Turmeric Price: पिछले एक साल में हल्दी की कीमतों में 50 फीसदी की बढ़ोत्तरी

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नई दिल्ली। Turmeric Price: हल्दी की कीमतों में लगातार तेजी देखने को मिल रही है। हालांकि रिकॉर्ड तेजी के बाद थोड़ी सुस्ती जरुर देखने को मिली, लेकिन मुख्य उत्पादक क्षेत्रों में उम्मीद से कम बुआई का विस्तार और कम बारिश एवं संभावित अल-नीनो से आने वाली फसल पर असर पड़ने की चिंता बढ़ा दी है।

बन रहे सूखे हालात पैदावार पर बुरा असर डाल सकते हैं। जिसके कारण कीमतों में फिर से तेजी देखने को मिल सकती है। फिलहाल हल्दी का भाव 20 हजार रुपये प्रति क्विंटल के ऊपर चल रहा है।

एसएमसी कमोडिटी की मार्केट रिपोर्ट के मुताबिक हल्दी की कीमतों में जोरदार तेजी के मंड़ियों में आवक तेज हुई। सप्लाई छह गुना बढ़कर 3,792 टन हो गई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 621 टन थी।

सप्लाई में सालाना आधार पर 611 फीसदी की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। दरअसल बेहतर दाम मिलने की वजह से किसानों ने बिक्री बढ़ाई है जिससे मंड़ी में सप्लाई बढ़ गई है। इसके विदेशी मांग बेहतर होने के कारण कीमतों में खास गिरावट नहीं देखी जा रही है।

इस साल हल्दी की कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। फिलहाल हाजिर बाजार निजामाबाद में हल्दी के दाम 20048 रुपये प्रति क्विंटल पर चल रहे हैं जबकि वायदा बाजार एनसीडीईएक्स पर हल्दी 20,222 रुपये प्रति क्विंटल पर कारोबार कर रहे हैं। इस साल जनवरी से हल्दी के दाम 25 फीसदी से ज्यादा बढ़े हैं वहीं पिछले तीन महीनों में हल्दी 28 फीसदी से ज्यादा महंगी हो चुकी है।

पिछले एक साल की बाद की जाए तो हल्दी की कीमतों में 50 फीसदी से अधिक की बढ़ोत्तरी हुई है। हाजिर बाजार में पिछले महीने हल्दी के दाम रिकॉर्ड 21,142 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गए थे।

पिछले कुछ सालों में कैरी-फॉरवर्ड स्टॉक में काफी कमी आई है। इंडस्ट्री के अनुमान के मुताबिक, मौजूदा स्टॉक लगभग 15 लाख बैग है, जबकि पिछले सीजन में यह 20 लाख बैग से ज़्यादा था, जिससे कुल बफर स्टॉक कम हो गया है।

2025-26 सीजन का वास्तविक उत्पादन शुरुआती अनुमान ( करीब 11.4 लाख टन) से कम रह सकता है, जबकि घरेलू खपत और निर्यात मांग मजबूत बनी हुई है। फसल के शुरुआती विकास के दौरान लगातार सूखे हालात पैदावार पर बुरा असर डाल सकते हैं और कीमतों को और बढ़ा सकते हैं।

हल्दी की निर्यात मांग तेजी से बढ़ी है। बांग्लादेश से अच्छी मांग मिलने के कारण निर्यात को समर्थन मिला। भारत का हल्दी निर्यात साल-दर-साल 30% बढ़कर जून 2026 में 17,987 टन हो गया, जो एक साल पहले 13,787 टन था।

अप्रैल-जून के दौरान निर्यात 8% बढ़कर 51,987 टन हो गया जो जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि मेंय 47,949 टन था। जिसमें चीन, ओमान, नाइजीरिया, श्रीलंका और उरुग्वे में अच्छी बढ़ोतरी देखी गई।

केडिया एडवाइजरी के अनुसार पिछले कुछ दिनों से कीमतों में बढ़ोतरी सीमित रही। क्योंकि महाराष्ट्र, तेलंगाना और उत्तरी कर्नाटक में मॉनसून की गतिविधि में सुधार हुआ और तेलंगाना व आंध्र प्रदेश में जलाशयों के स्तर में सुधार से पौधों के विकास के चरण के लिए पानी की उपलब्धता बेहतर हुई। बारिश के बाद उत्तरी कर्नाटक में दोबारा बुआई भी पूरी हो गई है, जिससे फसल की स्थिति में सुधार हुआ है और भारी उत्पादन नुकसान की चिंता कम हुई है।

जबकि यूरोपीय संघ के अधिकतम अवशेष सीमा (MRL) के कड़े नियमों के कारण IPM (एकीकृत कीट प्रबंधन) मानकों को पूरा न करने वाले लॉट को अस्वीकार कर दिया गया, जिससे कमर्शियल-ग्रेड हल्दी की कीमतों पर दबाव पड़ा। साथ ही, यूरोपीय बाज़ारों से IPM-सर्टिफाइड हल्दी की मज़बूत मांग ने मानकों को पूरा करने वाले स्टॉक को सहारा दिया।