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दीपिका पादुकोण, सारा और श्रद्धा से NCB ने 5 से 6 घंटे किए सवाल

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मुंबई। सुशांत सिंह राजपूत की मौत की जांच के सिलसिले में सामने आए बॉलीवुड के ड्रग्स कनेक्शन में आज बॉलीवुड की सबसे बड़ी पेशी हुई। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने दीपिका पादुकोण से साढ़े पांच घंटे, श्रद्धा कपूर से 6 घंटे और सारा अली खान से पांच घंटे पूछताछ की। सूत्रों के मुताबिक, सारा और श्रद्धा ने ड्रग्स के सेवन करने से इनकार किया।

एनसीबी ने कोलाबा स्थित गेस्ट हाउस में दीपिका और उनकी मैनेजर करिश्मा प्रकाश से सवाल किए गए। सूत्रों के मुताबिक, इस दौरान दोनों ने अक्टूबर 2017 के कथित ड्रग चैट की बात कबूल की, लेकिन दोनों ने सीधे जवाब नहीं दिए। दरअसल, इस चैट में दोनों ड्रग पर चर्चा कर रही थीं और क्लब कोको में मिलने की योजना बनाई थी। एनसीबी ने इसी मामले में समन जारी किया। उधर, श्रद्धा कपूर और सारा अली खान से एनसीबी के बैलार्ड एस्टेट स्थित ऑफिस में पूछताछ की गई।

सूत्रों के मुताबिक, दीपिका के पहुंचने पर एनसीबी ने सबसे पहले उन्हें आरोपों के बारे में बताया। डेटा बैकअप लेने के लिए दीपिका के 2 मोबाइल फोन ले लिए गए। उनसे कहा गया कि इस मामले में किसी संदिग्ध या आरोपी से बात नहीं करेंगी। उसके बाद एक अंडरटेकिंग पर साइन करवाए गए। उनसे कहा गया कि 3 फेज में पूछताछ की जाएगी, इसके लिए 3-4 राउंड हो सकते हैं।

एनसीबी ने कहा- ड्रग्स केस में अब तक 18 लोग गिरफ्तार एनसीबी के साउथ-वेस्टर्न रीजन के डिप्टी डीजी मुथा अशोक जैन ने कहा कि शनिवार को करिश्मा प्रकाश, सारा अली खान, दीपिका पादुकोण और श्रद्धा कपूर के स्टेटमेंट दर्ज किए गए। क्षितिज प्रसाद को अरेस्ट किया गया। आज किसी कोई समन इश्यू नहीं किया गया। हमने अब तक 18 लोगों को गिरफ्तार किया है।

जब भारत मजबूत था तो किसी को सताया नहीं, यूएन में मोदी का भाषण

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न्यूयॉर्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को तीसरी बार संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) की 75वीं बैठक को संबोधित किया। उन्होंने किसी भी देश का नाम लिए बिना कहा, ‘भारत दुनिया का सबसे बड़े लोकतंत्र है। विश्व की 18% से ज्यादा जनसंख्या, सैकड़ों भाषाओं-बोलियों, अनेकों पंथ, अनेकों विचारधारा वाली है। जो देश वैश्विक अर्थव्यवस्था का नेतृत्व सैकड़ों वर्षों तक करता रहा और सैकड़ों साल तक गुलाम रहा। जब हम मजबूत थे तो सताया नहीं, जब मजबूर थे तो बोझ नहीं बने।’

उन्होंने अपनी 22 मिनट की स्पीच में संयुक्त राष्ट्र संघ की अहमियत पर सवाल उठाए। कोविड-19 का जिक्र किया। कहा कि भारत दुनिया को इस महामारी से उबारेगा और वैक्सीन का सबसे बड़ा उत्पादक देश बनेगा। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थाई सदस्यता का भी जिक्र किया। कहा कि भारत कब तक इंतजार करता रहेगा।

मोदी के भाषण की अहम बातें

सुरक्षा परिषद की प्रासंगिकता: मोदी ने कहा- 1945 की दुनिया आज से एकदम अलग थी। साधन, संसाधन सब अलग थे। ऐसे में विश्व कल्याण की भावना के साथ जिस संस्था का गठन हुआ, वो भी उस समय के हिसाब से ही थी। आज हम बिल्कुल अलग दौर में हैं। 21वीं सदी में हमारे वर्तमान की, भविष्य की आवश्यकताएं और चुनौतियां अलग हैं। आज पूरे विश्व समुदाय के सामने एक बहुत बड़ा सवाल है कि जिस संस्था का गठन तबकी परिस्थतियों में हुआ था, वह आज भी प्रासंगिक है। सब बदल जाए और हम ना बदलें तो बदलाव लाने की ताकत भी कमजोर हो जाती है।

यूएन के प्रयासों पर सवाल: 75 साल में संयुक्त राष्ट्र की उपलब्धियों को मूल्यांकन करें, तो तमाम उपलब्धियां हैं। लेकिन, कई उदाहरण हैं, जो गंभीर आत्ममंथन की आ‌वश्यकता खड़ी करते हैं। कहने को तो तृतीय विश्वयुद्ध नहीं हुआ। पर अनेकों युद्ध हुए, गृह युद्ध हुए, आतंकी हमलों ने दुनिया को थर्रा कर रख दिया, खून की नदियां बहती रहीं। इन हमलों में जो मारे गए, वो हमारे आपकी तरह इंसान ही थे। वो लाखों मासूम बच्चे, जिन्हें दुनिया पर छा जाना था, वो दुनिया छोड़कर चले गए। कितने ही लोगों को अपने जीवन भर की पूंजी गंवानी पड़ी, घर छोड़ना पड़ा। आज ऐसे में संयुक्त राष्ट्र के प्रयास क्या पर्याप्त थे। कोरोना से दुनिया 8-9 महीने से संघर्ष कर रहा है। इस महामारी से निबटने के लिए संयुक्त राष्ट्र का प्रभावशाली नेतृत्व कहां था।

यूएन की रिफॉर्म की प्रॉसेस और भारत की भूमिका: संयुक्त राष्ट्र की व्यवस्था, प्रक्रिया में बदलाव आज समय की मांग है। भारत के लोग संयुक्त राष्ट्र के रिफॉर्म को लेकर चल रही प्रॉसेस के पूरा होने का लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं। आखिर कब तक भारत को संयुक्त राष्ट्र के डिसीजन मेकिंग स्ट्रक्चर से अलग रखा जाएगा। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र, विश्व की 18 फीसदी से ज्यादा जनसंख्या, सैकड़ों भाषाओं-बोलियों, अनेकों पंथ, अनेकों विचारधारा वाला देश। जो देश वैश्विक अर्थव्यवस्था का नेतृत्व सैकड़ों वर्षों तक करता रहा और सैकड़ों साल तक गुलाम रहा। जब हम मजबूत थे तो सताया नहीं, जब मजबूर थे तो बोझ नहीं बने।

भारत संयुक्त राष्ट्र में अपनी भूमिका को देख रहा है: जिन आदर्शों के साथ संयुक्त राष्ट्र का गठन हुआ, उससे भारत की दार्शनिक सोच बहुत मिलती है। इसी हॉल में ये शब्द अनेकों बार गूंजा है कि वसुधैव कुटुंबकम। हम पूरे विश्व को परिवार मानते हैं। ये हमारी संस्कृति, संस्कार और सोच का हिस्सा है। भारत ने हमेशा विश्वकल्याण को ही प्राथमिकता दी है। हमने शांति की स्थापना के लिए 50 पीस कीपिंग मिशन में अपने जांबाज भेजे। हमने शांति की स्थापना में अपने सबसे ज्यादा वीर सैनिकों को खोया है। आज हर भारतवासी संयुक्त राष्ट्र में अपने योगदान, भूमिका को देख रहा है।

भारत अनुभवों को साझा करने में पीछे नहीं रहता: भारत ने हमेशा पूरी मानव जाति के हित के बारे में सोचा है ना कि अपने निहित स्वार्थों को बारे में। भारत की नीतियां हमेशा इसी दर्शन से प्रेरित रही हैं। नेबरहुड फर्स्ट से लेकर एक्ट ईस्ट पॉलिसी तक, इंडो-पैसेफिक के प्रति हमारे विचार में इस दर्शन की झलक दिखाई देती है। भारत जब किसी से दोस्ती का हाथ बढ़ाता है तो वो किसी तीसरे के खिलाफ नहीं होती। भारत जब विकास की साझेदारी मजबूत करता है तो उसके पीछे किसी साथी देश को मजबूर करने की सोच नहीं होती है। हम अपनी विकास यात्रा से मिले अनुभव साझा करने में कभी पीछे नहीं रहते हैं।

महामारी के मुश्किल समय में सबका सहयोग किया: महामारी के मुश्किल समय में भी भारत की फार्मा इंडस्ट्री ने 150 देशों को दवाइयां भेजी हैं। आज मैं आज वैश्विक समुदाय को एक और आश्वासन देना चाहता हूं कि भारत की वैक्सीन प्रोडक्शन और डिलिवरी की क्षमता पूरी मानवता को इस संकट से बाहर निकालने के काम आएगी। हम भारत में और अपने पड़ोस में फेज थ्री क्लीनिकल ट्रायल पर बढ़ रहे हैं। वैक्सीन की डिलिवरी के लिए कोल्ड चेन और स्टोरेज की क्षमता बढ़ाने में भारत सभी की मदद करेगा।

स्थायी सदस्य के तौर पर जिम्मेदारी निभाएगा भारत: अगले साल जनवरी से भारत सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य के तौर पर भी अपनी जिम्मेदारी निभाएगा। विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र होने की प्रतिष्ठा और इसके अनुभव को हम विश्व हित के लिए इस्तेमाल करेंगे। हमारा मार्ग जनकल्याण से जगकल्याण का है। भारत की आवाज हमेशा शांति सुरक्षा और समृद्धि के लिए उठेगी। भारत की आवाज मानवता, मानवजाति और आतंकवाद, अवैध हथियारों की तस्करी के खिलाफ रही है।

भारत ने अपने नागरिकों के जीवन में बड़ा बदलाव किया: रिफॉर्म, परफॉर्म, ट्रांसफॉर्म के मंत्र के साथ भारत ने करोड़ों भारतीयों के जीवन में बड़े बदलाव लाने का काम किया है। ये अनुभव विश्व के बड़े देशों के लिए भी उपयोगी हैं। 4-5 साल में 400 मिलियन से ज्यादा लोगों को बैंकिंग सिस्टम से जोड़ना, सिर्फ 4-5 साल में 600 मिलियन लोगों को खुले में शौच से मुक्त करना, 2-3 साल में 500 मिलियन से ज्यादा लोगों को मुफ्त इलाज से जोड़ना आसान नहीं था, पर हमने कर के दिखाया।

दूसरे राज्यों की बहुओं को नौकरी में नहीं मिलेगा आरक्षण: राजस्थान हाईकोर्ट का फैसला

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जयपुर। राजस्थान अब दूसरे राज्य से शादी कर के आने वाली बहुओं को सरकारी नौकरी अथवा पंचायत चुनाव में आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा । राजस्थान हाईकोर्ट ने अपने फैसले में यह साफ कर दिया है ।

जस्टिस सतीश कुमार शर्मा की एकलपीठ ने प्रेम देवी व अन्य याचिकाओं को खारिज करते हुए फैसला दिया कि दूसरे राज्य से शादी करके आने वाली महिला या प्रवासी प्रदेश में सरकारी नौकरी और चुनाव में आरक्षित सीट के लिए दावेदारी नहीं कर सकते हैं ।

चाहे वे राजस्थान और मूल राज्य में एक ही आरक्षित वर्ग की सूची में भी क्यों न शामिल हो। कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि आरक्षित वर्ग के प्रवासियों को अन्य सरकारी लाभ के लिए प्रमाण पत्र जारी हो सकते है। लेकिन संबंधित विभाग इन प्रमाण पत्रों पर यह स्पष्ट अंकित करेगा कि यह प्रमाण पत्र सरकारी नौकरी या चुनाव लड़ने के लिए मान्य नहीं होगा।

दरअसल, यह पूरा मामला पंचायत चुनाव में आरक्षित सीट से चुनाव लड़ने के लिए आवश्यक जाति प्रमाण पत्र को लेकर शुरू हुआ था । जाति प्रमाण पत्र जारी नहीं होने पर बड़ी संख्या में याचिकाकर्ता कोर्ट पहुंच गए थे। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि राजस्थान में उनके पति की जाति भी उसी श्रेणी में आती है, जो श्रेणी उनकी मूल राज्य में है।

अंतरिम राहत देते हुए नामांकन की इजाज़त दी थी
शादी के बाद से वे राजस्थान में ही रह रही हैं। ऐसे में उनको आरक्षण के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता है। इस पर 18 सितम्बर को जस्टिस अशोक कुमार गौड़ की अदालत ने याचिकाकर्ताओं को अंतरिम राहत देते हुए उन्हें नामांकन की इजाज़त दे दी थी । लेकिन साथ ही यह निर्देश दिए थे कि इनका नामांकन कोर्ट के अंतिम फैसले के अधीन रहेगा।

प्रवासियों की याचिका को खारिज कर दिया
इसके बाद मामला जस्टिस सतीश कुमार शर्मा की कोर्ट में लगा, जहां सभी पक्षों को सुनने के बाद पंचायत चुनावों में आरक्षण के लाभ का दावा करने वाली प्रवासियों की याचिकाओं को खारिज कर दिया। सरकार की ओर से पैरवी कर रहे अतिरिक्त महाधिवक्ता अनिल मेहता ने बताया कि यह मामला 1990 में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ तय कर चुकी है। संविधान पीठ ने फैसले में साफ कर दिया था कि आरक्षण का लाभ व्यक्ति अपने मूल राज्य में ही ले सकता है।

संवैधानिक फैसलों का उल्लंघन होगा
अन्य राज्य में माइग्रेट होकर जाने पर भी उसे आरक्षण का लाभ देय नहीं होगा। विस्थापित होकर दूसरे राज्य में आने पर वहां नौकरी और चुनाव सहित अन्य लाभ का दावा करते हुए प्रमाणपत्र नहीं मांग सकता है। अगर ऐसे प्रवासी व्यक्तियों को आरक्षण का लाभ दिया जाता है, तो भारत के संविधान के अनुच्छेद 341 और 342 के तहत संवैधानिक फैसलों का उल्लंघन होगा।

कानूनी प्रक्रिया अपना सकते प्राधिकारी
संविधान पीठ के इस फैसले के बाद 2018 और 2019 में भी सुप्रीम कोर्ट अपने फैसले में कई बार इस स्थिति को स्प्ष्ट कर चुका है। कोर्ट ने अपने फैसले में साफ किया है कि ऐसी महिलाएं जो अन्य राज्य से राजस्थान में शादी करके आई हैं, अथवा ऐसे लोग जो माइग्रेट होकर प्रदेश में रह रहे हैं। उन्हें सरकारी योजनाओं के लाभ के लिए जाति प्रमाण पत्र जारी किए जा सकते हैं, लेकिन इसके लिए सक्षम प्राधिकारी कानूनी प्रक्रिया अपना सकते है।

आरक्षण के लाभ का दावा करने का हकदार नहीं
किसी भी प्रकार के भ्रम से बचने, प्रमाण पत्र के दुरुपयोग को रोकने के लिए उस पर एक नोट अंकित किया जाना चाहिए, जिसमें लिखा हो कि इस प्रमाण पत्र के आधार पर, विस्थापित व्यक्ति सरकारी नौकरी और आरक्षण के लाभ का दावा करने का हकदार नहीं होगा। यह प्रमाण पत्र सरकारी योजनाओं में प्रवासी व्यक्तियों के लिए विशेष रूप से उपलब्ध लाभों के दावे के सीमित उद्देश्य के लिए जारी किया गया है।

कोटा मंडी/आवक की कमी से नया बेस्ट क्वालिटी उड़द 600 रुपये उछला

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कोटा। भामाशाह अनाज मंडी में शनिवार को लहसुन की आवक लगभग 11हजार कट्टे और अन्य जिन्स की आवक लगभग 20 हजार बोरी की रही। समर्थन मूल्य बढ़ने से गेहूं मिल क्वालिटी 20 रुपये प्रति क्विंटल तेज बिका। आवक की कमी से नया बेस्ट क्वालिटी उड़द 600 रुपये प्रति क्विंटल उछल गया। लिवाली के अभाव में लहसुन मिडियम 200 रुपये मंदा बिका। जिंसों के भाव रुपये प्रति क्विंटल इस प्रकार

गेहूं लस्टर 1450 से 1500 रुपये, गेहूं मिल क्वालिटी 1500 से 1535 रुपये, गेहूं टुकडी 1570 से 1700 रुपये, गेहूं बीज क्वालिटी 1700 से 1750 रुपये, जौ 1100 से 1300 रुपये, ज्वार 1500 से 2000 रुपये, मक्का 900 से 1200 रुपये, धान सुगन्धा 1000 से 1500 रुपये, धान पूसा 1500 से 2000 रुपये, धान (1509 )1500 से 1701 रुपये,धान (1121) 1800 से 2001रुपये, सोयाबीन पुरानी 2500 से 3770 रुपये, सोयाबीन नई 2800 से 3600 रुपये, सरसो 4500 से 5080 रुपये, अलसी 4800 से 5300 रुपये प्रति क्विंटल।

ग्वार 3000 से 3500 रुपये, मैथी पुरानी 2800 से 5000 रुपये, नई 5200 से 5800 रुपये, मसूर 4000से 5200 रुपये, चना 4000 से 5000 रुपये, चना मौसमी 4500 से 5050 रुपये, उड़द पुराना 2000 से 6500 रुपये, उड़द नया 6000 से 7850 रुपये, धनिया काला 4400 से 4600 रुपये, धनिया बादामी 5000 से 5300 रुपये, धनिया ईगल 5400 से 5600 रुपये, धनिया रंगदार 5800 से 7000 रुपये प्रति क्विंटल रहा। लहसुन 2000से 9500 रुपये प्रति क्विंटल रहा।

बॉलीवुड ड्रग केस: धर्मा प्रोडक्शंस के असिस्टेंट डायरेक्टर रहे क्षितिज प्रसाद गिरफ्तार

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मुंबई। बॉलिवुड ड्रग चैट केस में एनसीबी ने करण जौहर के प्रॉडक्शन हाउस धर्मा प्रॉडक्शंस में असिस्टेंट डायरेक्टर रहे क्षितिज प्रसाद को 24 घंटे से ज्यादा लंबी पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया है। क्षितिज प्रसाद को शुक्रवार को पूछताछ के लिए बुलाया गया था और रात में भी उन्हें हिरासत में रखा गया था। शनिवार को उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। अब NCB क्षितिज का मेडिकल करवाकर कोर्ट के सामने पेश करेगी और रिमांड मांगेगी। क्षितिज ने पूछताछ में पेडलर से ड्रग्स लेने की बात क़ुबूल की

क्षितिज के पास मिला हशीश और MDMA?
हमारे सहयोगी चैनल टाइम्स नाउ की एक रिपोर्ट की मानें तो एनसीबी को क्षितिज प्रसाद के पास से हशीश और एमडीएमए बरामद हुआ है। बताया जा रहा है कि क्षितिज ने एनसीबी की पूछताछ में कुछ बड़े नामों का खुलासा किया है। साउथ मुंबई के एक हाई-प्रोफाइल ड्रग पेडलर अंकुश अनरेजा से हुई पूछताछ में उसने बताया कि बॉलिवुड सिलेब्स के साथ लिंक बनाने में क्षितिज प्रसाद ही उसकी मदद करता था। एनसीबी को जांच में अंकुश अनरेजा, अनुज केशवानी और करमजीत सिंह जैसे ड्रग पेडलर के साथ क्षितिज की चैट्स भी मिली हैं जिसमें वह ड्रग्स की डिमांड कर रहा है।

रकुलप्रीत सिंह ने भी लिया क्षितिज का नाम
क्षितिज प्रसाद का नाम रकुलप्रीत सिंह ने भी पूछताछ में लिया था। क्षितिज प्रसाद दिल्ली में थे और उसके बाद एनसीबी का समन मिलने के बाद मुंबई पहुंचे थे। एनसीबी ने एयरपोर्ट से ही क्षितिज प्रसाद को अपनी हिरासत में ले लिया लेकिन उससे पहले ही क्षितिज के मुंबई स्थित घर पर रेड की गई थी जिसमें जिसमें ड्रग्स बरामद की गई है। एनसीबी से पूछताछ में कथित तौर पर रकुलप्रीत सिंह ने बताया है कि क्षितिज प्रसाद ड्रग सप्लाई करते हैं। क्षितिज ने ही पूछताछ में एक अन्य असिस्टेंट डायरेक्टर अनुभव चोपड़ा का भी नाम लिया है जिनसे एनसीबी ने शुक्रवार को पूछताछ की थी।

करण जौहर ने पल्ला झाड़ा
क्षितिज प्रसाद के हिरासत में लिए जाने के बाद करण जौहर ने सोशल मीडिया पर अपना बयान जारी किया। उन्होंने लिखा, ‘इन सभी निंदनीय बयानों, समाचार लेखों ने मुझे, मेरे परिवार और मेरे सहयोगियों और धर्मा प्रॉडक्शंस को अनावश्यक रूप से घृणा, अवमानना और मजाक के हवाले कर दिया। मैं आगे बताना चाहूंगा कि कई मीडिया/ न्यूज चैनल रिपोर्ट्स दिखा रहे हैं कि क्षितिज प्रसाद और अनुभव चोपड़ा मेरे सहयोगी हैं। मैं इन व्यक्तियों को व्यक्तिगत रुप से नहीं जानता हूं और इन दोनों व्यक्तियों में से कोई भी सहयोगी या करीबी नहीं है। न ही मैं और न ही धर्मा प्रॉडक्शंस इस बात के लिए जिम्मेदार हैं ।’

करण जौहर ने अपने बयान में आगे लिखा, ‘मैं आगे बताना चाहता हूं अनुभव चोपड़ा धर्मा प्रॉडक्शन के कर्मचारी नहीं हैं। वह नवंबर 2011 और जनवरी 2012 के बीच और जनवरी 2013 में शॉर्ट फिल्म के सहायक निर्देशक के तौर पर सिर्फ दो महीने के लिए हमारे साथ जुड़े थे। इसके बाद वह कभी भी धर्मा प्रॉडक्शंस के किसी दूसरे प्रॉजेक्ट के साथ नहीं जुड़े। क्षितिज रवि प्रसाद धर्मा प्रॉडक्शंस के सिस्टर कंसर्न धर्मटिक एंटरटेनमेंट के एक प्रॉजेक्ट के लिए कॉन्ट्रैक्ट बेस पर कार्यकारी निर्माता के तौर पर नवंबर 2019 में जुड़े थे।

1 अक्टूबर से GST e-invoicing होगी अनिवार्य, जानिए किस पर होगी लागू

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नई दिल्ली। ई-एन्वॉयसिंग पर और ज्यादा समय मिलने की उम्मीद नहीं है। सरकार पहली अक्टूबर से ही जीएसटी ई-एन्वॉयसिंग को अनिवार्य करने के फैसले पर आगे बढ़ सकती है। अभी तक के फैसले के मुताबिक 500 करोड़ रुपए से ज्यादा टर्नओवर वाली कंपनियों के बिजनेस-टू-बिजनेस (बी-टू-बी) ट्रांजेक्शन पर 1 अक्टूबर से ई-एन्वॉसिंग अनिवार्य कर दिया जाएगा।

उद्योग के प्रतिनिधियों ने हालांकि सरकार से अनुरोध किया है कि ई-एन्वॉयसिंग को अनिवार्य नहीं बनाया जाए, बल्कि इसके पालन को स्वैच्छिक रखा जाए। ई-एन्वॉयसिंग से हालांकि छोटी कंपनियों को राहत मिलेगी। पहले 100 करोड़ रुपए से ज्यादा टर्नओवर वाली कंपनियों के लिए ई-एन्वॉयसिंग अनिवार्य करने की योजना थी। जीएसटी काउंसिल की अधिकार प्राप्त समिति ने न्यूनतम सालाना टर्नओवर सीमा को बढ़ाकर 500 करोड़ रुपए करने का सुझाव दिया है।

टैक्स अनुपालन में सुधार की उम्मीद
ई-एन्वॉयसिंग से टैक्स अनुपालन में और सुधार होने की उम्मीद है। पहले 1 अप्रैल 2020 से ही जीएसटी ई-एन्वॉयसिंग अनिवार्य करने की योजना थी। केंद्र ने हालांकि इसके लिए संशोधित तिथि के रूप में 1 अक्टूबर 2020 को नोटिफाई किया।

कंपनियों की कार्य क्षमता में भी होगा सुधार
गुड्स एंड सर्विस टैक्स नेटवर्क के वेबसाइट के मुताबिक कंपनियों के लिए ई-एन्वॉयसिंग के अनेक फायदे हैं। इनमें स्टैंडर्डाइजेशन, इंटरऑपरेबिलिटी, जीएसटी रिटर्न और अन्य फॉर्म्स (जैसे ई-वे बिल) में खुद-ब-खुद एन्वॉयस के विवरण का दर्ज हो जाना, प्रोसेसिंग कॉस्ट घटना, विवाद में कमी आना और पेमेंट साइकल में सुधार होना शामिल हैं। इसलिए ई-एन्वॉयसिंग से कंपनियों की कार्यक्षमता बेहतर होने की उम्मीद है।

NCB के सामने दीपिका, सारा अली खान और श्रद्धा कपूर का ड्रग्स लेने से इनकार

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मुंबई। NCB की टीम सारा अली खान और श्रद्धा कपूर से ड्रग्स कनेक्शन पर पूछताछ कर रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, सोर्सेज से जानकारी मिली है कि NCB के सामने दीपिका, सारा अली खान और श्रद्धा कपूर ने ड्रग्स लेने से इनकार किया है।

श्रद्धा ने सुशांत के साथ पार्टी की बात कुबूल की है लेकिन ड्रग्स लेने से इनकार कर दिया। वहीं सारा अली खान ने भी कहा है कि वह ड्रग्स नहीं लेतीं। सारा ने थाईलैंड जाने की बात कुबूली। वहीं सारा ने कहा कि पार्टीज होती थीं वहां ड्रिंक्स सर्व किए जात

NCB ने मामले में दो FIR दर्ज की हैं। 15/20 में सुशांत केस की जांच हो रही है। इसमें रिया, शौविक के साथ सारा और श्रद्धा का नाम है। 16/20 में दीपिका और बाकी लोगों के नाम हैं। सारा और श्रद्धा से सुशांत को लेकर पूछताछ हो रही है। सारा सुशांत के साथ थाईलैंड गई थीं। वहीं श्रद्धा सुशांत के फार्महाउस से लेकर कई पार्टीज में साथ रह चुकी हैं। सारा और रकुलप्रीत का नाम रिया चक्रवर्ती ने लिया था।

जया साहा से पूछताछ में दीपिका और श्रद्धा का नाम आया। CBD ऑयल को लेकर जो चैट हुई थी जया साहा और श्रुति मोदी की उसमें श्रद्धा का भी नाम है। अब गेस्टहाउस से NCB के 2 अधिकारी दफ्तर जा रहे हैं वहां वे सारा और श्रद्धा से पूछताछ करेंगे। अब गेस्टहाउस में तीन अधिकारी हैं। NCB दफ्तर में पहले से छह अधिकारी सारा और श्रद्धा से पूछताछ कर रहे हैं।

दीपिका ने कुबूल की चैट की बात, ड्रग्स से इनकार
दीपिका ने स्वीकार किया है कि करिश्मा से उनकी चैट हुई थी। जो 28 अक्टूबर 2017 का चैट दिखाया गया वो उनके और करिश्मा के बीच ही हुई है। लेकिन दीपिका ने यह भी कहा कि हमारे सर्कल में हमलोग ‘डूब’ लेते हैं। यह एक तरह का सिगरेट है, जिसमें कई चीजें भरी रहती हैं। दीपिका ने बताया के वे ‘डूब’ जैसे शब्द कोड वर्ड के तौर पर इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने साफ-साफ नहीं कहा कि इसमें ड्रग्स भी होता है। वहीं सवाल यह भी है कि ड्रग चैट में हैशीश (हैश) का जिक्र था। जबकि दीपिक इसे कोड बता रही हैं लिहाजा NCB अब इसका पता लगा रही है। दीपिका ड्रग्स से जुड़े सवाल का सीधा जवाब नहीं दे रही हैं। उन्होंने कई सवालों पर चुप्पी भी साध ली है।

आमने-सामने बैठाकर पूछताछ खत्म
दीपिका और करिश्मा को आमने-सामने बिठाकर पूछताछ खत्म हो गई है। अब NCB करिश्मा से अलग पूछताछ कर रही है, जबकि दीपिका अभी गेस्टहाउस दूसरी मंज़िल पर अकेली बैठी हैं। NCB ने दीपिका का लिखित बयान दर्ज कर लिया है। करिश्मा से पूछताछ के बाद दीपिका से फिर सवाल जवाब किया जा सकता है।

दीपिका के जवाबों से संतुष्ट नहीं NCB
दीपिका पादुकोण से एनसीबी की 5 सदस्यी टीम सवाल कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दीपिका के कुछ जवाबों से एनसीबी संतुष्ट नहीं है। करिश्मा ने शुक्रवार को पूछताछ में ड्रग्स लेने की बात से इनकार किया था। कहा था कि वे सिर्फ सिगरेट पीते हैं। आज जब दीपिका-करिश्मा को आमने-सामने बिठाकर ड्रग्स चैट को लेकर सवाल पूछा गया तो दोनों ने कहा कि ड्रग्स नहीं लेते हैं। NCB ने पूछा कि फिर चैट में ये वीड/हैश किसके लिए मंगवा रही हैं। इस पर दोनों ने गोल-गोल जवाब दिए हैं।

ड्रग्स केस: दीपिका ने NCB के सामने ड्रग्स लेने से किया इंकार, चैट किए कबूल

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मुंबई। ड्रग चैट केस में दीपिका पादुकोण और उनकी मैनेजर करिश्मा प्रकाश से एनसीबी की टीम पूछताछ कर रही है। इस पूछताछ में दीपिका ने यह स्वीकार किया है कि करिश्मा से उनकी चैट हुई थी। हालांकि उन्होंने इस बात से इनकार किया है कि उन्होंने ड्रग्स लिया है। बताया जा रहा है कि दीपिका ने यह भी माना है कि वह एक खास तरह का सिगरेट पीती हैं लेकिन ड्रग्स नहीं लेती हैं।

आमने-सामने बैठाकर हुई पूछताछ
दीपिका की मैनेजर करिश्मा से शुक्रवार को भी पूछताछ हुई थी और इस दौरान उन्होंने सिगरेट पीने की बात स्वीकार की थी लेकिन ड्रग्स लेने से इनकार किया था। दीपिका और करिश्मा के बीच 28 अक्टूबर 2017 का चैट सामने आया है जिसके बारे में दीपिका ने यह स्वीकार किया है वह उनके ही चैट हैं। हालांकि जब दोनों को आमने-सामने बैठाकर ड्रग चैट के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वे लोग ड्रग्स नहीं बल्कि डूप लेते हैं जो एक अलग तरह का सिगरेट होता है जिसमें कई चीजें भरी होती हैं।

गोल-मोल जवाब दे रहीं दीपिका, कई सवालों पर चुप्पी
बताया जा रहा है कि एनसीबी की टीम ने जब चैट में इस्तेमाल किए गए हैश और वीड शब्दों के बारे में पूछा तो दीपिका ने इस पर गोल-मोल जवाब दिए हैं। दीपिका ने यह तो माना है कि डूप (सिगरेट) पीती हैं लेकिन क्या इसमें ड्रग्स भी होता है, इस पर उन्होंने चुप्पी साध ली है।

दीपिका से पूछे गए ये सवाल

  • आपकी और करिश्मा की इस चैट का क्या मतलब है, विस्तार से बताइए
  • आपने करिश्मा से कितनी बार ड्रग्स मंगवाई है?
  • आप अपना बयान खुद लिखना चाहेंगी या NCB के अधिकारी लिखे?
  • जो ड्रग्स आपने मंगवाए उसके लिए पैसे किसे दिए और कैसे दिए?
  • करिश्मा प्रकाश को वह कबसे जानती हैं और कितने वक्त से वह उनकी मैनेजर हैं?
  • 2017 में कोको क्लब में पार्टी किसने ऑर्गनाइज की थी। इसमें कौन-कौन से सिलेब्स मौजूद थे। (इस पार्टी में ड्रग्स के इस्तेमाल का शक है)
  • 2017 की वॉट्सऐप चैट में अमित का जिक्र है, ये अमित कौन है? बता दें कि सामने आई चैट में करिश्मा ने अमित से ड्रग्स भिजवाने की बात कही थी।
  • क्या डिप्रेशन होने के बाद दीपिका ड्रग्स लेती थीं?
  • क्या ड्रग्स लेना बॉलिवुड पार्टीज से शुरू किया?
  • वह करिश्मा प्रकाश से ड्रग्स मंगवाती थीं या किसी पेडलर के संपर्क में हैं?
  • उनके ड्रग पार्टनर कौन से सिलेब्स हैं?

अब खेती किसानी पर भी लगेगा GST, ऐसे समझिए सरकार की मंशा को

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मुंबई। केंद्र सरकार खेती-किसानी के क्षेत्र में सुधार के लिए तीन विधेयक (बिल) लाई है। इन विधेयकों को लोकसभा पारित कर चुकी है। इसे लेकर पिछले कुछ दिनों से देश में किसानों का प्रदर्शन जारी हो गया है। खासकर उत्तर भारत के किसान इसे लेकर उग्र रूप अपना लिए हैं। इन तीनों ही कानूनों को केंद्र सरकार ने लॉकडाउन के दौरान 5 जून 2020 को ऑर्डिनेंस की शक्ल में लागू किया था। अब यह चर्चा के लिए राज्यसभा में जाएगा। वहां से पास होने पर कानून लागू हो जाएगा। यह बिल किस तरह से किसान विरोधी है या किस तरह से इसका फायदा है, यह हम आपको बता रहे हैं।

ये तीन विधेयक हैं विवाद के कारण
कृषि सुधारों वाले तीन विधेयक हैं- द फार्मर्स प्रोड्यूस ट्रेड एंड कॉमर्स (प्रमोशन एंड फेसिलिटेशन) बिल 2020; द फार्मर्स (एम्पॉवरमेंट एंड प्रोटेक्शन) एग्रीमेंट ऑफ प्राइज एश्योरेंस एंड फार्म सर्विसेस बिल 2020 और द एसेंशियल कमोडिटीज (अमेंडमेंट) बिल 2020। पर इस बिल से एक बात स्पष्ट है कि इसके लागू होने से किसानों पर जीएसटी सहित तमाम तरह के टैक्स लग जाएंगे। दूसरी बात किसानों के साथ धोखाधड़ी होगी। तीसरी बात बिल तो आ गई है, लेकिन इसमें किसानों के साथ अन्याय होने पर उसकी जिम्मेदारी या भुगतान कौन करेगा यह तय नहीं है।

एमएसपी पर आरोप क्या हैं और सरकार के जवाब क्या हैं
-विपक्षी दल यह आरोप लगा रहे हैं कि इस बिल से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) खत्म हो जाएगा। पर कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने यह साफ किया है कि एमएसपी खत्म नहीं होगा।

द फार्मर्स (एम्पॉवरमेंट एंड प्रोटेक्शन) एग्रीमेंट ऑफ प्राइज एश्योरेंस एंड फार्म सर्विसेस बिल 2020

कानून से क्या होगा– इसमें मुख्य रूप से कांट्रैक्ट पर खेती कराने की बात है। सरकार का दावा है कि खेती से जुड़े जोखिम किसानों के नहीं, बल्कि जो उनसे एग्रीमेंट करेंगे, उन पर शिफ्ट हो जाएगा। किसान एग्री-बिजनेस करने वाली कंपनियों, प्रोसेसर्स, होलसेलर्स, एक्सपोर्टर्स और बड़े रिटेलर्स से एग्रीमेंट कर आपस में तय कीमत पर उन्हें फसल बेच सकेंगे। इससे उनकी मार्केटिंग की लागत बचेगी। दलाल खत्म होंगे। किसानों को फसल का उचित मूल्य मिलेगा।

एग्रीमेंट में सप्लाई, क्वालिटी, ग्रेड, स्टैंडर्ड्स और कीमत से संबंधित नियम और शर्तें होंगी। यदि फसल की कीमत कम होती है, तो भी एग्रीमेंट के आधार पर किसानों को गारंटेड कीमत तो मिलेगी ही।

किसान क्या कहते हैं
खेती को सेवा का दर्जा जो दिया जा रहा है, जैसा कि बिल में ही है, उससे बहुत कुछ नुकसान होगा। सेवा सेक्टर जीएसटी के दायरे में आता है। और इसके तहत 18 प्रतिशत जीएसटी किसानों पर लगाया जाएगा। खेती को कॉर्पोरेट के जरिए अब चलाया जाएगा। इसमें टैक्स के बारे में स्पष्ट नहीं है। कुछ भी होगा सारे पावर जिला अधिकारी (डीएम) के पास हैं। किसानों के पास इतना समय या डीएम के पास इतना समय है कि वह इस मामले में देखेंगे?

दूसरी बात अगर खेती में नुकसान होगा तो इसका जिम्मा किसानों पर डाल दिया जाएगा। साथ ही किसान की रक्षा या पेमेंट की कोई गारंटी नहीं है। इसमें सरकार को चाहिए कि या तो वह गारंटी दे या फिर बैंक गारंटी दे।

द फार्मर्स प्रोड्यूस ट्रेड एंड कॉमर्स (प्रमोशन एंड फेसिलिटेशन) बिल 2020
कानून से क्या होगा-ऐसा इको-सिस्टम बनेगा, जहां किसान मनचाहे स्थान पर फसल बेच सकेंगे। इंटर-स्टेट और इंट्रा-स्टेट कारोबार बिना किसी अड़चन कर सकेंगे। किसानों की मार्केटिंग लागत बचेगी। जिन इलाकों में किसानों के पास अतिरिक्त फसल है, उन राज्यों में उन्हें अच्छी कीमत मिलेगी। इसी तरह जिन राज्यों में शॉर्टेज है, वहां उन्हें कम कीमत में वस्तु मिलेंगी।

किसान क्या कहते हैं
इसमें मार्केटिंग के एमएसपी की कोई गारंटी नहीं है। यहां किसानों के हितों की रक्षा की बजाय व्यापारियों की रक्षा की गई है। किसान और व्यापारी दोनों के अंतर को समझना होगा। इसमें किसान को उचित मूल्य नहीं मिलेगा। इस बिल में स्वामिनाथन कमेटी की सिफारिश को लागू की जाए।

एसेंशियल कमोडिटी (अमेंडमेंट) ऑर्डिनेंस
कानून से क्या होगा-इस कानून से कोल्ड स्टोरेज और फूड सप्लाई चेन के आधुनिकीकरण में मदद मिलेगी। यह किसानों के साथ ही उपभोक्ताओं के लिए भी कीमतों में स्थिरता बनाए रखने में मदद करेगा। स्टॉक लिमिट तभी लागू होगी, जब सब्जियों की कीमतें दोगुनी हो जाएंगी या खराब न होने वाली फसल की रिटेल कीमत 50% बढ़ जाएगी। अनाज, दलहन, तिलहन, खाद्य तेलों, प्याज और आलू को आवश्यक वस्तुओं की सूची से हटाया गया है। इससे उत्पादन, स्टोरेज, मूवमेंट और डिस्ट्रीब्यूशन पर सरकारी नियंत्रण खत्म हो जाएगा।

युद्ध, प्राकृतिक आपदा, कीमतों में असाधारण वृद्धि और अन्य परिस्थितियों में केंद्र सरकार नियंत्रण अपने हाथ में ले लेगी।

किसान क्या कहते हैं
यह किसान के लिए नहीं है, यह व्यापारियों के लिए है। किसान अनाज का स्टॉक तब करेंगे जब प्रोसेसिंग हो सकेगी। अब प्रोसेसिंग किसान कैसे कर पाएगा? अगर उसके पास इतना ही इंफ्रा और समय होता तो वह खेती की बजाय बिजनेस करता। प्रोसेसिंग कर भी ले तो जो वह बेचेगा, उस पर टैक्स लगेगा।

सरकार क्या कह रही है?
केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर का कहना है कि यह तीनों ही प्रस्तावित कानून भारत में किसानों की आमदनी बढ़ाने में मदद करेंगे। सरकार का फोकस किसानों को आत्मनिर्भर बनाने पर है। इसके लिए हर गांव में गोदाम, कोल्ड स्टोरेज बनाने की योजना पहले ही घोषित हो चुकी है। किसान रेल भी शुरू की है। ताकि किसानों को उनके माल की ज्यादा कीमत मिल सके।

किसान क्या कहते हैं- किसान कहते हैं कि यह जो भी कोल्ड स्टोरेज, गोदाम आदि की बात है यह तो पूरी तरह से कॉर्पोरेटाइज की बात है। किसान के पास इतना पैसा कहां है कि वह यह सब कर सके? यह पूरी तरह से पूंजीपतियों के लिए है।

SBI सहित कई बैंक 7 फीसदी से भी कम ब्याज पर दे रहे होम लोन, यहां जाने डिटेल

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नई दिल्ली।हाल ही में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ महाराष्ट्र और यूको बैंक सहित कई बैंकों ने होम लोन की ब्याज दरों में कटौती की है। ऐसे में अगर आप घर खरीदने या बनाने के लिए होम लोन लेने का प्लान बना रहे हैं तो आपका ये जानना बहुत जरूरी है कि कौन-सा बैंक किस ब्याज दर पर लोन दे रहा है। यूनियन बैंक और LIC हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड सहित कई वित्तीय संस्थाएं इस समय 7 फीसदी से भी ब्याज पर लोन दे रही हैं। हम आपको बैंकों की होम लोन ब्याज दरों के बारे में बता रहे हैं।

यहां जानें कौन सा बैंक किस ब्याज दर पर दे रहा लोन

बैंकब्याज दर(%)प्रोसेसिंग फीस
यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया6.70 – 7.15लोन अमाउंट की 0.50 फीसदी (10 हजार रुपए अधिकतम)
बैंक ऑफ इंडिया6.85- 7.75लोन अमाउंट की 0.25 फीसदी (20 हजार रुपए अधिकतम)
सेन्ट्रल बैंक6.85- 9.05लोन अमाउंट की 0.5 फीसदी (20 हजार रुपए अधिकतम)
LIC हाउसिंग फाइनेंस6.90-7.00निश्चित नहीं
केनरा बैंक6.90- 8.90लोन अमाउंट की 0.5 फीसदी (10 हजार रुपए अधिकतम)
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया6.95- 7.50लोन अमाउंट की 0.5 फीसदी
ICICI बैंक6.95- 8.050.5-1 फीसदी तक
बैंक ऑफ बड़ौदा7- 8.50लोन अमाउंट की 0.5 फीसदी (25 हजार रुपए अधिकतम)
इंडियन बैंक7-8निश्चित नहीं
बैंक ऑफ़ महाराष्ट्र7.05- 8.45लोन अमाउंट की 0.25 फीसदी (25 हजार रुपए अधिकतम)
पंजाब नेशनल बैंक7.10- 7.90लोन अमाउंट की 0.35 फीसदी (15 हजार रुपए अधिकतम)

नोट – ये ब्याज दरें 30 लाख के लोन पर 20 साल तक के कार्यकाल के हिसाब से दी गई हैं। इसके अलावा आपके सिविल स्कोर का असर भी ब्याज दर पर पड़ता है।

अगर आप 7 फीसदी ब्याज पर लोन लेते हैं तो कितनी EMI देनी होगी

होम लोन अमाउंट30 लाख रु.
अवधि20 साल
EMI23,259 रु.
कुल ब्याज25,82,152 रु.
कुल पेमेंट55,82,152 रु.
होम लोन अमाउंट20 लाख रु.
अवधि20 साल
EMI15,506 रु.
कुल ब्याज17,21,435 रु.
कुल पेमेंट37,21,435 रु.

नोट: ये कैलकुलेशन एक मोटे अनुमान के तौर पर दिया गया है।