कोटा। Kota Dussehra 2026: राष्ट्रीय मेला दशहरा 2026 के तहत् गुरुवार को विजयश्री रंगमंच पर आयोजित ‘सिंधी सांस्कृतिक संध्या’ ने शहरवासियों का मन मोह लिया। मुंबई के प्रसिद्ध सिंधी गायक, गीतकार और संगीतकार रॉकस्टार नील ने अपनी धमाकेदार लाइव प्रस्तुति से समां बांध दिया।
इस दौरान पारंपरिक सिंधी सूफी कलाम, लोक संगीत और आधुनिक फ्यूजन मैशअप्स का अनूठा संगम देखने को मिला। जिसने विशेष रूप से युवा पीढ़ी को अपनी समृद्ध संस्कृति से गहराई से जोड़ा।
सांस्कृतिक संध्या का औपचारिक शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ मुख्य अतिथियों निम्बाहेड़ा विधायक पूर्व मंत्री श्रीचंद कृपलानी, विधायक संदीप शर्मा, महापौर अनुसुईया गोस्वामी, मेला अधिकारी ओपी मेहरा, ओम आडवाणी, प्रेम भाटिया, विजय दासवानी, गिरधारी पंजवानी, महेश आहूजा संजना झमटानी द्वारा किया गया।
जैसे ही मंच पर गायक नील तलरेजा ने ‘आयोलाल सबिछो’ कहकर श्रोताओं का अभिवादन किया, पूरा पांडाल झूलेलाल के जयकारों से गूंज उठा और वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। रॉकस्टार ने मंच पर मौजूद अतिथियों की मौजूदगी में ही कान्सर्ट की शुरुआत की।
उन्होंने दुनिया के हर कोने में सिंधियत पर गर्व करने का संदेश देते हुए “हाँ माँ सिंधी आहियाँ…” गाया। उन्होंने कहा कि सिंधियों ने दुनिया की सबसे बेहतर सभ्यता दी है। उन्होंने सभी सिंधी समाज से हाथ और मोबाइल की बैटरी ऊंची करने को कहा। वैश्विक स्तर पर सिंधी संस्कृति और पहचान को दर्शाने वाले लोकप्रिय देशभक्ति गीत ‘मां सिंधी आह्यां’ ने श्रोताओं में सांस्कृतिक गौरव की भावना भर दी।
इसके बाद संगीतमय शाम की शुरुआत बेहद ऊर्जावान अंदाज में हुई। रॉकस्टार नील ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां दीं, जिन पर दर्शक झूमने को मजबूर हो गए। कार्यक्रम के दौरान ‘द झूलेलाल मैशअप’ के लोकप्रिय बोल ‘वाह वाह झूलन बाबा, वाह वाह लालन बाबा’ के साथ शानदार आगाज हुआ।
इसके बाद पुरानी और सदाबहार सिंधी लोक धुनों के खूबसूरत फ्यूजन ‘सिंधी मेड़ले’ ने पुराने दिनों की यादें ताजा कर दीं, तो वहीं बेहद लोकप्रिय सूफी अंदाज के रोमांटिक गाने ‘फकीराणी तबीयत’ ने दर्शकों की जमकर वाहवाही बटोरी।
इसके अलावा ‘दिलबर दुलारा’, ‘हिना दिल ज्यून’, ‘चर्यो आह्यां’, ‘ज़रूरी त नाहे’, और ‘सदके वञां’ जैसे गीतों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। अपने प्रसिद्ध गीत ‘दारू दवा’ से देश-विदेश में अपार प्रसिद्धि पाने वाले नील की प्रस्तुति ने हर किसी को थिरकने पर विवश कर दिया।
कार्यक्रम के अंतिम चरण में ‘ऊहो हथ मथे करे…’, ‘जियो सिन्धी सोना’, ‘सिन्धी अब्बाणि बोली.. मिठडी बानी बोली…’, ‘जी ले लालण, जीवे साइयां…’ और प्रसिद्ध सूफी तराने ‘दम दमादम कलंदर’ की प्रस्तुतियों पर पूरा पांडाल एक स्वर में झूम उठा।
रॉकस्टार नील ने अपनी अनूठी संगीत शैली के माध्यम से पारंपरिक सिंधी संगीत को आधुनिक बीट्स के साथ मिलाकर एक ऐसा फ्यूजन पेश किया, जिसने सिंधी लोक कला को एक आधुनिक और ऊर्जावान मंच प्रदान किया। कार्यक्रम में मौजूद हर दर्शक पारंपरिक धुनों और आधुनिक संगीत के इस मिश्रण पर थिरकता नजर आया।
सांस्कृतिक संध्या में बिखरे लोक कला व संगीत के रंग

गुरुवार को विजयश्री रंगमंच पर रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत कलाकार आकाश भट्ट द्वारा प्रस्तुत संगीतमय ‘गणेश वंदना’ से हुई, जिसने पूरे माहौल को आध्यात्मिक भक्ति-रस से सराबोर कर दिया। बाल कलाकार वान्या और भाविक ने प्रसिद्ध लोक भजन “रनेजा रा नाथ मारो हेलो…” पर अपनी मनमोहक एवं ऊर्जावान नृत्य प्रस्तुति से उपस्थित जनसमूह की खूब तालियां बटोरीं। इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए जगदीश निर्मल और रितु जोशी ने सदाबहार गीत “तू कहां मैं यहां…” की मधुर जुगलबंदी प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

