भारत में क्रूड ऑयल पर संकट, तेल लदे 18 टेंकर फारस की खाड़ी में फंसे

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नई दिल्ली। ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की लड़ाई तेजी से समुद्र में लड़ी जा रही है, जिसमें दोनों पक्ष होर्मुज स्ट्रेट और उसके आस-पास तेल टैंकरों और दूसरे जहाजों को निशाना बना रहे हैं। इससे दुनिया में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी हैं।

इन हमलों के बीच फारस की खाड़ी में करीब 42 टैंकर फंसे हुए हैं। इनमें से 18 में तेल लदा हुआ है। बताया जा रहा है कि इनमें इतना तेल है कि यह ओलंपिक साइज वाले 714 स्विमिंग पूल भरे जा सकते हैं। भारत पर भी इसका असर पड़ सकता है, क्योंकि भारत भी अपना ज्यादातर तेल आयात करता है।

सोमवार तक के मरीनट्रैफिक डेटा से पता चलता है कि 42 टैंकर होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुज़रने का इंतज़ार कर रहे हैं, जबकि सैकड़ों अन्य जहाज ओमान की खाड़ी और खाड़ी क्षेत्र में इंतजार कर रहे हैं या धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे हैं। इन टैंकरों में से 18 में तेल लदा हुआ है।

हालांकि यह ठीक-ठीक पता नहीं है कि उनमें कितना कच्चा तेल (अगर है तो) लदा है, लेकिन इन जहाजों की कुल क्षमता का अनुमान 1.76 मिलियन क्यूबिक मीटर तेल और पेट्रोलियम उत्पाद है। ऐसा कार्गो जो कमर्शियल शिपिंग पर हमले जारी रहने की स्थिति में जोखिम में पड़ सकता है।

होर्मुज में फंसे 18 तेल टैंकरों में करीब 1.76 मिलियन क्यूबिक मीटर कच्चा तेल है, जो लगभग 11.1 मिलियन बैरल तेल के बराबर है। यह दुनिया की रोजाना तेल की मांग का लगभग 11 प्रतिशत है, जो करीब 714 ओलंपिक साइज के स्विमिंग पूल भरने के लिए काफी है।

अब पर्यावरण को होने वाले नुकसान के बारे में सोचिए। अगर किसी बड़े टैंकर पर हमला होता है या वह डूब जाता है, तो खाड़ी में लाखों लीटर तेल फैल सकता है। इससे समुद्र तट, मछली पकड़ने के इलाके और समुद्री इकोसिस्टम को नुकसान पहुंच सकता है।

जमीन के उलट समुद्र में तेल बहुत बड़े इलाके में फैल सकता है। लहरों और हवाओं के साथ यह तेल रिसाव वाली जगह से बहुत दूर तक जा सकता है।