राजनीतिक धुरंधरों के गढ़ ढहे; गहलोत, वसुंधरा को अपने ही वार्ड में मिली मात

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जयपुर। राजस्थान में नगर निकायों के चुनावों के नतीजों ने साफ कर दिया है कि बड़े नेताओं का प्रभाव जीत की गारंटी नहीं रहा। कई पुराने राजनीतिक गढ़ों में मतदाताओं ने स्थानीय समीकरणों के हिसाब से फैसला सुनाया और कई जगह निर्दलीयों ने पूरी बाजी ही अपने हाथ में ले ली।

राजस्थान के 309 निकायों के चुनाव नतीजों ने कई बड़े राजनीतिक चेहरों और दिग्गज नेताओं को चौंका दिया है। जहां कुछ इलाकों में भाजपा ने दमदार प्रदर्शन करते हुए बोर्ड बनाने की स्थिति हासिल की, वहीं कई ऐसे गढ़ भी ढह गए जिन्हें वर्षों से मजबूत राजनीतिक किले के तौर पर देखा जाता रहा है।

पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के गढ़ झालावाड़ में भाजपा को बड़ा झटका लगा तो सचिन पायलट के विधानसभा क्षेत्र टोंक में कांग्रेस ने बाजी मार ली। सबसे बड़ा ट्विस्ट बारां में देखने को मिला, जहां आम आदमी पार्टी ने पहली बार राजस्थान में किसी नगर परिषद में स्पष्ट बहुमत हासिल कर बोर्ड बनाने की स्थिति बना ली है।

वसुंधरा के गढ़ में बीजेपी सिर्फ 13 पर सिमटी
झालावाड़ को लंबे समय से पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का मजबूत राजनीतिक गढ़ माना जाता है। लेकिन नगर परिषद चुनाव में यहां भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा। 45 वार्डों वाली नगर परिषद में भाजपा महज 13 वार्डों पर सिमट गई, जबकि कांग्रेस ने 39 वार्ड जीतने का दावा किया है। इस नतीजे ने झालावाड़ की स्थानीय राजनीति में कांग्रेस की मजबूत वापसी का संकेत दिया है।

पायलट के इलाके में कांग्रेस का दबदबा
पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट के विधानसभा क्षेत्र टोंक में भी भाजपा को बड़ा झटका लगा। टोंक नगर परिषद के 60 वार्डों में कांग्रेस ने 32 सीटों पर जीत दर्ज की। भाजपा 19 वार्डों तक सीमित रही, जबकि बाकी सीटें निर्दलीयों के खाते में गईं। यानी पायलट के इलाके में कांग्रेस ने स्थानीय निकाय के चुनाव में अपना दबदबा कायम किया।

बारां में आप ने खोला नया अध्याय
इन चुनावों का सबसे अलग नतीजा बारां से सामने आया। बारां नगर परिषद के 60 वार्डों में आम आदमी पार्टी ने 31 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया। भाजपा को 9 और कांग्रेस को 17 वार्ड मिले। इस परिणाम के साथ AAP राजस्थान में पहली बार किसी नगर परिषद में स्पष्ट बहुमत के साथ अपना चेयरमैन बनाने की स्थिति में पहुंच गई है।

जयपुर में बीजेपी बोर्ड के करीब
राजधानी जयपुर में भाजपा ने मजबूत प्रदर्शन किया है और वह मेयर बनाने की स्थिति में पहुंच गई है। इसके उलट मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह जिले भरतपुर में भाजपा बहुमत से काफी दूर रह गई। 65 वार्डों में निर्दलीयों ने 36 सीटें जीतकर सबसे बड़ा समूह बनाया। भाजपा 20 सीटों के साथ दूसरे और कांग्रेस 7 सीटों के साथ तीसरे स्थान पर रही। ऐसे में भरतपुर में बोर्ड की चाबी निर्दलीयों के हाथ में रहेगी।

जोधपुर में बराबरी का मुकाबला
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के क्षेत्र जोधपुर में भाजपा और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली। दोनों पार्टियों ने 44-44 वार्ड जीते हैं, जबकि 11 वार्ड निर्दलीयों के खाते में गए। एक वार्ड का परिणाम अभी बाकी है। ऐसे में जोधपुर में भी बोर्ड बनाने के लिए निर्दलीय निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

लेकिन जोधपुर का नतीजा इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत अपने वार्ड 56 में भाजपा को जीत नहीं दिला पाए। वहीं तीन बार मुख्यमंत्री रहे अशोक गहलोत के वार्ड 88 में भी कांग्रेस हार गई।

अजमेर में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी
अजमेर नगर निगम में भी बड़ा उलटफेर हुआ। 80 वार्डों में कांग्रेस ने 37 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी का दर्जा हासिल किया, जबकि भाजपा 32 वार्डों पर रही। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी और केंद्रीय राज्यमंत्री भागीरथ चौधरी के राजनीतिक प्रभाव वाले अजमेर में 36 साल बाद कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। पाली में भी भाजपा को झटका लगा। 65 वार्डों में कांग्रेस ने 29 और भाजपा ने 21 वार्ड जीते। यह परिणाम भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के लिए भी बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।

दिग्गजों के अपने वार्ड में ही बिगड़ा खेल
निकाय चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा उन दिग्गजों की हार की है जो अपने प्रभाव वाले वार्ड तक में पार्टी को जीत नहीं दिला सके। केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और केंद्रीय राज्यमंत्री भागीरथ चौधरी अपने-अपने वार्ड में भाजपा को जीत नहीं दिला पाए। मंत्रियों में राज्यवर्धन सिंह राठौड़, मदन दिलावर और जोराराम कुमावत के वार्ड में भी पार्टी को हार मिली। अलवर में धरने पर बैठे संजय शर्मा के वार्ड में भी भाजपा को झटका लगा।