एमएसएमई बनेगा निर्यात का नया इंजन; सरकार देगी नियम पालन में छूट, जानिए कैसे

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नई दिल्ली। सरकार के अगले कार्यकाल में एमएसएमई निर्यात का नया इंजन बनने जा रहा है। इसकी तैयारी शुरू हो चुकी है जिसके मुताबिक निर्यात करने वाले एमएसएमई को नियम पालन में छूट से लेकर विशेष वित्तीय सुविधा दी जा सकती है। सरकार माइक्रो व स्मॉल एक्सपोर्टर नीति ला सकती है। सरकार निर्यात संबंधी समस्त जानकारी के लिए वन स्टाप पोर्टल के साथ नेशनल ट्रेड नेटवर्क तैयार करेगी।

MSME के लिए अलग से निर्यात नीति लाने व उन्हें सुविधा देने की जरूरत इसलिए दिख रही है कि अभी पंजीकृत एमएसएमई में से सिर्फ एक प्रतिशत ही अपनी वस्तु व सेवा का निर्यात करते हैं। एमएसएमई मंत्रालय के उद्यम पोर्टल पर 1.58 करोड़ उद्यमी पंजीकृत हैं और इनमें से सिर्फ 1.5 लाख उद्यमी ही वस्तु व सेवा का निर्यात करते हैं। पंजीकृत उद्यमियों में 54 लाख एमएसएमई मैन्यूफैक्चरिंग के काम से जुड़े है।

नीति आयोग का मानना है कि मैन्यूफैक्चरिंग करने वाले सभी एमएसएमई के लिए निर्यात की बड़ी संभावना है। कई ऐसे सेक्टर हैं जिनमें अधिक कुशलता की जरूरत नहीं पड़ती है, लेकिन उन सेक्टर के वैश्विक निर्यात में भी भारत की हिस्सेदारी सिर्फ 1-2 प्रतिशत की है। इनमें हर्बल व आयुर्वेदिक उत्पाद, हैंडीक्राफ्ट्स, लकड़ी के आइटम, लेदर उत्पाद, हैंडलूम टेक्सटाइल व ज्वैलरी शामिल हैं।

ई-कामर्स के माध्यम से भी भारत के एमएसएमई निर्यात करने में पीछे हैं। चीन के एमएसएमई सालाना ई-कामर्स के जरिए 200 अरब डॉलर का निर्यात करते हैं तो भारत के एमएसएमई सालाना सिर्फ दो अरब डालर का निर्यात कर पाते हैं। नीति आयोग के मुताबिक निर्यात की इतनी बड़ी संभावनाओं को हकीकत में बदलने के लिए निर्यातक बनने की तमाम जानकारी के लिए एक वन स्टाप पोर्टल होना चाहिए। अभी निर्यात संबंधी पोर्टल तो कई है, लेकिन एक जगह पर सभी जानकारियों का अभाव है। निर्यात प्रक्रिया को बिना किसी बाधा के आगे बढ़ाने के लिए नेशनल ट्रेड नेटवर्क होना चाहिए।

नीति आयोग की सिफारिश के मुताबिक जब तक छोटे उद्यमी निर्यातक के रूप में स्थापित नहीं हो जाते हैं, उन्हें विभिन्न नियमों के पालन से छूट दी जा सकती है। ई-कामर्स निर्यात को बढ़ाने के लिए उनके लिए ग्रीन चैनल क्लीयरेंस के साथ रिजेक्टेड माल की सुगम वापसी के लिए आयात शुल्क में छूट दी सकती है। इन सबके अलावा एमएसएमई निर्यात की वित्तीय व्यवस्था को लेकर अलग से स्कीम लाई जा सकती है। एमएसएमई का निर्यात बढ़ने से बड़ी संख्या में रोजगार का भी सृजन होगा और एमएसएमई खुद को अपग्रेड कर सकेंगे।

अभी माइक्रो यूनिट माइक्रो ही रह जाती है, लेकिन निर्यात से जुड़ने पर वह स्माल की श्रेणी में आ सकती है। पंजीकृत व गैर पंजीकृत सभी प्रकार के एमएसएमई की संख्या 6.4 करोड़ हैं और ये 11 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार देते हैं।