नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने करीब 100 अरब डॉलर यानी लगभग 9.5 लाख करोड़ रुपये के टैरिफ का पैसा वापस कर दिया है। यह रकम उन आयातकों को लौटाई गई है, जिन्होंने ट्रंप प्रशासन की ओर से लगाए गए टैरिफ का भुगतान किया था। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह रिफंड किया गया है।
ट्रंप ने अमेरिका के व्यापारिक साझेदार देशों से आने वाले सामान पर बड़े पैमाने पर टैरिफ लगाने के लिए इंटरनेशनल इमरजेंसी इकनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का इस्तेमाल किया था। हालांकि, फरवरी में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि इस कानून के तहत राष्ट्रपति को अपनी मर्जी से इतने बड़े स्तर पर टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं है। इसके बाद प्रशासन को इस कानून के तहत वसूली गई रकम वापस करनी पड़ी।
100 अरब डॉलर लौटाए
- अमेरिकी कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड में दाखिल दस्तावेज के अनुसार, 31 जुलाई तक करीब 166 अरब डॉलर के टैरिफ की वसूली हुई थी।
- इसमें से लगभग 60 फीसदी यानी करीब 100 अरब डॉलर वापस किए जा चुके हैं। इस रिफंड में ब्याज की रकम भी शामिल है।
- पैसा उन अमेरिकी आयातकों को लौटाया गया है, जिन्होंने शुरुआत में टैरिफ का भुगतान किया था।
128.68 अरब डॉलर के रिफंड की प्रक्रिया
अमेरिकी कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन के एक अधिकारी के मुताबिक, 31 जुलाई तक करीब 128.68 अरब डॉलर के संभावित और प्रमाणित रिफंड को प्रोसेसिंग के लिए मंजूरी मिल चुकी थी। इनमें से करीब 100 अरब डॉलर का रिफंड पूरा हो चुका है और रकम अमेरिकी ट्रेजरी विभाग को भुगतान के लिए भेजी जा चुकी है।
आम लोगों को सीधे नहीं मिलेगा पैसा
यह रिफंड सीधे अमेरिकी उपभोक्ताओं को नहीं दिया जा रहा है। रकम उन अमेरिकी आयातकों को वापस मिल रही है, जिन्होंने टैरिफ का भुगतान किया था। यानी यह पैसा भारत समेत दूसरे देशों के निर्यातकों को नहीं मिल रहा है। आलोचकों का कहना है कि अमेरिकी कंपनियां इस पैसे का फायदा आम लोगों तक कम कीमतों के रूप में पहुंचाएंगी, इसकी कोई गारंटी नहीं है।
ट्रंप ने अपनाया दूसरा रास्ता
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप प्रशासन ने टैरिफ लगाने के लिए दूसरे कानूनी प्रावधानों का सहारा लिया है। इनमें कुछ खास सेक्टरों पर लगाए गए टैरिफ और ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 301 के तहत लगाए गए शुल्क शामिल हैं। इस तरह सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद ट्रंप प्रशासन अमेरिका की व्यापार नीति में टैरिफ को एक अहम हथियार के तौर पर इस्तेमाल करना जारी रखे हुए है।

