जून में भारत की मैन्युफैक्चरिंग रफ्तार तीन महीने के सबसे निचले स्तर पर

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नई दिल्ली। Manufacturing PMI: जून 2026 में भारत की मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों की रफ्तार तीन महीने के सबसे निचले स्तर पर आ गई। इसकी मुख्य वजह विदेशी मांग में नरमी रही, जिससे निर्यात, खरीदारी, रोजगार और उत्पादन की रफ्तार धीमी पड़ गई।

यह जानकारी बुधवार को जारी एक निजी सर्वे में सामने आई। S&P Global की ओर से तैयार किए गए HSBC इंडिया मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) का आंकड़ा जून में घटकर 54.2 पर आ गया, जो मई में 55 था। यह आंकड़ा पिछले महीने जारी किए गए फ्लैश अनुमान 54.5 से भी कम रहा।

PMI अभी भी 50 के स्तर से ऊपर बना हुआ है। 50 से ऊपर का आंकड़ा मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों में विस्तार और इससे नीचे का आंकड़ा गिरावट को दर्शाता है। इसके साथ ही भारतीय मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने लगातार 56वें महीने भी वृद्धि दर्ज की है।

सर्वे में कहा गया है कि मार्च को छोड़ दें तो उत्पादन और नए ऑर्डर, दोनों की वृद्धि दर पिछले चार वर्षों में सबसे कमजोर रही। कई कंपनियों ने मांग में सुधार की बात कही, लेकिन कुछ कंपनियों ने ग्राहकों की कमजोर मांग और बाजार में कड़ी प्रतिस्पर्धा का भी जिक्र किया।

जून में अंतरराष्ट्रीय मांग की ग्रोथ भी पिछले 39 महीनों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई। इसकी बड़ी वजह यूरोपीय बाजारों में बिक्री की रफ्तार धीमी पड़ना रही।

इस दौरान इनपुट कॉस्ट बढ़ने की रफ्तार भी कम हुई। जून में मैन्युफैक्चरर्स ने फरवरी के बाद सबसे धीमी लागत वृद्धि दर्ज की। हालांकि, कंपनियों ने बताया कि केमिकल्स, इलेक्ट्रॉनिक सामान, गैस, मेटल्स, पेट्रोलियम उत्पाद, प्लास्टिक, रबर और लकड़ी जैसी वस्तुओं की कीमतें अब भी बढ़ी हुई हैं।

HSBC की मुख्य अर्थशास्त्री (भारत) प्रांजुल भंडारी ने कहा कि आंकड़ा यह संकेत देता है कि पश्चिम एशिया के तनाव के दौरान मांग में जो तेजी आई थी, उसके बाद अब मांग कुछ धीमी हुई है।

उत्पादन, नए ऑर्डर, निर्यात ऑर्डर और रोजगार सभी में वृद्धि की रफ्तार कम हुई है। खासकर इंटरनेशनल सेल्स में मार्च 2023 के बाद सबसे कमजोर बढ़ोतरी दर्ज की गई है।