Sunday, June 28, 2026
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शेयर बाजार में घबराहट, बिकवाली से निवेशकों को 5 लाख करोड़ का नुक्सान

मुंबई। शुक्रवार को बजट पेश होने के बाद से शेयर बाजार में जारी गिरावट के कारण शेयरों में निवेश करने वालों की संपत्ति में 5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की चपत लग चुकी है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड सभी कंपनियों का बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैपिटलाइजेशन या मार्केट कैप) सोमवार को 11:40 बजे तक घटकर 148.43 लाख करोड़ रुपये हो गया जो शुक्रवार को कारोबार शुरू होने तक 153.58 लाख करोड़ रुपये था।

बीएसई के 31 शेयरों का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स शुक्रवार को 1 प्रतिशत टूटा और फिर सोमवार को इसमें 870.9 अंकों की गिरावट आ गई और 2:24 बजे तक यह दिन के निम्नतम स्तर 38,605.48 अंक पर आ गया।

इडबी कैपिटल मार्केट्स के रिसर्च हेड ए के प्रभाकर ने कहा, ‘बजट में कुछ था नहीं और मार्केट को उससे कुछ फर्क नहीं पड़ा, लेकिन जब कुछ बदलावों के कारण विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआईज) के लिए लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स बढ़ गया तो मार्केट को यह रास नहीं आया। बायबैक टैक्स और कुछ वर्षों के बाद पब्लिक शेयरहोल्डिंग्स बढ़ाने की योजना ने भी निवेशकों का मूड खराब कर दिया।’

सालाना करोड़ों में कमाने वाले अति धनाढ्य वर्ग पर इनकम टैक्स सरचार्ज बढ़ाने के बजट प्रस्ताव से 2 हजार विदेशी फंड्स प्रभावित हुए हैं। सोमवार को कारोबारी अवधि के पूर्वार्ध में सेंसेक्स के बड़े शेयरों में शामिल एचडीएफसी बैंक, लार्सन ऐंड टुब्रो (एलऐंडटी), आईसीआईसीआई बैंक, एसबीआई, बजाज फाइनैंस, कोटक महिंद्रा बैंक और ऐक्सिस बैंक में मिलाजुला कर 400 अंकों की गिरावट आ गई।

बिकवाली की ऐसी बयार चली कि हीरो मोटोकॉर्प, पीएनबी, इंडियन ऑइल कॉर्पोरेशन और दिलीप बिल्डकॉन जैसी कंपनियों के शेयरों के भाव में वर्ष की सबसे बड़ी गिरावट आ गई। वहीं, बजाज फाइनैंस और बैंक ऑफ इंडिया को वर्ष की दूसरी सबसे बड़ी गिरावट का मुंह देखना पड़ा। सैमको सिक्यॉरिटीज के रिसर्च हेड उमेश मेहता ने कहा, ‘देश की सुस्त पड़ी आर्थिक वृद्धि को दोबारा गति देने के उपाय बजट में नहीं किए गए। इसी ने मुख्य रूप से बाजार को झटका दिया।’

शेयर बाजार में निराशा का माहौल, सेंसेक्स 792 अंक गिरकर बंद

नई दिल्ली। शेयर बायबैक पर टैक्स और सूचीबद्ध कंपनियों में न्यूनतम पब्लिक शेयरहोल्डिंग बढ़ाने की घोषणा से निवेशकों में बने निराशा के माहौल से सोमवार को घरेलू शेयर बाजारों में जमकर बिकवाली हुई। बिकवाली के कारण बंबई स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 792 अंक लुढ़ककर 39 हजार के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे गिरकर 38,720 अंकों पर बंद हुआ। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का 50 शेयरों का संवेदी सूचकांक निफ्टी 252 अंकों की गिरावट के साथ 11,558 अंकों पर बंद हुआ।

ये हैं टॉप गेनर
सेंसेक्स में यस बैंक 5.73 फीसदी, लाल पैथ लैब 5.27 फीसदी, आरकॉम 4.52 फीसदी, सिम्फनी 4.23 फीसदी, डी मार्ट 3.70 फीसदी की तेजी के साथ टॉप गेनर रहे। निफ्टी में इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस, 3.42 फीसदी, इंड्सइंड बैंक 2.27 फीसदी, कोटक बैंक 1.22 फीसदी, आईटीसी 0.97 फीसदी, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया 0.64 फीसदी की तेजी के साथ टॉप गेनर रहे।

ये हैं टॉप लूजर
सेंसेक्स में पीएनबी 10.95 फीसदी, माइंडट्री 10.43 फीसदी, बैंक ऑफ इंडिया 10.23 फीसदी, बजाज फिनसर्व 10.07 फीसदी, जेपी एसोसिएट 9.70 फीसदी की गिरावट के साथ टॉप लूजर रहे। निफ्टी में यस बैंक 8.62 फीसदी, एनटीपीसी 4.74 फीसदी, महिंद्रा एंड महिंद्रा 4.73 फीसदी, यूपीएल 4.49 फीसदी, सनफार्मा 4.30 फीसदी की गिरावट के साथ टॉप लूजर रहे।

ह्यूंदै भारत में लाएगी स्मार्ट इलेक्ट्रिक कार, जानिए डीटेल

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मुंबई।दक्षिण कोरिया की कार कंपनी ह्यूंदै मोटर भारतीय बाजार के लिए मास-मार्केट इलेक्ट्रिक वीइकल (आम आदमी की पहुंच वाला) लॉन्च करने की तैयारी कर रही है। इसके ‘स्मार्ट ईवी’ प्रोजेक्ट को हेडक्वॉर्टर से हरी झंडी मिल गई है।

स्मार्ट इलेक्ट्रिक वीइकल प्रोजेक्ट के तहत पहला प्रॉडक्ट अगले 2-3 साल में भारत में पेश किया जा सकता है। कंपनी भारतीय मार्केट के लिए खास इलेक्ट्रिक वीइकल आर्किटेक्चर पर विचार कर रही है। यह आर्किटेक्चर ह्यूंदै और किआ के बीच शेयर किया जाएगा और भारत उभरते हुए बाजारों का हब होगा।

कंपनी के प्लान की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने बताया, ‘भारत के लिए खास इलेक्ट्रिक वीइकल बनाने को पहले से इनपुट हासिल किए जा रहे हैं। शेयर्ड मोबिलिटी प्लैटफॉर्म के लिए जरूरी इनपुट प्राप्त करने में ओला में निवेश की अहम भूमिका होगी।’

ह्यूंदै मोटर इंडिया के एमडी एसएस किम ने हाल के एक इंटरव्यू में कहा था कि भारत सरकार बाकी देशों के मुकाबले इलेक्ट्रिक वीइकल्स को अधिक बढ़ावा दे रही है। ह्यूंदै की स्ट्रैटेजी इसी से मुताबिक होगी। कंपनी भारत सरकार के निर्देश के अनुसार प्रॉडक्ट और टेक्नॉलजी डिवेलप करेगी।

उन्होंने कहा था कि कंपनी सभी विकल्पों और प्लैटफॉर्म को समझ रही है। हमारी रिसर्च ऐंड डिवेलपमेंट (R&D) टीम भारत में सड़कों की स्थिति और कस्टमर्स की जरूरतों के अनुसार बेहतर सॉल्यूशन पर काम कर रही है। कंपनी की इलेक्ट्रिक कार एक छोटे साइज के प्लैटफॉर्म पर आधारित होगी। कस्टमर अच्छा ड्राइविंग अनुभव चाहते हैं और इस वजह से कंपनी इस प्लैटफॉर्म पर ऐसा अनुभव और परफॉर्मेंस लाने की कोशिश कर रही है।

ह्यूंदै मोटर्स ने 38 क्लीन वीइकल डिवेलप करने की योजना बनाई है। इनमें हाइब्रिड, इलेक्ट्रिक और फ्यूल सेल वीइकल्स शामिल होंगे। कंपनी अगले कुछ दिनों में भारत में इलेक्ट्रिक कोना एसयूवी लॉन्च करेगी।

पीछे नहीं रहना चाहती ह्यूंदै
मारुति सुजुकी देश में बना अपना पहला इलेक्ट्रिकल वीइकल 2020 में लॉन्च करेगी। इसी दौरान टोयोटा किर्लोस्कर और टाटा मोटर्स भी इलेक्ट्रिक वीइकल पेश करेंगे। महिंद्रा-फॉर्ड और रेनॉ भी भारत के लिए कॉम्पैक्ट इलेक्ट्रिक कार लाने की योजना रखते हैं। ह्यूंदै इस दौड़ में पीछे नहीं रहना चाहती।

दाम कम रखने की कोशिश
इलेक्ट्रिक वीइकल की कीमत को अफोर्डेबल रखने के लिए ह्यूंदै इंडिया के कई वर्किंग ग्रुप बैटरी सहित लोकलाइजेशन सॉल्यूशन तैयार कर रहे हैं। इसके साथ ही ओला और रेव जैसी कंपनियों के लिए बिजनस मॉडल भी बनाए जा रहे हैं। इन कंपनियों में ह्यूंदै का निवेश है।

बजट की घोषणा ने इलेक्ट्रिक गाड़ियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद
वित्त मंत्री ने पिछले सप्ताह बजट में इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर 12 पर्सेंट के GST रेट को घटाकर 5 पर्सेंट कर दिया। साथ ही इलेक्ट्रिक वीइकल्स के लिए लोन पर इनकम टैक्स में छूट की भी घोषणा की थी। इससे देश में इलेक्ट्रिक वीइकल्स की लोकप्रियता बढ़ाने में मदद मिलेगी।

बिजली सब्सिडी अब आपके खाते में, आपूर्ति बाधित होने पर मिलेगा हर्जाना

नई दिल्ली। बिजली क्षेत्र में सुधारों के लिए बिजली मंत्रालय ने नई टैरिफ नीति तैयार कर ली है। इस टैरिफ नीति का कैबिनेट नोट सभी मंत्रालयों के पास मंजूरी के लिए भेजा दिया गया है। अगले 10 दिनों में इस नई नीति के आने की उम्मीद है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी बजट भाषण में बिजली कंपनियों को दिए जाने वाले क्रॉस सब्सिडी को बंद करने की वकालत कर चुकी हैं।

बिजली मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार, नई टैरिफ नीति में बिजली सब्सिडी को लेकर भी बड़ा बदलाव किया जा रहा है। नई टैरिफ नीति में बिजली सब्सिडी सीधे ग्राहक के बैंक खाते में भेजे जाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसके लिए राज्यों से एक साल के अंदर बिजली से सिंचाई करने वाले किसानों का रिकॉर्ड तैयार करने के लिए कहा गया है ताकि अगले वित्त वर्ष से उनके बैंक खाते में बिजली सब्सिडी भेजी जा सके।

दरअसल, अभी किसानों समेत अन्य उपभोक्ताओं को दिए जाने वाली सब्सिडी बिजली कंपनियों को देने का प्रावधान है। लेकिन राज्य सरकारों की ओर से भुगतान नहीं होने के कारण बिजली कंपनियां घाटे में आ जाती हैं।

हर घर में लगाए जाएंगे स्मार्ट मीटर
नई टैरिफ नीति को मंजूरी मिलने से तीन साल में हर घर में बिजली कनेक्शन और स्मार्ट मीटर लगाने का रास्ता साफ हो जाएगा। इसमें ग्राहकों को आसान किस्तों पर स्मार्ट मीटर उपलब्ध कराने का भी प्रावधान किया गया है।

बिल देने वाले ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा बिजली चोरी का बोझ
नई टैरिफ नीति में बिजली की लागत तय करने में भी बदलाव किया गया है। नई नीति के अनुसार, कंपनियां लागत तय करने के लिए केवल उतनी बिजली ही जोड़ पाएंगी, जितनी की आपूर्ति की गई है। अभी ट्रांसमिशन व डिस्ट्रीब्यूशन हानि को भी जोड़ दिया जाता है। नई नीति लागू होने के बाद समय पर बिल भरने वाले ग्राहकों को बिजली चोरी का बोझ नहीं पड़ेगा।

आपूर्ति बाधित होने पर ग्राहकों को मिलेगा हर्जाना
नई टैरिफ नीति में 24 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के प्रावधान किए गए हैं। इसके तहत बिजली आपूर्ति बाधित होने पर ग्राहकों को हर्जाना देने का प्रावधान किया गया है। साथ ही बिजली चोरी नहीं रोक पाने वाली कंपनियों पर जुर्माना भी लगाया जाएगा।

बजट के बाद बाजार में हाहाकार, सेंसेक्स 600 अंक से ज्यादा गिरा

मुंबई।मोदी सरकार 2.0 का पहला बजट आने के बाद से घरलेू शेयर बजार में हाहाकर मचा है। शुक्रवार को गिरावट के साथ बंद होने के बाद सोमवार को भी शेयर बाजार में मातम कायम है। मायूसी का आलम यह है कि 11:30 बजे तक सेंसेक्स 621.60 अंक (1.57%) टूटकर 38,891.79 जबकि निफ्टी 191.10 अंक (1.62%) कमजोर होकर 11,620.05 पर फिसल गया। शुक्रवार से अब तक सेंसेक्स अब तक 1098.61 अंक टूट चुका है जबकि निफ्टी में 344.70 अंक की गिरावट आ चुकी है।

बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक सेंसेक्स पूर्वाह्न् 11.45 बजे पिछले सत्र से 581.21 अंकों यानी 1.30 फीसदी लुढ़ककर 38,932.18 पर कारोबार कर रहा था। इससे पहले सेंसेक्स 39,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे गिरकर 38,999.50 पर आ गया जबकि सत्र के आरंभ में सेंसेक्स मामूली गिरावट के साथ 39,476.38 पर खुला था।

निफ्टी में 186 अंकों की गिरावट
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के 50 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक निफ्टी भी 186.85 अंकों यानी 1.56 फीसदी की भारी गिरावट के साथ 11,624.30 पर कारोबार कर रहा था जबकि इससे पहले निफ्टी 11,647.75 तक लुढ़का। सत्र के आरंभ में निफ्टी भी पिछले सत्र मुकाबले कमजोरी के साथ 11,770.40 पर खुला और 11,771.90 तक उठा मगर, बिकवाली का दबाव बढ़ने के कारण सूचकांक लुढ़क गया।

अमेरिकी जॉब डाटा का दिखा असर
मेरिका में पिछले सप्ताह जॉब डॉटा मजबूत आने से अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर में कटौती की संभावना कम होने से एशिया बाजारों में नकरात्मक रुझान रहा। इसके अलावा, पिछले सप्ताह शुक्रवार को संसद में पेश किए गए आम बजट 2019-20 के प्रावधानों को लेकर निवेशकों में असमंजस की स्थिति बरकरार है, जिससे शेयर बाजार में नकारात्मक रुझान देखने को मिला।

शेयर बायबैक पर टैक्स से निवेशकों में निराशा
बाजार के जानकार बताते हैं कि खासतौर से सरकार द्वारा शेयर बायबैक पर कर लगाने और सूचीबद्ध कंपनियों में न्यूनतम पब्लिक शेयरहोल्डिंग बढ़ाने की घोषणा से घरेलू निवेशकों में निराशा का माहौल बना है।

‘मिशन मंगल’ में कैसा होगा अक्षय कुमार का किरदार, देखिए

कुछ दिन पहले ही अक्षय कुमार ने सोशल मीडिया पर एक नोट शेयर किया था जिसमें लिखा था, ‘हॉलिवुड पिछले कई सालों से स्टार ट्रेक, स्टार वार्स और ग्रैविटी जैसी फिल्में बना रहा है जिन्होंने एक पूरी पीढ़ी, आविष्कारकर्ताओं, वैज्ञानिकों को प्रेरित किया है।

मैं भी हमेशा से ऐसी एक फिल्म करना चाहता था…मेरे लिए ‘मिशन मंगल’ वह फिल्म है। यह फिल्म खासतौर पर मैं अपनी बेटी के लिए कर रहा हूं ताकि उसकी उम्र के बच्चों को भारत के बेहतरीन मंगल मिशन की सच्ची कहानी पता चले।’

जब से इस फिल्म की घोषणा हुई है तब से ऐसी बातें कही जा रही थीं कि फिल्म में विद्या बालन, सोनाक्षी सिन्हा, तापसी पन्नू, नित्या मेनन, कीर्ति कुल्हाड़ी और शरमन जोशी के मुख्य किरदारों के बीच अक्षय का एक थोड़ा लंबा कैमियो रोल होगा।

हालांकि अब पता चला है कि इस फिल्म में अक्षय कुमार का एक बड़ा किरदार होगा। वह इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (इसरो) के एक सीनियर साइंटिस्ट का किरदार निभाने जान रहे हैं जिन्होंने मंगल मिशन में मार्स ऑर्बिटर पर काम किया था।

एक सूत्र के मुताबिक, फिल्म के मुख्य किरदारों के साथ अक्षय का रोल ऐसे साइंटिस्ट का है जो एक युवा टीम को मुश्किलों के बीच प्रेरित करते हैं। फिल्म सच्ची कहानी पर बनी है, इसमें केवल कुछ रचनात्मक स्वतंत्रता ली गई है।

यह फिल्म इस साल स्वतंत्रता दिवस पर रिलीज होगी। बता दें कि यह फिल्म 5 नवंबर 2013 में इसरो द्वारा लॉन्च किए गए मंगलयान पर बनी है। रूस, अमेरिका और यूरोपियन यूनियन के बाद भारत चौथा देश है जो अभी तक मंगल तक पहुंच पाया है।

बजट से शेयर बाजार में हाहाकार, 433 अंक टूटा सेंसेक्स, निफ्टी भी फिसला

मुंबई। घरेलू शेयर बाजार को मोदी सरकार 2.0 का पहला बजट नहीं भाया है। शुक्रवार को बजट पेश होने के बाद गिरावट के साथ बंद हुआ शेयर बाजार सोमवार टूटकर ही खुला। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) के 31 शेयरों का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 37.01 अंक (0.09%) कमजोर होकर 39,476.38 पर खुला।

नैशनल स्टॉक एक्सचेंज के 50 शेयरों का संवेदी सूचकांक निफ्टी 40.75 अंक (0.35%) टूटकर 11,770.40 अंक पर खुला। हालांकि, देखते-देखते बाजार में गिरावट बढ़ गई और 9:34 बजे तक सेंसेक्स 432.93 अंक (1.10%) टूटकर 39,080.46 जबकि निफ्टी 128.50 अंक (1.09%) की गिरावट के साथ 11,682.65 पर फिसल गया। हालत यह रही कि सेंसेक्स के 31 में से 25 और निफ्टी के 50 में से 44 शेयरों में बिकवाली हो रही थी।

सेंसेक्स के जिन शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट आई, उनमें हीरो मोटोकॉर्प (3.36%), मारुति (3.04%), एलऐंडटी (2.74%), बजाज ऑटो (2.28%), एमऐंडएम (2.09%), हिंदुस्तान यूनिलीवर (2.93%), टाटा मोटर्स (1.87%), टाटा मोटर्स डीवीआर (1.86%), एसबीआई (1.78%) और कोटक महिंद्रा बैंक (1.71%) टॉप 10 में शामिल रहे।

उधर, निफ्टी के सबसे ज्यादा गिरावट वाले शेयरों में हीरो मोटोकॉर्प 3.38%, मारुति 2.96%, एलऐंडटी 2.71%, बजाज ऑटो 2.45%, गेल 2.24%, एमऐंडएम 2.06%, टाटा मोटर्स 2%,टाइटन 1.89%, हिंदुस्तान यूनिलीवर 1.84% और एसबीआई 1.73% टूट चुके थे।

9:41 बजे सेंसेक्स के बढ़त वाले शेयरों में यस बैंक के भाव 4.08%, एचसीएल टेक के 1.12%, सन फार्मा के 0.79%, आईटीसी के 0.52%, वेदांता के 0.28% और पावर ग्रिड के 0.07% चढ़ गए। वहीं, निफ्टी के जिन शेयरों में मजबूती आई, उनमें यस बैंक 4.42%, इन्फ्राटेल 1.15%, एचसीएल टेक 1.14%, सन फार्मा 0.79%, जेएसडब्ल्यू स्टील 0.69%, आईटीसी 0.48%, अडानी पोर्ट्स 0.47%, यूपीएल 0.33%, वेदांता 0.18% और पावर ग्रिड 0.02% तक उछल गए।

बहरहाल, 9:46 बजे तक 401.62 अंक (1.02%) जबकि निफ्टी 113.60 अंक (0.96%) टूटकर क्रमशः 39,111.77 और 11,697.55 पर थे। तब निफ्टी का एक भी सेक्टोरल इंडेक्स हरे निशान में नहीं था। सबसे ज्यादा गिरावट निफअटी पीएसयू बैंक (2.83%) और निफ्टी ऑटो (2.30%) में देखी गई।

इन्फोसिस में 2200 एम्प्लॉयीज कमा रहे करोड़ों

बेंगलुरु।देश की दूसरी सबसे बड़ी इन्फर्मेशन टेक्नॉलजी कंपनी इन्फोसिस में करोड़पतियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। पिछले फाइनैंशल इयर के दौरान विदेश में मौजूद 1 करोड़ रुपये से अधिक सालाना सैलरी वाले एंप्लॉयीज की संख्या 2,200 से अधिक थी। यह संख्या फाइनैंशल इयर 2017 से 500 से अधिक है। इससे विदेश में अधिक एंप्लॉयीज को हायर करने के कंपनी के कदम के कारण कॉस्ट बढ़ने का संकेत मिल रहा है।

फाइनैंशल इयर 2017 में इन्फोसिस के 1,700 से अधिक एंप्लॉयीज की सैलरी 1 करोड़ रुपये से अधिक थी। इन्फोसिस के एक एग्जिक्यूटिव से हासिल किए गए फाइनैंशल इयर 2019 के डेटा में 1,700 से अधिक ऐसे एंप्लॉयीज शामिल नहीं हैं जिन्हें कंपनी की यूरोपियन ब्रांचों ने सीधे हायर किया है। यूरोपियन यूनियन के जनरल डेटा प्रोटेक्शन रेगुलेशन (GDPR) के कारण यह डेटा हासिल नहीं किया जा सका।

इन्फोसिस ने 2017 से अमेरिका में 9,100 से अधिक लोगों को हायर किया है। यह कंपनी के सबसे बड़े मार्केट में 10,000 लोगों को रिक्रूट करने के पूर्व सीईओ विशाल सिक्का के लक्ष्य के अनुसार है। हालांकि इससे कंपनी की कॉस्ट भी बढ़ रही है। कंपनी ने पहले फाइनैंशल इयर 2020 के लिए 22-24 पर्सेंट के मार्जिन का अनुमान दिया था, जिसे घटाकर अब 21-23 पर्सेंट किया गया है।

अधिकतर इन्फर्मेशन टेक्नॉलजी कंपनियां लोकलाइजेशन को बढ़ाने की स्ट्रैटिजी पर चल रही हैं। इस वजह से टैलेंट को हासिल करने के लिए प्रतिस्पर्द्धा बढ़ गई है और एंप्लॉयी कॉस्ट में भी वृद्धि हो रही है। IT कंसल्टेंसी एवरेस्ट रिसर्च के CEO बेंडर सैमुअल ने बताया, ‘पहले विदेश में कम सैलरी और फ्रेशर्स की बड़ी संख्या का इस्तेमाल करने से मार्जिन को 20 पर्सेंट से अधिक रखा जाता था। मार्केट में डिजिटल की डिमांड बढ़ने से अब कॉस्ट में भी इजाफा हुआ है। डिजिटल स्किल्स वाले एंप्लॉयीज की कमी है और इनकी एक घंटे की कॉस्ट 150 डॉलर से अधिक तक हो सकती है।’

इस बारे में इन्फोसिस ने कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। विदेश में अधिक सैलरी लेने वालों में कंपनी के पुराने एंप्लॉयीज के साथ ही अधिग्रहण के जरिए आए लोग भी हैं। इस लिस्ट में पाल हाइन्स शामिल हैं, जो पहले नोआ कंसल्टिंग के डायरेक्टर थे और अब इन्फोसिस कंसल्टिंग के असोसिएट पार्टनर हैं। इन्हें फाइनैंल इयर 2019 में 6.9 करोड़ रुपये की सैलरी मिली थी। इन्फोसिस कंसल्टिंग के वाइस प्रेजिडेंट और पार्टनर जॉन ब्रिजि की सैलरी 5.7 करोड़ रुपये थी।

मौजूद डेटा से पता चलता है कि इन्फोसिस के कुछ अधिग्रहणों की लागत अधिक है। हालांकि, एनालिस्ट्स का कहना है कि ऑटोमेशन और आर्टिफिशल इंटेलिजेंस जैसी नई टेक्नॉलजी से इन्फोसिस के लिए डिलिवरी की कॉस्ट कुछ कम हो सकती है।

डॉक्टरों ने जब युवती की बड़ी आंत काट कर बना दिया पुरुष जननांग

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में स्थित केजीएमयू के डॉक्टरों ने एक बेहद जटिल ऑपरेशन किया है। यूरॉलजी विभाग के डॉक्टरों ने एक ऐसी युवती का ऑपरेशन किया, जिसके जन्म से न बच्चेदानी थी न जननांग। उसके दिल के वॉल्व में खराबी थी। गुर्दे और रीढ़ की हड्डी की कुल 9 बीमारियां थीं। डॉक्टरों ने चुनौती स्वीकारी और युवती की बड़ी आंत काटकर उससे जननांग बना दिया।

यह युवती अब शादी करके वैवाहिक जीवन जी सकती है। डॉक्टरों का दावा है कि दुनिया में इतने जटिल ऑपरेशन अब तक सिर्फ दो ही हुए हैं। भारत में इस तरह का यह पहला ऑपरेशन किया गया। रायबरेली की एक युवती का सप्ताह पहले यह ऑपरेशन किया गया। उम्र होने पर भी जब उसे मासिक धर्म नहीं हुआ तो घरवालों ने केजीएमयू में दिखाया। यहां डॉ. विश्वजीत सिंह ने जांच की।

युवती को एमआरकेएच सिंड्रोम की पुष्टि हुई। डॉ. विश्वजीत ने बताया कि युवती को जन्म से बच्चेदानी और जननांग नहीं था। पांच हजार लोगों में से किसी एक को यह दिक्कत होती है। डॉक्टरों ने ऑपरेशन का फैसला किया। जब बाकी जांच हुई तो पता चला कि दिल के वॉल्व में खराबी है और एक गुर्दा भी नहीं था। गर्दन की लंबाई सामान्य से काफी कम थी और रीढ़ की हड्डी में भी परेशानी थी। ऐसे में बेहोशी देने में दिक्कत हो सकती थी।

पांच सेंटीमीटर बड़ी आंत निकाली
डॉ. विश्वजीत ने बताया कि युवती को 15 दिन पहले भर्ती किया, कुछ दिन दवाएं चलीं। इसके बाद पहले पेट में चीरा लगाकर बड़ी आंत का पांच सेंटीमीटर का टुकड़ा निकाला गया। उसी टुकड़े से जननांग बनाया गया।

पूरा इलाज मुफ्त हुआ
डॉ. विश्वजीत के मुताबिक, यह वजाइनोप्लास्टी टाइप टू का केस था। ऐसे केस में मरीज को कई अन्य बीमारियां भी होती हैं। निजी अस्पताल में इस तरह का ऑपरेशन मुश्किल था। हालांकि, मरीज बीपीएल धारक था इसलिए आयुष्मान योजना के तहत पंजीकृत कर ऑपरेशन मुफ्त किया गया। शनिवार को मरीज को डिस्चार्ज कर दिया गया।

यूरॉलजी विभाग के डॉ. विश्वजीत सिंह के निर्देशन में यह ऑपरेशन हुआ। इसमें डॉ. राहुल जनक सिन्हा, रेजिडेंट डॉ. ज्ञानेंद्र, डॉ. मुकेश, सिस्मानु, एनस्थीसिया विभाग के डॉ. जिया और पैरामेडिकल स्टाफ भी इसमें शामिल रहा।

बदलाव: अब सिर्फ तीन साल की होगी प्राथमिक शिक्षा

नई दिल्ली। प्रस्तावित नई शिक्षा नीति को लागू करने के अपने इरादे में सरकार यदि सफल हुई, तो देश का 50 साल पुराना स्कूली शिक्षा का ढांचा पूरी तरह से बदल जाएगा। हालांकि सरकार ने जिस तरह से बजट में इसे लागू करने का इरादा जताया है, उसके बाद इसे लेकर हलचल बढ़ी हुई है।

इसके चलते जो बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे, उनमें स्कूली शिक्षा में फाउंडेशन स्तर के एक नए शिक्षाक्रम की शुरूआत होगी। जिसमें प्री-प्राइमरी से दूसरी कक्षा तक की पढाई शामिल होगी। जबकि प्राथमिक (प्राइमरी) शिक्षाक्रम सिमट कर तीसरी, चौथी और पांचवी तक रह जाएगा। स्कूली शिक्षा का मौजूदा ढांचा 1968 में तैयार किया गया था।

नई शिक्षा नीति के प्रस्तावित मसौदे में स्कूली शिक्षा के ढांचे में बदलाव के इस लक्ष्य को 2022 तक हासिल करने की सिफारिश की गई है। साथ ही कहा कि इससे स्कूली शिक्षा में रटने-रटाने का चलन खत्म होगा और बच्चों में आवश्यक ज्ञान, मूल्य, रूझान, हुनर और कौशल जैसे तार्किक चिंतन, बहुभाषी क्षमता और डिजिटल साक्षरता जैसे विषयों के विकास में मदद मिलेगी।

नीति में स्कूली शिक्षा के ढांचे में बदलाव की जो और बड़ी सिफारिशें की गई है, उनमें स्कूली शिक्षा का तीसरा क्रम माध्यमिक स्तर का होगा, जो तीन साल का होगा और इनमें कक्षा छह, सात और आठवीं शामिल होगा। वहीं चौथा क्रम उच्च या सेकेंडरी स्तर का होगा। जो चार वर्ष का होगा। जिसमें नौवीं, दसवीं, ग्यारहवीं और बारहवीं की पढ़ाई शामिल होगी।

वहीं स्कूली शिक्षा में प्रस्तावित फाउंडेशन शिक्षा पांच सालों की होगी। जिसमें तीन साल प्री-प्राइमरी और दो साल में पहली और दूसरी की पढ़ाई होगी। नीति के मुताबकि बदलाव की यह सिफारिश मौजूदा दौर में बच्चों की उम्र और उनकी जरूरतों के लिहाज से तय किया गया है। हालांकि नीति में यह साफ किया गया है, कि इस आधार पर भौतिक इंफ्रास्ट्रक्चर में बदलाव करने की कोई जरूरत नहीं है।

स्कूली शिक्षा का कुछ इस तरह का होगा प्रस्तावित ढांचा

  • पांच वर्षो की बुनियादी अवस्था( फाउंडेशन स्टेज): इनमें तीन वर्ष प्री प्राइमरी स्कूल के और पहली और दूसरी कक्षा होगी शामिल।
  • प्राथमिक(प्राइमरी) शिक्षा तीन वर्ष की होगी: इनमें अब सिर्फ कक्षा तीन, चार और पांच शामिल होगा।
    -तीन वर्ष की होगी माध्यमिक अवस्था: इनमें कक्षा छह, सात और आठ होगा शामिल।
  • उच्च या सेकेंडरी अवस्था: यह चार वर्षो की होगी। इनमें कक्षा नौ, दस, ग्यारहवीं और बारहवीं होगा शामिल।