राजस्थान में चाय व्यापार पर कृषि कल्याण शुल्क समाप्त करने की मांग

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कोटा व्यापार महासंघ ने चाय व्यापार संघ की मांग का किया समर्थन

कोटा। राजस्थान में चाय व्यापार पर लगाए जा रहे कृषि कल्याण शुल्क को समाप्त करने की मांग को लेकर चाय व्यापार संघ, कोटा के एक प्रतिनिधिमंडल ने कोटा व्यापार महासंघ के अध्यक्ष क्रांति जैन एवं महासचिव अशोक माहेश्वरी से मिलकर इस शुल्क को चाय व्यापारियों के लिए अनुचित एवं आर्थिक भार बताते हुए इसे समाप्त कराने के लिए कोटा व्यापार महासंघ से सहयोग की अपील की।

चाय व्यापार संघ के अध्यक्ष पवन हिसारिया, महामंत्री महेंद्र कांकरिया एवं कोषाध्यक्ष जयदेव शिवनानी ने बताया कि राजस्थान में चाय की खेती एवं उत्पादन नहीं होता है। यहां के व्यापारी मुख्य रूप से असम, पश्चिम बंगाल, सिलीगुड़ी, दार्जिलिंग आदि क्षेत्रों से चाय मंगाकर उसका व्यापार करते हैं। चाय का नियमित व्यापार कृषि उपज मंडी प्रांगण में भी नहीं होता, बल्कि निजी व्यापारिक प्रतिष्ठानों के माध्यम से किया जाता है।

उन्होंने बताया कि इसके बावजूद राजस्थान सरकार द्वारा वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 के कृषि कल्याण शुल्क के नाम पर चाय व्यापारियों को 0.50 प्रतिशत की दर से शुल्क जमा कराने के नोटिस दिए जा रहे हैं। इससे चाय व्यापारियों पर अनावश्यक आर्थिक भार पड़ रहा है और व्यापारियों में रोष व्याप्त है।

चाय व्यापार संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि 7 मई 2022 को चाय पत्ती पर मंडी शुल्क की वसूली तत्कालीन सरकार द्वारा समाप्त कर दी गई थी। इसके बावजूद वर्तमान में चाय पर 0.50 प्रतिशत कृषि कल्याण शुल्क लगाया जाना व्यापारियों के लिए उचित नहीं है।

उन्होंने कहा कि पड़ोसी एवं सीमावर्ती राज्यों में इस प्रकार का शुल्क नहीं होने के कारण राजस्थान के चाय व्यापारियों को अंतरराज्यीय व्यापारिक प्रतिस्पर्धा में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।

चाय व्यापार संघ के महामंत्री महेंद्र काकरिया ने बताया कि चाय व्यापारियों को लाखों रुपये के शुल्क संबंधी नोटिस जारी किए जा रहे हैं, जिससे व्यापारियों में भारी असमंजस एवं चिंता की स्थिति बनी हुई है।

उन्होंने सरकार से इस शुल्क को तत्काल समाप्त करने तथा चाय व्यापार को कृषि उपज मंडी अधिनियम के दायरे से बाहर करने की मांग की।उन्होंने बताया किचाय कृषि जींस भी नहीं है यह कारखाने में निर्मित होने के बाद ही बिक्री के लिए जारी की जाती है

इस अवसर पर कोटा व्यापार महासंघ के अध्यक्ष क्रांति जैन एवं महासचिव अशोक माहेश्वरी ने चाय व्यापारियों की मांग को उचित बताते हुए कहा कि कोटा व्यापार महासंघ चाय व्यापारियों की इस मांग का पूर्ण समर्थन करता है।

उन्होंने कहा कि सरकार को चाय की वास्तविक प्रकृति तथा राजस्थान में इसके उत्पादन नहीं होने के तथ्य को ध्यान में रखते हुए चाय पत्ती को कृषि उपज मंडी अधिनियम के दायरे से बाहर करना चाहिए। अशोक माहेश्वरी ने कहा कि 7 मई 2022 के नियमों के तहत चाय पत्ती पर मंडी शुल्क की वसूली समाप्त किए जाने के बाद पुनः कृषि कल्याण शुल्क के रूप में व्यापारियों पर आर्थिक भार डालना उचित नहीं है।

उन्होंने कहा कि कोटा व्यापार महासंघ इस मुद्दे को लेकर चाय व्यापार संघ के साथ खड़ा है तथा जिला कलेक्टर के माध्यम से राज्य के मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन देकर इस शुल्क को तत्काल समाप्त करने की मांग करेगा।

उन्होंने कहा कि यदि चाय व्यापार संघ द्वारा इस मांग को लेकर किसी भी प्रकार का आंदोलन किया जाता है तो कोटा व्यापार महासंघ उसे पूर्ण समर्थन एवं सहयोग प्रदान करेगा।

साथ ही उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि चाय की वास्तविक प्रकृति और राजस्थान में इसके उत्पादन नहीं होने को देखते हुए चाय को कृषि उपज मंडी अधिनियम की सूची से स्थायी रूप से बाहर किया जाए, ताकि प्रदेश के चाय व्यापारियों को अनावश्यक आर्थिक भार से राहत मिल सके।