खोटे सिक्के और चलन से बाहर हुए नोट बने बहुमूल्य, 1 का सिक्का 75 हजार में बिका

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कोटा। स्टैम्प्स, कॉइन्स, नोट्स सोसाइटी (एसएनसी) कोटा के तत्वावधान में सेवन वंडर पार्क के सामने स्थित होटल 7डबल्यू में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय स्तरीय प्रदर्शनी के दूसरे दिन रविवार को भी भारी भीड़ रही।

इस दौरान कोटा के इतिहास प्रेमियों, शोध छात्रों और आमजन का प्रदर्शनी स्थल पर जमावड़ा रहा। जिन्होंने भारत के गौरवशाली और दुर्लभ इतिहास को प्रत्यक्ष रूप से देखने और समझने का अनुभव लिया। हर कोई भारत के समृद्ध और प्राचीन अतीत की इस झलक को देखकर अभिभूत नजर आया।

केवल सिक्के और नोट ही नहीं, बल्कि प्रदर्शनी में प्रदर्शित विभिन्न कालखंडों के दुर्लभ पोस्टकार्ड, ऐतिहासिक डाक टिकट, विंटेज अखबार और पुरानी कंपनियों द्वारा प्रचार-प्रसार के लिए इस्तेमाल की जाने वाली विंटेज प्रचार सामग्री ने भी लोगों का ध्यान खींचा। इतिहास के इन प्रत्यक्ष साक्ष्यों ने विद्यार्थियों और युवाओं को देश की विकास यात्रा को करीब से समझने का एक बेहतरीन अवसर प्रदान किया।

​दुर्लभ सिक्कों, नोटों और प्राचीन सामग्रियों का क्रय-विक्रय
कहते हैं कि खोटा सिक्का बाजार में नहीं चलता, लेकिन एसएनसी की इस प्रदर्शनी ने इस कहावत को पूरी तरह बदल दिया। जो नोट और सिक्के वर्षों पहले चलन से बाहर हो चुके थे, वे यहां अमूल्य और बेहद कीमती साबित हुए। प्रदर्शनी में विभिन्न राज्यों और शहरों से आए संग्रहकर्ताओं के स्टॉल्स पर दिनभर लोग अपने पास रखी पुरानी मुद्राएं लेकर पहुंचे और उनकी कीमतें पूछते नजर आए। इस दौरान बड़ी संख्या में दुर्लभ सिक्कों, नोटों और प्राचीन सामग्रियों का क्रय-विक्रय भी हुआ। प्रदर्शनी में 100 रुपए का ‘000001’ फैंसी नंबर वाला स्पेसीमेन सैंपल नोट आकर्षण का मुख्य केंद्र रहा। जिसकी कीमत 1 लाख रुपए तक आंकी गई। वहीं 1 रुपए का सैंपल नोट भी हजारों रुपए में बिका।

​शाही काल से लेकर आधुनिक दौर के सिक्कों की लगी बोली
प्रदर्शनी में हैदराबाद मिंट में ढला हुआ 1 रुपए का दुर्लभ सिक्का 50,000 रुपए से 75,000 रुपए तक की कीमत में बिका। वहीं वर्ष 2021 में आजादी के अमृत महोत्सव के दौरान जारी किया गया 5 रुपए का विशेष सिक्का भी 50,000 रुपए तक की कीमत पर बिकता देखा गया। बंगाल से आए प्रसिद्ध संग्रहकर्ता के पास मौजूद चांदी और सोने के सिक्कों को देखने के लिए लोगों की सबसे ज्यादा भीड़ उमड़ी। उनके संग्रह में अवध स्टेट, विजयनगर साम्राज्य और प्राचीन बंगाल राज्य के अति-दुर्लभ सोने के सिक्के शामिल थे। जिनकी कीमत ढाई लाख से लेकर तीन-चार लाख रुपए तक थी।

इनकी रही मौजूदगी
इस अवसर पर सोसाइटी के फाउंडर सौरभ लोढ़ा एवं को-फाउंडर शुभम लोढ़ा, सोसाइटी के संरक्षक आनंद राठी, नरेन्द्र कटियाल, उद्धबदास मरचुनिया सहित देश के प्रमुख संग्रहकर्ता निखिलेश सेठी, सुधीर तुलस्यान और अभिनंदन सेठी भी मौजूद रहे।