अल नीनो बिगाड़ेगा बाजार का गणित, एथेनॉल के साथ चीनी पर भी संकट

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दिवाली तक चीनी फिर से 70 रुपये प्रति किलो से ऊपर बिकने का अनुमान

नई दिल्ली। सुपर अल नीनो मौसम पैटर्न वैश्विक चीनी आपूर्ति और एथेनॉल उत्पादन को प्रभावित कर सकता है। अलनीनों का प्रभाव फसलों पर दिखाई दे रहा है। चालू खरीफ सीजन में गन्ना, मक्का और धान के रकबे में गिरावट देखी जा रही है। जिसका असर फसलों के उत्पादन पर पड़ेगा। स्टॉक की कमी से दिवाली तक चीनी के भाव फिर से 70 रुपये किलो के पार जा सकते हैं।

अल नीनो का प्रभाव लगातार दो साल तक पड़ने की आशंका है। चीनी की उपलब्धता कम होने की स्थिति में चीनी सीजन 2026-27 के दौरान गन्ने के रस और बी-हेवी शीरे से एथेनॉल उत्पादन को सीमित करना पड़ सकता है।

अल नीनो से जुड़ा सूखा और बाढ़ दुनिया के प्रमुख चीनी उत्पादक क्षेत्रों में गन्ने के उत्पादन को प्रभावित कर सकता है और निर्यात के लिए उपलब्ध चीनी की मात्रा घट सकती है। गोल्डमैन सैक्स के अनुसार संभावित सुपर अल नीनो मौसम पैटर्न वैश्विक चीनी आपूर्ति और एथेनॉल उत्पादन को प्रभावित कर सकता है।

दुनिया के कुल चीनी निर्यात में ब्राजील, भारत और थाईलैंड की हिस्सेदारी करीब 70 प्रतिशत है, इसलिए इन देशों में मौसम संबंधी बदलाव का वैश्विक बाजार पर बड़ा असर पड़ सकता है। सूखे के कारण मक्के की फसल कमजोर होने पर एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने की मांग बढ़ सकती है।

हालांकि गन्ने पर भी मौसम की मार और चीनी मांग को देखते हुए बहुत ज्यादा गन्ना भी एथेनॉल उत्पादन के लिए इस्तेमाल करना मुश्किल होगा। जो एथेनॉल के उत्पादन को प्रभावित करेगा ।

भारत का एथेनॉल उद्योग तेज़ी से बदलाव के दौर से गुजर रहा है। जहां पहले एथेनॉल उत्पादन मुख्य रूप से गन्ने और उससे जुड़े उत्पादों पर निर्भर था, वहीं अब अनाज आधारित कच्चे माल की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है।

ऑल इंडिया डिस्टिलर्स’ एसोसिएशन (एआईडीए) के अनुसार जून 2026 के आँकड़ों के अनुसार, देश में एथेनॉल की कुल आपूर्ति का लगभग 67 प्रतिशत हिस्सा अनाज आधारित स्रोतों से आया, जबकि गन्ने आधारित स्रोतों की हिस्सेदारी लगभग 33 प्रतिशत रही। अनाज से लगभग 480 करोड़ लीटर और गन्ने आधारित स्रोतों से लगभग 238 करोड़ लीटर एथेनॉल की आपूर्ति की गई।

मक्का सबसे बड़ा एथेनॉल फ़ीडस्टॉक बनकर उभरा है और इससे लगभग 258 करोड़ लीटर एथेनॉल का उत्पादन हुआ। भारतीय खाद्य निगम (एफ़सीआई) के अतिरिक्त खाद्यान्नों से 177 करोड़ लीटर, गन्ने के रस से 144 करोड़ लीटर, बी-हेवी शीरे से 82 करोड़ लीटर और क्षतिग्रस्त खाद्यान्नों से लगभग 45 करोड़ लीटर एथेनॉल तैयार किया गया।

एथेनॉल सप्लाई वर्ष 2025-26 में अब तक कुल 717 करोड़ लीटर एथेनॉल की आपूर्ति की जा चुकी है, जो 1,048 करोड़ लीटर के अनुबंधित लक्ष्य का लगभग 68 प्रतिशत है।

चीनी का स्टॉक कम
अल नीनो की स्थिति जून 2026 से मई 2027 तक बने रहने का अनुमान है। डीएएम कैपिटल (DAM Capital) एडवाइजर्स की एक शोध रिपोर्ट के अनुसार बारिश की कमी से गन्ने की पैदावार प्रभावित हो सकती है। वहीं, चीनी मिलों में पेराई जल्द शुरू होने पर चीनी की रिकवरी दर में और गिरावट आ सकती है।

2026-27 चीनी सत्र में चीनी उत्पादन करीब 2.9 करोड़ टन रहने का अनुमान लगाया है। 1 अक्टूबर 2026 को शुरू होने वाले 2026-27 चीनी सत्र की शुरुआत में चीनी का भंडार करीब 30 लाख टन रह सकता है। यह मात्रा देश की केवल लगभग 35 दिनों की खपत के लिए पर्याप्त होगी और पिछले एक दशक में सबसे कम शुरुआती स्टॉक होगी।

गोल्डमैन सैक्स के अनुसार, इससे भारत के एक प्रमुख चीनी निर्यातक से संभावित रूप से शुद्ध आयातक बनने की स्थिति पैदा हो सकती है। वर्तमान में वैश्विक चीनी निर्यात में भारत की हिस्सेदारी करीब 6 प्रतिशत है।