018- 19 में आर्थिक वृद्धि कम से कम 7.5 प्रतिशत पर पहुंच जायेगी। वित्त वर्ष 2017-18 में आर्थिक वृद्धि दर 6.6% रहने की उम्मीद है।

यह पूछे जाने पर कि सरकार को अगले एक साल में कौन से आर्थिक सुधारों की पहल करनी चाहिये? जवाब में कुमार ने कहा, ”सरकार ने कई सुधार और पहलें की हैं और सरकार को नए सुधार या पहल शुरु करने के बजाय पुरानों पर ही ध्यान केंद्रित करते हुये उन्हें मजबूती देनी चाहिए।

आइडिया का घाटा तीन गुना बढ़ा, आमदनी घटकर 6387 करोड़ रुपए

नई दिल्‍ली। टेलिकॉम इंडस्‍ट्री की कंपनी आइडिया सेल्‍लुलर की 31 मार्च 2018 को खत्‍म हुए चौथे क्‍वार्टर के नतीजे आ गए हैं। बीते फाइनेंशियल ईयर के चौथे क्‍वार्टर में कंपनी का घाटा लगभग तीन गुना बढ़कर 962.20 करोड़ रुपए हो गया है । इसी अवधि में एक साल पहले कंपनी का घाटा 327.70 करोड़ रुपए रहा था।

कुल इनकम भी 22 फीसदी घटी
वहीं आइडिया के Q4 में साल दर साल आधार पर कुल इनकम भी 22 फीसदी कम हुई है। चौथे क्‍वार्टर में कंपनी की कुल इनकम 6,387.70 करोड़ रुपए है।

जबकि बीते साल इसी अवधि में कंपनी की कुल इनकम 8,194.50 करोड़ रुपए रहा थी। वहीं 2017-18 में आइडिया को 4,168.20 करोड़ का नुकसान हो गया है। जबकि 2016-17 में कंपनी का नुकसान 399.70 करोड़ रुपए रहा था।

नुकसान पर क्‍या कहा कंपनी ने
आइडिया सेल्‍लुलर की ओर से जारी बयान के मुताबिक इस साल के दौरान दो निगेटिव फैक्‍टर का असर नतीजों पर पड़ा। कंपनी ने कहा कि टेलिकॉम इंडस्‍ट्री के डाटा और कॉलिंग की गलाकाट प्रतिस्पर्धा की वजह से कंपनी को नुकसान हुआ है। इसके अलावा विपरित नियामक परिस्थितियां भी नुकसान की वजह बनी हैं।

मर्जर प्रक्रिया आखिरी पड़ाव पर
कंपनी ने आगे कहा कि आइडिया और वोडाफोन इंडिया के बीच मर्जर की प्रक्रिया आखिरी पड़ाव पर है। कंपनी को अनुमान है कि इस कैलेंडर ईयर के पहली छमाही तक मर्जर की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।

Jio को 510 करोड़ का मुनाफा
आइडिया को ऐसे समय में नुकसान हुआ है जब इसी अवधि में रिलायंस जियो ने 510 करोड़ रुपए का मुनाफा हासिल किया है। तीसरी तिमाही में जियो का मुनाफा 504 करोड़ रुपए था। वहीं, इस दौरान Jio की आय 6879 करोड़ से बढ़कर 7128 करोड़ रुपए हो गई है।

Jio के अब तक 18.66 करोड़ ग्राहक हो चुके हैं। कंपनी ने बताया है कि इस तिमाही में ग्राहकों ने 506 करोड GB डाटा खर्च किया। इस प्रकार इसमें पिछली तिमाही की तुलना में 17.4 फीसदी ग्रोथ दर्ज की गई।

चीन यात्रा: मोदी ने उठाया ट्रेड बैलेंस का मुद्दा, लंबी पार्टनरशिप पर भी चर्चा

नई दिल्‍ली। चीन के वुहान शहर में अनौपचारिक बैठक के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन के राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग के सामने ट्रेड बैलेंस का मुद्दा उठाया। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच 4 दौर की बातचीत हुई। दोनों नेताओं के बीच वार्ता की शुरुआत ईस्ट लेक के किनारे वॉक के साथ हुई। इस दौरान दोनों नेताओं में कुछ गुफ्तगू भी हुई है।

इसके बाद दोनों नेताओं ने नौका विहार भी किया। इसके बाद हुई बातचीत में आपसी सहयोग के मुद्दों समेत ग्‍लोबल रीजनल और द्विपक्षीय संबंधों पर बात हुई। बता दें कि इससे पहले वार्ता के पहले दिन मोदी और जिनपिंग के बीच 3 दौर की वार्ता हुई थी।

ट्रेड बैलेंस को लेकर बातचीत
आज हुई वार्ता के बाद विदेश मंत्रालय यानी MEA ने बताया कि मोदी-जिनपिंग मुलाकात में अंतरराष्ट्रीय महत्व के द्विपक्षीय संबंधों पर किसी तरह का समझौता नहीं हुआ है, पर चर्चा जरूर हुई है। इसके अलावा आतंकवाद पर दोनों देश एक सुर में बोले हैं और इसकी आलोचना की गई है।

दोनों देश पीपुल-टू-पीपुल संबंधों को मजबूत बनाने की कोशिश करेंगे। बातचीत के दौरान ट्रेड का मुद्दा भी उठा। MEA के मुताबिक, ट्रेड बैलेंस को लेकर दोनों देशों में बातचीत हुई है। बता दें कि दोनों देशों का कारोबार पिछले साल 84 अरब डॉलर पहुंचा था। हालांकि इसमें भारत का करोबारी घाटा करीब 51 अरब डॉलर रहा है।

बॉर्डर पर शांति को लेकर भी बात
इसके साथ ही दोनों देशों के बीच बॉर्डर पर शांति बनाए रखने पर बातचीत भी हुई है। विदेश सचिव विजय गोखले के मुताबिक, दोनों देशों के बीच सीमावर्ती इलाकों में शांति बनाए रखने को लेकर भी बात हुई।

मोदी जिनपिंग के बीच बीच कारोबार, पर्यटन, संस्कृति, ग्लोबल वॉर्मिंग, द्विपक्षीय संबंधों, रणनीतिक और दीर्घकालिक साझेदारी को लेकर चर्चा हुई। भारतीय विदेश सचिव ने बताया कि दोनों देशों के नेताओं के बीच चार दौर की बातचीत हुई भारतीय विदेश सचिव ने कहा कि दोनों देशों के नेताओं की बातचीत से इनके रिश्तों में मजबूती आएगी।

मोदी ने कहा- पंचशील के नए सिद्वांत से विश्व में शांति आएगी
शुक्रवार को डेलिगेशन बातचीत के दौरान मोदी ने चीन के सामने 21वीं सदी के पंचशील की नई व्याख्या पेश की। उन्होंने कहा- “अगर हम समान विजन, मजबूत रिश्ते, साझा संकल्प, बेहतर संवाद और समान सोच के पांच सिद्धांतों वाले पंचशील के इस रास्ते पर चलें तो इससे विश्वशांति, स्थिरता और समृद्धि आयेगी। इस पर शी जिनपिंग ने कहा कि उनका देश मोदी के बताए पंचशील के इन नए सिद्धांतों से प्रेरणा लेकर भारत के साथ सहयोग एवं काम करने को तैयार है।

– बता दें कि इससे पहले चीन और भारत के बीच पंचशील समझौते को लेकर 31 दिसंबर 1953 और 29 अप्रैल 1954 को बैठकें हुई थीं, जिसके बाद बीजिंग में इस पर हस्ताक्षर हुए थे। ये सिद्वांत हैं: 1. एक दूसरे की अखंडता और संप्रभुता का सम्मान, 2. परस्पर आक्रमकता से बचना , 3. एक दूसरे के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना, 4. समान और परस्पर लाभकारी संबंध, 5. शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व

मोदी ने जताया जिनपिंग का शुक्रिया
– मोदी ने कहा कि भारत के लोग वास्तव में बेहद गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं कि मैं पहला ऐसा भारतीय प्रधानमंत्री हूं, जिसकी अगवानी के लिए आप (शी जिनपिंग) दो बार राजधानी से बाहर आए।
– “मुझे खुशी है कि इस समिट को आपने काफी महत्व दिया। ये इन्फॉर्मल समिट हमारी रेग्युलर व्यवस्था को विकसित करे। मुझे खुशी होगी कि 2019 में ऐसी ही एक अनौपचारिक समिट करने का हमें मौका मिले।”

मुख्यमंत्री रहने के दौरान बांधों के बारे में सुना था
– शी जिनपिंग ने भारतीय प्रधानमंत्री से अनौपचारिक बातचीत के लिए पहली बार प्रोटोकॉल तोड़ा। मोदी ने कहा- “जब मैं गुजरात का सीएम था, तब इन बांधों के बारे में सुना था। आपने जिस पैमाने पर और जिस तेजी के साथ इन्हें बनाया है, इसने मुझे प्रभावित किया। यही वजह है कि मैं स्टडी टूर पर आया हूं और एक दिन डैम पर बिताने का फैसला लिया।
– “भारत और चीन दोनों की संस्कृतियों का संबंध नदियों से हैं। यदि हम हड़प्पा और मोहनजोदड़ो की प्राचीन सभ्यता की बात करें तो ये नदियों के किनारे पर ही बसी थीं।”

इनसॉल्वेंसी ऐंड बैंकरप्सी कोड से डिफॉल्टर्स कंपनियों में घबराहट

नई दिल्ली। देश में इनसॉल्वेंसी ऐंड बैंकरप्सी कोड लागू हो जाने के बाद से अचानक बैंक डिफॉल्टर कंपनियों में मामलों के जल्द निपटारे को लेकर हलचल बढ़ गई है। तय वक्त में डिफॉल्टर कंपनियों के मामले का निपटारा हो रहा है।

बैंकों को डिफॉल्टर कंपनियों के पीछे भागना नहीं पड़ रहा, बल्कि खुद कंपनियां निपटारे के लिए आगे आ रही हैं। सवाल यह है कि क्या इनसॉल्वेंसी ऐंड बैंकरप्सी कोड लागू हो जाने के बाद कंपनियों के लिए धोखेबाजी करके भागना मुश्किल हो गया है?

वित्तीय सेवाओं के सचिव राजीव कुमार का कहना है कि स्थितियां एकदम बदल गई है। पहले बैंकों को लोन वापस न देने वाली कंपनियों के पीछे भागना पड़ता था, मगर अब कंपनियां खुद ही डिफॉल्ट मामले को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) के जरिये सुलझाने के लिए पहल कर रही है।

ऐसा क्यों हुआ?
दरअसल, इनसॉल्वेंसी ऐंड बैंकरप्सी कोड इस तरह के प्रावधान हैं कि तय समय तक अगर किसी ने लोन नहीं अदा किया तो कंपनी को बेचकर बैंक कर्ज की राशि वसूल की जा सकती है। इसने कंपनियों में खलबली मचा दी है।

300 मामले एनसीएलटी के पास
यह इनसॉल्वेंसी ऐंड बैंकरप्सी कोड लागू होने का ही नतीजा है कि पिछले 8 महीने में करीब 300 मामले एनसीएलटी में दर्ज हो चुके हैं। कंपनियां अब मामले को सुलझाना चाहती हैं, वरना उनको पता है कि इतनी सख्ती होगी कि उनकी पूरी कंपनी को बेचने का खतरा बढ़ जाएगा। ये मामले आरबीआई की ओर से डिफॉल्टरों की लिस्ट जारी करने और इनसॉल्वेंसी ऐंड बैंकरप्सी कोड लागू होने के बाद आए हैं।

विलफुल डिफॉल्टर्स में हड़कंप
बैंकर एस. सी. लोढ़ा का कहना है कि यह कोड विलफुल डिफॉल्टर्स के लिए बेहद खतरनाक है। विलफुल डिफॉल्टर्स वे होते हैं, जो जानबूझकर कर्ज नहीं चुकाते हैं। यही कारण है कि इस कोड के लागू होने के बाद विलफुल डिफॉल्टर्स को इस बात का अहसास हो गया है। अब वे ज्यादा समय तक कर्ज अदायगी किए बिना नहीं रह सकते।

इस कोड के तहत कार्रवाई हुई तो उनको ज्यादा नुकसान होगा। भूषण और एस्सार के मामले में जिस तरह की कार्रवाई तय समय सीमा में हुई, उससे कंपनियों को इसी में भलाई नजर आ रही है कि वे मामले को तय वक्त में सुलटा लें।

इसके अलावा इस कोड ने उन कंपनियों के मन में भी खौफ पैदा कर दिया है, जो लोन ले रही हैं या लेना चाहती हैं। अगर उन्होंने लोन नहीं चुकाया तो उनका हश्र भी इन्हीं विलफुल डिफॉल्टर्स की तरह होगा।

क्या हैं प्रावधान?
इनसॉल्वेंसी ऐंड बैंकरप्सी कोड के तहत अगर कोई कंपनी कर्ज नहीं देती है तो उससे कर्ज वसूलने के लिए दो तरीके हैं। एक या तो कंपनी को दिवालिया घोषित कर दिया जाए। इसके लिए एनसीएलटी की विशेष टीम कंपनी से बात करती है।

कंपनी के मैनेजमेंट के राजी होने पर कंपनी को दिवालिया घोषित कर दिया जाता है और उसकी पूरी संपत्ति पर बैंक का कब्जा हो जाता है। बैंक उस असेट को किसी अन्य कंपनी को बेचकर कर्ज की राशि वसूलता है। बेशक यह राशि कर्ज की राशि से कम होता है, मगर बैंक का पूरा कर्जा डूबता नहीं है।

कर्ज वापसी का दूसरा तरीका है कि मामला एनसीएलटी में ले जाया जाए। कंपनी के मैनेजमेंट से कर्ज वापसी पर बातचीत होती है। 180 दिनों के भीतर कोई समाधान निकालना होता है। कंपनी को उसकी जमीन या संपत्ति बेचकर कर्ज चुकाने का विकल्प दिया जाता है।

ऐसा न होने पर कंपनी को ही बेचने का फैसला किया जाता है। खास बात यह है कि जब कंपनी को बेचा जाता है तो उसका प्रमोटर या डायरेक्टर बोली नहीं लगा सकता।