गहलोत सरकार का तीसरा बजट कल पेश होगा विधान सभा में

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file photo

जयपुर। गहलोत सरकार के मौजूदा कार्यकाल का तीसरा बजट बनकर तैयार हो चुका है। प्रदेश की गहलोत सरकार 24 फरवरी को मौजूदा कार्यकाल का सबसे चुनौतीपूर्ण बजट पेश करेगी। वित्त राजस्व, वित्त व्यय और बजट महकमें के 150 अधिकारियों और कर्मचारियों की टीम बीते 2 महीने से इस बजट को तैयार करने में जुटी थी।

मंगलवार को वित्त विभाग बजट की काॅपी औपचारिक रूप से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को सौंपेगा। लेकिन इस बार बजट हॉर्ड कॉपी में नहीं बल्कि सॉफ्ट कॉपी में टेबलेट पीसी के रूप में सौंपा जाएगा। सभी विधायकों को भी बजट समझने के लिए टेबलेट ही दिए जाएंगे। कोरोना संकट के चलते राज्य सरकार करों से मिलने वाली कमाई में करीब 25 हजार करोड़ रुपए पीछे चल रही है।

प्रदेश की पूरी अर्थव्यवस्था ही उधार खाते चल रही है। अपने रोजमर्रा के खर्च चलाने के लिए सरकार अब तक सरकार बाजार से 40 हजार करोड़ रुपए का उधार ले चुकी है जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में करीब 14 हजार करोड़ रुपए ज्यादा है। 2020-21 के बजट अनुमानों में गहलोत सरकार ने राजकोषीय घाटे का अनुमान 33922 करोड़ रुपए रखा था जो दिसंबर के अंत तक ही 18 प्रतिशत तक बढ़कर 40190 करोड़ रुपए हो चुका है। अनुमान के मुताबिक वित्त वर्ष पूरा होने तक राजकोषीय घाटा 45 हजार करोड़ रुपए का पार कर जाएगा।

आपदा अपने साथ अवसर भी आता है। राज्य सरकार के पास भी आने वाले बजट में नए अवसर पैदा करने का मौका है। इसकी तैयारी भी की जा रही है। जानकारी के मुताबिक गहलोत सरकार इस बजट में गवर्नेंस पर फोकस करेगी। मकसद यह है कि सरकार की लागत घटे और लोगों को बेहतर सुविधा मिल सके।

नए प्रोजेक्ट्स पर फोकस: सचिवों को प्री फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश
आपदा अपने साथ अवसर भी लाती है। राज्य सरकार आने वाले बजट में इन अवसरों की संभावनाएं तलाश रही है। खास तौर से विनिर्माण क्षेत्र में सरकार ने अपने सभी महकमों को नए प्रोजेक्ट आईडेंटिफाई करने के लिए कहा है। विभागों के सचिवों को निर्देश दिए गए हैं कि वे उन प्रोजेक्ट्स की सूची बनाएं जिन्हें राज्य सरकार अपने दम पर पूरा नहीं कर सकती। इन प्रोजेक्टों की प्री फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार कर अब केंद्र सरकार को भेजी जाएगी।

केंद्र सरकार ने सभी राज्यों से कहा है कि अपनी उन नजूल संपत्तियों काे चिन्हित करें जिन्हें अगले पांच सालों में बेचना चाहते हैं। या इनके अलावा ऐसे सेक्टर जिनका निजीकरण किया जा सकता है।

यूजर चार्ज वाले प्रोजेक्टों पर जोर
ऐसे प्रोजेक्ट भी आईडेंटिफाई करने के लिए कहा गया है जो यूजर चार्ज पर आधारित हों। इनके लिए केंद्र सरकार और राज्य सरकार ज्यादा वीजीएफ देंगी।

डिजिटल होंगे विभाग
कोरोना ने खर्च में कटौती के नए तरीके समझा दिए हैं। सरकार अब अपने विभागों की बैठकों को पूरी तरह ऑनलाइन करने करने पर विचार कर रही है।

इंफ्रा प्रोजेक्ट्स के लिए ज्यादा मिलेगा उधार
केंद्र सरकार ने अपने बजट में इस बार राज्य सरकारों को बाजार से ज्यादा उधार लेने की अनुमति दे दी है। राज्य अपनी जीडीपी का 4% तक उधार ले सकेंगे। इसके अलावा 0.5 प्रतिशत की अतिरिक्त उधार पूंजीगत निर्माण कार्यों के लिए ही खर्च किया जा सकेगा।