नई दिल्ली। Urad Price: उड़द के घरेलू बाजार मूल्य में अनेक कारणों से तेजी आने के संकेत मिल रहे हैं। घरेलू प्रभाग में इसकी आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति जटिल बनी हुई है और सरकार के पास भी इसका अत्यन्त सीमित स्टॉक बचा हुआ है। मौजूदा खरीफ सीजन में उड़द की बिजाई की स्थिति उत्साहवर्धक नहीं है और मानसून की वर्षा का भारी अभाव बना हुआ है।
उधर म्यांमार एवं ब्राजील जैसे प्रमुख आपूर्तिकर्ता देशों में उत्पादकों एवं निर्यातकों का ध्यान भारत पर केन्द्रित है और वहां उड़द के दाम में बढ़ोत्तरी होने की संभावना है जिससे भारत में इसका आयात महंगा हो सकता है। उत्पादकों, दाल मिलर्स व्यापारियों / स्टॉकिस्टों एवं आयातकों के पास भी उड़द का भारी-भरकम स्टॉक मौजूद नहीं है जबकि इसकी मांग धीरे-धीरे बढ़ने लगी है।
केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के यूपीएजी पोर्टल पर दी गई सूचना से पता चलता है कि पिछले माह की तुलना में अब अखिल भारतीय स्तर पर उड़द का औसत थोक मंडी भाव करीब 20 प्रतिशत बढ़ गया है जबकि अन्य प्रमुख दलहनों की कीमतों में मिश्रित रुख देखा जा रहा है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार चालू खरीफ सीजन में 17 जुलाई तक उड़द का उत्पादन क्षेत्र 13.51 लाख हेक्टेयर पर पहुंच सका जो पिछले साल से 6 प्रतिशत कम है।
एक अग्रणी कॉमोडिटी मार्केट रिसर्च फर्म- आई ग्रेन इंडिया के डायरेक्टर- राहुल चौहान के अनुसार उड़द का घरेलू उत्पादन 2024-25 सीजन के 22.42 लाख टन से घटकर 2025-26 के सीजन में 21.60 लाख टन पर सिमट जाने से आपूर्ति की स्थिति कुछ जटिल हो गई।
उधर प्रतिकूल मौसम के कारण म्यांमार एवं ब्राजील जैसे प्रमुख निर्यातक देशों में भी उड़द का उत्पादन प्रभावित हुआ। इससे वहां हाल के महीनों में भाव तेज हो गया। वहां व्यापारियों / निर्यातकों को पता है कि भारत में उड़द का अभाव है और अगला उत्पादन भी जोरदार नहीं होने वाला है क्योंकि इसके लिए परिस्थितियां अनुकूल नहीं हैं।
म्यांमार में चेन्नई डिलीवरी के लिए एफएक्यू उड़द का सीएनएफ मूल्य 15 जून को 825 डॉलर प्रति टन चल रहा था जो अब बढ़कर 935 डॉलर प्रति टन हो गया है। इसी तरह प्रीमियम क्वालिटी की उड़द का निर्यात मूल्य 905 डॉलर प्रति टन से उछलकर 1000 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गया है। वहां उड़द का उत्पादन भी गत वर्ष के 10 लाख टन से करीब 30 प्रतिशत घटकर इस बार 7 लाख टन के करीब अटक जाने की संभावना है। इससे भारत में आयात घट सकता है।

