मैन्युफैक्चरिंग की ग्रोथ 5 साल में सबसे धीमी, अगस्त में PMI घटकर 52.8 पर आया

0
4

नई दिल्ली। Manufacturing PMI: भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की रफ्तार अगस्त में कमजोर पड़ी है। उत्पादन और नए ऑर्डर की ग्रोथ धीमी होने से मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों की बढ़त पांच साल में सबसे कम रही। मंगलवार को जारी HSBC इंडिया मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) सर्वे में यह जानकारी सामने आई है।

अगस्त में मैन्युफैक्चरिंग PMI घटकर 52.8 रह गया, जो जुलाई में 53.5 था। यह लगातार तीसरा महीना है जब PMI में गिरावट आई है। अगस्त का आंकड़ा 54.2 के लंबे समय के औसत से भी नीचे रहा।

PMI का 50 से ऊपर रहना मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों में बढ़ोतरी दिखाता है, जबकि 50 से नीचे का आंकड़ा गिरावट का संकेत माना जाता है। यानी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर अभी भी बढ़ रहा है, लेकिन इसकी रफ्तार कमजोर हुई है।

HSBC की चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट प्रांजुल भंडारी के मुताबिक अगस्त में उत्पादन सूचकांक अगस्त 2021 के बाद सबसे निचले स्तर पर आ गया। इसका मतलब है कि कंपनियां उत्पादन तो बढ़ा रही हैं, लेकिन इसकी रफ्तार पहले के मुकाबले काफी धीमी हो गई है।

कंपनियों ने इसकी बड़ी वजह कमजोर मांग और नए ऑर्डर में धीमी बढ़ोतरी को बताया। नए कारोबार में अगस्त के दौरान बढ़ोतरी जारी रही, लेकिन इसकी रफ्तार पांच साल में सबसे कम रही। सर्वे में शामिल कंपनियों ने कहा कि बाजार की मुश्किल परिस्थितियों और कुछ उत्पादों की कमजोर मांग के कारण नए ऑर्डर की रफ्तार घटी है। तीन औद्योगिक समूहों में से दो में मांग कमजोर हुई। हालांकि कंज्यूमर गुड्स सेगमेंट इसका अपवाद रहा।

तैयार माल का स्टॉक बढ़ा
उम्मीद से कम बिक्री होने का असर कंपनियों के पास पड़े तैयार माल पर भी दिखाई दिया। तैयार माल का स्टॉक लगातार दूसरे महीने बढ़ा। हालांकि इसमें बढ़ोतरी जुलाई के मुकाबले कम रही। इससे संकेत मिलता है कि कंपनियों ने जितना सामान बेचने की उम्मीद की थी, बिक्री उससे कम रही और कुछ माल स्टॉक में रह गया।

एक्सपोर्ट ऑर्डर बढ़े, लेकिन रफ्तार घटी
विदेशों से मिलने वाले ऑर्डर में अगस्त के दौरान बढ़ोतरी हुई। कंपनियों को ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, चीन, स्पेन, थाईलैंड और अमेरिका जैसे बाजारों से नए ऑर्डर मिले। हालांकि अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर की बढ़ोतरी की रफ्तार जुलाई के मुकाबले धीमी रही।