नई दिल्ली। Women Reservation Bill: संसद सत्र के दोबारा बुलाए जाने की अटकलों के बीच महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर एक बार फिर सियासत तेज हो गई है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की महिलाओं से महिला आरक्षण कानून को जल्द लागू करने का स्पष्ट वादा किया है और सरकार इसी दिशा में काम कर रही है।
रिजिजू ने बातचीत के दौरान संसद के दोबारा बुलाए जाने की संभावना पर सीधे तौर पर कुछ नहीं कहा। लेकिन उन्होंने यह जरूर बताया कि अतीत में ऐसा हुआ है जब किसी सत्र को स्थगित करने के बाद संसद को फिर से दोबारा बुलाया गया है। खास बात यह है कि 13 अगस्त को मानसून सत्र की कार्यवाही खत्म होने के बावजूद अभी तक संसद सत्रावसान नहीं हुआ है।
रिजिजू ने कहा, ‘प्रधानमंत्री ने देश की महिलाओं से स्पष्ट रूप से प्रतिबद्धता जताई है कि महिला आरक्षण और संसद की ओर से महिलाओं से किया गया वादा लागू किया जाएगा। उसी आधार पर हम काम कर रहे हैं।’
खरगे ने की सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग
रिजिजू के इस बयान को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री मोदी को लेटर लिखकर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। खरगे ने कहा कि परिसीमन से जुड़े सरकार के प्रस्तावों पर चर्चा के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने से पहले सभी राजनीतिक दलों की बैठक होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण मुद्दा है और सरकार को जल्दबाजी में कदम नहीं उठाना चाहिए।
खड़गे ने जताई जल्दबाजी की आशंका
खरगे ने लेटर में लिखा कि सरकार को ‘फिर से चीजों को वैसे ही बुलडोज नहीं करना चाहिए, जैसा आपने 16-17 अप्रैल 2026 को करने की कोशिश की थी।’ कांग्रेस अध्यक्ष का इशारा अप्रैल में लोकसभा में हुई चर्चा और मतदान की ओर था, जिसमें विपक्ष ने सरकार के प्रस्तावित कानून को खारिज कर दिया था।
543 सीटों पर 25 साल तक रोक की मांग
खड़गे ने कहा कि कांग्रेस की स्पष्ट राय है कि लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों की संख्या और राज्यों के बीच सीटों का मौजूदा अनुपात अगले 25 वर्षों तक बरकरार रखा जाना चाहिए।
कांग्रेस यह भी चाहती है कि महिला आरक्षण को 2029 के लोकसभा चुनाव से ही लागू किया जाए और इसके लिए लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों की संख्या में बदलाव न किया जाए।
खरगे ने प्रधानमंत्री को याद दिलाया कि उन्होंने 16 जुलाई को भी पत्र लिखकर परिसीमन के प्रस्तावों पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की थी। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को प्रस्तावों को समझने और उनका अध्ययन करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए।
PM मोदी ने किया था महिला आरक्षण का जिक्र
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में भी महिला आरक्षण का मुद्दा उठाया था। उन्होंने राजनीतिक दलों से महिलाओं की ताकत को स्वीकार करने और महिलाओं को विधानसभाओं तथा लोकसभा में जल्द से जल्द 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की अपील की थी।

