नई दिल्ली। Edible oil price: त्योहारी सीजन में मांग बढ़ने और वैश्विक बाजारों में तेजी के कारण आयातित खाद्य तेलों के दाम ऊंचे बने हुए हैं। पिछले एक महीने में खाद्य तेलों के दाम करीब 15 फीसदी बढ़ चुके हैं।
त्योहारी सीजन के दौरान घरेलू बाजार में मांग बढ़ने की संभावनाओं को देखते हुए तेल रिफाइनरी कंपनियां आयात बढ़ाने में लगी हुई है। उद्योग जगत का अनुमान है कि चालू महीने में सोयाबीन का आयात 6.20 लाख टन तक पहुंच सकता है, जो मौजूदा मासिक औसत से करीब 46 प्रतिशत अधिक है। हालांकि आयात में आ रही रुकावट सप्लाई बढ़ाने में सबसे बड़ी बाधा बन रही है।
खाद्य तेल की कीमतों में भी त्योहारी खुमारी चढ़ने लगी है। अगस्त महीने में खाद्य तेलों के दाम करीब 15 फीसदी महंगे हो गए। जो आगामी त्योहारी सीजन में और भी महंगे हो सकते हैं। खुदरा बाजार में खाद्य तेलों के दाम 200 रुपये प्रति लीटर के ऊपर पहुंच गए। महंगाई को कम दिखाने के लिए ब्रांडेड कंपनियां एक लीटर की जगह 910 ग्राम का पैकेट बाजार में उतार रही है।
थोक बाजार में सोयाबीन तेल के दाम बढ़कर 15,800 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गए है। मूंगफली (गुजरात) 17,000 रुपये, पामोलीन के दाम बढ़कर 15,850 रुपये प्रति क्विंटल और सरसों के दाम 2,820 रुपय प्रति टिन (15 किलो) पहुंच गए। ब्रांडेड कंपनियों की औद्योगिक मांग बढ़ने और उपलब्धता कम रहने के कारऩ बिनौला तेल का दाम भी बढ़कर 17,125 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गए।
सोयाबीन तेल का आयात 46% बढ़ने का अनुमान
खाद्य तेल कारोबारियों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक अगस्त में सोयाबीन तेल का आयात बढ़कर 6,20,000 मीट्रिक टन होने की संभावना है। मौजूदा मार्केटिंग ईयर (जो नवंबर में शुरू से शुरु होता है) में अब तक के 4,24,549 टन के औसत मासिक आयात से लगभग 46% अधिक है।
सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) के अध्यक्ष संजीव अस्थाना के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोयाबीन तेल की अच्छी कीमत, देश में बढ़ती मांग और रूस-यूक्रेन संघर्ष के बीच सूरजमुखी तेल की आपूर्ति में आ रही रुकावट के कारण भारतीय रिफाइनरियां सोयाबीन तेल की खरीद बढ़ा रही हैं।
त्योहारी सीजन में महंगा होगा खाद्य तेल
अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ के अध्यक्ष शंकर ठक्कर ने कहा पिछले कुछ महीनो में भारत में पहले पूर्वानुमान के मुताबिक अल-नीनो के कारण बरसात कम होने से उत्पादन घटने की संभावनाएं जताई जा रही थी इसलिए दामों ने रफ्तार पकड़ ली थी।
इसके बाद खाड़ी देशों के बीच युद्ध के चलते क्रूड ऑयल के दाम बढ़ने और इंडोनेशिया द्वारा जैव ईंधन में पाम तेल के उपयोग को बढ़ाने का फैसले के करण पाम तेल के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजारों में काफी ऊपर देखने को मिल रहे हैं। अब सूरजमुखी तेल की आपूर्ति बाधित होने के कारण आने वाले त्योहारी सीजन में भारत के उपभोक्ताओं को अपनी जेब ज्यादा ढीली करनी पड़ सकती है।
खाद्य तेल का निर्यात घटा, लेकिन कमाई बढ़ी
आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल-मई 2026 में भारत ने 41,438 टन खाद्य तेल का निर्यात किया, जिसकी कुल कीमत 720.85 करोड़ रुपये रही। पिछले साल इसी अवधि में 49,100 टन खाद्य तेल का निर्यात हुआ था और इसकी कीमत 707.09 करोड़ रुपये थी।
इस तरह निर्यात की मात्रा में करीब 16 प्रतिशत की कमी आई, लेकिन कुल कीमत में लगभग 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इसका मतलब है कि कम मात्रा में निर्यात के बावजूद इस बार प्रति टन बेहतर कीमत मिली। निर्यात में मूंगफली तेल सबसे आगे रहा। इसके बाद सोयाबीन तेल और सूरजमुखी तेल का स्थान रहा।

